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तशरीह के साथ हदीसें

लोग क़यामत (महा प्रलय) के दिन नंगे पाँव, नंगे शरीर तथा बिना ख़तना किए हुए उठाए जाएँगे।

عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المُؤْمنين رَضيَ اللهُ عنها قَالَتْ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «يُحْشَرُ النَّاسُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حُفَاةً عُرَاةً غُرْلًا» قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللهِ النِّسَاءُ وَالرِّجَالُ جَمِيعًا يَنْظُرُ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ؟ قَالَ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «يَا عَائِشَةُ، الْأَمْرُ أَشَدُّ مِنْ أَنْ يَنْظُرَ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ».
मोमिनों की माता आइशा (रज़ियल्लाु अन्हा) से रिवायत है, वह कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुनाः “लोग क़यामत (महा प्रलय) के दिन नंगे पाँव, नंगे शरीर तथा बिना ख़तना किए हुए उठाए जाएँगे।” मैंने प्रश्न कियाः हे अल्लाह के रसूल, महिला तथा पुरूष एक साथ होंगे, तो एक-दूसरे को देखेंगे? आपने फ़रमायाः “ऐ आइशा, मामला इससे कहीं संगीन होगा कि लोग एक-दूसरे को देखें।” एक रिवायत में इस प्रकार हैः “मामला एक-दूसरे को देखने से अधिक संगीन होगा।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (8/ 109) (6527). صحيح مسلم (4/ 2194) (2859). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 373). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 302). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 483). المعجم الوسيط، (2/ 651).

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आख़िरत (परलोक) का जीवन

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com