सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

मैं हौज़ (तालाब) के पास ही रहूँगा, ताकि देख सकूँ कि तुममें से कौन-कौन मेरे पास पानी पीने आता है। कुछ लोगों को मेरे पास आने से रोक दिया जाएगा, तो मैं कहूँगा कि ऐ मेरे रब! ये मेरे तथा मेरी उम्मत के लोग हैं

عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا، قَالَتْ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنِّي عَلَى الحَوْضِ حَتَّى أَنْظُرَ مَنْ يَرِدُ عَلَيَّ مِنْكُمْ، وَسَيُؤْخَذُ نَاسٌ دُونِي، فَأَقُولُ: يَا رَبِّ مِنِّي وَمِنْ أُمَّتِي، فَيُقَالُ: هَلْ شَعَرْتَ مَا عَمِلُوا بَعْدَكَ، وَاللَّهِ مَا بَرِحُوا يَرْجِعُونَ عَلَى أَعْقَابِهِمْ».
असमा बिंत अबू बक्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मैं हौज़ (तालाब) के पास ही रहूँगा, ताकि देख सकूँ कि तुममें से कौन-कौन मेरे पास पानी पीने आता है। कुछ लोगों को मेरे पास आने से रोक दिया जाएगा, तो मैं कहूँगा कि ऐ मेरे रब! ये मेरे तथा मेरी उम्मत के लोग हैं।" चुनांचे कहा जाएगा : क्या तुम्हें मालूम है कि इन लोगों ने तुम्हारे बाद क्या अमल क्या है? अल्लाह की क़सम, ये लोग अपनी एड़ियों के बल (आपके दीन से) लौटते रहे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि क़यामत के दिन आप अपने हौज़ (तालाब) के पास ही होंगे, ताकि देख सकें कि आपकी उम्मत के कौन-कौन लोग आपके हौज़ पर पानी पीने आ रहे हैं। उस दिन कुछ लोगों को आपके पास आने से रोक दिया जाएगा। यह देख आप कहेंगे कि ऐ मेरे रब! ये मेरे और मेरी उम्मत के लोग हैं। इसपर कहा जाएगा : क्या आप जानते हैं कि इन लोगों ने आपसे जुदा होने के बाद क्या किया है? अल्लाह की क़सम, ये लोग लगातार ऐड़ियों के बल पीछे लौटते रहे और अपने दीन से दूर जाते रहे। इसलिए ये न तो आपके लोग हैं और न आपकी उम्मत के लोग।

फ़ायदे
  1. अपनी उम्मत पर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कृपा और उनको बचाने के प्रति आपकी तत्परता।
  2. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शिक्षाओं की मुख़ालफ़त करने का नुक़सान।
  3. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत को मज़बूती से पकड़े रहने की प्रेरणा।
हवाला

صحيح البخاري (8/ 121) (6593)، صحيح مسلم (4/ 1793) (2292)، عمدة القاري (23/144)، البحر المحيط الثجاج (37/322).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
अंतिम दिवस पर ईमान

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com