सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

आख़िरत (परलोक) का जीवन

44 हदीसें

क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।

عَنْ عَبْدِ اللهِ بنِ مَسْعُودٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَوَّلُ مَا يُقْضَى بَيْنَ النَّاسِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِي الدِّمَاءِ».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि क़यामत के दिन लोगों के एक-दूसरे पर अत्याचार करने से संबंधित जिस चीज़ के बारे में सबसे पहले निर्णय लिया जाएगा, वह रक्त का विषय है। जैसे क़त्ल करना और ज़ख़्मी करना।

फ़ायदे
  1. रक्त के विषय का महत्व। क्योंकि आरंभ महत्वपूर्ण चीज़ों से किया जाता है।
  2. पाप उनके द्वारा हुई हानि और बिगाड़ की महानता के अनुसार बड़े हो जाते हैं। और यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि किसी बेगुनाह इन्सान की हत्या करना एक बहुत बड़ी हानि और बिगाड़ है। और इससे बड़ा बिगाड़ अल्लाह के प्रति अविश्वास और उसका साझी ठहराने के सिवा और कुछ नहीं है।
हवाला

صحيح البخاري (9/ 2) (6864). صحيح مسلم (3/ 1304) (1678). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص319). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص640). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (2/ 103).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जिसने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा, जबकि वह उसे चरितार्थ करने में सक्षम था, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और यह अख़्तियार देगा कि बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों में से जिसे चाहे, चुन ले।

عن معاذ بن أنس رضي الله عنه مرفوعًا: «مَن كَظَمَ غَيظًا، وَهُو قادر على أن يُنفِذَه، دَعَاه الله سبحانه وتعالى على رؤوس الخَلاَئِق يوم القيامة حتَّى يُخَيِّره من الحُور العَين مَا شَاء».
मुआज़ बिन अनस (रजि़यल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जिसने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा, जबकि वह उसे चरितार्थ करने में सक्षम था, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और यह अख़्तियार देगा कि बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों में से जिसे चाहे, चुन ले।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन)
हवाला

مسند أحمد، تحقيق شعيب الأرنؤوط، الناشر: مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. سنن أبي داود، للإمام أبي داود تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، الناشر: المكتبة العصرية، صيدا - بيروت. سنن ابن ماجه، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي. سنن الترمذي، للإمام الترمذي، تحقيق: أحمد محمد شاكر وآخرون، الناشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، الطبعة: الثانية، 1395 هـ - 1975 م. صحيح الترغيب والترهيب – الألباني، مكتبة المعارف – الرياض. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अल्लाह तआला क़यामत के दिन कहेगाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वाले कहाँ हैं? आज मैं उन्हें अपनी छाया में जगह दूँगा, जबकि मेरी छाया के अतिरिक्त कोई छाया नहीं है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعًا: «إِنَّ الله تَعَالى يَقُول يَوْمَ القِيَامَة: أَيْنَ المُتَحَابُّونَ بِجَلاَلِي؟ اليَوم أُظِلُّهُم فِي ظِلِّي يَوْمَ لاَ ظِلَّ إِلاَّ ظِلِّي».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "अल्लाह तआला क़यामत के दिन कहेगाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वाले कहाँ हैं? आज मैं उन्हें अपनी छाया में जगह दूँगा, जबकि मेरी छाया के अतिरिक्त कोई छाया नहीं है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، الطبعة: الرابعة 1425هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423 هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अल्लाह क़यामत के दिन आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार करने वाले लोग? फिर सातों धर्तियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार दिखाने वाले लोग?

