دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموع باحثين ،نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ 1987م. كنوز رياض الصالحين، إشراف حمد العمار ،نشر: دار كنوز إشبيليا، الطبعة: الأولى، 1430هـ 2009م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. المعجم الوسيط، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت - لبنان، الطبعة: الثانية. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت.
तशरीह के साथ हदीसें
काफ़िर जब कोई अच्छा काम करता है, तो उसके बदले में उसे दुनिया में रोज़ी दे दी जाती है, लेकिन जहाँ तक मोमिन की बात है, तो उसकी नेकियों को अल्लाह उसकी आख़िरत के लिए जमा रखता है और उसके आज्ञापालन के कारण उसे दुनिया में रोज़ी भी प्रदान करता है
عن أنس بن مالك رضي الله عنه مرفوعاً: «إنَّ الكافر إذا عمل حسنة، أُطْعِمَ بها طُعْمَةً من الدنيا، وأما المؤمن فإِنَّ اللهَ تعالى يدخر له حسناته في الآخرة، ويُعْقِبُهُ رزقًا في الدنيا على طاعته».
وفي رواية: «إنَّ الله لا يظلم مؤمنا حسنة، يُعْطَى بها في الدنيا، ويُجْزَى بها في الآخرة، وأما الكافر فَيُطْعَمُ بحسنات ما عمل لله تعالى في الدنيا، حتى إذا أفضى إلى الآخرة، لم يكن له حسنة يُجْزَى بها».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: काफ़िर जब कोई अच्छा काम करता है, तो उसके बदले में उसे दुनिया में रोज़ी दे दी जाती है, लेकिन जहाँ तक मोमिन की बात है, तो उसकी नेकियों को अल्लाह उसकी आख़िरत के लिए जमा रखता है और उसके आज्ञापालन का बदला उसे दुनिया में रोज़ी भी प्रदान करता है।
एक अन्य रिवायत में है: अल्लाह किसी मोमिन की किसी नेकी की उपेक्षा नहीं करता। उसे दुनिया में भी उसका बदला दिया जाता है और आख़िरत में भी उसका बदला दिया जाएगा। लेकिन जहाँ तक काफ़िर की बात है, तो जो अच्छे काम वह अल्लाह के लिए करता है, उनके बदले में उसे दुनिया में रोज़ी दे दी जाती है, यहाँ तक कि जब वह आख़िरत में पहुँचेगा, तो उसके पास कोई नेकी नहीं होगी कि उसका बदला उसे दिया जाए।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com