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तशरीह के साथ हदीसें

अंतिम दिवस पर ईमान

109 हदीसें

जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।

عن أبي شُريح خُويلد بن عمرو الخزاعي عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال: «مَنْ كَان يُؤمِن بِاللهِ وَاليَومِ الآخِرِ فَلْيُكْرِم ضَيفَه جَائِزَتَه»، قَالوا: وما جَائِزَتُهُ؟ يَا رسول الله، قال: «يَومُهُ ولَيلَتُهُ، والضِّيَافَةُ ثَلاَثَةُ أَيَّامٍ، فَمَا كَانَ وَرَاءَ ذَلك فَهُوَ صَدَقَةٌ عَلَيه». وفي رواية: «لا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يُقِيمَ عِنْدَ أَخِيهِ حَتَّى يؤْثِمَهُ» قالوا: يَا رَسول الله، وَكَيفَ يُؤْثِمَهُ؟ قال: «يُقِيمُ عِندَهُ ولاَ شَيءَ لَهُ يُقرِيهِ بهِ».
अबू शुरैह खुवैलिद बिन अम्र खुज़ाई कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायः "जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।" तथा एक रिवायत में हैः "किसी मुसलमान के लिए जायज़ नहीं कि अपने भाई के पास इतने दिन रहे कि उसे पापी बना दे। सहाबा ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, वह उसे पापी कैसे बना सकता है? तो आपने फ़रमायाः "वह उसके पास ठहरा रहे, जबकि उसके पास उसके सत्कार के लिए कुछ न हो।"
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين، للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. فتح رب البرية بتلخيص الحموية، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة، (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़यामत के बारे में पूछा। उसने कहा : क़यामत कब आएगी? आपने कहा : "तुमने उसके लिए क्या तैयारी की है?

عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ: أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنِ السَّاعَةِ، فَقَالَ: مَتَى السَّاعَةُ؟ قَالَ: «وَمَاذَا أَعْدَدْتَ لَهَا». قَالَ: لاَ شَيْءَ، إِلَّا أَنِّي أُحِبُّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَ: «أَنْتَ مَعَ مَنْ أَحْبَبْتَ». قَالَ أَنَسٌ: فَمَا فَرِحْنَا بِشَيْءٍ، فَرِحْنَا بِقَوْلِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَنْتَ مَعَ مَنْ أَحْبَبْتَ» قَالَ أَنَسٌ: فَأَنَا أُحِبُّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبَا بَكْرٍ، وَعُمَرَ، وَأَرْجُو أَنْ أَكُونَ مَعَهُمْ بِحُبِّي إِيَّاهُمْ، وَإِنْ لَمْ أَعْمَلْ بِمِثْلِ أَعْمَالِهِمْ.
अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़यामत के बारे में पूछा। उसने कहा : क़यामत कब आएगी? आपने कहा : "तुमने उसके लिए क्या तैयारी की है?" उसने कहा : तैयारी तो वैसे कुछ नहीं की है, लेकिन इतना ज़रूर है कि मैं अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से मोहब्बत रखता हूँ। इसपर आपने कहा : "तुम्हें उसके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, जिससे तुम्हें मोहब्बत है।" अनस रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : हम किसी चीज़ से उतना खुश नहीं हुए, जितना अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के इस कथन से हुए कि तुम्हें उसके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, जिससे तुम्हें मोहब्बत है। अनस रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : मैं अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तथा अबू बक्र एवं उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से मोहब्बत रखता हूँ और आशा करता हूँ कि उनसे इस मोहब्बत के कारण मुझे उनके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, यद्यपि मैं उनके जैसा अमल न भी कर सकूँ।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

रेगिस्तान में रहने वाले एक देहाती व्यक्ति ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़यामत के दिन के समय के बारे में प्रश्न किया, तो आपने उत्तर देने के बजाय उसी से पूछ लिया कि तुमने उसकी तैयारी के तौर पर कौन-कौन से अच्छे काम किए हैं? उसने उत्तर दिया : मैंने उसकी तैयारी के तौर पर कुछ बड़ा तो नहीं किया है, लेकिन इतना ज़रूर है कि मैं अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से मोहब्बत रखता हूँ। उन्होंने किसी दूसरी हार्दिक, शारीरिक एवं आर्थिक इबादत का ज़िक्र नहीं किया। क्योंकि यह सारी इबादतें उसी मोहब्बत की शाखाएँ हैं और उसी के नतीजे में सामने आती हैं। दूसरी बात यह है कि सच्ची मोहब्बत इन्सान को अच्छा कार्य करने की प्रेरणा देती है। यह सुन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उससे कहा : निश्चित रूप से तुम जन्नत में उसके साथ रहोगे, जिससे तुम्हें मोहब्बत है। इस सुसमाचार से अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहाबा को बड़ी खुशी हुई। फिर अनस रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया कि वह अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तथा अबू बक्र एवं उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से मोहब्बत रखते हैं और आशा करते हैं कि जन्नत में उनके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, चाहे उनका अपना अमल उन लोगों के जैसा न भी रहे।

