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तशरीह के साथ हदीसें

कुत्सित आचरण

47 हदीसें

जब क़यामत के दिन अल्लाह पहले के और बाद के तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो हर विश्वासघात करने वाले के लिए एक-एक झंडा ऊँचा किया जाएगा। कहा जाएगा : यह अमुक के पुत्र अमुक का विश्वासघात है।

عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضيَ اللهُ عنهما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا جَمَعَ اللهُ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُرْفَعُ لِكُلِّ غَادِرٍ لِوَاءٌ، فَقِيلَ: هَذِهِ غَدْرَةُ فُلَانِ بْنِ فُلَانٍ».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब क़यामत के दिन अल्लाह पहले के और बाद के तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो हर विश्वासघात करने वाले के लिए एक-एक झंडा ऊँचा किया जाएगा। कहा जाएगा : यह अमुक के पुत्र अमुक का विश्वासघात है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जब अल्लाह क़यामत के दिन हिसाब के लिए अगले तथा पिछले तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो अल्लाह खुद अपने साथ या लोगों के साथ किए हुए किसी वादे को पूरा न करने वाले हर विश्वासघाती के लिए एक-एक चिह्न बना देगा, जिससे उसके विश्वासघात पर उसकी रुसवाई हो सके। उस दिन उसके खिलाफ यह पुकारा जाएगा : यह अमुक के बेटे अमुक का विश्वासघात है। ऐसा उसके कुकर्मों से हश्र के मैदान में एकत्र तमाम लोगों अवगत करने के लिए किया जाएगा।

फ़ायदे
  1. विश्वासघात करना हराम तथा कबीरा गुनाह है। क्योंकि इस प्रकार के व्यक्ति को बड़ी सख़्त चेतावनी दी गई है।
  2. जिस ख़यानत से यहाँ चेताया गया है, उसमें हर वो व्यक्ति दाख़िल है, जिसने अपने रक्त, इज़्ज़त-आबरू, भेद या धन के बारे में आपको अमीन बनाया और आपने उसके विश्वास के विपरीत काम करते हुए उसके साथ ख़यानत कर डाली।
  3. क़ुर्तुबी कहते हैं : यह बात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अरबों की प्रथा को ध्यान में रखते हुए कही है। क्योंकि अरब वादा पूरा करने पर सफ़ेद झंडा ऊँचा करते थे और धोखा देने पर काला झंडा ऊँचा करते थे, ताकि लोग धोखा देने वाले की भर्त्सना तथा निंदा करें। अतः इस हदीस में बताया गया है कि धोखा देने वाले के साथ ऐसा ही होगा, ताकि हश्र के मैदान में एकत्र लोग उसके इस कुकृत्य से भली-भाँति अवगत हो जाएँ और उसकी निंदा करें।
  4. इब्न-ए-हजर करते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि क़यामत के दिन लोगों को उनके पिता के नाम के साथ पुकारा जाएगा। इस हदीस के शब्द हैं : "यह अमुक पुत्र अमुक का विश्वासघात है।"
हवाला

صحيح البخاري (4/ 104) (3188) صحيح مسلم (3/ 1359) (1735). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص745). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (2/ 188).

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क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?

