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तशरीह के साथ हदीसें

बर्ज़ख़ का जीवन

19 हदीसें

इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قَالَ: مَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقَبْرَيْنِ، فَقَالَ: «إِنَّهُمَا لَيُعَذَّبَانِ، وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ، أَمَّا أَحَدُهُمَا فَكَانَ لاَ يَسْتَتِرُ مِنَ البَوْلِ، وَأَمَّا الآخَرُ فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ» ثُمَّ أَخَذَ جَرِيدَةً رَطْبَةً، فَشَقَّهَا نِصْفَيْنِ، فَغَرَزَ فِي كُلِّ قَبْرٍ وَاحِدَةً، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللَّهِ، لِمَ فَعَلْتَ هَذَا؟ قَالَ: «لَعَلَّهُ يُخَفِّفُ عَنْهُمَا مَا لَمْ يَيْبَسَا».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।" फिर आपने एक ताज़ा शाखा ली, उसे आधा-आधा फाड़ा और हर एक क़ब्र में एक-एक भाग को गाड़ दिया। सहाबा ने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों किया? तो आपने जवाब दिया : "शायद इन दोनों की यातना को उस समय तक के लिए हल्का कर दिया जाए, जब तक यह दोनों शाखाएँ सूख न जाएँ।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे और फ़रमाया : इन क़ब्रों में दफ़न दोनों लोग यातना झेल रहे हैं और ये यातना ऐसी चीज़ों के कारण झेल रहे हैं, जो तुम्हारी नज़र में बड़ी चीज़ें नहीं हैं। यह और बात है कि ये अल्लाह की नज़र में बड़ी चीज़ें हैं। इन दोनों में से एक व्यक्ति पेशाब-पाखाने के समय अपने शरीर तथा कपड़ों को पेशाब से बचाने पर ध्यान नहीं देता था। जबकि दूसरा व्यक्ति लोगों के बीच लगाई-बुझाई करता फिरता था। वह एक व्यक्ति की बात दूसरे व्यक्ति को नुक़सान पहुँचाने एवं मतभेद पैदा करने के उद्देश्य से पहुँचाया करता था।

फ़ायदे
  1. लगाई-बुझाई करना और पेशाब से बचने पर ध्यान न देना कबीरा गुनाह और क़ब्र की यातना का सबब है।
  2. अल्लाह ने अपने नबी के सामने कुछ ग़ैब की चीज़ें, जैसे क़ब्र की यातना, खोल दीं, ताकि यह आपके नबी होने की एक निशानी बन सके।
  3. एक शाख लेने और उसे फाड़कर क़ब्र पर रखने का यह अमल अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ खास है। क्योंकि अल्लाह ने आपको उन दोनों क़ब्रों में दफ़न लोगों का हाल बता दिया था। इस मसले में आपपर किसी को क़यास इसलिए नहीं किया जा सकता कि कोई क़ब्र में दफ़न लोगों का हाल जान नहीं सकता।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 53) (218). صحيح مسلم (1/ 240) (292). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص43). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص22). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 29).

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जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो।

عَن أَبِي سَعِيدٍ الخُدْرِيَّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِذَا وُضِعَتِ الجِنَازَةُ وَاحْتَمَلَهَا الرِّجَالُ عَلَى أَعْنَاقِهِمْ فَإِنْ كَانَتْ صَالِحَةً قَالَتْ: قَدِّمُونِي، وَإِنْ كَانَتْ غَيْرَ صَالِحَةٍ قَالَتْ: يَا وَيْلَهَا أَيْنَ يَذْهَبُونَ بِهَا؟ يَسْمَعُ صَوْتَهَا كُلُّ شَيْءٍ إِلَّا الإِنْسَانَ، وَلَوْ سَمِعَهُ صَعِقَ».
अबू सईद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो। और अगर सदाचारी नहीं होता, तो कहता है कि हाय मेरा विनाश, लोग मुझे कहाँ ले जा रहे हैं? उसकी आवाज़ इन्सान को छोड़कर हर चीज़ सुनती है। इन्सान अगर सुन ले, तो बेहोश हो जाए।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि जब जनाज़े को चारपाई पर रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, ऐसे में अगर वह सदाचारी होता है तो कहता है; मुझे आगे ले चलो उस नेमत की ओर जिसे वह अपने सामने देख रहा है। लेकिन अगर सदाचारी नहीं होता, तो भयानक आवाज़ में कहता है कि हाय मेरा मिनाश, ये लोग मुझे कहाँ ले जा रहे हैं? क्योंकि उसे सामने यातना दिख रही होती है। उसकी इस आवाज़ को इन्सान को छोड़ हर कोई सुनता है। उसकी आवाज़ इतनी भयानक होती है कि अगर इन्सान सुन ले, तो बेहोश हो जाए।

