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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह के नामों और गुणों से संबंधित एकेश्वरवाद

76 हदीसें

क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया

عن أبي واقد الحارث بن عوف رضي الله عنه أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم بينما هو جالس في المسجد، والناس معه، إذ أقبل ثلاثَةُ نَفَرٍ، فأقبل اثنان إلى رسول الله، صلى الله عليه وسلم وذهب واحد، فوقفا على رسول الله صلى الله عليه وسلم ، فأما أحدهما فرأى فُرْجَةً في الْحَلْقَةِ فجلس فيها، وأما الآخر فجلس خلفهم، وأما الثالث فأدْبَر ذاهبٍا، فلما فرغ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «ألا أُخْبِرُكُم عن النَّفَرِ الثلاثة: أما أحدهم فأَوَى إلى الله فآوَاهُ الله إليه، وأما الآخر فاسْتَحْيا فاسْتَحْيَا الله منه، وأما الآخر، فأعْرَضَ، فأعرضَ اللهُ عنه».
अबू वाक़िद हारिस बिन औफ़ (रज़ियल्लाहु अनहु) सेे रिवायत है कि एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में लोगों के साथ बैठे थे कि इतने में तीन आदमी आए। उनमें से दो लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और एक वापस चला गया। जो दो व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए, उनमें से एक मज्लिस में एक खाली स्थान देखकर बैठ गया और दूसरा लोगों के पीछे जाकर बैठा। रही बात तीसरे की, तो वह उलटे पाँव वापस हो गया। जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की व्यस्तता समाप्त हुई, तो फ़रमायाः क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، دار طوق النجاة، ط: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي – بيروت. رياض الصالحين، للنووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق -بيروت، ط: الأولى 1428هـ. نزهة المتقين، لمجموعة من المؤلفين، مؤسسة الرسالة، ط: الرابعة عشر،1407هـ. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، بإشراف مؤسسة الشيخ، دار الوطن للنشر، الرياض، ط: 1426هـ. بهجة الناظرين، لسليم الهلالي، دار ابن الجوزي، السعودية، ط: الثالثة 1418هـ. تطريز رياض الصالحين، تأليف فيصل آل مبارك، تحقيق د. عبد العزيز آل حمد، دار العاصمة -الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ. صفات الله عز وجل الواردة في الكتاب والسنة: علوي بن عبد القادر السَّقَّاف، دار الهجرة الطبعة: الثالثة ، 1426هـ - 2006م.

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मैं तुमसे केवल अल्लाह के लिए मोहब्बत करता हूँ। तो उसने कहाः वह भी तुमसे मोहब्बत करे, जिसके लिए तुम्हें मुझसे मोहब्बत है।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه أنَّ رَجُلاً كَانَ عِند النَبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَمَرَّ رَجُلٌ بِهِ، فقال: يا رسول الله، أنِّي لَأُحِبُّ هَذَا، فَقَال لَهُ النَبِيُّ صلى الله عليه وسلم : «أَأَعْلَمْتَهُ؟» قال: لا. قال: «أَعْلِمْهُ»، فَلَحِقَهُ، فقال: إِنِّي أُحِبُّك فِي الله، فقال: أّحَبَّك الَّذِي أَحْبَبْتَنِي لَهُ.
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि एक व्यक्ति नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास बैठा हुआ था कि एक और व्यक्ति उसके पास से गुज़रा। तो उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं इससे मोहब्बत करता हूँ। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "क्या तुमने उसे बताया है?" कहाः नहीं। फ़रमायाः "उसे बता दो।" चुनांचे, वह गया और उससे कहाः मैं तुमसे केवल अल्लाह के लिए मोहब्बत करता हूँ। तो उसने कहाः वह भी तुमसे मोहब्बत करे, जिसके लिए तुम्हें मुझसे मोहब्बत है।
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. سنن أبي داود، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية، بيروت. السنن الكبرى للنسائي، تحقيق: حسن عبد المنعم شلبي، ط1، مؤسسة الرسالة، بيروت، 1421هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم: تهذيب سنن أبي داود وإيضاح علله ومشكلاته للعظيم آبادي، ط3، دار الكتب العلمية، بيروت، 1415 هـ. مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، ط1، مؤسسة الرسالة، 1421هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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बेशक अल्लाह को ग़ैरत (स्वाभिमान) आती है और मोमिन को भी ग़ैरत आती है। अल्लाह को ग़ैरत इस बात पर आती है कि मोमिन वह कार्य करे, जिसे अल्लाह ने हराम (वर्जित) किया है।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قال: قال رَسُولُ الله صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ اللهَ يَغَارُ، وَإِنَّ الْمُؤْمِنَ يَغَارُ، وَغَيْرَةُ اللهِ أَنْ يَأْتِيَ الْمُؤْمِنُ مَا حَرَّمَ عَلَيْهِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "बेशक अल्लाह को ग़ैरत (स्वाभिमान) आती है और मोमिन को भी ग़ैरत आती है। अल्लाह को ग़ैरत इस बात पर आती है कि मोमिन वह कार्य करे, जिसे अल्लाह ने हराम (वर्जित) किया है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि बेशक अल्लाह को ग़ैरत आती है तथा वह नफ़रत एवं नापसंद करता है, जिस तरह कि मोमिन को ग़ैरत आती है और वह नफ़रत एवं नापसंद करता है। अल्लाह को ग़ैरत इस बात पर आती है कि मोमिन व्यभिचार, समलैंगिकता, चोरी और शराब पीना जैसे गुनाह के काम करे, जिनको अल्लाह ने हराम क़रार दिया है।

फ़ायदे
  1. जब अल्लाह की हराम की हुई चीज़ों में संलिप्तता सामने आए, तो अल्लाह का क्रोध एवं दंड झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 35) (5223). صحيح مسلم (4/ 2114) (2761). تطريز رياض الصالحين، لفيصل المبارك (ص62). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 496). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 96). صفات الله عز وجل الواردة في الكتاب والسنة، لعلوي السَّقَّاف (ص267).