फ़ायदे
  1. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम प्रश्न करने वाले को जवाब देने में हिकमत से काम लेते थे। यही कारण है कि यहाँ सवाल करने वाले का मार्गदर्शन एक ऐसी चीज़ की ओर कर दी, जो उसके लिए महत्वपूर्ण थी और जो उसे मुक्ति दिला सकती है। यानी आख़िरत के दिन की तैयारी के लिए सत्कर्म करना।
  2. क़यामत कब होगी, इस बात की जानकारी अल्लाह ने बंदों को नहीं दी है, ताकि इन्सान अल्लाह से मिलने के लिए हमेशा तैयार रहे और पूरी तैयारी रखे।
  3. अल्लाह, उसके रसूल और सदाचारी मोमिनों से मुहब्बत रखने की फ़ज़ीलत बताना और मुश्रिकों से मुहब्बत रखने से सावधान करना।
  4. अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कथन "तुम्हें उसका साथ नसीब होगा, जिससे तुम्हें मुहब्बत है" का मतलब यह नहीं है कि दोनों को समान श्रेणी के स्थान प्राप्त होंगे, बल्कि मतलब यह है कि दोनों जन्नत में इस तरह रहेंगे कि एक-दूसरे को देख सकेंगे, यद्यपि जगह दूर ही क्यों न हो।
  5. एक मुसलमान को इस बात का निर्देश दिया गया है कि वह उस चीज़ पर ध्यान दे, जो उसके लिए ज़्यादा अच्छा और लाभकारी हो। वह ऐसी चीज़ों के बारे में प्रश्न न करे, जो उसके लिए लाभकारी न हों।
हवाला

صحيح البخاري (5/ 12) (3688). صحيح مسلم (4/ 2032) (2639). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 435). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (6/ 177). المعجم الأوسط، للطبراني (1/ 131). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 342).

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क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَلاَ أُحَدِّثُكُمْ حَدِيثًا عَنِ الدَّجَّالِ، مَا حَدَّثَ بِهِ نَبِيٌّ قَوْمَهُ؟ إِنَّهُ أَعْوَرُ، وَإِنَّهُ يَجِيءُ مَعَهُ بِمِثَالِ الجَنَّةِ وَالنَّارِ، فَالَّتِي يَقُولُ إِنَّهَا الجَنَّةُ هِيَ النَّارُ، وَإِنِّي أُنْذِرُكُمْ كَمَا أَنْذَرَ بِهِ نُوحٌ قَوْمَهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा और जिसे जन्नत कहेगा, वास्तव में वह जहन्नम होगी। मैं तुम्हें उससे उसी तरह सावधान करता हूँ, जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति को सावधान किया था।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों को दज्जाल, उसकी विशेषताओं और अलामतों से संबंधित ऐसी-ऐसी बातें बता रहे हैं, जो पहले किसी नबी ने नहीं बताई थीं। उदाहरण : वह काना होगा। अल्लाह उसके साथ दो चीज़ें रख देगा, जो लोगों को जन्नत और जहन्नम की तरह नज़र आएँगी। लेकिन हक़ीक़त में उसकी जन्नत जहन्नम होगी और उसकी जहन्नम जन्नत। जो उसकी बात मानेगा, उसे वह जन्नत जैसी दिखने वाली जगह में दाख़िल करेगा, जो हक़ीक़त में जहन्नम होगी। जो उसकी बात नहीं मानेगा, उसे वह जहन्नम जैसी दिखने वाली जगह में दाख़िल करेगा, जो हक़ीक़त में जन्नत होगी। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें उसके फ़ितने से सावधान किया है, जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को सावधान किया था।

फ़ायदे
  1. दज्जाल का फ़ितना बहुत बड़ा फ़ितना होगा।
  2. दज्जाल के फ़ितने से मुक्ति का ज़रिया सच्चा ईमान, अंतिम तशह्हुद में उससे अल्लाह की शरण माँगना और सूरा अल-कह्फ़ के आरंभ की दस आयतों को याद करना है।
  3. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपनी उम्मत से बेपनाह मोहब्बत थी। यही कारण है कि मुसमानों को दज्जाल की ऐसी विशेषताएँ बता दीं, जो किसी नबी ने नहीं बताई थीं।
हवाला

صحيح البخاري (4/ 134) (3338). صحيح مسلم (4/ 2250) (2936).