फ़ायदे
  1. सदाचारी मृतक को दफ़नाने से पहले ही सुखद चीजें दिखाई देने लगती हैं, जबकि अविश्वासी को आने वाले चरणों की भयावहता का एहसास होने लगता है और वह घबराने लगता है।
  2. कुछ आवाज़ें ऐसी भी होती हैं, जिन्हें इन्सान तो सुन नहीं सकता, लेकिन दूसरे सुन सकते हैं।
  3. सुन्नत यह है कि जनाज़े को पुरुषों के कंधे पर उठाया जाए। महिलाओं के कंधों पर नहीं। क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने महिलाओं को जनाज़े के साथ चलने से मना किया है।
हवाला

صحيح البخاري (2/ 85) (1314). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 513). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 400). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (7/ 122). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 546).

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मुसलमान से जब क़ब्र में सवाल होगा तो वह गवाही देगा कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।

عَنِ البَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «المُسْلِمُ إِذَا سُئِلَ فِي القَبْرِ: يَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ»، فَذَلِكَ قَوْلُهُ: {يُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا بِالقَوْلِ الثَّابِتِ فِي الحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الآخِرَةِ} [إبراهيم: 27].
बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान से जब क़ब्र में सवाल होगा तो वह गवाही देगा कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।" इसी को प्रभुत्वशाली अल्लाह के इस फ़रमान में बयान किया गया है : (يُثَبِّتُ اللهُ الذِينَ آمَنُوا بالقَوْلِ الثَّابِتِ في الحَيَاةِ الدُّنْيَا وفي الآخِرَةِ)। [सूरा इबराहीम : 27]
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

हर मोमिन से क़ब्र के अंदर कुछ प्रश्न किए जाएँगे। प्रश्न, इस कार्य पर नियुक्त दो फ़रिश्ते करेंगे, जिनका नाम कई हदीसों में मुनकर और नकीर आया है। तब मोमिन इस बात की गवाही देगा कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया कि यही वह पक्की बात है, जिसके बारे में अल्लाह ने कहा है : “अल्लाह ईमानदारों को पक्की बात पर दृढ़ रखता है सांसारिक जीवन में भी तथा आख़िरत के जीवन में भी।” [सूरा इब्राहीम : 27]

फ़ायदे
  1. क़ब्र के अंदर कुछ प्रश्न होंगे, इस बात में कहीं कोई संदेह नहीं है।
  2. ईमान वालों पर दुनिया एवं आख़िरत में अल्लाह का अनुग्रह कि उनको पक्की बात पर सुदृढ़ रखेगा।
  3. तौहीद की गवाही देने और इसी गवाही के साथ दुनिया से जाने की महत्ता।
  4. अल्लाह ईमान वाले को इस दुनिया में ईमान पर दृढ़ रहने और सीधे रास्ते पर चलने के द्वारा, मृत्यु के समय एकेश्वरवाद पर मरने के द्वारा, और कब्र में फ़रिश्तों के प्रश्न करने के समय सुदृढ़ रहने के द्वारा, स्थिर करता है।
हवाला

صحيح البخاري (6/ 80) (4699). صحيح مسلم (4/ 2201) (2871). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 498). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 386).

