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तशरीह के साथ हदीसें

सरहनायोग्य आचरण

83 हदीसें

जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।

عن المِقدام بن معدي كرب رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «إِذَا أَحَبَّ الرَّجُلُ أَخَاهُ فَلْيُخْبِرْهُ أَنَّهُ يُحِبُّهُ».
मिक़दाम बिन मादीकरिब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।"
इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस हदीस में ईमान वालों के आपसी संबंध को मज़बूत करने वाली और उनके अंदर परस्पर प्रेम का माहौल बनाने वाली एक बात बता रहे हैं। वह बात यह है कि जब कोई व्यक्ति किसी से मोहब्बत रखे तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।

फ़ायदे
  1. ऐसी विशुद्ध मोहब्बत की फ़ज़ीलत जो अल्लाह के लिए रखी जाए और उससे कोई सांसारिक हित जुड़ा हुआ न हो।
  2. जो व्यक्ति किसी से अल्लाह के लिए मोहब्बत रखे, मुसतहब यह है कि वह उसे बता दे, ताकि मोहब्बत और बढ़ जाए।
  3. ईमान वालों के बीच मोहब्बत का माहौल बनने से ईमानी भाईचारा मज़बूत होगी और समाज बिखराव से सुरक्षित रहेगा।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 444) (5124). سنن الترمذي (4/ 199) (2392). السنن الكبرى للنسائي (9/ 87) (9963). مسند أحمد (28/ 408) (17171). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 450). تطريز رياض الصالحين، لفيصل المبارك (ص258). رياض الصالحين للنووي، (ص138) (383). سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها، للألباني (1/ 777). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (1/ 247). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (6/ 279).

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अल्लाह तआला के सम्मान में यह बात भी सम्मिलित है कि सफ़ेद बाल वाले मुसलमान का तथा उस कुरवान वाले का, जो न उसमें अतिशयोक्ति करता हो और न उससे बेवफ़ाई करता हो एवं उस प्रशासक का सम्मान किया जाए, जो न्यायप्रिय हो।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه قَالَ: قالَ رسول اللَّه -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم-: «إِنَّ مِنْ إِجْلاَلِ الله -تَعَالَى-: إِكْرَامَ ذِي الشَّيْبَةِ المُسْلِمِ، وَحَامِلِ القُرْآنِ غَيرِ الغَالِي فِيه، وَالجَافِي عَنْه، وَإِكْرَام ذِي السُّلْطَان المُقْسِط».
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "अल्लाह तआला के सम्मान में यह बात भी सम्मिलित है कि सफ़ेद बाल वाले मुसलमान का तथा उस कुरवान वाले का, जो न उसमें अतिशयोक्ति करता हो और न उससे बेवफ़ाई करता हो एवं उस प्रशासक का सम्मान किया जाए, जो न्यायप्रिय हो।"
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425 هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. سنن أبي داود، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية، بيروت. عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم: تهذيب سنن أبي داود وإيضاح علله ومشكلاته للعظيم آبادي ط3، دار الكتب العلمية، بيروت، 1415 هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ. مشكاة المصابيح، للتبريزي. تحقيق الألباني. الناشر : المكتب الإسلامي - بيروت. الطبعة : الثالثة - 1405 – 1985

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जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।