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उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उसपर लोटने लगे और कहे कि काश मैं इस क़ब्र में दफ़न व्यक्ति के स्थान पर होता! हालाँकि उसके अंदर दीनदारी नहीं होगी, केवल मुसीबतों से तंग आ कर ऐसा करेगा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قالَ: قالَ رَسُولُ اللَّه -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم-: «والذي نفسي بيده لا تذهب الدنيا حتى يمر الرجل على القبر، فَيَتَمَرَّغَ عليه ويقول: يا ليتني كنت مكان صاحب هذا القبر، وليس به الدِّينُ، ما به إلا البلاء».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उस पर लोटने लगे और कहे कि काश मैं इस क़ब्र में दफ़न व्यक्ति के स्थान पर होता! हालाँकि उसके अंदर दीनदारी नहीं होगी, केवल मुसीबतों से तंग आ कर ऐसा करेगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري, تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر, دار طوق النجاة ترقيم محمد فؤاد عبدالباقي, 1422ه. صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن حجاج النيسابوري, تحقيق: محمد فؤاد عبدالباقي, دار إحياء التراث العربي. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين, تأليف: محمد علي بن محمد البكري الصديقي, عناية: خليل مأمون شيحا, الناشر: دار المعرفة, ط 4، 1425ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين, تأليف: سليم بن عيد الهلالي, دار ابن الجوزي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين, تأليف: مصطفى الخن ومصطفى البغا ومحي الدين مستو وعلي الشربجي ومحمد لطفي, مؤسسة الرسالة, ط 14، 1407ه - 1987م. تطريز رياض الصالحين, تأليف: فيصل مبارك, دار العاصمة, 1423ه – 2002م.

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क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «لا تقوم الساعة حتى يحسر الفرات عن جبل من ذهب يُقْتَتَلُ عليه، فَيُقْتَلُ من كل مائة تسعة وتسعون، فيقول كل رجل منهم: لعلي أن أكون أنا أنجو». وفي رواية: «يوشك أن يحسر الفرات عن كنز من ذهب، فمن حضره فلا يأخذ منه شيئا».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे। उनमें से हर आदमी सोचेगा कि शायद मैं ही बच जाऊँ।" तथा एक रिवायत में हैः "निकट है कि फ़ुरात नदी से सोने का खज़ाना निकल आए। अतः, जो उस समय उपस्थित हो, वह उस में से कुछ न ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب، الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه مرفوعاً: «يكون خليفة من خلفائكم في آخر الزمان يحثُو المالَ ولا يَعُدُّهُ».
अबू सईद खुदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैंः "अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه - 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर्गत चालीस स्त्रियाँ होंगी, जो उसकी शरण ली हुई होंगी। ऐसा पुरुष की कमी और स्त्रियों की अधिकता के कारण होगा।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «لَيَأْتِيَنَّ على الناس زمانٌ يَطُوفُ الرجلُ فيه بالصدقة من الذهب فلا يجد أحدا يأخذها منه، ويُرَى الرجلُ الواحدُ يَتْبَعُهُ أربعون امرأة يَلُذْنَ به من قِلَّةِ الرجال وكَثْرَةِ النساء».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर्गत चालीस स्त्रियाँ (बेटियाँष बहनें आदि) होंगी, जो उसकी शरण ली हुई होंगी। ऐसा पुरुष की कमी और स्त्रियों की अधिकता के कारण होगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह की यहाँ कोई हैसियत न होगी।

عن مرداس الأسلمي رضي الله عنه قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ -صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ-: «يذهب الصالحون الأول فالأول، ويبقى حُثَالَةٌ كَحُثَالَةِ الشعير أو التمر لا يُبَالِيهُم الله بَالَةً».
मिरदास असलमी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह के यहाँ कोई हैसियत न होगी।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
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نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه 1987م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. تطريز رياض الصالحين، لفيصل الحريملي، نشر: دار العاصمة، الرياض، الطبعة: الأولى، 1423هـ - 2002م. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه.