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दो फूँक मारने के बीच चालीस का अंतराल होगा। लोगों ने कहाः ऐ अबू हुरैरा! क्या चालीस से तात्पर्य चालीस दिन हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस साल मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस महीने मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा भी नहीं कहता।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «بين النفختين أربعون» قالوا: يا أبا هريرة أربعون يومًا؟ قال: أَبَيْتُ. قالوا: أربعون سنة؟ قال: أَبَيْتُ. قالوا: أربعون شهرا؟ قال: أَبَيْتُ. «ويَبْلَى كل شيء من الإنسان إلا عَجْبُ الذَّنَب، فيه يُرَكَّبُ الخلق، ثم يُنْزِلُ الله من السماء ماء فَيَنْبُتُونَ كما يَنْبُتُ الْبَقْلُ».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः दो फूँक मारने के बीच चालीस का अंतराल होगा। लोगों ने कहाः ऐ अबू हुरैरा! क्या चालीस से तात्पर्य चालीस दिन हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस साल मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस महीने मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा भी नहीं कहता। तथा इनसान की पूँछ की हड्डी के सिवा सारा शरीर सड़-गल जाएगा। फिर अल्लाह आकाश से पानी उतारेगा और लोग उग आएँगे, जैसे हरियाली उग आती है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، الطبعة الأولى، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، الطبعة الأولى، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، الطبعة الأولى، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. رياض الصالحين، لمحي الدين النووي،الطبعة الأولى، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ، الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ.

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दोनों ने सच कहा है। इन लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं।

عن عائشة رضي الله عنها ، قالت: دخلت عليَّ عجوزان من عُجُز يهود المدينة، فَقَالَتا لي: إنَّ أهلَ القبور يُعذَّبون في قبورهم، فكذَّبتُهما، ولم أُنْعِم أنْ أُصَدِّقهما، فَخَرَجَتَا، ودخل عليَّ النبي صلى الله عليه وسلم ، فقلت له: يا رسول الله، إنَّ عجوزين، وذكرتُ له، فقال: «صَدَقَتَا، إنَّهم يُعذَّبون عذابًا تَسْمَعُه البهائم كلُّها» فما رأيتُه بعْدُ في صلاة إلا تعوَّذ من عذاب القبر.
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मेरे पास मदीने की दो बूढ़ी यहूदी महिलाएं आईं और मुझसे कहने लगीं कि क़ब्र वालों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जाता है। मैंने दोनों को झुठला दिया और उनकी पुष्टि न कर सकी। दोनों चली भी गईं। फिर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरे पास आए, तो मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, दो बूढ़ियाँ मेरे पास आईं थीं। मैंने आपको पूरी घटना सुना दी। आपने फ़रमायाः "दोनों ने सच कहा है। लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं।" इसके बाद मैंने देखा कि आप हर नमाज़ में क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगा करते थे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- के पास मदीने की दो बूढ़ी यहूदी महिलाएँ आईं और कहने लगीं कि मरे हुए लोगों को क़ब्र के अंदर अज़ाब होता है। आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने उन दोनों को झुठला दिया और उनकी पुष्टि करना पसंद नहीं किया। क्योंकि यहूदियों के झूठ, धर्म के नाम पर झूठी बातें घड़ने की आदत और अल्लाह की किताब के साथ छेड़-छाड़ से सब लोग परिचित थे। चुनांचे दोनों चली गईं। फिर जब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- के पास आए और उन्होंने आपको दोनों यहूदी महिलाओं की बात सुनाई, तो आपने कहा : उनकी बात सही है। मरे हुए लोगों को क़ब्र में यातना दी जाती है, जिसे सारे चौपाये सुनते हैं। आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- बताती हैं कि उन्होंने इसके बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब भी कोई नमाज़ पढ़ते हुए देखा, तो आपने क़ब्र की यातना से अल्लाह की शरण माँगी।

हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. إرشاد الساري لشرح صحيح البخاري، أحمد بن محمد القسطلاني القتيبي، الناشر: المطبعة الكبرى الأميرية، مصر، الطبعة: السابعة 1323 هـ. إكمال المعلم بفوائد مسلم، عياض بن موسى اليحصبي السبتي، المحقق: الدكتور يحيى إسماعيل، الناشر: دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر، الطبعة: الأولى، 1419 هـ، 1998م. شرح سنن النسائي المسمى «ذخيرة العقبى في شرح المجتبى»، محمد بن علي الإثيوبي الوَلَّوِي، الناشر: دار المعراج الدولية للنشر، دار آل بروم للنشر والتوزيع، الطبعة الأولى.