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما مرفوعاً: "يَطْوِي الله السماوات يوم القيامة، ثم يَأْخُذُهُنَّ بيده اليمنى، ثم يقول: أنا الملك أين الجبارون؟ أين المتكبرون؟ ثم يَطْوِي الأَرَضِينَ السبع، ثم يأخذهن بشماله، ثم يقول: أنا الملك، أين الجبارون؟ أين المتكبرون؟".
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैं कि आपने फ़रमायाः "अल्लाह क़यामत के दिन आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार करने वाले लोग? फिर सातों धर्तियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार दिखाने वाले लोग?"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बतायाः सर्वशक्तिमान अल्लाह क़यामत के दिन सातों आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और सातों धरतियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा। तथा आकाशों एवं धरतियों को लपेटते समय उद्दण्डता करने वालों और अहंकार दिखाने वालों को उनकी औक़ात बताने के लिए पुकारेगा और एलान करेगा कि वही वास्तविक एवं सर्वशक्तिमान बादशाह है, जो न कभी कमज़ोर होगा, न फ़ना होगा। जबकि उसके सिवा सारे राजा व प्रजा, न्यायकारी व अत्याचारी फ़ना हो जाएँगे। सब उसके सामने महत्वहीन हैं। अल्लाह अपने किसी काम का जवाबदेह नहीं, जबकि अन्य लोग जवाबदेह हैं।

हवाला

كتاب التوحيد للإمام محمد بن عبد الوهاب ص252 ت: د. دغش العجمي . مكتبة أهل الأثر , الطبعة الخامسة , 1435ه الجديد في شرح كتاب التوحيد لمحمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي, ت: محمد بن أحمد سيد , مكتبة السوادي، الطبعة: الخامسة، 1424ه صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अल्लाह तआला ने कहाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वालों के लिए नूर के मिंबर होंगे तथा उनपर नबी एवं शहीद भी रश्क करेंगे।

عن معاذ بن جبل رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال: «قَالَ اللهُ -عَزَّ وجَلَّ-: المُتَحَابُّون فِي جَلاَلِي، لَهُم مَنَابِرُ مِن نُورٍ يَغْبِطُهُم النَبِيُّونَ والشُهَدَاء».
मुआज़ बिन जबल- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला ने कहाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वालों के लिए नूर के मिंबर होंगे तथा उनपर नबी एवं शहीद भी रश्क करेंगे।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. جامع الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر وآخرون، ط2، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، 1395هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، ط1، مؤسسة الرسالة، 1421هـ. مشكاة المصابيح للتبريزي، تحقيق: محمد ناصر الدين الألباني، ط3، المكتب الإسلامي، بيروت، 1985م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

क्या मैं तुम्हें जन्नत जाने वालों के विषय में न बताऊँ? प्रत्येक कमज़रो एवं विनम्र व्यक्ति, जो अल्लाह पर क़सम उठा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम की लाज रख ले। क्या मैं तुम्हें जहन्नम जाने वालों के विषय में न बताऊँ? प्रत्येक क्रूर अशिष्ट, कंजूस एवं अभिमानी व्यक्ति।

عَنْ حَارِثَةَ بْنِ وَهْبٍ الخُزَاعِيِّ رضي الله عنه قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «أَلاَ أُخْبِرُكُمْ بِأَهْلِ الجَنَّةِ؟ كُلُّ ضَعِيفٍ مُتَضَعِّفٍ، لَوْ أَقْسَمَ عَلَى اللَّهِ لَأَبَرَّهُ، أَلاَ أُخْبِرُكُمْ بِأَهْلِ النَّارِ: كُلُّ عُتُلٍّ جَوَّاظٍ مُسْتَكْبِرٍ».
हारिसा बिन वह्ब ख़ुज़ाई रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "क्या मैं तुम्हें जन्नत जाने वालों के विषय में न बताऊँ? प्रत्येक कमज़रो एवं विनम्र व्यक्ति, जो अल्लाह पर क़सम उठा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम की लाज रख ले। क्या मैं तुम्हें जहन्नम जाने वालों के विषय में न बताऊँ? प्रत्येक क्रूर अशिष्ट, कंजूस एवं अभिमानी व्यक्ति।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जन्नतियों एवं जहन्नमियों की कुछ विशेषताएँ बताई हैं। जन्नत वासियों में अधिक संख्या ऐसे लोगों की होगी, जो विनम्र, अल्लाह के आगे झुकने वाले और उसके सामने दीनता प्रकट करने वाले होंगे। यही कारण है कि कुछ लोग उन्हें कमज़ोर तथा कमतर समझने लगेंगे। लेकिन अल्लाह के यहाँ उनका महत्व इतना होगा कि अगर अल्लाह के अनुग्रह की आशा में कोई क़सम खा ले, तो अल्लाह उनकी क़सम की लाज रख ले और उनकी मुराद और दुआ पूरी कर दे। जबकि जहन्नम में अधिक संख्या ऐसे लोगों की होगी, जो «उतुल्ल» अर्थात: असभ्य, कठोर स्वभाव वाले और अश्लील होंगे, जो कोई अच्छी बात नहीं मानेंगे। «जव्वाज़» यानी घमंडी, पेट के पुजारी, भारी भरकम शरीर वाले, अकड़कर चलने वाले और अशिष्ट होंगे। «मुस्तकबिर» यानी सत्य को ठुकराने वाले और दूसरों को तुच्छ समझने वाले होंगे।

