عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المُؤْمِنين رضي الله عنها زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «يَا عَائِشَةُ إِنَّ اللهَ رَفِيقٌ يُحِبُّ الرِّفْقَ، وَيُعْطِي عَلَى الرِّفْقِ مَا لَا يُعْطِي عَلَى الْعُنْفِ، وَمَا لَا يُعْطِي عَلَى مَا سِوَاهُ».
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "निश्चय ही अल्लाह दयालु है और वह प्रत्येक वस्तु में दयालुता को पसंद करता है।"
उन्ही से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "निश्चय ही अल्लाह दयालु है और वह दयालुता को पसंद करता है तथा दयालुता के कारण वह चीज़ देता है, जो क्रूरता एवं उसके सिवा दूसरी चीज़ पर नहीं देता।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح مسلم (4/ 2003) (2593). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 683). المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي (16/ 145).