अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि क़यामत के दिन कोई भी व्यक्ति हिसाब के स्थान से जन्नत या जहन्नम की ओर उस समय तक बढ़ नहीं सकेगा, जब तक उससे निम्नलिखित बातें पूछ न ली जाएँ : 1- उसने अपना जीवन किन कार्यों में बिताया है? 2- उसने जो ज्ञान प्राप्त किया था, क्या उसे अल्लाह के लिए प्राप्त किया था, क्या उसपर अमल किया था और क्या उसे उसके हक़दार तक पहुँचाया था? 3- उसके पास जो धन था, उसे कहाँ से कमाया था? कमाई के रास्ते हलाल थे या हराम? साथ ही उसे कहाँ खर्च किया था? अल्लाह की प्रसन्नता के कामों में या अप्रसन्नता के कामों में? 4- उसे जो शरीर, शक्ति, स्वास्थ्य और जवानी मिली थी, उसे किन कामों में खर्च किया था?
- जीवन को अल्लाह की प्रसन्नता के कार्यों में लगाने की प्रेरणा।
- बंदों को अल्लाह की बेशुमार नेमतें मिली हुई हैं और हर बंदे को अल्लाह के सामने इन नेमतों के बारे में जवाब देना होगा। इसलिए इन्सान को चाहिए कि अल्लाह की दी हुई नेमतों को उसकी प्रसन्नता के कामों में लगाए।
سنن الترمذي (4/ 217) (2417). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 371). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 478). المعجم الوسيط (2/ 704).