फ़ायदे
  1. जन्नतवासियों की विशेषताओं से विशेषित होने की प्रेरणा और जहन्नमवासियों की विशेषताओं से दूर रहने की शिक्षा।
  2. विनम्रता का इज़हार अल्लाह के सामने होता है, उसके आदेशों एवं निषेधों तथा उनपर अमल करने के संबंध में होता है और बंदों के सामने भी इस तौर पर होता है कि इन्सान किसी को हीन दृष्टि से न देखे।
  3. इब्न-ए-हजर कहते हैं : अधिकतर जन्नती यही लोग होंगे, जैसे कि अधिकतर जहन्नमी दूसरे प्रकार के लोग होंगे। यह बताना उद्देश्य नहीं है कि दोनों ओर बस यही लोग होंगे।
हवाला

صحيح البخاري (6/ 159) (4918). صحيح مسلم (4/ 2190) (2853). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (5/ 5). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 47). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 340). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 264).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जन्नत में एक सौ श्रेणियाँ हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपने मार्ग में जिहाद करने वालों के लिए तैयार कर रखा है। दो श्रेणियों के बीच उतना फ़ासिला है, जितना आकाश और धरती के बीच में है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «إنَّ في الجنَّة مائةَ دَرَجَة أعَدَّهَا الله للمُجاهِدين في سَبِيل الله ما بَيْنَ الدَّرَجَتَيْنِ كما بين السماء والأرض».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जन्नत में एक सौ श्रेणियाँ हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपने मार्ग में जिहाद करने वालों के लिए तैयार कर रखा है। दो श्रेणियों के बीच उतना फ़ासिला है, जितना आकाश और धरती के बीच में है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अल्लाह के मार्ग में युद्ध करने वाले लोगों की फ़ज़ीलत बताई है और इस बात का उल्लेख किया है कि अल्लाह ने जन्नत में उनके लिए सौ दरजे तैयार कर रखे हैं, जिनमें से हर दो दर्जों के बीच में उतना फ़ासला है, जितना फ़ासला आकाश तथा धरती के बीच में है।

हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. صحيح البخاري -للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـز - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. -شرح صحيح البخارى لابن بطال الأندلسي،تحقيق: أبو تميم ياسر بن إبراهيم مكتبة الرشد - السعودية، الرياض الطبعة: الثانية، 1423هـ - 2003م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

क़यामत के दिन एक मोटा विशालकाय व्यक्ति आएगा, परन्तु अल्लाह की नज़र में एक मच्छर के पर के बराबर भी वज़न ना रखेगा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «إنه لَيَأتي الرَّجلُ السَّمين العظيم يوم القيامة لا يَزِنُ عند الله جَناح بَعُوضة».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः क़यामत के दिन एक मोटा विशालकाय व्यक्ति आएगा, परन्तु अल्लाह की नज़र में एक मच्छर के पर के बराबर भी वज़न ना रखेगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

ऐसा व्यक्ति, जो शारीरिक रूप से मज़बूत हो, दुनिया में लोगों को अभिमान दिखाता फिरता हो और उसके हर कर्म एवं कथन से घमंड टपकता हो, वह क़यामत के दिन अल्लाह के निकट मच्छर के पर के बराबर में वज़न नहीं रखेगा और उसका कोई मूल्य एवं सम्मान नहीं होगा।