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इन लोगों का भय कैसा है? यह स्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर नर्म पड़ जाते हैं, लेकिन अस्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर हलाक होने लगते हैं!

عن ابن عباس رضي الله عنهما أنه رأى رجلا انْتَفَضَ لما سمع حديثا عن النبي صلى الله عليه وسلم في الصفات -استنكارا لذلك– فقال: "ما فَرَقُ هؤلاء؟ يجدون رِقَّةً عند مُحْكَمِهِ، ويَهْلِكُونَ عند مُتَشَابِهِهِ" .
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है, उन्होंने एक व्यक्ति को देखा कि जैसे ही अल्लाह की विशेषताओं के बारे में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक हदीस सुनी, (उसे एक नामालूम वस्तु समझते हुए) काँपने लगा। ऐसे में उन्होंने कहाः इन लोगों का भय कैसा है? यह स्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर नर्म पड़ जाते हैं, लेकिन अस्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर हलाक होने लगते हैं!
इसे इब्ने अबी आसिम ने रिवायत किया है। - इसे अब्दुर रज़्ज़ाक़ ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- अपनी मजलिस में बैठने वाले उन आम लोगों का खण्डन कर रहे हैं, जो अल्लाह की विशेषताओं से संबंधित कोई हदीस सुनते हैं, तो अनजान बनते हुए भयभीत हो जाते हैं और काँपने लगते हैं। दरअसल, वे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की सहीह हदीसों और कुरआन की स्पष्ट आयतों पर जैसा ईमान रखना चाहिए, वैसा ईमान रखते ही नहीं हैं। हालाँकि अल्लाह की विशेषताएँ सत्य हैं। किसी ईमान वाले को उनपर संदेह नहीं करना चाहिए। फिर, उनमें से कुछ लोग उनका वह अर्थ बयान करते हैं, जो अल्लाह ने मुराद नहीं लिया है। ऐसा करके वे अपने विनाश का मार्ग ही प्रशस्त करते हैं।

हवाला

كتاب التوحيد للإمام محمد بن عبد الوهاب ص252 ت: د. دغش العجمي . مكتبة أهل الأثر , الطبعة الخامسة , 1435ه الجديد في شرح كتاب التوحيد لمحمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي, ت: محمد بن أحمد سيد , مكتبة السوادي، الطبعة: الخامسة، 1424ه الملخص في شرح كتاب التوحيد للشيخ صالح الفوزان , دار العاصمة , الطبعة الأولى 1422ه كتاب السنة لابن أبي عاصم ومعه ظلال الجنة للألباني, المكتب الإسلامي, ط4 1419

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एक यहूदी धर्मगुरू अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ मुहम्मद, हम अपनी किताबों में पाते हैं कि अल्लाह आकाशों को एक उगली पर और धर्तियों को एक उगली पर रखेगा।

عن ابن مسعود رضي الله عنه قال: "جاء حَبْرٌ من الأحبار إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: يا محمد، إنا نجد أن الله يجعل السماوات على إِصْبَعٍ، والأَرَضَينَ على إِصْبَعٍ، والشجر على إِصْبَعٍ، والماء على إِصْبَعٍ، والثَّرَى على إِصْبَعٍ، وسائر الخلق على إِصْبَعٍ، فيقول: أنا الملك، فضحك النبي صلى الله عليه وسلم حتى بَدَتْ نَوَاجِذَهُ تَصْدِيقًا لقول الحبر، ثم قرأ: (وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالأَرْضُ جَمِيعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ). وفي رواية لمسلم: "والجبال والشجر على إِصْبَعٍ، ثم يَهُزُّهُنَّ فيقول: أنا الملك، أنا الله". وفي رواية للبخاري: "يجعل السماوات على إِصْبَعٍ، والماء والثَّرَى على إِصْبَعٍ، وسائر الخلق على إِصْبَعٍ".
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि एक यहूदी धर्मगुरू अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ मुहम्मद, हम अपनी किताबों में पाते हैं कि अल्लाह आकाशों को एक उगली पर, धर्तियों को एक उगली पर, पेड़ों को एक उंगली पर, पानी को एक उंगली पर, कीचड़ को एक उंगली पर और शेष सारी सृष्टियों को एक उंगली पर रखकर कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। उसकी बात पर सहमति जताते हुए नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हँस पड़े, यहाँ तक कि आपके दाढ़ प्रकट हो गए। फिर यह आयत पढ़ीः (وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالأَرْضُ جَمِيعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ) (उन लोगों ने अल्लाह का सम्मान करने की तरह सम्मान नहीं किया और सारी धरती क़यामत के दिन अल्लाह की मुट्ठी में होगी।) मुस्लिम की एक रिवायत में हैः "पर्वत एवं पेड़ को एक उंगली पर रखकर उन्हें हिलाएगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। मैं ही अल्लाह हूँ।" तथा बुख़ारी की एक रिवायत में हैः "आकाशों को एक ऊंगली पर, पानी और कीचड़ को एक उंगली पर और शेष सारी सारी सृष्टियों को एक उंगली पर रखेगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि एक यहूदी धर्म गुरू अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगा कि हम अपनी किताबों में लिखा पाते हैं कि अल्लाह क़यामत के दिन सात आकाशों को एक ऊंगली पर, सात धर्तियों को एक उंगली पर, पेड़ों को एक उंगली पर और कीचड़ को एक उंगली पर रखेगा। तथा एक रिवायत में है कि पानी को एक उंगली पर और शेष सारी सृष्टियों को एक उंगली पर रखेगा। यहाँ यह बता दें कि अल्लाह की उंगलियाँ पाँच हैं, जैसा कि सहीह हदीसों में आया है, लेकिन जीवों की उंगलियों की भाँति नहीं। फिर, अल्लाह अपनी सामर्थ्य और महानता को दर्शाने के लिए उन्हें हिलाते हुए एलान करेगा कि वही वास्तविक बादशाह है, उसी के हाथ में सारी शक्तियाँ हैं और वही परम पूज्य है। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यहूदी विद्वान की बात से सहमति जताते हुए हँस दिया, यहाँ तक के आपके दाढ़ के दाँत तक प्रकट हो गए। फिर यह आयत पढ़ीः {وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالأَرْضُ جَمِيعاً قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ}.(उन लोगों ने अल्लाह की जैसी क़द्रदानी करनी चाहिए थी उसकी (कुछ भी) क़द्र न की हालाँकि (वह ऐसा महान है कि) क़यामत के दिन सारी ज़मीन उसकी मुठ्ठी में होगी)।