عن أبي بكرة رضي الله عنه قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم: «‌أَلَا ‌أُنَبِّئُكُمْ بِأَكْبَرِ الْكَبَائِرِ؟» ثَلَاثًا، قَالُوا: بَلَى يَا رَسُولَ اللهِ، قَالَ: «الْإِشْرَاكُ بِاللهِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ» وَجَلَسَ وَكَانَ مُتَّكِئًا، فَقَالَ: «أَلَا وَقَوْلُ الزُّورِ»، قَالَ: فَمَا زَالَ يُكَرِّرُهَا حَتَّى قُلْنَا: لَيْتَهُ سَكَتَ.
अबू बकरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, उन्होंने कहा : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रनाया : "क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?" आपने यह बात तीन बार दोहराई। हमने कहा : अवश्य, ऐ अल्लाह के रसूल! तो आपने फ़रमाया : "अल्लाह का साझी बनाना और माता-पिता की बात न मानना।" यह कहते समय आप टेक लगाए हुए थे, लेकिन सीधे बैठ गए और फ़रमाया : "सुन लो, झूठी बात कहना (भी बड़ा गुनाह है)।" यह बात आप इतनी बार दोहराते रहे कि हमने कहा कि काश आप खामोश हो जाते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों के सामने सबसे बड़े गुनाहों का वर्णन करते हुए इन तीन गुनाहों का उल्लेख किया : 1- अल्लाह का साझी ठहराना : यानी कोई भी इबादत अल्लाह के अतिरिक्त के लिए करना और अल्लाह के अतिरिक्त को अल्लाह की तरह पूज्य तथा रब बनाना और उसे अल्लाह के नाम तथा गुण दे देना। 2- माता-पिता की अवज्ञा करना : यानी माता-पिता को अपनी बात तथा कार्य द्वारा या उनके साथ अच्छा व्यवहार न करके किसी भी प्रकार का कष्ट देना। 3- झूठ बोलना, जिसका एक रूप झूठी गवाही देना है : यानी हर वह गढ़ी हुई और झूठी बात है, जिसका उद्देश्य किसी का माल हड़पना या किसी का अपमान करना आदि हो। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने झूठ बोलने से बार-बार सावधान यह बताने के लिए किया कि यह एक बुरी चीज़ है और समाज पर इसके बड़े बुरे प्रभाव पड़ते हैं। आपने झूठ बोलने से इतनी बार सावधान किया कि सहाबा ने आपकी परेशानी को देखकर कहा कि काश आप ख़ामोश हो जाते।

फ़ायदे
  1. सबसे बड़ा गुनाह अल्लाह का साझी ठहराना है, क्योंकि आपने इसका वर्णन सबसे पहले किया है, और इसकी पुष्टि इस आयत से भी होती है : "निःसंदेह, अल्लाह यह क्षमा नहीं करेगा कि उसका साझी बनाया जाए और इसके अतिरिक्त जिसके लिए जो चाहेगा क्षमा कर देगा।"
  2. माता-पिता के अधिकार का महत्व, क्योंकि अल्लाह ने उनके अधिकार को अपने अधिकार के साथ मिलाकर बयान किया है।
  3. गुनाहों के दो प्रकार हैं। कबीरा (बड़े) गुनाह और सग़ीरा (छोटे) गुनाह। कबीरा गुनाह हर वह गुनाह है, जिसकी कोई दुनियावी सज़ा निर्धारित हो, जैसे हुदूद एवं लानत आदि। या फिर जिसपर कोई आख़िरत की चेतावनी दी गई हो, जैसे जहन्नम में प्रवेश करने की चेतावनी। कबीरा गुनाह कई श्रेणियों के होते हैं, कुछ कबीरा गुनाह अन्य कुछ के मुक़ाबले में अधिक सख़्त हराम होते हैं। सग़ीरा गुनाह कबीरा गुनाहों को छोड़ अन्य गुनाहों को कहते हैं।
हवाला

صحيح البخاري (3/ 172) (2654)، (8/ 4) (5976)، (8/ 62) (6273-6274). صحيح مسلم (1/ 91) (87). عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم (ص257) (380). شرح النووي على مسلم (2/ 81). الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري (2/ 149). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام (ص703). أعلام السنة المنشورة لاعتقاد الطائفة الناجية المنصورة، لحافظ بن أحمد الحكمي (ص111).