हवाला

كنوز رياض الصالحين، أ. د. حمد بن ناصر بن عبد الرحمن العمار، دار كنوز اشبيليا، الطبعة الأولى : 1430 هـ. بهجة الناظرين، الشيخ: سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي. نزهة المتقين، د. مصطفى سعيد الخن، د. مصطفى البغا، محي الدين مستو، علي الشرجبي، محمد أمين لطفي، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الأولى: 1397 هـ 1977 م- الطبعة الرابعة عشر 1407- هـ 1987م. شرح رياض الصالحين، المؤلف: محمد بن صالح بن محمد العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ. رياض الصالحين، د. ماهر بن ياسين الفحل، الناشر: دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق - بيروت الطبعة: الأولى، 1428 هـ - 2007 م . صحيح البخاري، لمحمد بن إسماعيل البخاري، دار طوق النجاة، الطبعة : الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، لمسلم بن الحجاج أبو الحسن القشيري النيسابوري، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت. تطريز رياض الصالحين، المؤلف: فيصل المبارك الحريملي النجدي، المحقق: د. عبد العزيزآل حمد، الناشر: دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة: الأولى، 1423 هـ - 2002 م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
44 में से 8
44 हदीसें
  1. क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।
  2. जिसने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा, जबकि वह उसे चरितार्थ करने में सक्षम था, तो क़यामत के दिन अल्लाह उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और यह अख़्तियार देगा कि बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों में से जिसे चाहे, चुन ले।
  3. अल्लाह तआला क़यामत के दिन कहेगाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वाले कहाँ हैं? आज मैं उन्हें अपनी छाया में जगह दूँगा, जबकि मेरी छाया के अतिरिक्त कोई छाया नहीं है।
  4. अल्लाह क़यामत के दिन आकाशों को लपेटकर अपने दाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार करने वाले लोग? फिर सातों धर्तियों को लपेटकर अपने बाएँ हाथ में कर लेगा और कहेगाः मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं सरकशी करने वाले लोग? कहाँ हैं अहंकार दिखाने वाले लोग?
  5. अल्लाह तआला ने कहाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वालों के लिए नूर के मिंबर होंगे तथा उनपर नबी एवं शहीद भी रश्क करेंगे।
  6. क्या मैं तुम्हें जन्नत जाने वालों के विषय में न बताऊँ? प्रत्येक कमज़रो एवं विनम्र व्यक्ति, जो अल्लाह पर क़सम उठा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम की लाज रख ले। क्या मैं तुम्हें जहन्नम जाने वालों के विषय में न बताऊँ? प्रत्येक क्रूर अशिष्ट, कंजूस एवं अभिमानी व्यक्ति।
  7. जन्नत में एक सौ श्रेणियाँ हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपने मार्ग में जिहाद करने वालों के लिए तैयार कर रखा है। दो श्रेणियों के बीच उतना फ़ासिला है, जितना आकाश और धरती के बीच में है।
  8. क़यामत के दिन एक मोटा विशालकाय व्यक्ति आएगा, परन्तु अल्लाह की नज़र में एक मच्छर के पर के बराबर भी वज़न ना रखेगा।
  9. जिसने किसी अभावग्रस्त व्यक्ति को मोहलत दी या उसे माफ़ कर दिया, उसे अल्लाह क़यामत के दिन अपने अर्श की छाया के नीचे जगह देगा, जिस दिन उसके (अर्श के) छाया के सिवा कोई छाया नहीं होगी।