हवाला

كتاب التوحيد للإمام محمد بن عبد الوهاب ص252 ت: د. دغش العجمي - مكتبة أهل الأثر , الطبعة الخامسة , 1435هـ. الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي, ت: محمد بن أحمد سيد , مكتبة السوادي، الطبعة: الخامسة، 1424هـ. الملخص في شرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح الفوزان, دار العاصمة , الطبعة الأولى 1422هـ. صحيح البخاري, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار طوق النجاة, الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت.

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अल्लाह क़यामत के दिन आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार करने वाले लोग? फिर सातों धर्तियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार दिखाने वाले लोग?

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما مرفوعاً: "يَطْوِي الله السماوات يوم القيامة، ثم يَأْخُذُهُنَّ بيده اليمنى، ثم يقول: أنا الملك أين الجبارون؟ أين المتكبرون؟ ثم يَطْوِي الأَرَضِينَ السبع، ثم يأخذهن بشماله، ثم يقول: أنا الملك، أين الجبارون؟ أين المتكبرون؟".
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैं कि आपने फ़रमायाः "अल्लाह क़यामत के दिन आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार करने वाले लोग? फिर सातों धर्तियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार दिखाने वाले लोग?"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बतायाः सर्वशक्तिमान अल्लाह क़यामत के दिन सातों आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और सातों धरतियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा। तथा आकाशों एवं धरतियों को लपेटते समय उद्दण्डता करने वालों और अहंकार दिखाने वालों को उनकी औक़ात बताने के लिए पुकारेगा और एलान करेगा कि वही वास्तविक एवं सर्वशक्तिमान बादशाह है, जो न कभी कमज़ोर होगा, न फ़ना होगा। जबकि उसके सिवा सारे राजा व प्रजा, न्यायकारी व अत्याचारी फ़ना हो जाएँगे। सब उसके सामने महत्वहीन हैं। अल्लाह अपने किसी काम का जवाबदेह नहीं, जबकि अन्य लोग जवाबदेह हैं।

हवाला

كتاب التوحيد للإمام محمد بن عبد الوهاب ص252 ت: د. دغش العجمي . مكتبة أهل الأثر , الطبعة الخامسة , 1435ه الجديد في شرح كتاب التوحيد لمحمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي, ت: محمد بن أحمد سيد , مكتبة السوادي، الطبعة: الخامسة، 1424ه صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت.

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संतुलित रहा करो और सीधे चला करो। जान लो कि तुममें से कोई हरगिज़ अपने अमल से मुक्ति नहीं पा सकता।" सहाबा ने कहा : आप भी नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमाया : "मैं भी नहीं! यह और बात है कि अल्लाह मुझे अपनी दया एवं कृपा में ढाँप ले।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «قَارِبُوا وَسَدِّدُوا، وَاعْلَمُوا أَنَّهُ لَنْ يَنْجُوَ أَحَدٌ مِنْكُمْ بِعَمَلِهِ» قَالُوا: يَا رَسُولَ اللهِ وَلَا أَنْتَ؟ قَالَ: «وَلَا أَنَا، إِلَّا أَنْ يَتَغَمَّدَنِيَ اللهُ بِرَحْمَةٍ مِنْهُ وَفَضْلٍ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "संतुलित रहा करो और सीधे चला करो। जान लो कि तुममें से कोई हरगिज़ अपने अमल से मुक्ति नहीं पा सकता।" सहाबा ने कहा : आप भी नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमाया : "मैं भी नहीं! यह और बात है कि अल्लाह मुझे अपनी दया एवं कृपा में ढाँप ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा को इस बात की प्रेरणा दी कि अमल करते रहें, अतिशयोक्ति एवं कोताही से बचते हुए जहाँ तक हो सके अल्लाह से डरते रहें और अल्लाह के प्रति निष्ठावान होकर तथा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत का पालन करते हुए अमल करते रहें, उनका अमल ग्रहण होगा और उनपर अल्लाह की दया उतरेगी। उसके बाद अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि केवल तुममें से किसी का अमल ही उसे मुक्ति नहीं दिला सकता। अल्लाह की दया दृष्टि भी ज़रूरी है। सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! आपके आमाल भी आपको मुक्ति नहीं दिला सकते, जबकि वो तो बड़े मूल्यवान हैं? जवाब दिया : मेरे आमाल भी नहीं, जब तक अल्लाह अपने अनुग्रह की चादर मुझपर न फैला दे।