عن أبي شُريح خُويلد بن عمرو الخزاعي عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال: «مَنْ كَان يُؤمِن بِاللهِ وَاليَومِ الآخِرِ فَلْيُكْرِم ضَيفَه جَائِزَتَه»، قَالوا: وما جَائِزَتُهُ؟ يَا رسول الله، قال: «يَومُهُ ولَيلَتُهُ، والضِّيَافَةُ ثَلاَثَةُ أَيَّامٍ، فَمَا كَانَ وَرَاءَ ذَلك فَهُوَ صَدَقَةٌ عَلَيه». وفي رواية: «لا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يُقِيمَ عِنْدَ أَخِيهِ حَتَّى يؤْثِمَهُ» قالوا: يَا رَسول الله، وَكَيفَ يُؤْثِمَهُ؟ قال: «يُقِيمُ عِندَهُ ولاَ شَيءَ لَهُ يُقرِيهِ بهِ».
अबू शुरैह खुवैलिद बिन अम्र खुज़ाई कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायः "जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।" तथा एक रिवायत में हैः "किसी मुसलमान के लिए जायज़ नहीं कि अपने भाई के पास इतने दिन रहे कि उसे पापी बना दे। सहाबा ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, वह उसे पापी कैसे बना सकता है? तो आपने फ़रमायाः "वह उसके पास ठहरा रहे, जबकि उसके पास उसके सत्कार के लिए कुछ न हो।"
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين، للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. فتح رب البرية بتلخيص الحموية، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة، (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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आदमी उसी के साध होगा, जिससे वह मोहब्बत करता है।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه مرفوعاً: « المَرْءُ مَعَ مَنْ أَحَبَّ ». وفي رواية: قِيلَ لِلنبي صلى الله عليه وسلم : الرَّجُلُ يُحِبُّ القَوْمَ وَلَمَّا يَلْحَق بهم؟ قال: « المَرْءُ مَعَ مَنْ أَحَبَّ». عن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه قال: جاء رجل إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله، كَيفَ تَقُولُ فِي رَجُلٍ أحَبَّ قَومًا ولم يَلحَق بِهم؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «المَرْءُ مَعَ مَنْ أَحَبَّ».
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "आदमी उसी के साध होगा, जिससे वह मोहब्बत करता है।" एक और रिवायत में हैः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा गया कि एक आदमी कुछ लोगों से मोहब्बत करता है, लेकिन वह उन लोगों तक पहुँच नहीं पाता? तो आपने फ़रमायाः "आदमी उसी के साध होगा, जिससे वह मोहब्बत करता है।" अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि एक आदमी अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल, आप उस व्यक्ति के बारे में क्या कहते हैं, जो कुछ लोगों से मोहब्बत करता है, लेकिन उन लोगों तक पहुँच नहीं पाता? तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "आदमी उसी के साध होगा, जिससे वह मोहब्बत करता है।"
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जादोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415ه. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425 ه. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति से जायदाद खरीदी। फिर ख़रीदने वाले ने उसमें एक सोने का घड़ा पाया।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: اشترى رجل من رجل عَقَارًا، فوجد الذي اشترى العَقَارَ في عَقَارِه جَرَّةً فيها ذهب، فقال له الذي اشترى العقار: خذ ذهبك، إنما اشتريت منك الأرض ولم أَشْتَرِ الذهب، وقال الذي له الأرض: إنما بِعْتُكَ الأرض وما فيها، فتحاكما إلى رجل، فقال الذي تحاكما إليه: أَلَكُمَا ولد؟ قال أحدهما: لي غلام، وقال الآخر: لي جارية قال: أنكحا الغلام الجارية، وأنفقا على أنفسهما منه وتَصَدَّقَا.
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति से जायदाद खरीदी। फिर ख़रीदने वाले ने उसमें एक सोने का घड़ा पाया। अतः उसने बेचने वाले से कहा कि अपना सोना ले लो। मैं ने तुम से केवल ज़मीन खरीदी है, सोना नहीं। लेकिन बेचने वाले ने कहाः मैंने तुम्हें ज़मीन, उसमें जो कुछ है, उसके साथ बेच दी है। अंत में दोनों निर्णय के लिए एक व्यक्ति के पास गए। उस ने कहा कि क्या तुम्हारी कोई संतान है? एक ने उत्तर दिया कि मुझे एक बेटा है और दूसरे ने कहा कि मेरी एक बेटी है। उसने कहाः दोनों का निकाह कर दो और इस धन का कुछ भाग दोनों पर खर्च करो और कुछ भाग सदक़ा कर दो।"
इसकी विभिन्न रिवायतों को बुख़ारी एवं मुस्लिम ने नक़ल किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه - 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. تطريز رياض الصالحين، لفيصل الحريملي، نشر: دار العاصمة، الرياض، الطبعة: الأولى، 1423هـ - 2002م. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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अमानतदार, मुसलमान कोषाधिकारी, जो खुशी-खुशी अक्षरशः उसका पालन करता हो, जिसका आदेश उसे मिला हो और वहीं खर्च करता हो, जहाँ खर्च करने का आदेश उसे दिया गया हो, वह भी एक सदक़ा करने वाला है।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه عن النبيِّ -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم- أَنَّهُ قَالَ: «الخَاِزنُ المسلم الأمين الَّذِي يُنْفِذُ ما أُمِرَ بِهِ فَيُعْطِيهِ كَامِلاً مُوَفَّراً طَيِّبَةً بِهِ نَفسُهُ فَيَدْفَعُه إلى الَّذِي أُمِرَ لَهُ بِهِ، أَحَدُ المُتَصَدِّقِين». وفي رواية: «الذي يُعطِي مَا أُمِرَ به».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "अमानतदार, मुसलमान कोषाधिकारी, जो खुशी-खुशी अक्षरशः उसका पालन करता हो, जिसका आदेश उसे मिला हो और वहीं खर्च करता हो, जहाँ खर्च करने का आदेश उसे दिया गया हो, वह भी एक सदक़ा करने वाला है।" तथा एक रिवायत में हैः "जो वह देता हो, जिसका उसे आदेश दिया गया हो।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है और शब्द बुख़ारी के हैं।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415ه. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425 ه. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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जिसने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा, जबकि वह उसे चरितार्थ करने में सक्षम था, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और यह अख़्तियार देगा कि बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों में से जिसे चाहे, चुन ले।

