सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

जब अल्लाह किसी समुदाय पर अनुग्रह करना चाहता है, तो उससे पहले ही उसके नबी को उठा लेता है और उसे उसका अग्रदूत और सिफ़ारिशी बना देता है

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه مرفوعاً: «إذا أراد الله تعالى رحمة أُمَّة، قَبض نبيَّها قبلها، فَجَعَلَهُ لها فَرَطًا وسَلفًا بين يديها، وإذا أراد هلَكَةً أُمَّة، عَذَّبَها ونَبِيُّهَا حَيٌّ ، فأهْلَكَها وهو حَيٌّ يَنظرُ، فأقرَّ عينَه بِهَلاَكِهَا حين كذَّبُوه وعَصَوا أمرَه».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब अल्लाह किसी समुदाय पर अनुग्रह करना चाहता है, तो उससे पहले ही उसके नबी को उठा लेता है और उसे उसका अग्रदूत और सिफ़ारिशी बना देता है। तथा जब किसी समुदाय का विनाश चाहता है, तो उसे नबी के जीते जी अज़ाब देता है और उसकी आँखों के सामने विनष्ट कर देता है। इस तरह, उसकी हलाकत से नबी की आँखों की ठंडक का सामान करता है, जब समुदाय के लोग उसे झुठलाने लगते हैं और उसके आदेश का उल्लंघन शुरू कर देते हैं।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- كنوز رياض الصالحين أ. د . حمد بن ناصر بن عبد الرحمن العمار دار كنوز اشبيليا ـالطبعة الأولى : 1430 هـ. - بهجة الناظرين ،الشيخ: سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - شرح الشفا- المؤلف: علي بن سلطان القاري دار الكتب العلمية - بيروت الطبعة: الأولى، 1421 هـ. - رياض الصالحين للنووي، تحقيق د. ماهر بن ياسين الفحل دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق - بيروت الطبعة: الأولى، 1428 هـ - 2007 م. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - شرح رياض الصالحين المؤلف: الشيخ الطبيب أحمد حطيبة - مصدر الكتاب: دروس صوتية قام بتفريغها موقع الشبكة الإسلامية.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
अल्लाह के नामों और गुणों से संबंधित एकेश्वरवाद

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com