फ़ायदे
  1. नववी कहते हैं : हर काम दुरुस्त तरीक़े से करने का प्रयास करो। अगर ऐसा न कर सको, तो उससे निकट रहा करो। "अल-सिदाद" शब्द का अर्थ दुरुस्त है। यानी बीच का रास्ता, जिसमें न अतिशयोक्ति हो और न कोताही, अतः न कोताही करो न अतिशयोक्ति।
  2. इब्न-ए-बाज़ कहते हैं : जिस तरह अच्छे काम जन्नत में दाख़िल होने का सबब हैं, उसी तरह बुरे काम जहन्नम में दाख़िल होने का सबब हैं। यह हदीस बताती है कि जन्नत में दाख़िला केवल अमल के आधार पर नसीब नहीं हो सकता, बल्कि अल्लाह की क्षमा और उसकी दया ज़रूरी है। लोग जन्नत में दाख़िल तो अपने कर्मों की वजह से होंगे, लेकिन इस दाख़िले को अल्लाह की दया और उसकी क्षमा अनिवार्य करेगी।
  3. बंदे को अपने कर्म पर अभिमान नहीं करना चाहिए, कर्म कितना ही बड़ा क्यों न हो। क्योंकि अल्लाह का हक़ उसके कर्म से कहीं बढ़कर है। इसलिए बंदे के दिल में भय एवं आशा दोनों का मिश्रण होना चाहिए।
  4. अल्लाह का फ़ज़्ल (अनुग्रह) और उसकी रहमत (दया) उसके बंदों के कर्मों से अधिक विशाल है।
  5. अच्छे कर्म जन्नत में दाख़िल होने का सबब हैं और जन्नत में प्रवेश पाने का सौभाग्य केवल अल्लाह के अनुग्रह एवं दया से प्राप्त होता है।
  6. किर्मानी कहते हैं : जब सारे लोग अल्लाह की दया की बदौलत ही जन्नत में दाख़िला पा सकते हैं, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ज़िक्र विशेष रूप से यह बताने के लिए किया गया है कि जब आपका जन्नत में दाख़िल होना यक़ीनी है और इसके बावजूद आप अल्लाह की दया के बिना जन्नत में दाख़िल नहीं हो सकते, तो दूसरे लोग किस शुमार में हैं?
  7. नववी कहते हैं : अल्लाह का कथन "अपने उन कर्मों के सबब जन्नत में दाखिल हो जाओ, जो तुम दुनिया में किया करते थे।" [सूरा नह्ल : 32], एक और कथन "ये वो जन्नत जिसका तुम वारिस अपने किए हुए कर्मों के सबब बनाए गए हो।" [सूरा ज़ुख़रुफ़ : 72] और इस प्रकार की अन्य आयतें जो यह बताती हैं कि कर्मों की बदौलत जन्नत में दाख़िला नसीब होगा, उनके और इन हदीसों के बीच कोई टकराव नहीं है। क्योंकि आयतों का अर्थ बस इतना है कि जन्नत में दाख़िल कर्मों के कारण नसीब होगा। लेकिन कर्म का सुयोग, केवल अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए काम करने का जज़्बा और उनकी क़बूलियत अल्लाह के अनुग्रह एवं दया से नसीब होती है। यही इन हदीसों का उद्देश्य है। अतः यह सही है कि जन्नत कर्म के सबब मिलेगा, लेकिन यह भी सही है कि कर्म का सुयोग अल्लाह की दया से प्राप्त होता है।
  8. इब्न अल-जौज़ी कहते हैं : इससे चार उत्तर निकलकर सामने आते हैं : 1- कर्म का सुयोग अल्लाह की दया से मिलता है। सच्चाई यह है कि यदि अल्लाह की दया न हो, तो न ईमान की दौलत नसीब हो और न अनुकरण का सौभाग्य। 2- दास का अर्जित किया हुआ लाभ उसके मालिक का हुआ करता है। ऐसे में मालिक अपने दास को जो भी इनाम दे, उसे उसका अनुग्रह ही कहा जाएगा। 3- कुछ हदीसों में आया है कि जन्नत में प्रवेश तो अल्लाह की दया से मिलेगा, लेकिन श्रेणियों का बटवारा कर्मों के आधार पर होगा। 4- नेकी के काम करने में थोड़ा-सा समय लगता है, लेकिन उसेक नतीजे में मिलने वाला सवाब ख़त्म होने वाला नहीं है। इसलिए ख़त्म हो जाने वाले कर्म के बदले में न ख़त्म होने वाला इनाम अनुग्रह ही कहलाएगा। बदला नहीं।
  9. राफ़ेई कहते हैं : किसी भी व्यक्ति के लिए उचित नहीं है कि मुक्ति एवं जन्नत की ऊँची श्रेणियों की प्राप्ति के संबंध में अपने कर्म पर भरोसा करे। क्योंकि उसके पास जो कर्म हैं, वह अल्लाह द्वारा प्रदान किए गए सुयोग के कारण हैं। वह गुनाहों से भी सुरक्षित रहा है, तो उसे सुरक्षित अल्लाह ने रखा है। अतः यह सब कुछ अल्लाह के अनुग्रह एवं उसकी दया का नतीजा है।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 121) (5673). صحيح مسلم (4/ 2170) (2816). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 165). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 321). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 573). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 130).

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सिफ़ारिश करो, प्रतिफल प्राप्त करोगे तथा अल्लाह अपने नबी की ज़बान से वह निर्णय देगा, जो उन्हे पसंद होगा।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه كان النبي صلى الله عليه وسلم إذا أتاه طالب حاجة أقبل على جُلسائِه، فقال: «اشْفَعُوا تُؤجَرُوا، ويَقْضِي الله على لسانِ نَبِيِّه ما أحب». وفي رواية: «ما شاء».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास जब कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति आता तो अपने पास बैठे लोगों की ओर मुड़ते और कहतेः सिफ़ारिश करो, प्रतिफल प्राप्त करोगे तथा अल्लाह अपने नबी की ज़बान से वह निर्णय देगा, जो उन्हें पसंद होगा। तथा एक रिवायत में हैः जो वह चाहेगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