عن معاذ بن أنس رضي الله عنه مرفوعًا: «مَن كَظَمَ غَيظًا، وَهُو قادر على أن يُنفِذَه، دَعَاه الله سبحانه وتعالى على رؤوس الخَلاَئِق يوم القيامة حتَّى يُخَيِّره من الحُور العَين مَا شَاء».
मुआज़ बिन अनस (रजि़यल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जिसने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा, जबकि वह उसे चरितार्थ करने में सक्षम था, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और यह अख़्तियार देगा कि बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों में से जिसे चाहे, चुन ले।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन)
हवाला

مسند أحمد، تحقيق شعيب الأرنؤوط، الناشر: مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. سنن أبي داود، للإمام أبي داود تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، الناشر: المكتبة العصرية، صيدا - بيروت. سنن ابن ماجه، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي. سنن الترمذي، للإمام الترمذي، تحقيق: أحمد محمد شاكر وآخرون، الناشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، الطبعة: الثانية، 1395 هـ - 1975 م. صحيح الترغيب والترهيب – الألباني، مكتبة المعارف – الرياض. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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जो इन पुत्रियों के द्वारा कुछ आज़माया जाए, फिर वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करे, तो वे उनके लिए जहन्नम की आग से बचाव का माध्यम बन जाएँगी।

عَن عَائِشَةَ أُمِّ المؤْمِنين رضي الله عنها زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَتْهُ قَالَتْ: جَاءَتْنِي امْرَأَةٌ مَعَهَا ابْنَتَانِ تَسْأَلُنِي، فَلَمْ تَجِدْ عِنْدِي غَيْرَ تَمْرَةٍ وَاحِدَةٍ، فَأَعْطَيْتُهَا فَقَسَمَتْهَا بَيْنَ ابْنَتَيْهَا، ثُمَّ قَامَتْ فَخَرَجَتْ، فَدَخَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَحَدَّثْتُهُ، فَقَالَ: «مَنْ يَلِي مِنْ هَذِهِ البَنَاتِ شَيْئًا، فَأَحْسَنَ إِلَيْهِنَّ، كُنَّ لَهُ سِتْرًا مِنَ النَّارِ».
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि मेरे पास एक स्त्री आई, जिसके साथ उसकी दो बेटियाँ थीं। वह मुझसे कुछ माँग रही थी, लेकिन मेरे पास उसे एक ही खजूर मिल सका। मैंने वह खजूर उसे दिया, तो उसने उसे दोनों बेटियों के बीच बाँट दिया और ख़ुद कुछ नहीं खाया। फिर वह उठकर चल पड़ी। जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे पास आए और हमने आपको यह घटना सुनाई, तो फ़रमायाः "जो इन पुत्रियों के द्वारा कुछ आज़माया जाए, फिर वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करे, तो वे उनके लिए जहन्नम की आग से बचाव का माध्यम बन जाएँगी।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है और शब्द बुख़ारी के हैं।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (8/ 7) (5995). صحيح مسلم (4/ 2027) (2629). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 353). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص199). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (5/ 151). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 106). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 277).

