رياض الصالحين، للنووي، نشر: دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق – بيروت، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، الطبعة: الأولى، 1428هـ - 2007م. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426ه. كنوز رياض الصالحين، نشر: دار كنوز إشبيليا، الطبعة: الأولى، 1430ه 2009م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. ط1 -1415 المعجم الوسيط، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان، الطبعة: الثانية. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
तशरीह के साथ हदीसें
एक कुत्ता एक कुएँ के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और क़रीब था कि वह प्यास से हलाक हो जाए कि उसे बनी इसराईल की एक वेश्या ने देख लिया। फिर उसने अपना मोज़ा उतारा और उसके ज़रिए कुत्ते के लिए पानी निकालकर उसे पिलाया, तो इस पुण्य के कारण उसे क्षमा कर दिया गया
عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «بينما رجلٌ يمشي بطريقٍ اشتَدَّ عليه العَطَشُ، فوَجَدَ بِئْرًا فنزل فيها فَشَرِبَ، ثم خَرَجَ فإذا كَلْبٌ يَلْهَثُ يأكل الثَّرَى مِنَ العَطَشِ، فقال الرجلُ: لقد بَلَغَ هذا الكَلْبَ مِنَ العَطَشِ مِثْلَ الذِي كان قَدْ بَلَغَ مِنِّي، فنَزَلَ البِئْرَ، فَمَلَأَ خُفَّهُ ماءً ثم أَمْسَكَهُ بِفِيهِ حَتَّى رَقِيَ، فَسَقَى الكَلْبَ، فشَكَرَ اللهُ له، فَغَفَرَ لهُ» قالوا: يا رسول الله، إنَّ لَنَا في البَهَائِمِ أَجْرًا؟ فقال: «في كُلِّ كَبِدٍ رَطْبَةٍ أَجْرٌ».
وفي رواية: «فشَكَرَ اللهُ له، فغَفَرَ له، فَأَدْخَلَهُ الجَنَّةَ».
وفي رواية: «بَيْنَمَا كَلْبٌ يُطِيفُ بِرَكْيَةٍ قد كَادَ يَقْتُلُهُ العَطَشُ إذ رَأَتْهُ بَغِيٌّ مِنْ بَغَايَا بَنِي إِسْرَائِيلَ، فَنَزَعَتْ مُوقَهَا فَاسْتَقَتْ له بهِ فَسَقَتْهُ فَغُفِرَ لها بِهِ».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: एक व्यक्ति किसी रास्ते से गुज़र रहा था कि उसे सख़्त प्यास लगी। इतने में उसे एक कुआँ मिला, तो उसमें उतरकर उसने पानी पिया। ऊपर आया तो देखा कि एक कुत्ता प्यास के कारण हाँप रहा है और कीचड़ चाट रहा है। उसने अपने दिल में कहा: इस कुत्ते को भी उतनी ही प्यास लगी होगी, जितनी मुझे लगी थी। इसलिए वह कुएँ में उतरा, अपने मोज़े में पानी भरा और उसे अपने मुँह से पकड़कर ऊपर आया तथा कुत्ते को पानी पिलाया। अल्लाह को उसका यह नेक काम इतना पसंद आया कि उसे क्षमा कर दिया। सहाबा ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हमें जानवरों की सहायता करने में भी नेकी मिलती है? आपने कहा: हर ज़िंदा कलेजे वाले की सहायता में नेकी है। एक रिवायत में हैः अल्लाह ने उसके इस कार्य की क़द्र की और उसे क्षमा कर दिया तथा जन्नत में दाख़िल होने का सौभाग्य प्रदान किया। तथा एक रिवायत में है: एक कुत्ता एक कुएँ के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और क़रीब था कि वह प्यास से हलाक हो जाए कि उसे बनी इसराईल की एक वेश्या ने देख लिया। उसने कुत्ते पर दया करते हुए, अपना मोज़ा उतारा और उसके ज़रिए कुत्ते के लिए पानी निकालकर उसे पिलाया, तो इस पुण्य के कारण उसे क्षमा कर दिया गया।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com