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इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قَالَ: مَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقَبْرَيْنِ، فَقَالَ: «إِنَّهُمَا لَيُعَذَّبَانِ، وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ، أَمَّا أَحَدُهُمَا فَكَانَ لاَ يَسْتَتِرُ مِنَ البَوْلِ، وَأَمَّا الآخَرُ فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ» ثُمَّ أَخَذَ جَرِيدَةً رَطْبَةً، فَشَقَّهَا نِصْفَيْنِ، فَغَرَزَ فِي كُلِّ قَبْرٍ وَاحِدَةً، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللَّهِ، لِمَ فَعَلْتَ هَذَا؟ قَالَ: «لَعَلَّهُ يُخَفِّفُ عَنْهُمَا مَا لَمْ يَيْبَسَا».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।" फिर आपने एक ताज़ा शाखा ली, उसे आधा-आधा फाड़ा और हर एक क़ब्र में एक-एक भाग को गाड़ दिया। सहाबा ने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों किया? तो आपने जवाब दिया : "शायद इन दोनों की यातना को उस समय तक के लिए हल्का कर दिया जाए, जब तक यह दोनों शाखाएँ सूख न जाएँ।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे और फ़रमाया : इन क़ब्रों में दफ़न दोनों लोग यातना झेल रहे हैं और ये यातना ऐसी चीज़ों के कारण झेल रहे हैं, जो तुम्हारी नज़र में बड़ी चीज़ें नहीं हैं। यह और बात है कि ये अल्लाह की नज़र में बड़ी चीज़ें हैं। इन दोनों में से एक व्यक्ति पेशाब-पाखाने के समय अपने शरीर तथा कपड़ों को पेशाब से बचाने पर ध्यान नहीं देता था। जबकि दूसरा व्यक्ति लोगों के बीच लगाई-बुझाई करता फिरता था। वह एक व्यक्ति की बात दूसरे व्यक्ति को नुक़सान पहुँचाने एवं मतभेद पैदा करने के उद्देश्य से पहुँचाया करता था।

फ़ायदे
  1. लगाई-बुझाई करना और पेशाब से बचने पर ध्यान न देना कबीरा गुनाह और क़ब्र की यातना का सबब है।
  2. अल्लाह ने अपने नबी के सामने कुछ ग़ैब की चीज़ें, जैसे क़ब्र की यातना, खोल दीं, ताकि यह आपके नबी होने की एक निशानी बन सके।
  3. एक शाख लेने और उसे फाड़कर क़ब्र पर रखने का यह अमल अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ खास है। क्योंकि अल्लाह ने आपको उन दोनों क़ब्रों में दफ़न लोगों का हाल बता दिया था। इस मसले में आपपर किसी को क़यास इसलिए नहीं किया जा सकता कि कोई क़ब्र में दफ़न लोगों का हाल जान नहीं सकता।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 53) (218). صحيح مسلم (1/ 240) (292). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص43). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص22). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 29).

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मेरी उम्मत का निर्धन वह व्यक्ति है, जो क़यामत के दिन नमाज़, रोज़ा और ज़कात के साथ आए, लेकिन इस अवस्था में उपस्थित हो कि किसी को गाली दे रखी हो, किसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा रखा हो, किसी का रक्त बहा रखा हो और किसी को मार रखा हो, अतः इसे उसकी कुछ नेकियाँ दे दी जाएंगी और इसे कुछ नेकियाँ दे दी जाएंगी।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «أتدرون من المفلس؟» قالوا: المُفْلِس فينا من لا دِرهَمَ له ولا مَتَاع، فقال: «إن المفلس من أمتي من يأتي يوم القيامة بصلاة وصيام وزكاة، ويأتي وقد شَتَمَ هذا، وقذف هذا، وأكل مال هذا، وسَفَكَ دم هذا، وضرب هذا، فيعطى هذا من حسناته، وهذا من حسناته، فإن فنيت حسناته قبل أن يُقْضَى ما عليه، أخذ من خطاياهم فَطُرِحتْ عليه، ثم طُرِحَ في النار».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है?" सहाबा ने कहाः हमारे निकट निर्धन वह है, जिसके पास न दिरहम हो न सामान। आपने कहाः "मेरी उम्मत का निर्धन वह व्यक्ति है, जो क़यामत के दिन नमाज़, रोज़ा और ज़कात के साथ आए, लेकिन इस अवस्था में उपस्थित हो कि किसी को गाली दे रखी हो, किसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा रखा हो, किसी का रक्त बहाया हो और किसी को मारा हो, अतः इसे उसकी कुछ नेकियाँ दे दी जाएंगी और इसे कुछ नेकियाँ दे दी जाएंगी। फिर अगर उसके ऊपर जो हक़ हैं, उन्हें अदा करने से पहले उसकी नेकियाँ समाप्त हो जाएं, तो हक़ वालों के कुछ गुनाह उसके ऊपर डाल दिए जाएंगे, फिर उसे आग में फेंक दिया जाएगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه . - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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तुम लोग सात विनाशकारी वस्तुओं से बचो

