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तशरीह के साथ हदीसें

क़यामत की निशानयाँ

27 हदीसें

आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर दी जाएगी। केवल फफोले की तरह उसका निशान बाक़ी रह जाएगा

عن حذيفة بن اليمان رضي الله عنه قال: حَدَثَنا رسول الله صلى الله عليه وسلم حدِيثَين قَد رَأَيتُ أَحَدَهُما وأنا أنتظر الآخر: حدثنا أنَّ الأمَانة نَزَلَت في جَذر قُلُوب الرِّجال، ثمَّ نزل القرآن فَعَلِموا مِن القرآن، وعَلِمُوا مِن السُنَّة، ثمَّ حدَّثنا عن رفع الأمانة، فقال: «يَنَامُ الرَّجُلُ النَّومَة فَتُقْبَضُ الأَمَانَةُ مِنْ قَلْبِهِ، فَيَظَلُّ أَثَرُهَا مِثلَ الوَكْتِ، ثُمَّ يَنَامُ النَّومَةَ فَتُقبَض الأَمَانَة مِن قَلْبِه، فَيَظَلُّ أَثَرُها مِثل أَثَر المَجْلِ، كَجَمْرٍ دَحْرَجْتَهُ عَلى رِجْلِكَ فَنَفِطَ، فَتَرَاهُ مُنْتَبِراً وَلَيس فِيه شَيء»، ثم أَخَذ حَصَاةً فَدَحْرَجَه على رجله «فَيَصبَح النَّاس يَتَبَايَعُون، فَلاَ يَكَاد أَحَدٌ يُؤَدِّي الأَمَانَةَ حَتَّى يُقَال: إِنَّ فِي بَنِي فُلاَن رَجُلاً أَمِيناً، حَتَّى يُقَال للرَّجُل: مَا أَجْلَدَهُ! مَا أَظْرَفَه! مَا أَعْقَلَه! وَمَا فِي قَلبِه مِثْقَالُ حَبَّة مِن خَرْدَل مِنْ إيمان»، ولَقَد أتى عَلَيَّ زَمَان وما أُبَالي أَيُّكُم بَايعت: لئِن كان مُسلِمًا لَيَرُدَنَّه عَلَيَّ دِينه، وَإِن كان نصرانيا أو يهوديا ليَرُدنَّه عَلَيَّ سَاعِيه، وأَمَّا اليوم فَمَا كُنت أَبَايِعُ مِنكُم إِلاَّ فُلاَنا وفُلاَناً».
हुज़ैफ़ा बिन यमान (रज़ियल्लाहु अहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें दो बातें बताई थीं। एक मैंने देख ली है और दूसरी की प्रतीक्षा में हूँ। आपने हमें बताया कि अमानत लोगों के दिलों की जड़ में उतरी। फिर क़ुरआन उतरा और लोगों ने उसे क़ुरआन और सुन्नत से सीखा और जाना। फिर हमें अमानत के उठ जाने के बारे में बताते हुए कहाः "आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर दी जाएगी। केवल फफोले की तरह उसका निशान बाक़ी रह जाएगा, जैसे तुम अपने पाँव पर कोई अंगारा लुढ़का दो और उसमें छाला पड़ जाए, जिसके कारण तुम्हें उभार दिखाई देने लगे, हालाँकि उसके अंदर कुछ नहीं होता।" फिर आपने दिखाने के लिए एक कंकड़ लिया और उसे अपने पाँव पर लुढ़का दिया। "फिर हाल यह होगा कि लोग क्रय-विक्रय करेंगे, लेकिन कोई अमानत का पालन नहीं करेगा। यहाँ तक कि कहा जाएगा कि अमुक क़बीले में एक अमानतदार व्यक्ति है। एक व्यक्ति के बारे में कहा जाएगा कि वह कितना साहसी, शिष्ट और होशियार है! लेकिन उसके दिल में राई के दाने बराबर भी ईमान न होगा।" एक समय था, जब मुझे कोई चिंता नहीं होती थी कि मैं तुममें से किससे क्रय- विक्रय कर रहा हूँ। अगर मुसलमान होगा, तो उसका धर्म उसे मेरी ओर वापस करेगा और अगर यहूदी या नसरानी होगा, तो उसका शासक उसे मेरी ओर वापस करेगा। परन्तु, आज यह हालत है कि मैं तुममें से अमुक और अमुक के सिवा किसी से मामला नहीं करता।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، دار طوق النجاة ترقيم محمد فؤاد عبدالباقي، ط 1422هـ. صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن حجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبدالباقي، دار إحياء التراث العربي. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف: مصطفى الخن ومصطفى البغا ومحي الدين مستو وعلي الشربجي ومحمد لطفي، مؤسسة الرسالة، ط 14، عام 1407 - 1987. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، تأليف: محمد علي بن محمد البكري الصديقي، عناية: خليل مأمون شيحا، الناشر: دار المعرفة، ط.4، 1425هـ. رياض الصالحين، للنووي، نشر: دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق – بيروت، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، الطبعة الأولى، 1428هـ - 2007م. كنوز رياض الصالحين، نشر: دار كنوز إشبيليا، الطبعة: الأولى، 1430ه 2009م.

