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तशरीह के साथ हदीसें

जो लोगों पर दया नहीं करता, उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह भी दया नहीं करता।

عن جرير بن عبد الله رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «مَنْ لَا يَرْحَمِ النَّاسَ لَا يَرْحَمْهُ اللهُ عَزَّ وَجَلَّ».
जरीर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो लोगों पर दया नहीं करता, उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह भी दया नहीं करता।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो लोगों पर दया नहीं करता, उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह दया नहीं करता। इस तरह देखा जाए तो अल्लाह की सृष्टि पर दया करना अल्लाह की दया प्राप्त करने का एक बहुत बड़ा साधन है।

फ़ायदे
  1. सारी सृष्टियों पर दया वांछित है, लेकिन यहाँ खास तौर पर 'लोगों' का ज़िक्र उनपर ध्यान दिलाने के लिए है।
  2. अल्लाह दयावान् है और अपने दया करने वाले बंदे पर दया करता है। यह दरअसल बंदे को उसी कोटि का बदला देने का एक उदाहरण है, जिस कोटि का उसका कर्म है।
  3. लोगों पर दया करने के अंतर्गत उनका भला करना, उनको बुराई से बचाना और उनके साथ अच्छा व्यवहार करना भी शामिल है।
हवाला

صحيح البخاري (8/ 10) (6013). صحيح مسلم (4/ 1809) (2319). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 553). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين (1/ 247). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 319).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
सरहनायोग्य आचरण

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com