كنوز رياض الصالحين - حمد بن ناصر بن عبد الرحمن العمار - دار كنوز اشبيليا- الطبعة الأولى: 1430 هـ بهجة الناظرين - سليم بن عيد الهلالي - دار ابن الجوزي. نزهة المتقين - مصطفى سعيد الخن، مصطفى البغا، محي الدين مستو، علي الشرجبي، محمد أمين لطفي - مؤسسة الرسالة ، بيروت - الطبعة الأولى : 1397 هـ 1977 م - الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ 1987م. شرح رياض الصالحين - محمد بن صالح بن محمد العثيمين - الناشر: دار الوطن للنشر، الرياض - الطبعة: 1426 هـ. دليل الفالحين - محمد بن علان - دار الكتاب العربي. رياض الصالحين- د. ماهر بن ياسين الفحل - الناشر: دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق - بيروت - الطبعة: الأولى، 1428 هـ - 2007 م. صحيح البخاري - محمد بن إسماعيل البخاري - دار طوق النجاة - الطبعة : الأولى، 1422هـ صحيح مسلم - مسلم بن الحجاج أبو الحسن القشيري النيسابوري - المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت. بهجة قلوب الأبرار وقرة عيون الأخيار في شرح جوامع الأخبار - المؤلف: أبو عبد الله، عبد الرحمن بن ناصر بن عبد الله بن ناصر بن حمد آل سعدي المحقق: عبد الكريم بن رسمي ال الدريني دار النشر: مكتبة الرشد للنشر والتوزيع الطبعة: الأولى 1422هـ - 2002م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
76 में से 8
76 हदीसें
  1. क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया
  2. मैं तुमसे केवल अल्लाह के लिए मोहब्बत करता हूँ। तो उसने कहाः वह भी तुमसे मोहब्बत करे, जिसके लिए तुम्हें मुझसे मोहब्बत है।
  3. बेशक अल्लाह को ग़ैरत (स्वाभिमान) आती है और मोमिन को भी ग़ैरत आती है। अल्लाह को ग़ैरत इस बात पर आती है कि मोमिन वह कार्य करे, जिसे अल्लाह ने हराम (वर्जित) किया है।
  4. इन लोगों का भय कैसा है? यह स्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर नर्म पड़ जाते हैं, लेकिन अस्पष्ट अर्थ वाली हदीस सुनकर हलाक होने लगते हैं!
  5. एक यहूदी धर्मगुरू अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ मुहम्मद, हम अपनी किताबों में पाते हैं कि अल्लाह आकाशों को एक उगली पर और धर्तियों को एक उगली पर रखेगा।
  6. अल्लाह क़यामत के दिन आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार करने वाले लोग? फिर सातों धर्तियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार दिखाने वाले लोग?
  7. संतुलित रहा करो और सीधे चला करो। जान लो कि तुममें से कोई हरगिज़ अपने अमल से मुक्ति नहीं पा सकता।" सहाबा ने कहा : आप भी नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमाया : "मैं भी नहीं! यह और बात है कि अल्लाह मुझे अपनी दया एवं कृपा में ढाँप ले।
  8. सिफ़ारिश करो, प्रतिफल प्राप्त करोगे तथा अल्लाह अपने नबी की ज़बान से वह निर्णय देगा, जो उन्हे पसंद होगा।
  9. मैं अपने बारे में अपने बंदे की सोच के निकट होता हूँ तथा मैं उसके साथ होता हूँ, वह जब भी मुझे याद करे।
  10. जब अल्लाह किसी समुदाय पर अनुग्रह करना चाहता है, तो उससे पहले ही उसके नबी को उठा लेता है और उसे उसका अग्रदूत और सिफ़ारिशी बना देता है
  11. जो व्यक्ति दुनिया में किसी पर पर्दा डालेगा, अल्लाह क़यामत के दिन उसपर पर्दा डालेगा।
  12. मैं इस बात का तुमसे कहीं अधिक हक़दार हूँ। चलो, मेरे इस बंदे को माफ़ कर दो।
  13. अल्लाह तआला ने कृपा को एक सौ भागों में बाँटकर अपने पास निन्यानवे भाग रख लिए और धरती में एक भाग उतारा। उसी एक भाग के कारण सारी सृष्टियाँ एक-दूसरे पर दया करती हैं, यहाँ तक कि एक चौपाया इस डर से पाँव को उठाए रहता है कि कहीं उसके बच्चे को चोट न लग जाए।
  14. “निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ही स्वीकार करता है। अल्लाह ने ईमान वालों को वही आदेश दिया है, जो उसने रसूलों को दिया था।
  15. निःसंदेह अल्लाह ने नेकियों और गुनाहों को लिख लिया है। फिर उसका विस्तार करते हुए फ़रमाया : जिसने किसी सत्कर्म का इरादा किया और उसे कर नहीं सका, अल्लाह उसके बदले अपने यहाँ एक पूरी नेकी लिख लेता है और अगर इरादे के अनुसार उसे कर भी लिया, तो उसके बदले में अपने पास दस से सात सौ, बल्कि उससे भी अधिक नेकियाँ लिख देता है। और अगर किसी बुरे काम का इरादा किया, लेकिन उसे किया नहीं, तो अल्लाह उसके बदले में भी एक पूरी नेकी लिख देता है और अगर इरादे के अनुसार उसे कर लिया, तो उसके बदले में केवल एक ही गुनाह लिखता है।