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क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَلاَ أُحَدِّثُكُمْ حَدِيثًا عَنِ الدَّجَّالِ، مَا حَدَّثَ بِهِ نَبِيٌّ قَوْمَهُ؟ إِنَّهُ أَعْوَرُ، وَإِنَّهُ يَجِيءُ مَعَهُ بِمِثَالِ الجَنَّةِ وَالنَّارِ، فَالَّتِي يَقُولُ إِنَّهَا الجَنَّةُ هِيَ النَّارُ، وَإِنِّي أُنْذِرُكُمْ كَمَا أَنْذَرَ بِهِ نُوحٌ قَوْمَهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा और जिसे जन्नत कहेगा, वास्तव में वह जहन्नम होगी। मैं तुम्हें उससे उसी तरह सावधान करता हूँ, जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति को सावधान किया था।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों को दज्जाल, उसकी विशेषताओं और अलामतों से संबंधित ऐसी-ऐसी बातें बता रहे हैं, जो पहले किसी नबी ने नहीं बताई थीं। उदाहरण : वह काना होगा। अल्लाह उसके साथ दो चीज़ें रख देगा, जो लोगों को जन्नत और जहन्नम की तरह नज़र आएँगी। लेकिन हक़ीक़त में उसकी जन्नत जहन्नम होगी और उसकी जहन्नम जन्नत। जो उसकी बात मानेगा, उसे वह जन्नत जैसी दिखने वाली जगह में दाख़िल करेगा, जो हक़ीक़त में जहन्नम होगी। जो उसकी बात नहीं मानेगा, उसे वह जहन्नम जैसी दिखने वाली जगह में दाख़िल करेगा, जो हक़ीक़त में जन्नत होगी। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें उसके फ़ितने से सावधान किया है, जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को सावधान किया था।

फ़ायदे
  1. दज्जाल का फ़ितना बहुत बड़ा फ़ितना होगा।
  2. दज्जाल के फ़ितने से मुक्ति का ज़रिया सच्चा ईमान, अंतिम तशह्हुद में उससे अल्लाह की शरण माँगना और सूरा अल-कह्फ़ के आरंभ की दस आयतों को याद करना है।
  3. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपनी उम्मत से बेपनाह मोहब्बत थी। यही कारण है कि मुसमानों को दज्जाल की ऐसी विशेषताएँ बता दीं, जो किसी नबी ने नहीं बताई थीं।
हवाला

صحيح البخاري (4/ 134) (3338). صحيح مسلم (4/ 2250) (2936).