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83 हदीसें
  1. जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।
  2. अल्लाह तआला के सम्मान में यह बात भी सम्मिलित है कि सफ़ेद बाल वाले मुसलमान का तथा उस कुरवान वाले का, जो न उसमें अतिशयोक्ति करता हो और न उससे बेवफ़ाई करता हो एवं उस प्रशासक का सम्मान किया जाए, जो न्यायप्रिय हो।
  3. जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।
  4. आदमी उसी के साध होगा, जिससे वह मोहब्बत करता है।
  5. एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति से जायदाद खरीदी। फिर ख़रीदने वाले ने उसमें एक सोने का घड़ा पाया।
  6. अमानतदार, मुसलमान कोषाधिकारी, जो खुशी-खुशी अक्षरशः उसका पालन करता हो, जिसका आदेश उसे मिला हो और वहीं खर्च करता हो, जहाँ खर्च करने का आदेश उसे दिया गया हो, वह भी एक सदक़ा करने वाला है।
  7. जिसने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा, जबकि वह उसे चरितार्थ करने में सक्षम था, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और यह अख़्तियार देगा कि बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों में से जिसे चाहे, चुन ले।
  8. जो इन पुत्रियों के द्वारा कुछ आज़माया जाए, फिर वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करे, तो वे उनके लिए जहन्नम की आग से बचाव का माध्यम बन जाएँगी।
  9. अल्लाह तआला क़यामत के दिन कहेगाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वाले कहाँ हैं? आज मैं उन्हें अपनी छाया में जगह दूँगा, जबकि मेरी छाया के अतिरिक्त कोई छाया नहीं है।
  10. सिफ़ारिश करो, प्रतिफल प्राप्त करोगे तथा अल्लाह अपने नबी की ज़बान से वह निर्णय देगा, जो उन्हे पसंद होगा।
  11. अल्लाह तआला के निकट सबसे अच्छा साथी वह है, जो अपने साथियों के लिए सबसे अच्छा हो और अल्लाह तआला के निकट सबसे अच्छा पड़ोसी वह है, जो अपने पड़ोसी के लिए सबसे अच्छा हो
  12. अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे, जो बेचते, खरीदते और क़र्ज का तकाज़ा करते समय नर्मी से काम ले।
  13. कहाँ है अल्लाह की क़सम खाने वाला कि भला कार्य नहीं करेगा?
  14. अल्लाह की क़सम, मैं किसी को देता हूँ और किसी को नहीं भी देता हूँ, जबकि जिसे नहीं देता, वह उससे कहीं अधिक प्रिय होता है, जिसे देता हूँ
  15. एक व्यक्ति लोगों को क़र्ज़ देता और अपने सेवकों से कहा करता कि जब किसी ऋण चुकाने में असमर्थ व्यक्ति के पास जाओ तो उसके क़र्ज़ की अनदेखी करो। हो सकता है कि अल्लाह हमारे गुनाहों की अनदेखी करे
  16. जो व्यक्ति दुनिया में किसी पर पर्दा डालेगा, अल्लाह क़यामत के दिन उसपर पर्दा डालेगा।
  17. वास्तविक मालदारी का बयान और अल्लाह ने जो कुछ दिया है, उससे संतुष्ट रहने की ओर प्रेरित करना।
  18. झूठा वह नहीं है जो लोगों के बीच सुधार का प्रयास करे एवं भली बात पहुँचाए अथवा अच्छी बात कहे।
  19. अल्लाह तआला ने कृपा को एक सौ भागों में बाँटकर अपने पास निन्यानवे भाग रख लिए और धरती में एक भाग उतारा। उसी एक भाग के कारण सारी सृष्टियाँ एक-दूसरे पर दया करती हैं, यहाँ तक कि एक चौपाया इस डर से पाँव को उठाए रहता है कि कहीं उसके बच्चे को चोट न लग जाए।