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «اجْتَنِبُوا السَّبْعَ الْمُوبِقَاتِ»، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللهِ وَمَا هُنَّ؟ قَالَ: «الشِّرْكُ بِاللهِ، وَالسِّحْرُ، وَقَتْلُ النَّفْسِ الَّتِي حَرَّمَ اللهُ إِلَّا بِالْحَقِّ، وَأَكْلُ الرِّبَا، وَأَكْلُ مَالِ الْيَتِيمِ، وَالتَّوَلِّي يَوْمَ الزَّحْفِ، وَقَذْفُ الْمُحْصَنَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ الْغَافِلَاتِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम लोग सात विनाशकारी वस्तुओं से बचो।" लोगों ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! वह क्या-क्या हैं? आपने फ़रमाया : "अल्लाह का साझी बनाना, जादू, अल्लाह के हराम किए हुए प्राणी को औचित्य ना होने के बावजूद क़त्ल करना, ब्याज खाना, यतीम का माल खाना, युद्ध के मैदान से पीठ दिखाकर भागना और निर्दोष भोली-भाली मोमिन स्त्रियों पर व्यभिचार का आरोप लगाना।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपनी उम्मत को सात विनाशकारी अपराधों एवं गुनाहों से बचने का आदेश दे रहे हैं। जब आपसे पूछा गया कि यह सात गुनाह क्या-क्या हैं, तो आपने उनको बयान करते हुए फ़रमाया : 1- अल्लाह का साझी ठहराना। यानी किसी भी प्रकार से किसी को अल्लाह का समान ठहराना और कोई भी इबादत अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के लिए करना। आपने सबसे पहले शिर्क का ज़िक्र इसलिए किया कि शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है। 2- जादू करना। जादू से मुराद है धागा आदि पर इस तरह गिरह लगाना, मंत्र पढ़ना और दवाओं तथा नशा लाने वाली चीज़ों का इस्तेमाल करना, जो जादू किए हुए व्यक्ति के शरीर को प्रभावित करते हुए उसे बीमार कर दे या उसकी जान ले ले या पति-पत्नी के बीच में जुदाई डाल दे। यह एक शैतानी कार्य है। अधिकतर समय जादू उसी समय काम करता है, जब शिर्क वाले काम किए जाएँ और दुष्ट रूहों को खुश करने के लिए उनके मन के अनुसार कुछ किया जाए। 3- किसी ऐसे व्यक्ति की हत्या कर देना, जिसकी जान लेने से अल्लाह ने मना किया हो। जाने लेने की अनुमति केवल उसी समय है, जब कोई शरई कारण पाया जाए और यह काम शासक के द्वारा किया जाए। 4- सूद लेना या देना। चाहे उसे खाया जाए या उससे किसी अन्य प्रकार का लाभ उठाया जाए। 5- किसी बच्चे के माल पर हाथ साफ़ करना, जो नाबालिग़ हो और उसका बाप मर गया हो। 6- काफ़िरों के साथ हो रहे युद्ध के मैदान से भाग खड़ा होना। 7- पाकदामन आज़ाद औरतों पर व्यभिचार का आरोप लगाना। इसी तरह पाकदामन आज़ाद मर्दों पर व्यभिचार का झूठा आरोप लगाना भी विनाशकारी गुनाह है।