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26 में से 8
26 हदीसें
  1. जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।
  2. एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़यामत के बारे में पूछा। उसने कहा : क़यामत कब आएगी? आपने कहा : "तुमने उसके लिए क्या तैयारी की है?
  3. क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा
  4. उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उसपर लोटने लगे और कहे कि काश मैं इस क़ब्र में दफ़न व्यक्ति के स्थान पर होता! हालाँकि उसके अंदर दीनदारी नहीं होगी, केवल मुसीबतों से तंग आ कर ऐसा करेगा।
  5. क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे।
  6. अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा।
  7. लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर्गत चालीस स्त्रियाँ होंगी, जो उसकी शरण ली हुई होंगी। ऐसा पुरुष की कमी और स्त्रियों की अधिकता के कारण होगा।
  8. सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह की यहाँ कोई हैसियत न होगी।
  9. तुम अपना सर उठाओ और कहो; तुम्हारी बात सुनी जाएगी, माँगो; तुम्हें दिया जाएगा तथा सिफ़ारिश करो; तुम्हारी सिफ़ारिश ग्रहण की जाएगी।
  10. , ऐसे व्यक्ति को अल्लाह जन्नत में दाख़िल करेगा, चाहे उसका अमल जैसा भी रहा हो।
  11. मोमिन को क़यामत के दिन उसके सर्वशक्तिमान पालनहार के सामने लाया जाएगा, यहाँ तक कि उसपर अपनी ओर से पर्दा डाल देगा और उससे उसके गुनाहों का इक़रार कराते हुए पूछेगा
  12. तथा जो किसी इमाम की बैअत करे और उसे अपना हाथ तथा अपने दिल का फल दे दे, उसे चाहिए कि जहाँ तक हो सके, उसका अनुसरण करे। फिर अगर कोई दूसरा उसे अपने मातहत करने के लिए उससे झगड़ा करे, तो उसकी गरदन उड़ा दो।
  13. प्रत्येक बंदा (मुत्यु पश्चात) उसी अवस्था में उठाया जाएगा, जिसमें उसकी मृत्यु हुई थी।
  14. अल्लाह ज़मीन को अपनी मुट्ठी में ले लेगा तथा आकाशों को अपने दाएँ हाथ में लपेट लेगा और फिर कहेगा : मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं धरती के बादशाह?
  15. मेरा तालाब इतना बड़ा होगा कि उसे पार करने के लिए एक महीने का समय दरकार होगा। उसका पानी दूध से ज़्यादा सफ़ेद होगा, उसकी खुशबू कस्तूरी से ज़्यादा अच्छी होगी
  16. मैं हौज़ (तालाब) के पास ही रहूँगा, ताकि देख सकूँ कि तुममें से कौन-कौन मेरे पास पानी पीने आता है। कुछ लोगों को मेरे पास आने से रोक दिया जाएगा, तो मैं कहूँगा कि ऐ मेरे रब! ये मेरे तथा मेरी उम्मत के लोग हैं
  17. उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मुहम्मद की जान है, उसके बर्तन आकाश के तारों एवं ग्रहों से अधिक होंगे
  18. अल्लाह क़यामत के दिन मेरी उम्मत से एक व्यक्ति को चुनकर सारी सृष्टियों के सामने उपस्थित करेगा
  19. जब अल्लाह ने जन्नत एवं जहन्नम को पैदा किया, तो जिबरील अलैहिस्सलाम
  20. क़यामत के दिन मौत को एक चितकबरे मेंढे
  21. तुम्हारी आग जहन्नम की आग के सत्तर भागों में से एक भाग है
  22. हमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने, जो कि सच्चे थे और जिनकी सच्चाई सर्वमान्य थी, बताया है : तुममें से हर व्यक्ति की सृष्टि-सामग्री उसकी माँ के पेट में चालीस दिनों वीर्य के रूप में एकत्र की जाती है
  23. उनके द्वारा की गई तुम से विश्वासघात, अवज्ञा तथा तुमसे झूठ बोलने और तुम्हारे द्वारा उनको दी गई सज़ा का हिसाब होगा
  24. जिसने उसे दुनिया में पैरों पर चलाया, क्या वह क़यामत के दिन उसे चेहरे के बल चला नहीं सकता?
  25. जब तुम मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनो, तो उसी तरह के शब्द कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। फिर मुझपर दरूद भेजो
  26. “तुममें से हर व्यक्ति की सृष्टि-सामग्री उसकी माँ के पेट में चालीस दिनों तक वीर्य के रूप में एकत्र की जाती है

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com