  16. अल्लाह तुम्हारे रूप और तुम्हारे धनों को नहीं देखता, बल्कि तुम्हारे दिलों और कर्मों को देखता है।
  17. ऐ मेरे बंदो! मैंने अत्याचार को अपने ऊपर हराम कर लिया है और उसे तुम्हारे बीच हराम किया है, अतः तुम एक-दूसरे पर अत्याचार न करो
  18. अल्लाह के निकट सबसे प्रिय स्थान मस्जिदें और सबसे अप्रिय स्थान, बाज़ार हैं।
  19. अल्लाह ने जब मखलूक़ की सृष्टि की, तो एक किताब में, जो उसके पास अर्श पर है, लिख दियाः मेरी रहमत मेरे क्रोध पर हावी रहेगी।
  20. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति को एक सैन्यदल का अमीर बनाकर भेजा। वह अपने साथियों को नमाज़ पढ़ाते समय कुरआन पढ़ता, तो अंत में "قل هو الله أحد" पढ़ता।
  21. अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक सवारी लाई गई, ताकि उसपर सवार हों। जब उन्होंने पायदान पर पाँव रखा, तो 'बिस्मिल्लाह' कहा।
  22. हे आदम के पुत्र! जब तक तू मुझे पुकारता रहेगा तथा मुझसे आशा रखेगा, मैं तेरे पापों को क्षमा करता रहूँगा, चाहे वह जितने भी हों, मैं उसकी परवाह नहीं करूँगा।
  23. पवित्र एवं सर्वशक्तिमान अल्लाह ऐसे दो आदमियों को देखकर हँसता है, जिनमें से एक व्यक्ति दूसरे को क़त्ल करता है और (फिर भी) दोनों जन्नत में प्रवेश कर जाते हैं। उनमें से एक तो अल्लाह की राह में लड़ता हुआ शहीद होता है तथा क़ातिल को अल्लाह तौबा की तौफ़ीक़ देता है और वह मुसलमान हो जाता है तथा (बाद में) शहीद हो जाता है।
  24. तुम्हारे स्वभाव में दो ऐसी बातें हैं, जिन्हें अल्लाह पसंद करता है : सहनशीलता और धैर्य।
  25. निश्चय ही अल्लाह अत्याचारी को छूट देता रहता है और जब पकड़ता है, तो छोड़ता नहीं है
  26. एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं (भूख से) निढाल हूँ।
  27. अल्लाह तआला फरमाता हैः प्रतिष्ठा मेरा तहबंद और अभिमान मेरी चादर है। अतः, जो उन दोनों में से कोई भी चीज़ मुझसे खींचेगा, मैं उसे यातना में डालूँगा।
  28. ऐ लोगो! स्वंय अपने आप पर दया करो। तुम किसी बहरे तथा ग़ायब को नहीं बुला रहे हो, वह तुम्हारे साथ है और वह बहुत ही सुनने वाला और समीप है
  29. अल्लाह मुहसिन अर्थात परोपकारी है, इसी लिए वह प्रत्येक वस्तु के साथ एहसान किए जाने को पसंद करता है। अतः जब तुम उस व्यक्ति को क़त्ल करो, जिसको इस्लामी दंड- संहिता के अनुसार क़त्ल करना अनिवार्य तो अच्छे अंदाज़ में क़त्ल करो और जब ज़िबह करो, तो अच्छे अंदाज़ में ज़िबह करो। तुम अपनी छुरी को तेज़ कर लो और अपने ज़बीहे को आराम पहुँचाओ।
  30. आदम की संतान ने मुझे झुठलाया, हालाँकि उसे ऐसा करने का हक नहीं था। मुझे गाली दी, हालाँकि ऐसा करने का उसे कोई अधिकार नहीं था
  31. जब अल्लाह किसी समुदाय को अज़ाब में लिप्त करना चाहता है, तो प्रत्येक व्यक्ति को उस यातना से ग्रस्त करता है, फिर हर एक अपने कर्मों के अनुसार उठाया जाएगा
  32. कुर्सी दोनों पैरों के रखने का स्थान है और अर्श की विशालता का अनुमान कोई नहीं लगा सकता
  33. ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नेकी के काम करने की क्षमता माँगता हूँ, बुराइयों को छोड़ने का सुयोग माँगता हूँ, अधीनों से प्रेम करने का मनोबल माँगता हूँ और इस बात का प्रार्थी हूँ कि तू मेरे सारे गुनाहों को माफ कर दे और मुझपर दया कर। जब तू किसी समुदाय को विपदा ग्रस्त करना चाहे तो मुझे उस विपदा में लिप्त करने से पहले ही उठा लेने का तुझसे अनुनय- विनय करता हूँ और तुझसे मैं तेरा प्रेम और तुझसे प्रेम करने वाले का प्रेम माँगता हूँ और उस कर्म का प्रेम माँगता हूँ जो तेरे प्रेम से करीब कर दे
  34. एक यहूदी ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहाः ऐ मुहम्मद, अल्लाह (क़यामत के दिन) आकाशों को एक उँगली पर, धरतियों को एक उँगली पर, पहाड़ों को एक उँगली पर, पेड़ों को एक उँगली पर और सारी सृष्टियों को एक उँगली पर थाम लेगा और फिर कहेगा : मैं ही बादशाह हूँ।
  35. जब कोई मुस्लिम व्यक्ति नमाज़ एवं ज़िक्र के लिए मस्जिदों में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने लगता है, तो अल्लाह उससे उसी प्रकार प्रसन्न होता है, जिस प्रकार किसी खोए हुए व्यक्ति के घर आने पर उसके घर वाले प्रसन्न होते हैं।
  36. जो मेरे किसी वली (मित्र) से शत्रुता का रास्ता अपनाएगा, मैं उसके साथ जंग का एलान करता हूँ। मेरा बंदा जिन कामों के द्वारा मेरी निकटता प्राप्त करना चाहता है, उनमें मेरे निकट सबसे प्यारी चीज़ मेरे फ़र्ज़ किए हुए काम हैं
