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तशरीह के साथ हदीसें

भूखे को खाना खिलाओ, बीमार की देखभाल करो और क़ैदी को रिहा कराओ।

عَنْ أَبِي مُوسَى الأَشْعَرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «أَطْعِمُوا الجَائِعَ، وَعُودُوا المَرِيضَ، وَفُكُّوا العَانِيَ».
अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अन्हु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "भूखे को खाना खिलाओ, बीमार की देखभाल करो और क़ैदी को रिहा कराओ।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बयान किया है कि एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान पर एक अधिकार यह है कि वह भूखे को खाना खिलाए, बीमार की देखभाल करे और क़ैदी को रिहा कराए।

फ़ायदे
  1. मुसलमानों के बीच आपसी सहयोग की प्रेरणा।
  2. भूखे और भोजन के ज़रूरतमंद को खाना खिलाने का प्रोत्साहन, क्योंकि उसे खिलाने का आदेश दिया गया है।
  3. रोगी का हाल जानने जाना चाहिए, ताकि उसे हौसला मिले, उसके लिए दुआ हो और पुण्य प्राप्त हो, आदि।
  4. काफ़िरों द्वारा बंदी बनाए गए व्यक्ति को छुड़ाने का पूरा प्रयास करना, जो या तो उन्हें उसे छुड़ाने के लिए कोई बदला देकर किया जाता है, या काफ़िरों के किसी बंदी से उसकी अदला-बदली करके।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 67) (5373). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 468). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 685).

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सरहनायोग्य आचरण

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com