\उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को पता नहीं होगा कि उसे किस बात पर क़त्ल किया गया।
عن أبي هريرة، قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم : «والذي نفسي بيده ليأتينَّ على الناس زمانٌ لا يدري القاتلُ في أيِّ شيء قَتَل، ولا يدري المقتولُ على أيِّ شيء قُتِل».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को पता नहीं होगा कि उसे किस बात पर क़त्ल किया गया।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अल्लाह की क़सम खाते हुए, जो आपके प्राण का मालिक है, कहा है कि लोगों पर एक समय ऐसा आएगा कि किसी का वध करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने वध क्यों किया, और जिसका वध किया जाएगा उसे भी पता नहीं होगा कि उसका वध क्यों किया गया। ऐसा दरअसल वध की घटनाएँ बहुत ज़्यादा होने की वजह से होगा।
हवाला
-صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
-الإفصاح عن معاني الصحاح، ليحيى بن هبيرة بن محمد بن هبيرة الذهلي الشيباني، المحقق: فؤاد عبد المنعم أحمد، الناشر: دار الوطن، سنة النشر: 1417هـ.
-إكمال المعلم بفوائد مسلم لعياض بن موسى بن عياض بن عمرون اليحصبي السبتي، المحقق: الدكتور يحيى إسماعيل، الناشر: دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر، الطبعة: الأولى، 1419 هـ - 1998 م.
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com