  20. “जहाँ कहीं भी रहो, अल्लाह से डरते रहो, बुरे कर्म के बाद अच्छे कर्म कर लिया करो, अच्छे कर्म बुरे कर्म को मिटा देंगे तथा लोगों के साथ उत्तम आचरण वाला व्यवहार करो।”
  21. नेकी तो अच्छा व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में खटके और तुझे यह बुरा लगे कि लोग उसे जान जाएँ।
  22. अल्लाह ने हर चीज़ के साथ अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है
  23. पूर्व के नबियों की वाणियों में से जो बातें लोगों को प्राप्त हुईं, उनमें से एक यह है कि जब तेरे अंदर शर्म व हया न रहे, तो जो चाहे, कर।
  24. “आपस में ईर्ष्या मत करो, क्रय-विक्रय में एक दूसरे से छल मत करो, एक-दूसरे से घृणा मत करो, एक-दूसरे से मुख मत फेरो तथा किसी के व्यापार पर व्यापार मत करो। अल्लाह के बंदों, आपस में भ्रातृत्व भाव (भाई-चारे) से रहो।
  25. गुस्सा मत किया करो
  26. ''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, जब तक कि अपने भाई के लिए वही पसंद न करे, जो अपने लिए पसंद करता है।''
  27. मोमिन एक ही बिल से दो बार डसा नहीं जाता।
  28. न्याय करने वाले सर्वशक्तिमान एवं महान दयावान् (अल्लाह) के दाएँ जानिब, और उसके दोनों हाथ दाएँ हैं
  29. जिसे नर्मी से वंचित कर दिया गया, उसे सारी भलाई से वंचित कर दिया गया।
  30. मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जा रहा था और आपके शरीर पर एक मोटे किनारे वाली नजरानी चादर थी। इसी बीच, आपको एक देहाती मिला और बड़े ज़ोर से चादर पकड़कर खींचा।
  31. "عليك السلام" न कहो, क्योंकि "عليك السلام" मरे हुए लोगों का सलाम है। बल्कि "السلام عليك" कहो।
  32. तथा जो किसी इमाम की बैअत करे और उसे अपना हाथ तथा अपने दिल का फल दे दे, उसे चाहिए कि जहाँ तक हो सके, उसका अनुसरण करे। फिर अगर कोई दूसरा उसे अपने मातहत करने के लिए उससे झगड़ा करे, तो उसकी गरदन उड़ा दो।
  33. किसी भी नेकी के काम को कदापि कमतर न जानो, चाहे इतना ही क्यों न हो कि तुम अपने भाई से मुस्कुराते हुए मिलो।
  34. बलवान वह नहीं है, जो किसी को पछाड़ दे, बलवान तो वह है, जो क्रोध के समय अपने आप को नियंत्रण में रखे।
  35. जिसने किसी अच्छे काम का मार्ग दिखाया, उसे उसके करने वाले के बराबर प्रतिफल मिलेगा
  36. अलल्लाह की प्रसन्नता माता-पिता की प्रसन्नता में है और अल्लाह की अप्रसन्नता माता-पिता की अप्रसन्नता में है।
  37. कोई भी वस्तु तराज़ू में अच्छे आचरण से ज़्यादा भारी नहीं होगी और अल्लाह ऐसे व्यक्ति से नफ़रत करता है, जो बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला हो।
  38. जिसने अल्लाह के लिए विनम्रता दिखाते हुए ऐसा वस्त्र पहनने से गुरेज़ किया, जिसे पहनने की वह शक्ति रखता है, अल्लाह क़यामत के दिन उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और अख़्तियार देगा कि ईमान का जो जोड़ा वह पहनने चाहे, पहन ले।