  37. जब अल्लाह ने जन्नत में आदम का चित्र बनाया, तो जब तक चाहा, उसे उसी दशा में छोड़े रखा। इस बीच इब्लीस उसके चोरों ओर चक्कर लगाने लगा और देखने लगा कि यह क्या है! जब देखा कि वह अंदर से खाली है, तो समझ गया कि अल्लाह ने कोई ऐसी मख़लूक़ बनाई है, जिसे अपने ऊपर नियंत्रण नहीं होगा।
  38. जब उच्च एवं महान अल्लाह किसी बंदे से मोहब्बत करता है, तो जिब्रील को पुकारकर कहता है कि अल्लाह अमुक बंदे से मोहब्बत करता है, तो तुम भी उससे मोहब्बत करो। चुनांचे जिब्रील उससे मोहब्बत करने लगते हैं। फिर वह आकाश वालों में एलान करते हैं कि अल्लाह अमुक बंदे से मोहब्बत करता है, तो तुम लोग भी उस से मोहब्बत करो। चुनांचे आकाश वाले भी उससे मोहब्बत करने लगते हैं। फिर धरती पर उपस्थित लोगों के दिलों में उसकी मोहब्बत पैदा कर दी जाती है।
  39. जब बंदा मुझसे एक बित्ता क़रीब आता है, तो मैं उससे एक हाथ क़रीब आता, जब वह मुझसे एक हाथ क़रीब आता है, तो मैं उससे दोनों हाथों को फैलाकर जितनी दूरी बनती है, उतना क़रीब आता हूँ और जब वह मेरे पास चलकर आता है, तो मैं उसके पास दौड़ कर आता हूँ।
  40. ''तुममें से हर एक के साथ अल्लाह बात करेगा, इस तरह कि उसके और उसके रब के बीच कोई अनुवादक न होगा।
  41. जो अल्लाह से मिलना पसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है और जो अल्लाह से मिलना नापसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।
  42. रहिम (रिश्ता) रहमान के 'हुजज़ा' (तहबंद बाँधने के स्थान) को पकड़े हुआ है। जो उसे जोड़ेगा, रहमान उसे ज़ोड़ेगा और जो उसे तोड़ेगा, रहमान उसे तोड़ेगा।
  43. क्या तू इस बात से प्रसन्न नहीं है कि जो तुझे जोड़े, मैं उसे जोड़ूँ और तुझे काटे में उसे काटूँ?
  44. दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।
  45. निस्संदेह अल्लाह ही चीज़ों को महंगा और सस्ता करने वाला तथा रोज़ी तंग करने वाला एवं फैलाने वाला है और मुझे आशा है कि अल्लाह से मेरी भेंट इस हाल में होगी कि तुममें से कोई रक्त एवं धन संबंधित किसी प्रकार के ज़ुल्म का कोई दावा मेरे विरुद्ध नहीं रखेगा
  46. (क़यामत के दिन) हमारा रब अपनी पिंडली खोलेगा, तो सभी मोमिन मर्द और औरतें सजदे में गिर पड़ेंगे। लेकिन, हर वह व्यक्ति ख़ड़ा रह जाएगा, जो दुनिया में दिखावे और शोहरत के लिए सजदा करता था। वह सजदा करने जाएगा, तो उसकी पीठ एक ही हड्डी की तरह सख्त बन जाएगी।
  47. निस्संदेह सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह अत्यंत हया वाला तथा परदा करने वाला है, जो हया तथा परदा करने को पसंद करता है। अतः, जब तुममें से कोई स्नान करे, तो परदा कर ले।
  48. अल्लाह ने कहा : जब मेरा बंदा मुझसे एक बालिश्त निकट आता है, तो मैं उससे एक हाथ निकट होता हूँ और जब वह मुझसे एक हाथ निकट आता है, तो मैं उससे दोनों हाथों के फैलाव के समान निकट होता हूँ और जब वह मुझसे दोनों हाथों के फैलाव के समान निकट आता है, तो मैं उसकी ओर और तेज़ी से बढ़ता हूँ।
  49. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब मस्जिद में प्रवेश करते, तो फ़रमाया करते :«أعوذ بالله العظيم، وبوجهه الكريم، وسلطانه القديم، من الشيطان الرَّجِيم» (मैं महान अल्लाह की, उसके सम्मानित चेहरे की और उसकी सनातन सत्ता की शरण माँगता हूँ, धिक्कारे हुए शैतान से।)
  50. सारी प्रशंसा उस अल्लाह की है, जो सारी आवाज़ों को सुनता है। ख़ौला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास अपने पति की शिकायत लेकर आईं, तो उनकी बात मैं सुन नहीं पा रही थीं।
  51. क्या तुम्हें साद की ग़ैरत पर आश्चर्य हो रहा है? अल्लाह की क़सम! मैं उससे भी अधिक ग़ैरत वाला हूँ और अल्लाह मुझसे भी अधिक गैरत वाला है। अल्लाह की ग़ैरत के कारण ही उसने अश्लील कामों को हराम किया है। जो दिखाकर किए जाएँ उन्हें भी और जो छिपाकर किए जाएँ उन्हें भी। अल्लाह से अधिक ग़ैरत वाला कोई नहीं है।
  52. कोई भी व्यक्ति अथवा कोई भी वस्तु अल्लाह से अधिक किसी ऐसी कष्टदायक बात पर सब्र करने वाली नहीं है, जो उसे सुनाई दे। लोग अल्लाह की संतान होने की बात करते हैं, लेकिन इसके बावजूद अल्लाह उन्हें सुख-शांति और रोज़ी देता है।
  53. बेशक अल्लाह हर बनाने वाले और उसकी बनाई हुई चीज़ को बनाता है।
  54. चिकित्सक तो अल्लाह ही है। तुम केवल एक नर्म दिल व्यक्ति हो। उसका उपचारक वही है, जिसने उसे पैदा किया है।
  55. मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि इस आयत को पढ़ते समय अपनी दो उँगलियों को (कान और आँख पर) रख रहे थे।