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मेरी ओर वह्य की गई है कि तुम्हें क़ब्रों में कमो-बेश दज्जाल की परीक्षा की भाँति परीक्षा का सामना करना पड़ेगा।

عن أسماء بنت أبي بكر رضي الله عنها قالت: قام رسول الله صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ الفتنةَ التي يُفتن بها المرء في قبره، فلما ذكر ذلك ضَجَّ المسلمون ضَجَّةً حالت بيني وبين أن أفهم كلامَ رسول الله صلى الله عليه وسلم ، فلما سَكَنَت ضَجَّتُهم قلتُ لرجل قريب مني: أيْ -بارك الله لك- ماذا قال رسول الله صلى الله عليه وسلم في آخر قوله؟ قال: «قد أُوحِيَ إليَّ أنكم تُفتَنون في القبور قريبًا من فتنة الدَّجَّال».
असमा बिंत अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- खड़े हुए और उस परीक्षा का ज़िक्र किया, जिसका सामना इनसान को अपनी क़ब्र में करना होगा। जब आपने उस परीक्षा का ज़िक्र किया, तो मुसलमान इस क़दर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे कि मैं अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की बात समझ न सकी। जब उनके रोने की आवाज़ थमी, तो मैंने अपने निकट के एक व्यक्ति से कहाः ऐ अमुक, -अल्लाह तुझ में बरकत दे- अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी बात के अंत में क्या कहा है? उसने कहा कि आपने फ़रमाया हैः "मेरी ओर वह्य की गई है कि तुम्हें क़ब्रों में कमो-बेश दज्जाल की परीक्षा की भाँति परीक्षा का सामना करना पड़ेगा।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. المجتبى من السنن (السنن الصغرى)، أحمد بن شعيب النسائي، تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة، مكتب المطبوعات الإسلامية، حلب، الطبعة: الثانية 1406هـ، 1986م. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، حمزة محمد قاسم، راجعه: عبد القادر الأرناؤوط، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق، مكتبة المؤيد، الطائف، عام النشر: 1410هـ، 1990م. شرح سنن النسائي المسمى «ذخيرة العقبى في شرح المجتبى»، محمد بن علي الإثيوبي الوَلَّوِي، الناشر: دار المعراج الدولية للنشر، دار آل بروم للنشر والتوزيع، الطبعة الأولى.

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इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनता हूँ।

عن أبي سعيد رضي الله عنه قال: ولم أشهده من النبي صلى الله عليه وسلم ، ولكن حدَّثنيه زيد بن ثابت، قال: بينما النبي صلى الله عليه وسلم في حائط لبني النَّجَّار، على بَغْلة له ونحن معه، إذ حادَت به فكادت تُلْقيه، وإذا أقبُر ستة أو خمسة أو أربعة -قال: كذا كان يقول الجريري- فقال: «مَن يعرف أصحاب هذه الأقبُر؟» فقال رجل: أنا، قال: فمتى مات هؤلاء؟ قال: ماتوا في الإشراك، فقال: «إن هذه الأمة تُبْتَلى في قبورها، فلولا أن لا تَدَافنوا لدعوتُ اللهَ أنْ يُسْمِعَكم من عذاب القبر الذي أسمع منه» ثم أقبل علينا بوجهه، فقال: «تعوَّذوا بالله من عذاب النار» قالوا: نعوذ بالله من عذاب النار، فقال: «تعوَّذوا بالله من عذاب القبر» قالوا: نعوذ بالله من عذاب القبر، قال: «تعوَّذوا بالله من الفتن، ما ظهر منها وما بَطَن» قالوا: نعوذ بالله من الفتن ما ظهر منها وما بَطَن، قال: «تعوَّذوا بالله من فتنة الدَّجَّال» قالوا: نعوذ بالله من فتنة الدَّجَّال.
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अंहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबंधित इस घटना को मैंने अपनी आँखों से नहीं देखा है, लेकिन मुझे ज़ैद बिन साबि -रज़ियल्लाहु अंहु- ने सुनाया है। वह कहते हैंः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक खच्चर पर सवार होकर बनी नज्जार के एक बाग से गुज़र रहे थे और हम आपके साथ थे कि अचानक आपका खच्चर बिदक गया और ऐसा लग रहा था कि आपको गिरा देगा। हमने देखा, तो वहाँ छह या पाँच या चार क़ब्रें थीं-वर्णितकार ने कहा: जरीरी ऐसा ही कहा करते थे, आपने कहाः "इन क़ब्रों में दफ़न लोगों को कौन जानता है?" एक व्यक्ति ने कहाः मैं जानता हूँ। आपने पूछा: "यह लोग कब मरे हैं?" उसने उत्तर दियाः शिर्क के ज़माने में। आपने फ़रमायाः "इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनता हूँ।" फिर आप हमारी ओर दृष्टि करते हुए फ़रमायाः "जहन्नम के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगो।" सहाबा ने कहाः हम जहन्नम के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगते हैं। फिर फ़रमायाः "क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगो।" सहाबा ने कहाः हम क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगते हैं। फ़रमायाः "सारे प्रकट तथा गुप्त फ़ितनों से अल्लाह की पनाह माँगो।" सहाबा ने कहाः हम सारे प्रकट तथा गुप्त फ़ितनों से अल्लाह की पनाह माँगते हैं। फ़रमायाः "दज्जाल के फ़ितने से अल्लाह की पनाह माँगो।" सहाबा ने कहाः दज्जाल के फ़ितने से अल्लाह की पनाह माँगते हैं।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