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उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उसपर लोटने लगे और कहे कि काश मैं इस क़ब्र में दफ़न व्यक्ति के स्थान पर होता! हालाँकि उसके अंदर दीनदारी नहीं होगी, केवल मुसीबतों से तंग आ कर ऐसा करेगा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قالَ: قالَ رَسُولُ اللَّه -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم-: «والذي نفسي بيده لا تذهب الدنيا حتى يمر الرجل على القبر، فَيَتَمَرَّغَ عليه ويقول: يا ليتني كنت مكان صاحب هذا القبر، وليس به الدِّينُ، ما به إلا البلاء».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उस पर लोटने लगे और कहे कि काश मैं इस क़ब्र में दफ़न व्यक्ति के स्थान पर होता! हालाँकि उसके अंदर दीनदारी नहीं होगी, केवल मुसीबतों से तंग आ कर ऐसा करेगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري, تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر, دار طوق النجاة ترقيم محمد فؤاد عبدالباقي, 1422ه. صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن حجاج النيسابوري, تحقيق: محمد فؤاد عبدالباقي, دار إحياء التراث العربي. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين, تأليف: محمد علي بن محمد البكري الصديقي, عناية: خليل مأمون شيحا, الناشر: دار المعرفة, ط 4، 1425ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين, تأليف: سليم بن عيد الهلالي, دار ابن الجوزي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين, تأليف: مصطفى الخن ومصطفى البغا ومحي الدين مستو وعلي الشربجي ومحمد لطفي, مؤسسة الرسالة, ط 14، 1407ه - 1987م. تطريز رياض الصالحين, تأليف: فيصل مبارك, دار العاصمة, 1423ه – 2002م.

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क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «لا تقوم الساعة حتى يحسر الفرات عن جبل من ذهب يُقْتَتَلُ عليه، فَيُقْتَلُ من كل مائة تسعة وتسعون، فيقول كل رجل منهم: لعلي أن أكون أنا أنجو». وفي رواية: «يوشك أن يحسر الفرات عن كنز من ذهب، فمن حضره فلا يأخذ منه شيئا».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे। उनमें से हर आदमी सोचेगा कि शायद मैं ही बच जाऊँ।" तथा एक रिवायत में हैः "निकट है कि फ़ुरात नदी से सोने का खज़ाना निकल आए। अतः, जो उस समय उपस्थित हो, वह उस में से कुछ न ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب، الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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लोग मदीना को, उस के बेहतर अवस्था में होने के बावजूद, छोड़ जाएँगे। उस समय उसका रुख वहशी दरिंदों और परिंदों के सिवा कोई नहीं करेगा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: سمعتُ رسولَ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - يقولُ: (يتركون المدينة على خير ما كانت، لا يَغْشَاهَا إلا العَوَافِي يريد -عوافي السِّباع والطير-، وآخِر من يُحْشَرُ راعيان من مُزَيْنَةَ، يُرِيدَانِ المدينةَ يَنْعِقَانِ بغنمهما، فيَجِدَانِها وُحُوشًا، حتى إذا بلغا ثَنِيَّةَ الوَدَاعِ خَرَّا على وُجوههما).
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना हैः "लोग मदीना को, उस के बेहतर अवस्था में होने के बावजूद, छोड़ जाएँगे। उस समय उसका रुख वहशी दरिंदों और परिंदों के सिवा कोई नहीं करेगा। अंत में जिन पर क़यामत क़ायम होगी, वह मुज़ैना क़बीले के दो चरवाहे होंगे। दोनों अपनी बकरियों को हाँकते हुए मदीना जा रहे होंगे। परन्तु, उसे जंगली जानवरों से भरा हुआ पाएँगे। यहाँ तक कि जब सनीयतुल वदा तक पहुँचेंगे, तो अपने मुँह के बल गिर पड़ेंगे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ، 1987م. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، نشر دار الكتاب العربي. شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1418هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

