अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस हदीस में बयान कर रहे हैं कि क़यामत के दिन मौत को चितकबरे रंग के मेंढे के रूप में लाया जाएगा। फिर एक आवाज़ लगाने वाला आवाज़ लगाएगा कि ऐ जन्नत में रहने वालो! चुनांचे वे अपनी गर्दनों को लंबा करके और अपने सरों को उठाकर देखेंगे। इसके बाद आवाज़ लगाने वाला उनसे कहेगा कि क्या तुम इसे पहचान रहे हो? लोग उत्तर देंगे कि हाँ हम इसे पहचान रहे हैं। यह मौत है। सब ने उसे देख रखा था। इसलिए पहचान लेंगे। फिर आवाज़ देने वाला आवाज़ देगा कि ऐ जहन्नम में रहने वालो! चुनांचे वे अपनी गर्दनों को लंबा और अपने सरों को उठाकर देखेंगे। पुकारने वाला कहेगा कि क्या तुम इसे पहचान रहे हो? वे उत्तर देंगे कि हाँ, हम इसे पहचान रहे हैं। यह मौत है। दरअसल सबने पहले उसे देख रखा होगा। इसके बाद मौत को ज़बह कर दिया जाएगा। फिर आवाज़ देने वाला आवाज़ देगा : ऐ जन्नत वासियो! अब तुम हमेशा ज़िंदा रहोगे। तुमको मौत नहीं आएगी। ऐ जहन्नम वासियो! अब तुम हमेशा ज़िंदा रहोगे। तुमको मौत नहीं आएगी। यह ऐलान इसलिए किया जाएगा, ताकि ईमान वाले अधिक आनंद ले सकें और ईमान न रखने वालों को कष्ट का अधिक एहसास हो। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत पढ़ी : "और (ऐ नबी!) आप उन्हें पछतावे के दिन से डराएँ, जब हर काम का फैसला कर दिया जाएगा, और वे पूरी तरह से ग़फ़लत में हैं और वे ईमान नहीं लाते।" क़यामत के दिन जन्नतियों एवं जहन्नमियों के बीच निर्णय कर दिया जाएगा और हर एक अपने ठिकाने में चला जाएगा, जहाँ उसे हमेशा रहना है। उस दिन गुनहगार इस बात पर अफ़सोस करेगा कि वह दुनिया से नेकी के काम करके नहीं आया है। इसी तरह कोताही करने वाले को भी अफ़सोस होगा कि अधिक नेकी करके क्यों नहीं आए।
- आख़िरत में इन्सान का जन्नत अथवा जहन्नम का ठिकाना अनंत काल के लिए होगा।
- इसमें क़यामत के दिन की ख़ौफ़नाकी से सावधान किया गया है, क्योंकि वह आकांक्षा एवं पश्चाताप का दिन होगा।
- इस बात का बयान कि जन्नतियों को प्राप्त होने वाली खुशियाँ हमेशा रहेंगी और जहन्नमियों को प्राप्त होने वाले दुःख भी हमेशा रहेंगे।
صحيح البخاري (6/ 93) (4730)، صحيح مسلم (4/ 2188) (2849)، التوضيح شرح الجامع الصحيح (22/595)، عمدة القاري شرح صحيح البخاري (19/ 52)، البحر المحيط الثجاج (43/686).