ज़ैद बिन साबित -रज़ियल्लाहु अनहु- बयान करते हैं कि एक दिन हम लोग अंसार के क़बीला बनू नज्जार के एक बाग में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने खच्चर पर सवार थे। अचानक आपका खच्चर बिदक कर रास्ते से हट गया। ऐसा लग रहा था कि वह आपको अपनी पीठ से गिरा देगा। उस जगह चार या पाँच या छह क़ब्रें थीं। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने पूछा कि इन क़ब्रों में दफ़न लोगों को कौन पहचानता है? एक व्यक्ति ने उत्तर दिया कि उन्हें मैं पहचानता हूँ।इसपर आपने कहा कि यदि तुम उन्हें पहचानते हो, तो बताओ कि उनकी मृत्यु कब हुई है? उसने कहा कि उनकी मृत्यु शिर्क के ज़माने में हुई है। यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : इस उम्मत के लोगों की क़ब्र में परीक्षा होती है और इसके बाद या तो उन्हें नेमतें दी जाती हैं या फिर यातना दी जाती है। यदि मुझे इस बात का डर महसूस न होता कि तुम अपने मरे हुए लोगों को दफ़न करना छोड़ दोगे, तो मैं अल्लाह से दुआ करता कि क़ब्र की जो यातना मैं सुनता हूँ, वह तुम्हें भी सुना दे। दरअसल बात यह है कि यदि तुम्हें क़ब्र की यातना सुनाई देने लगे, तो इस डर से कि कहीं मुर्दों की चीख से तुम्हारे दिल फट न जाएँ या फिर इस भय से मरे हुए व्यक्ति की हालत से अवगत होने के बाद रिश्तेदारों में अपमानित न होना पड़े, तुम एक-दूसरे को दफ़न करना ही छोड़ दो। फिर अपने साथियों की ओेर मुँह करने के बाद फ़रमाया : अल्लाह से दुआ करो कि वह तुमसे आग की यातना को हटा दे। इसपर उन्होंने कहा : हम आग की यातना से अल्लाह की शरण में आते हैं। फिर आपने कहा : अल्लाह से दुआ करो कि तुम्हें क़ब्र की यातना से बचाए। उन्होंने कहा : हम क़ब्र की यातना से अल्लाह की शरण में आते हैं। फिर आपने कहा : अल्लाह से दुआ करो कि वह तुम्हें सारे प्रकट एवं गुप्त फ़ितनों से बचाए। उन्होंने कहा : हम तमाम प्रकट एवं गुप्त फ़ितनों से अल्लाह की शरण में आते हैं। आपने कहा : अल्लाह से दुआ करो कि वह तुम्हें काना दज्जाल के फ़ितने से बचाए, जो कि सबसे बड़ा फ़ितना है। क्योंकि वह कुफ़्र का कारण बनता है और कुफ़्र इन्सान को जहन्नम की न ख़तम होने वाली यातना की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा : हम दज्जाल के फ़ितने से अल्लाह की शरण में आते हैं।

हवाला

صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. مرقاة المفاتيح، علي بن سلطان القاري ، دار الفكر، بيروت، لبنان، الطبعة: الأولى 1422هـ، 2002م. معجم اللغة العربية المعاصرة، أحمد مختار عبد الحميد عمر بمساعدة فريق عمل، الناشر: عالم الكتب، الطبعة: الأولى 1429هـ، 2008م.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सूरज डूबने के बाद निकले, तो एक आवाज़ सुनी। अतः, आपने फ़रमायाः "यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जा रहा है।"