  39. जो अल्लाह एवं अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अच्छी बात करे या चुप रहे
  40. जो लोगों पर दया नहीं करता, उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह भी दया नहीं करता।
  41. जो दया नहीं करता, उसपर दया नहीं की जाती।
  42. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जन्नत में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “अल्लाह का डर और अच्छा व्यवहार
  43. लज्जा ईमान का एक अंश है
  44. एक मोमिन अपने दूसरे मोमिन भाई का आईना है।
  45. अल्लाह तआला ने मेरी ओर वह़्य की है कि तुम लोग विनम्रता धारण करो, यहाँ तक कि कोई किसी पर अत्याचार न करे और न कोई किसी को घमंड दिखाए।
  46. निश्चित रूप से तुम अपने धन में सब लोगों को शामिल नहीं कर सकते, लेकिन तुम्हारे हँसते चेहरे और अच्छे व्यवहार के दायरे में सबको आ जाना चाहिए।
  47. “सच्चाई को मज़बूती से थाम लो, क्योंकि सच्चाई नेकी (सुकर्म) की राह दिखाती है और नेकी जन्नत की ओर ले जाती है।
  48. “जो अपने भाई की मान-सम्मान की रक्षा करेगा, क़यामत के दिन अल्लाह जहन्नम की अग्नि से उसकी रक्षा करेगा।”
  49. “निश्चय अल्लाह ऐसे बंदे से प्रेम करता है, जो धर्मशील, दिल का धनी और दिखावे से बचने वाला हो।”
  50. सबसे अधिक अच्छा व्यक्ति कौन है ऐ अल्लाह के रसूल?
  51. सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो।
  52. क्या तुम नहीं सुनते? क्या तुम नहीं सुनते? निश्चय ही सादगी और सरलता ईमान की निशानी है। निश्चय ही सादगी और सरलता ईमान की पहचान है।
  53. दयालुता जिसमें भी होती है, उसे सुंदर बना देती है और जिससे निकाल ली जाती है, उसे कुरूप कर देती है।
  54. निश्चय ही अल्लाह दयालु है और वह प्रत्येक वस्तु में दयालुता को पसंद करता है।
  55. मोमिन अपने अच्छे आचरण के कारण रोज़ेदार और तहज्जुद गुज़ार का दर्जा प्राप्त कर लेता है।
  56. तुम्हारे स्वभाव में दो ऐसी बातें हैं, जिन्हें अल्लाह पसंद करता है : सहनशीलता और धैर्य।
  57. तुममें से मेरी नज़र में सबसे प्यारे और क़यामत के दिन मेरे सबसे अधिक करीब बैठने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले लोग वह होंगे, जो आचरण के ऐतबार से तुममें सबसे अच्छे हैं।
  58. तुम्हारे अंदर सबसे अच्छा व्यक्ति वह है, जिसका आचरण सबसे अच्छा है।
  59. मैं उस व्यक्ति के लिए जन्नत के अंदर एक घर की गारंटी लेता हूँ, जो सत्य पर होने के बावजूद व्यर्थ तर्क करना छोड़ दे।
  60. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को सबसे ज़्यादा जन्नत में दाख़िल करेगी? तो आपने उत्तर दिया : "अल्लाह का भय और अच्छा आचरण।" साथ ही पूछा गया कि कौन-सी चीज़ सबसे ज़्यादा जहन्नम में दाख़िल करेगी? तो उत्तर दिया : "मुँह और शर्मगाह।"
  61. आसानी पैदा करो और कठिनाई में न डालो तथा सुसमाचार सुनाओ एवं घृणा मत दिलाओ।
  62. एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं (भूख से) निढाल हूँ।
  63. ऐ मुहाजिरो और अंसारियो! तुम्हारे कुछ भाई ऐसे हैं, जो न धन रखते हैं न कुनबा। अतः, तुममें से हर व्यक्ति अपने साथ दो या तीन लोगों को मिला ले।
