अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अल्लाह की अपने मोमिन बंदे से होने वाली सरगोशी के बारे में बात करते हुए फ़रमाया है : क़यामत के दिन मोमिन को उसके पालनहार के निकट लाया जाएगा, तो अल्लाह उसपर पर्दा डाल देगा कि उसके छिपे हुए गुनाहों से हश्र के मैदान में एकत्र लोग अवगत न हो सकें। फिर अल्लाह उससे पूछेगा : क्या तुम अमुक और अमुक गुनाह को जानते हो? दरअसल अल्लाह उससे उन गुनाहों का इक़रार करवाएगा, जो बंदा और उसके रब से संबंधित थे। चुनांचे बंदा उत्तर देगा : हाँ, ऐ मेरे पालनहार! मैं इन गुनाहों को जानता हूँ। जब बंदा भयभीत हो जाएगा, तो पवित्र एवं महान अल्लाह उससे कहेगा : मैंने तुम्हारे इन गुनाहों पर दुनिया में पर्दा डाल रखा था और आज उन्हें माफ़ करता हूँ। इसके बाद उसे उसका कर्म पत्र दिया जाएगा। रही बात अविश्वासी एवं मुनाफ़िक़ की, तो उनके बारे में सार्वजनिक रूप से यह एलान किया जाएगा : यही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार पर झूठ बाँधा था। सुन लो, अल्लाह की लानत है, इन ज़ालिमों पर।
- ईमान वालों पर अल्लाह का यह अनुग्रह है कि उनके गुनाहों पर दुनिया एवं आख़िरत में पर्दा डाल दिया जाता है।
- मोमिन की कमियों पर हर संभव पर्दा डालने की प्रेरणा।
- बंदों के सभी कर्म बंदों के पालनहार के यहाँ शुमार होते हैं। अतः जिसे अच्छाई मिले, वह अल्लाह की प्रशंसा करे और जिसको कुछ और मिले, वह अपने आपको कोसे।और वह अल्लाह की इच्छा के अधीन है।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : इन तमाम हदीसों का सारांश यह है कि क़यामत के दिन मोमिनों के दो प्रकार होंगे : पहला प्रकार : ऐसे लोग जिनके गुनाह उनके तथा उनके पालनहार से संबंधित होंगे। अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा की यह हदीस बताती है कि इस प्रकार के लोगों के भी दो प्रकार हैं : एक ऐसे लोग जिनके गुनाह पर दुनिया में पर्दा पड़ा रह गया। इस प्रकार के लोगों के गुनाह पर क़यामत के दिन भी पर्दा डालकर रख दिया जाएगा। यह बात इस हदीस से स्पष्ट है। जबकि दूसरे ऐसे लोग होंगे, जो खुलेआम गुनाह करते थे। इस हदीस से यह बात निकलकर सामने आती है कि ऐसे लोगों के गुनाहों पर पर्दा डाला नहीं जाएगा। दूसरा प्रकार : ऐसे लोग जिनके गुनाह उनके तथा बंदों से संबंधित होंगे। इस प्रकार के लोगों के भी दो प्रकार हैं। एक ऐसे लोग जिनके गुनाहों का पलड़ा नेकियों के पलड़े पर भारी होगा। ऐसे लोग जहन्नम जाएँगे और सिफ़ारिश के बाद बाहर निकलेंगे। दूसरे ऐसे लोग जिनके गुनाहों और नेकियों के पलड़े बराबर होंगे। ऐसे लोग उस समय तक जहन्न नहीं जाएँगे, जब तक पीड़ित लोगों को उनसे बदला न दिलवा दिया जाए।
صحيح البخاري (6/ 74) (4685). صحيح مسلم (4/ 2120) (2768). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 323). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (7/ 12). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 501). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 390). جامع العلوم والحكم في شرح خمسين حديثا من جوامع الكلم، لابن رجب الحنبلي (1/ 452).