  10. ''क़यामत के दिन सूरज को सृष्टि से इतना निकट कर दिया जाएगा कि वह एक मील की दूरी पर होगा।''
  11. क़यामत के दिन किसी बंदे के पांव उस समय तक नहीं हिलेंगे, जब तक उसकी आयु के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे किस काम में लगाया और उसके ज्ञान के बारे में न पूछ लिया जाए कि उससे क्या किया तथा उसके धन के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे कहाँ से कमाया और कहाँ खर्च किया और उसके शरीर के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे कहाँ खपाया?
  12. क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा।
  13. जिसके पास उसके भाई का, इज़्ज़त व आबरू या किसी और चीज़ से संबंधित कोई हक़ हो, वह आज ही उससे गरदन छुड़ा ले, इससे पहले कि वह दिन आ जाए, जब उसके पास न दीनार होंगे न दिरहम।
  14. उनमें से कुछ ऐसे होंगे जिनके टख़नों तक आग पहूँचेगी, तो कुछ लोगों के घुटनों तक और कुछ के कमर तक। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जिनकी हँसली तक अग पहुँच रही होगी।
  15. लोग क़यामत (महा प्रलय) के दिन नंगे पाँव, नंगे शरीर तथा बिना ख़तना किए हुए उठाए जाएँगे।
  16. लोग सारे संसार के पालनहार के समक्ष खड़े होंगे, यहाँ तक कि उनमें से कुछ लोग अपने आधे कानों तक पसीने में डूबे हुए होंगे।
  17. सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह क़यामत के दिन कहेगाः ऐ आदम के पुत्र, मैं बीमार था, तो तू मेरा हाल जानने नहीं आया।
  18. बेशक तुम अपने रब को उसी तरह देखोगे, जैसे इस चाँद को देख रहे हो। उसे देखने में तुम्हें कोई दिक़्क़त नहीं होगी
  19. क़यामत के दिन हकदारों को उनके हक़ दिलवाए जाएँगे, यहाँ तक कि बिना सींग वाली बकरी को सींग वाली बकरी से बदला दिलवाया जाएगा।
  20. शिफ़ाअत वाली हदीस़
  21. क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है?
  22. उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की जान है, मुझे आशा है कि जन्नत में तुम्हारी संख्या आधी होगी। इसका कारण यह है कि जन्नत में केवल मुसलमान ही प्रवेश करेंगे। जबकि बहुदेववादियों की तुलना में तुम्हारा अनुपात ऐसे है, जैसे काले बैल की खाल में सफ़ेद बाल हों।
  23. जब क़यामत का दिन होगा, तो अल्लाह प्रत्येक मुस्लिम के हवाले एक यहूदी अथवा ईसाई को करेगा और कहेगा : यह जहन्नम से तुम्हारी छुड़ाई है।
  24. जो भी सोना या चाँदी रखने वाला व्यक्ति अपने उस धन का हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, उसके लिए क़यामत के दिन आग की तख़्तियाँ तैयार की जाएँगी
  25. आमू (Oxus), सिर (Jaxartes), फ़रात और नील, यह सब जन्नत की नदियाँ हैैं।
  26. मेरे रब ने मुझे वचन दिया है कि वह मेरी उम्मत के सत्तर हज़ार लोगों को बिना किसी हिसाब-किताब और अज़ाब के जन्नत में दाख़िल करेगा। उनमें से प्रत्येक हज़ार के साथ और सत्तर हज़ार तथा मेरे रब के लप से तीन लप भर लोग होंगे।
  27. पुल सिरात को जहन्नम के ऊपर रखा जाएगा, जिसपर ऐसे काँटे लगे होंगे, जैसे सादान पौधे में होते हैं। फिर लोग उससे होकर गुज़रेंगे, तो कोई सही-सलामत नजात पा जाएगा, कोई खरोंच के साथ पार हो जाएगा और कोई रोक दिया जाएगा और मुँह के बल जहन्नम में गिरा दिया जाएगा।
  28. (क़यामत के दिन) हमारा रब अपनी पिंडली खोलेगा, तो सभी मोमिन मर्द और औरतें सजदे में गिर पड़ेंगे। लेकिन, हर वह व्यक्ति ख़ड़ा रह जाएगा, जो दुनिया में दिखावे और शोहरत के लिए सजदा करता था। वह सजदा करने जाएगा, तो उसकी पीठ एक ही हड्डी की तरह सख्त बन जाएगी।
