अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो मोमिन बंदा अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसका ईमान उसे इन कामों को करने की प्रेरणा देता है : 1- अच्छी बात करना : जैसे सुबहानल्लाह और ला इलाहा इल्लल्लाह जैसे अज़कार पढ़ना, भलाई का आदेश देना, बुराई से रोकना और लोगों के बीच सुलह कराना। अगर वह ऐसा न कर सकता हो, तो चुप रहे, किसी को कष्ट देने से बचे और अपनी ज़बान की रक्षा करे। 2- पड़ोसी को सम्मान देना : यानी उसके साथ एहसान और अच्छा व्यवहार करना करना और उसे कष्ट न देना। 3- मिलने के लिए आने वाले अतिथि का सत्कार करना : यानी उससे अच्छे अंदाज़ से बात करना और उसे खाना खिलाना आदि।
- अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान हर भलाई की जड़ है और इससे अच्छे काम करने की प्रेरणा मिलती है।
- इसमें इन्सान को ज़बान की क्लेशों से सावधान किया गया है।
- इस्लाम प्रेम तथा सम्मान का धर्म है।
- ये तीन काम ईमान की शाखाओं और अच्छे शिष्टाचारों में से हैं।
- अधिक बोलना कभी-कभी मकरूह तथा हराम की ओर ले जाता है, इसलिए भलाई केवल उसी समय बोलने में है, जब कोई अच्छी बात करनी हो।
صحيح البخاري (8/ 11) (6018). صحيح مسلم (1/ 68) (47). التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية، (ص34). شرح الأربعين النووية، لابن عثيمين (ص176). شرح النووي على مسلم (2/ 18).