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अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه مرفوعاً: «يكون خليفة من خلفائكم في آخر الزمان يحثُو المالَ ولا يَعُدُّهُ».
अबू सईद खुदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैंः "अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه - 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर्गत चालीस स्त्रियाँ होंगी, जो उसकी शरण ली हुई होंगी। ऐसा पुरुष की कमी और स्त्रियों की अधिकता के कारण होगा।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «لَيَأْتِيَنَّ على الناس زمانٌ يَطُوفُ الرجلُ فيه بالصدقة من الذهب فلا يجد أحدا يأخذها منه، ويُرَى الرجلُ الواحدُ يَتْبَعُهُ أربعون امرأة يَلُذْنَ به من قِلَّةِ الرجال وكَثْرَةِ النساء».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर्गत चालीस स्त्रियाँ (बेटियाँष बहनें आदि) होंगी, जो उसकी शरण ली हुई होंगी। ऐसा पुरुष की कमी और स्त्रियों की अधिकता के कारण होगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह की यहाँ कोई हैसियत न होगी।

عن مرداس الأسلمي رضي الله عنه قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ -صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ-: «يذهب الصالحون الأول فالأول، ويبقى حُثَالَةٌ كَحُثَالَةِ الشعير أو التمر لا يُبَالِيهُم الله بَالَةً».
मिरदास असलमी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह के यहाँ कोई हैसियत न होगी।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه 1987م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. تطريز رياض الصالحين، لفيصل الحريملي، نشر: دار العاصمة، الرياض، الطبعة: الأولى، 1423هـ - 2002م. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه.

