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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह तआला ने मेरी ओर वह़्य की है कि तुम लोग विनम्रता धारण करो, यहाँ तक कि कोई किसी पर अत्याचार न करे और न कोई किसी को घमंड दिखाए।

عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ أَخِي بَنِي مُجَاشِعٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: قَامَ فِينَا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ خَطِيبًا، فَقَالَ: وَسَاقَ الْحَدِيثَ وَفِيهِ: «وَإِنَّ اللهَ أَوْحَى إِلَيَّ أَنْ تَوَاضَعُوا حَتَّى لَا يَفْخَرَ أَحَدٌ عَلَى أَحَدٍ، وَلَا يَبْغِي أَحَدٌ عَلَى أَحَدٍ».
अयाज़ बिन हिमार (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “अल्लाह तआला ने मेरी ओर वह़्य की है कि तुम लोग विनम्रता धारण करो, यहाँ तक कि कोई किसी पर अत्याचार न करे और न कोई किसी को घमंड दिखाए।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2198) (2865). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، لعبد الله البسام (7/ 497). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 344). فتح ذي الجلال والإكرام، لابن عثيمين (6/ 436). سبل السلام بشرح بلوغ المرام، لمحمد الصنعاني (2/ 691).

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सरहनायोग्य आचरण

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com