  64. भूखे को खाना खिलाओ, बीमार की देखभाल करो और क़ैदी को रिहा कराओ।
  65. मालदार व्यक्ति का कर्ज़ अदा करने में टाल-मटोल करना ज़ुल्म है और अगर तुममें से किसी को किसी मालदार के पीछे लगा दिया जाए तो वह पीछे लग जाए।
  66. यह दया है, जिसे अल्लाह -तआला- ने अपने बंदों के दिलों में रखा है और अल्लाह अपने उन बंदों पर दया करता है, जो दूसरों पर दया करते हैं।
  67. तुम एक ऐसे व्यक्ति हो, जिसके अंदर जाहिलयत की कुछ बातें पाई जाती हैं। वे तुम्हारे भाई और दास हैं। उन्हें अल्लाह ने तुम्हारे नियंत्रण में रखा है। अतः, जिसके मातहत उसका कोई भाई हो, वह उसे वही खिलाए जो स्वयं खाए, वही पहनाए जो स्वयं पहने और उन्हें ऐसे कार्य करने को न कहो, जो वे कर न सकें और अगर करने को कह भी दो, तो उनकी सहायता करो।
  68. दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।
  69. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बनी इसराईल के एक व्यक्ति की घटना सुनाई, जिसने बनी इसराईल के एक अन्य व्यक्ति से एक हज़ार दीनार क़र्ज़ माँगे थे।
  70. जिस मुस्लिम के तीन बच्चे मर जाएँ, उसे जहन्नम की आग केवल क़सम पूरी करने भर छूएगी
  71. ऐ अबू मसऊद! जान लो कि अल्लाह तुम पर तुम्हारे इस ग़ुलाम पर सामर्थ्य से अधिक सामर्थ्य रखता है। तो मैंने कहा: इसके पश्चात मैं कभी किसी दास को नहीं मारुँगा
  72. मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।
  73. आप न तो अपशब्द बोलने वाले थे न ही अश्लील बातें करने वाले और न ही बाजारों में जा कर हल्ला करने वाले, आप बुराई का बदला बुराई से नहीं देते थे, बल्कि आप माफ कर देते तथा नजरअंदाज कर देते।
  74. जब तुममें से किसी का सेवक उसके सामने भोजन परोसे, तो अगर उसे अपने साथ न बिठा सके, तो उसे एक-दो लुक़मा या एक-दो निवाला ज़रूर दे, क्योंकि उसने उसे तैयार करने का काम किया है।
  75. मोमिन ताना देने वाला, लानत करने वाला, बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला नहीं होता।
  76. बेशक मुझे सदाचार को पूर्ण रूप देने के लिए भेजा गया है।
  77. उस व्यक्ति के पास (संपूर्ण) ईमान नहीं, जिसके पास अमानतदारी न हो और उस व्यक्ति के पास (संपूर्ण) दीन नहीं, जो वचन का पालन न करता हो।
  78. क्या मैं तुम्हें यह न बताऊँ कि तुममें से अच्छा कौन है और बुरा कौन?
  79. जो लोगों का शुक्र अदा नहीं करता, वह अल्लाह का शुक्र अदा नहीं कर सकता।
  80. ''तुममें से कोई व्यक्ति उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, जब तक कि अपने भाई के लिए वही पसंद न करे, जो अपने लिए पसंद करता है।''
  81. “अल्लाह ने हर चीज़ में अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है।
  82. पूर्व के नबियों की वाणियों में से जो बातें लोगों को प्राप्त हुईं, उनमें से एक यह है कि जब तेरे अंदर शर्म व हया न रहे, तो जो चाहे, कर।
  83. “नेकी उत्तम आचरण है, तथा गुनाह वह है जो तुम्हारे हृदय में खटकता रहे और तुम यह नापसंद करो कि लोग उसे जानें।”

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com