इस हदीस से उच्च एवं महान अल्लाह की महानता का पता चलता है। क्योंकि इसमें बताया गया है कि अल्लाह सारे आकाशों को अपने विशाल एवं सम्मानित हाथ की एक उंगली पर रख लेगा, फिर आपने कई विशालकाय सृष्टियों का नाम गिनाया और बताया कि इनमें से हर किसी को एक-एक उंगली पर रख लेगा। याद रहे कि यदि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह चाहे, तो आकाशों एवं धरतियों को तथा उनमें मौजूद सारी सृष्टियों को अपने हाथ की एक ही उंगली पर रख ले। चूँकि उक्त जानकारी नबियों से नस्ल दर नस्ल नक़ल होकर आई थी, जो उन्हें वह्य के माध्यम से सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह से प्राप्त हुई थी, इसलिए अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने यहूदी की बात की पुष्टि की और उसकी बात से प्रसन्नता व्यक्त की। आप उसकी बात सुन, उसकी पुष्टि के तौर पर, इस तरह हँस पड़े कि आपके सामने के दाँत दिख गए। इसका उल्लेख अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- ने एक अन्य हदीस में किया है। फिर आपने यहूदी के विचार की पुष्टि और उसकी सिद्धि के लिए अल्लाह के इस कथन को पढ़ा, जिसमें उसके हाथों का उल्लेख है : "तथा उन्होंने अल्लाह का वैसा सम्मान नहीं किया, जैसे उसका सम्मान करना चाहिए था और धरती पूरी उसकी एक मुट्ठी में होगी, क़यामत के दिन तथा आकाश लपेटे हुए होंगे उसके हाथ में। वह पवित्र तथा उच्च है उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।" इन प्रमाणों के होते हुए उन लोगों की बात पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, जो इस शब्द को अर्थहीन बना देते हैं और अल्लाह के उंगली होने का इनकार करते हैं तथा दावा यह करते हैं कि अल्लाह के लिए उंगली सिद्ध करना उसे सृष्टि के समान सिद्ध करना है। जबकि इस प्रकार के लोगों को पता ही नहीं है कि अल्लाह के लिए उंगली सिद्ध करने से उसे सृष्टि के समान सिद्ध करना लाज़िम नहीं आता, क्योंकि हम अल्लाह के लिए जीवन, सामर्थ्य, शक्ति, सुनाने तथा देखने की बात कहते हैं और इससे उसके सृष्टि के समान होना लाज़िम नहीं आता। क्योंकि पवित्र अल्लाह की शान यह है कि "उसके जैसी कोई चीज़ नहीं है और वह सुनने वाला देखने वाला है।"
صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. المصباح المنير في غريب الشرح الكبير، لأحمد بن محمد بن علي الفيومي، الناشر: المكتبة العلمية – بيروت. شرح كتاب التوحيد من صحيح البخاري، لعبد الله بن محمد الغنيمان، الناشر: مكتبة الدار، المدينة المنورة، الطبعة: الأولى، 1405 هـ. الملخص في شرح كتاب التوحيد- صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان- دار العاصمة الرياض- الطبعة: الأولى 1422هـ- 2001م.