  29. ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हम क़यामत के दिन अपने रब को देख सकेंगे? आपने कहा : “जब आसमान साफ हो तो क्या सूरज और चाँद को देखने में तुम्हें कोई कठिनाई होती है?”
  30. जहन्नम और जन्नत के बीच बहस व तकरार हो गई। जहन्नम ने कहा : मुझे तुम्हारे ऊपर यह श्रेष्ठता प्राप्त है कि मेरे अंदर अभिमानियों और ज़ालिमों का निवास होगा। इसपर जन्नत ने कहा : मेरा क्या है, मेरे अंदर तो केवल कमज़ोर, निम्न स्तर के और बुद्धिहीन लोग ही दाख़िल होंगे।
  31. लोग (या फिर कहा कि बंदे) क़यामत के दिन नंगे बदन, बिना ख़तना किए हुए और ख़ाली हाथ उठाए जाएँगे।
  32. तुम्हारे लिए वो सारी चीज़ें हैं, जिनकी तमन्ना तुमने की है और उनके साथ उनके समान और भी चीज़ें हैं।''
  33. अल्लाह अगले तथा पिछले सब लोगों को एक बड़े तथा समतल मैदान में जमा करेगा, जहाँ आवाज़ देने वाले की आवाज़ सब को पहुँच सकेगी और देखने वाला सब को देख सकेगा और सूरज बहुत नज़दीक होगा। लोगों को असहनीय कष्ट एवं पीड़ा का सामना होगा।
  34. काफ़िर जब कोई अच्छा काम करता है, तो उसके बदले में उसे दुनिया में रोज़ी दे दी जाती है, लेकिन जहाँ तक मोमिन की बात है, तो उसकी नेकियों को अल्लाह उसकी आख़िरत के लिए जमा रखता है और उसके आज्ञापालन के कारण उसे दुनिया में रोज़ी भी प्रदान करता है
  35. क़यामत के दिन अज़ान देने वालों की गर्दनें सबसे ऊँची होंगी।
  36. मैं उस व्यक्ति को अच्छी तरह जानता हूँ, जो अंत में जहन्नम से निकलेगा और अंत में जन्नत के अंदर प्रवेश करेगा। वह चूतड़ों के बल घिसटता हुआ जहन्नम से निकलेगा। सर्वशक्तिमान अल्लाह उससे कहेगा: जाओ और जन्नत में प्रवेश कर जाओ। वह जन्नत के पास जाएगा, लेकिन उसे ऐसा लगेगा कि जन्नत भरी हुई है। अतः लौट आएगा और कहेगा: ऐ मेरे रब! मैंने पाया कि जन्नत भरी हुई है
  37. मैं कैसे चैन से रह सकता हूँ, जबकि सूर फूँकने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने सूर को मुँह से लगा रखा है और (सूर फूँकने की तैयारी के तौर पर) अपनी पेशानी को झुका रखा है और आदेश की प्रतीक्षा में कान लगा रखा है कि आदेश मिलते ही सूर फूँक दे
  38. ''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा स्थान) और श्रेष्ठतम दर्जा प्रदान कर और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें वचन दिया है।" उसके लिए क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश अनिवार्य हो जाएगी।''
  39. अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) का यह फ़रमान कि मैं पहला व्यक्ति हूँ, जो अत्यंत कृपाशील अल्लाह के सामने झगड़ने के लिए क़यामत के दिन अपने घुटनों के बल बैठेगा।
  40. अल्लाह किसी मोमिन के द्वारा किए गए किसी अच्छे काम के महत्व को घटाता नहीं है। मोमिन को उसके अच्छे काम के बदले में दुनिया में नेमतें प्रदान की जाती हैं और आख़िरत में प्रतिफल दिया जाता है
  41. मैं हौज़ (तालाब) के पास ही रहूँगा, ताकि देख सकूँ कि तुममें से कौन-कौन मेरे पास पानी पीने आता है। कुछ लोगों को मेरे पास आने से रोक दिया जाएगा, तो मैं कहूँगा कि ऐ मेरे रब! ये मेरे तथा मेरी उम्मत के लोग हैं
  42. {ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ النَّعِيمِ}
  43. हम अंतिम उम्मत हैं, और सबसे पहले हमारा हिसाब-किताब होगा
  44. ऐ बिलाल, मुझे बताओ कि तुमने इस्लाम में सबसे आशा दिलाने वाला कौन-सा अमल किया है

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com