  56. जहन्नम निरंतर कहता रहेगा कि क्या इससे अधिक है? यहाँ तक कि सर्वशक्तिमान अल्लाह उसमें अपना पैर रख देगा, तो कहेगा : तेरी इज़्जत की क़सम! बस काफ़ी है, बस काफ़ी है! फिर जहन्नम ख़ुद में सिमट जाएगा।
  57. जहन्नम और जन्नत के बीच बहस व तकरार हो गई। जहन्नम ने कहा : मुझे तुम्हारे ऊपर यह श्रेष्ठता प्राप्त है कि मेरे अंदर अभिमानियों और ज़ालिमों का निवास होगा। इसपर जन्नत ने कहा : मेरा क्या है, मेरे अंदर तो केवल कमज़ोर, निम्न स्तर के और बुद्धिहीन लोग ही दाख़िल होंगे।
  58. लोग (या फिर कहा कि बंदे) क़यामत के दिन नंगे बदन, बिना ख़तना किए हुए और ख़ाली हाथ उठाए जाएँगे।
  59. “अल्लाह तआला जन्नतियों से फ़रमाएगा : ऐ जन्नत वालो! वो कहेंगे : पूरे ध्यान से हाज़िर हैं ऐ हमारे रब और सदा तेरी मेहरबानी के मोहताज हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा : अब तुम राज़ी हो? वो कहेंगे : क्या अब भी ख़ुश न होंगे, जबकि तूने हमें ऐसी-ऐसी नेमतें प्रदान की हैं, जो अपनी सारी मख़लूक़ में से किसी और को नहीं दीं?
  60. ऐ अबू मसऊद! जान लो कि अल्लाह तुम पर तुम्हारे इस ग़ुलाम पर सामर्थ्य से अधिक सामर्थ्य रखता है। तो मैंने कहा: इसके पश्चात मैं कभी किसी दास को नहीं मारुँगा
  61. अल्लाह अपने बंदों पर उससे कहीं ज़्यादा मेहरबान है, जितना यह अपने बच्चे पर मेहरबान है
  62. एक कुत्ता एक कुएँ के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और क़रीब था कि वह प्यास से हलाक हो जाए कि उसे बनी इसराईल की एक वेश्या ने देख लिया। फिर उसने अपना मोज़ा उतारा और उसके ज़रिए कुत्ते के लिए पानी निकालकर उसे पिलाया, तो इस पुण्य के कारण उसे क्षमा कर दिया गया
  63. ऐ मेरे रब! मेरी सहायता कर और मेरे विरुद्ध सहायता न कर, मुझे विजय प्रदान कर और किसी को मेरे विरुद्ध विजय प्रदान न कर, मेरे हक़ में योजना बना तथा मेरे विरुद्ध योजना मत बना, मुझे सच्चाई के रास्ते पर चला और सच्चाई के रास्ते पर चलना मेरे लिए आसान कर तथा मेरे विरुद्ध विपलव करने वाले पर मुझे विजयी बना
  64. हमारा बरकत वाला तथा उच्च रब हर रात, जबकि रात का एक तिहाई भाग शेष रह जाता है, दुनिया से निकट वाले आसमान पर उतरकर फरमाता है
  65. क्या तुम्हें दोपहर के समय सूरज को देखने में, जबकि वह बादलों में न हो, कोई कठिनाई होती है? उन्होंने उत्तर दिया कि नहीं! तो आपने फ़रमाया: क्या तुम्हें चौदहवीं की रात को, चाँद को देखने में, जबकि वह बादलों में न हो, कोई कठिनाई होती है?
  66. ईमान तो यमनी है और हिकमत भी यमनी है
  67. अल्लाह के निन्यानवे, एक कम सौ नाम हैं, जिसने उन्हें याद कर लिया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा, अल्लाह एक है और वह विषम संख्या को पसंद करता है
  68. तुममें से कोई जब नमाज़ में खड़ा होता है, तो वह अपने रब से व्यक्तिगत रूप से बात कर रहा होता है या उसका रब उसके और क़िबले के बीच होता है। इसलिए, तुममें से कोई (नमाज़ की हालत में) क़िबले की ओर न थूके। बल्कि बाएँ तरफ़ या अपने क़दमों के नीचे थूके।
  69. अल्लाह के सौ से एक कम निन्यानवे नाम हैं। जिसने उनको याद किया तथा उनके तक़ाज़ों पर अमल किया, वह जन्नत में दाख़िल होगा।
  70. अल्लाह किसी मोमिन के द्वारा किए गए किसी अच्छे काम के महत्व को घटाता नहीं है। मोमिन को उसके अच्छे काम के बदले में दुनिया में नेमतें प्रदान की जाती हैं और आख़िरत में प्रतिफल दिया जाता है
  71. अल्लाह ज़मीन को अपनी मुट्ठी में ले लेगा तथा आकाशों को अपने दाएँ हाथ में लपेट लेगा और फिर कहेगा : मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं धरती के बादशाह?
  72. जिसने उसे दुनिया में पैरों पर चलाया, क्या वह क़यामत के दिन उसे चेहरे के बल चला नहीं सकता?
  73. अल्लाह सोता नहीं है तथा सोना उसकी महानता के अनुरूप भी नहीं है
  74. “निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ही स्वीकार करता है। अल्लाह ने ईमान वालों को वही आदेश दिया है, जो उसने रसूलों को दिया था।
  75. बेशक अल्लाह ने नेकियों और गुनाहों को लिख लिया है। "फिर उसका विस्तार करते हुए फ़रमाया
  76. “अल्लाह तआला का फ़रमान है : जिसने मेरे किसी ‘वली’ से दुश्मनी की, उससे मेरी ओर से युद्ध का ऐलान है। मेरा बंदा जिन चीज़ों के द्वारा मेरी निकटता प्राप्त करता है, उनमें मुझे सबसे अधिक प्रिय वह चीज़ें हैं, जो मैंने उसपर फ़र्ज़ की हैं

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com