अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने कुछ बैठे हुए साथियों के पास आकर खड़े हुए और उनसे पूछा : क्या मैं तुम्हें यह न बताऊँ कि तुममें सबसे अच्छा कौन है और सबसे बुरा कौन है? लेकिन उनके पास अच्छे और बुरे की पहचान ने होने और रुसवाई के भय से उन्होंने न तो कुछ कहा और न ही कोई जवाब दिया। अतः नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे तीन बार यही प्रश्न दोहराया, तो उनमें से एक व्यक्ति ने जवाब दिया : जी हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! हमें हमारे अच्छे और बुरे लोगों के बारे में बताइए। चुनांचे अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें बताया : तुममें सबसे अच्छा व्यक्ति वह है, जिससे उसकी भलाई, उपकार और नेकी की उम्मीद की जाती हो और जिसकी बुराई से सुरक्षित रहा जाता हो, अतः उसके अत्याचार, दुर्व्यवहार और ज़ुल्म का डर न हो। और तुममें सबसे बुरा व्यक्ति वह है, जिससे उसकी भलाई, उपकार और नेकी की कोई उम्मीद न की जाती हो और जिसकी बुराई से सुरक्षित न रहा जाता हो, बल्कि उसके अत्याचार, दुर्व्यवहार और ज़ुल्म का डर लगा रहे।
- सबसे अच्छे और सबसे बुरे लोगों का बयान।
- दूसरों तक पहुँचने वाला लाभ और नुक़सान, स्वयं व्यक्ति तक सीमित लाभ और नुक़सान से बढ़कर है।
- सदाचार और लोगों के साथ अच्छे व्यवहार की प्रेरणा तथा ज़ुल्म, बुराई और अत्याचार से चेतावनी।
سنن الترمذي (4/ 98) (2263). التيسير بشرح الجامع الصغير (1/ 395). تحفة الأحوذي (6/ 445).