फ़ायदे
  1. बड़े गुनाह केवल सात ही नहीं हैं। लेकिन विशेष रूप से इनका उल्लेख इसलिए किया गया है कि यह सात गुनाह कुछ ज़्यादा ही ख़तरनाक हैं।
  2. अगर कोई शरई कारण, जैसे क़िसास, इस्लाम का परित्याग और शादीशुदा होने के बावजूद व्यभिचार में लिप्त होना आदि पाया जाए, तो किसी की जान लेना जायज़ है। लेकिन यह काम शरई शासक का है।
हवाला

صحيح البخاري (4/ 10) (2766). صحيح مسلم (1/ 92) (89). شرح صحيح البخارى لابن بطال (8/ 489). الملخص في شرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح الفوزان (ص201).

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मुझे एक ऐसा वाक्य मालूम है कि अगर यह व्यक्ति उसे पढ़ ले, तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाए। अगर इसने कहा : मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ। तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाएगा।

عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ صُرَدٍ رضي الله عنه قَالَ: كُنْتُ جَالِسًا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجُلاَنِ يَسْتَبَّانِ، فَأَحَدُهُمَا احْمَرَّ وَجْهُهُ، وَانْتَفَخَتْ أَوْدَاجُهُ، فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنِّي لَأَعْلَمُ كَلِمَةً لَوْ قَالَهَا ذَهَبَ عَنْهُ مَا يَجِدُ، لَوْ قَالَ: أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ، ذَهَبَ عَنْهُ مَا يَجِدُ» فَقَالُوا لَهُ: إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «تَعَوَّذْ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ»، فَقَالَ: وَهَلْ بِي جُنُونٌ؟
सुलैमान बिन सुरद रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ बैठा हुआ था और (निकट ही) दो व्यक्ति एक-दूसरे को गाली गलौज कर रहे थे। उनमें एक व्यक्ति का चेहरा ग़ुस्से के कारण लाल हो गया था और उसकी रगें फूल गई थीं। यह देख अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "मुझे एक ऐसा वाक्य मालूम है कि अगर यह व्यक्ति उसे पढ़ ले, तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाए। अगर इसने कहा : मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ। तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाएगा।" अतः लोगों ने उससे कहा कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "शैतान से अल्लाह की शरण माँग।" तो उसने उत्तर दिया : क्या मैं पागल हूँ?
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

दो व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सामने एक-दूसरे को गाली-गलौज कर रहे थे। एक की हालत तो यह थी कि उसका चेहरा लाल हो चुका था और उसकी गर्दन की रगें फूल चुकी थीं। यह दृश्य देख अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : मुझे एक ऐसा वाक्य मालूम है कि अगर इस ग़ुस्से वाले व्यक्ति ने उसे कह लिया, तो उसका ग़ुस्सा दूर हो जाएगा। उसे "मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ।" कह लेना चाहिए। चुनांचे सहाबा ने उससे कहा कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तुझे "मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ" पढ़ने के लिए कहा है। लेकिन उसने उत्तर दिया : क्या मैं पागल हूँ? उसे लगता था कि अल्लाह की शरण वही माँगता है, जो पागलपन का शिकार हो।