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27 हदीसें
  1. आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर दी जाएगी। केवल फफोले की तरह उसका निशान बाक़ी रह जाएगा
  2. क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा
  3. उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यह दुनिया फ़ना नहीं होगी, यहाँ तक कि यह स्थिति पैदा हो जाए कि आदमी क़ब्र के पास से गुज़रे, तो उसपर लोटने लगे और कहे कि काश मैं इस क़ब्र में दफ़न व्यक्ति के स्थान पर होता! हालाँकि उसके अंदर दीनदारी नहीं होगी, केवल मुसीबतों से तंग आ कर ऐसा करेगा।
  4. क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे।
  5. लोग मदीना को, उस के बेहतर अवस्था में होने के बावजूद, छोड़ जाएँगे। उस समय उसका रुख वहशी दरिंदों और परिंदों के सिवा कोई नहीं करेगा।
  6. अंतिम ज़माने में तुम्हारे बीच एक ऐसा ख़लीफ़ा होगा, जो लप भर-भरकर धन देगा और उसकी गणना भी नहीं करेगा।
  7. लोगों पर एक ऐसा ज़माना अवश्य आएगा कि उस समय आदमी सोने का सदक़ा निकालकर घूम रहा होगा, लेकिन कोई लेने वाला नहीं पाएगा और देखा जाएगा कि एक पुरुष के अंतर्गत चालीस स्त्रियाँ होंगी, जो उसकी शरण ली हुई होंगी। ऐसा पुरुष की कमी और स्त्रियों की अधिकता के कारण होगा।
  8. सदाचारी लोग, एक-एक करके गुज़र जाएँगे और जौ अथवा खजूर के भूसे की भाँति रद्दी क़िस्म के लोग शेष रह जाएँगे, जिनकी अल्लाह की यहाँ कोई हैसियत न होगी।
  9. अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, अरबों का विनाश उस बुराई से होना है, जो निकट आ गई है। आज याजूज और माजूज की दीवार में इतना छेद हो गया है।
  10. वह लोग सबसे बुरे लोगों में से हैं, जो क़यामत आते समय जीवित रहेंगे तथा जो क़ब्रों को मस्जिद बना लेंगे।
  11. एक सैन्यदल काबे पर आक्रमण करने के इरादे से निकलेगा। जब वह एक चटियल मैदान में पहुँचेगा, तो उसके शुरू से आख़िर तक के सब लोग धरती में धँसा दिए जाएँगे।
  12. हम लोग हज्जतुल वदा के बारे में बात कर रहे थे और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे बीच मौजूद थे, लेकिन हमें पता नहीं था कि हज्जतुल वदा क्या है।
  13. प्रत्येक नबी ने अपनी क़ौम को झूठे काना से डराया है
  14. जिसने सूरा कह्फ़ के आरंभ की दस आयतें कंठस्थ कर लीं, वह दज्जाल से सुरक्षित रहेगा।" एक रिवायत में है : "सूरा कह्फ़ के अंत की।
  15. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक दिन सुबह को दज्जाल का ज़िक्र किया। आपने उसे इतना तुच्छ बताया और उसके फ़ितने को इतना भयानक दिखाया कि हमें लगने लगा कि वह यहीं कहीं खजूर के बागों के पास मौजूद होगा।
  16. मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल
  17. क़यामत से पहले छह निशानियाँ सामने आएँगी, उन्हें गिन लो।
  18. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मुझे और क़यामत को इस तरह भेजा गया है।" यह कहते समय आपने अपनी दोनों उँगलियों को फैलाकर उनसे इशारा किया।
  19. क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक हिजाज़ की भूमि से ऐसी आग न निकले, जिससे बुसरा में मौजूद ऊँटों की गरदनें चमक उठें।
  20. मेरी उम्मत के अंतिम ज़माने में एक ख़लीफ़ा होगा, जो गिने बिना लप भर-भरकर लोगों को माल देगा।
  21. तुम अरब उपमहाद्वीप के काफ़िरों से युद्ध करोगे और अल्लाह इस क्षेत्र में तुम्हें विजय प्रदान करेगा, फिर फ़ारस क्षेत्र के लोगों से युद्ध करोगे और इस क्षेत्र में भी अल्लाह विजय प्रदान करेगा, फिर तुम रूम क्षेत्र के लोगों से युद्ध करोगे और इस क्षेत्र को भी अल्लाह तुम्हारे अधीन कर देगा और फिर तुम दज्जाल से युद्ध करोगे और अल्लाह उसे परास्त करेगा।
  22. यह धर्म वहाँ तक ज़रूर पहुँचेगा, जहाँ दिन और रात पहुँचती है। अल्लाह किसी नगर तथा गाँव और देहात तथा रेगिस्तान का कोई घर नहीं छोड़ेगा, जहाँ इस धर्म को दाख़िल न कर दे। इस प्रकार, सम्मानित व्यक्ति को सम्मान मिलेगा और अपमानित व्यक्ति का अपमान होगा। ऐसा सम्मान, जो अल्लाह इस्लाम के आधार पर प्रदान करेगा तथा ऐसा अपमान जिससे अल्लाह कुफ़्र की बिना पर दोचार करेगा।
  23. मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अलैहिमस्सलाम- का साथ देगा।
  24. क़यामत उस समय तक नहीं आ सकती, जब तक तुम तुर्कों से युद्ध न कर लो, जिनकी आँखें छोटी-छोटी, चेहरे लाल और नाक छोटी तथा चिपटी होगी, तथा उनके चेहरे ऐसे मालूम होंगे जैसे चमड़े चढ़ी हुई ढालें हों। तथा क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम एक ऐसे समुदाय से युद्ध न कर लो, जिनके जूते बालों के होंगे।
  25. क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम ख़ूज़ और किरमान के ग़ैरअरब लोगों से युद्ध न कर लो, जिनके चेहरे लाल, नाक चिपटी और आँखें छोटी-छोटी होंगी। उनके चेहरे चमड़े चढ़ी हुई ढालों की तरह प्रतीत होंगे। उनके जूते बालों से बने होंगे।
  26. \उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को पता नहीं होगा कि उसे किस बात पर क़त्ल किया गया।
  27. ऐ ख़ालिद, मेरे बाद बहुत-सी घटनाएँ, फ़ितने और मतभेद उत्पन्न होंगे। अतः, यदि तुमसे हो सके कि तुम अल्लाह के मारने वाले बंदे की बजाय मरने वाले बंदे बनो, तो ऐसा ज़रूर करना।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com