عن أبي أيوب رضي الله عنه، قال: خرج النبي صلى الله عليه وسلم وقد وَجَبَت الشمس، فسمع صوتا فقال: «يهودُ تُعذَّب في قبورها».
अबू अय्यूब -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सूरज डूबने के बाद निकले, तो एक आवाज़ सुनी। अतः, आपने फ़रमायाः "यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जा रहा है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. عمدة القاري شرح صحيح البخاري، محمود بن أحمد بدر الدين العينى، الناشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، علي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت، لبنان، الطبعة الأولى، 1422هـ - 2002م. كشف المشكل من حديث الصحيحين، جمال الدين أبو الفرج عبد الرحمن بن الجوزي، تحقيق: علي حسين البواب، الناشر: دار الوطن، الرياض.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
19 में से 8
19 हदीसें
  1. इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।
  2. जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो।
  3. मुसलमान से जब क़ब्र में सवाल होगा तो वह गवाही देगा कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
  4. दो फूँक मारने के बीच चालीस का अंतराल होगा। लोगों ने कहाः ऐ अबू हुरैरा! क्या चालीस से तात्पर्य चालीस दिन हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस साल मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस महीने मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा भी नहीं कहता।
  5. दोनों ने सच कहा है। इन लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं।
  6. मेरी ओर वह्य की गई है कि तुम्हें क़ब्रों में कमो-बेश दज्जाल की परीक्षा की भाँति परीक्षा का सामना करना पड़ेगा।
  7. इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनता हूँ।
  8. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सूरज डूबने के बाद निकले, तो एक आवाज़ सुनी। अतः, आपने फ़रमायाः "यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जा रहा है।"
  9. तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है।
  10. क़ब्र की कुछ नेमतों और यातनओं का ज़िक्र
  11. सुन लो, वह समय आने ही वाला है कि एक व्यक्ति के पास मेरी हदीस पहुँचेगी और वह अपने बिस्तर पर टेक लगाकर बैठा होगा। हदीस सुनने के बाद वह कहेगा : हमारे और तुम्हारे बीच अल्लाह की किताब है
  12. क़यामत की निशानियों में से कुछ निशानियाँ यह हैं कि ज्ञान उठा लिया जाए, अज्ञान अधिक हो जाए, व्यभिचार अधिक हो जाए, मदिरा पीने का चलन अधिक हो जाए, पुरुष कम हो जाएँ और स्त्रियाँ इतनी अधिक हो जाएँ कि पचास-पचास स्त्रियों का एक ही अभिभावक हो।
  13. क़यामत उस समय तक क़ायम नहीं होगी, जब तक इस तरह की हालत पैदा न हो जाए कि एक व्यक्ति किसी की क़ब्र के पास से गुज़रे और कहे कि काश! इसके स्थान पर मैं होता!
  14. क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम यहूदियों से युद्ध न कर लो और यहाँ तक कि जिस पत्थर के पीछे यहूदी छुपा हो वह न कहे कि ए मुसलमान! यह मेरे पीछे यहूदी छुपा है, इसकी हत्या कर दो।
  15. उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, वह समय बहुत ही निकट है, जब तुम्हारे बीच मरयम के बेटे न्यायकारी शासक के रूप में उतरेंगे। वह सलीब तोड़ देंगे, सूअर का वध करेंगे, जिज़्या (वेशेष लगान) हटा देंगे और धन की इतनी बहुतायत हो जाएगी कि कोई उसे ग्रहण नहीं करेगा।
  16. क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक सूरज अपने डूबने के स्थान से न निकले। जब सूरज अपने डूबने के स्थान से निकलेगा और लोग देखेंगे, तो सब लोग ईमान ले आएँगे
  17. क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक समय इतना सिकुड़ न जाए
  18. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी चीज़ का ज़िक्र किया और फ़रमाया : "यह उस समय होगा, जब ज्ञान चला जाएगा
  19. मेरी उम्मत के आख़िर में ऐसे लोग पैदा हो जाएँगे, जो ऐसी बातें बताएँगे, जो न तुमने सुनी होगी और न तुम्हारे बाप-दादाओं ने सुनी होगी। अतः तुम उनसे बचकर एवं सावधान रहना।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com