फ़ायदे
  1. जब कोई बात सामने आती, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उसके बारे में उचित मार्गदर्शन देने के लिए तैयार रहते थे।
  2. ग़ुस्सा के पीछे शैतान का हाथ हुआ करता है।
  3. यहां ग़ुस्सा आने पर धुतकारे हुए शैतान से अल्लाह की शरण माँगने का आदेश दिया गया है। उच्च एवं महान अल्लाह का फ़रमान है : "अगर आपके दिल में शैतान द्वारा कोई बुरा ख़्याल डाला जाए, तो अल्लाह की शरण माँग लिया कीजिए।"
  4. इस हदीस में गाली गलौज एवं लानत करने से सावधान किया गया है तथा उनसे नफ़रत दिलाई गई है। क्योंकि इन दोनों से संबंध ख़राब होता है।
  5. जो व्यक्ति उपदेश न सुन सके, उस तक उपदेश पहुँचा देनी चाहिए, ताकि उससे लाभान्वित हो सके।
  6. अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ग़ुस्सा से सावधान किया है, क्योंकि ग़ुस्सा बुराई और विनाश का कारण बनता है। अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को ग़ुस्सा केवल उसी समय आता था, जब अल्लाह के आदेशों एवं निर्देशों की अवहेलना की जाए। यह प्रशंसनीय ग़ुस्सा है।
  7. नववी इस हदीस में आए हुए व्यक्ति के शब्दों "क्या मैं पागल हूँ?" के बारे में कहते हैं : हो सकता है कि यह बात कहने वाला व्यक्ति मुनाफ़िक़ था या देहात का रहने वाला कोई अशिष्ट व्यक्ति।
हवाला

صحيح البخاري (4/ 124) (3282). صحيح مسلم (4/ 2015) (2610). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 110). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص50). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 270). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 78).

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सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो

عن وَاثِلَةَ بن الأَسْقَعِ ـ رضي الله عنه ـ مرفوعاً: «إن من أعظم الفِرَى أن يَدَّعِيَ الرجلُ إلى غير أبيه، أو يُرِي عَيْنَهُ ما لم تَرَ، أو يقول على رسول الله صلى الله عليه وسلم ما لم يَقْلْ».
वासिला बिन असक़ा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - كنوز رياض الصالحين»، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة . - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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तुमने एक ऐसी बात कह दी है कि यदि उसे समुद्र के पानी से मिला दिया जाए, तो उसे नष्ट कर डाले।

عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المؤْمنينَ رَضيَ اللهُ عنها قَالَت: قُلْتُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: حَسْبُكَ مِنْ صَفِيَّةَ كَذَا وَكَذَا، -قَالَ أَحدُ الرُّوَاةِ: تَعْنِي قَصِيرَةً- فَقَالَ: «لَقَدْ قُلْتِ كَلِمَةً لَوْ مُزِجَتْ بِمَاءِ الْبَحْرِ لَمَزَجَتْهُ» قَالَتْ: وَحَكَيْتُ لَهُ إِنْسَانًا، فَقَالَ: «مَا أُحِبُّ أَنِّي حَكَيْتُ إِنْسَانًا وَأَنَّ لِي كَذَا وَكَذَا».
मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा : आपके लिए सफ़िया का ऐसा और ऐसा होना काफ़ी है। -एक वर्णनकर्ता का कहना है कि उनका इशारा उनके नाटा होने की ओर था- यह सुन आपने कहा : "तुमने एक ऐसी बात कह दी है कि यदि उसे समुद्र के पानी से मिला दिया जाए, तो उसे नष्ट कर डाले।" वह कहती हैं : मैंने आपके सामने एक व्यक्ति की नक़ल उतारी, तो आपने कहा : "मुझे यह बात पसंद नहीं है कि मैं किसी इन्सान की नक़ल उतारूँ और उसके बदले में मुझे इतना और इतना मिल जाए।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा कि आपके लिए सफ़िया -यानी मुसलमानों की माता सफिय्या-रज़ियल्लाहु अनहा- का बस एक ही शारीरिक ऐब काफ़ी है कि वह नाटी हैं। उनकी यह बात सुन आपने कहा : तुमने एक ऐसी बात कही है कि अगर उसे समुद्र के पानी में भी मिला दिया जाए, तो उस पर हावी हो जाए, उसे बदल दे, और उसे खराब करदे। वह बताती हैं कि मैंने एक बार एक व्यक्ति की कमी दिखाने के लिए उसकी नक़ल उतारी, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : मुझे यह बात पसंद नहीं है कि मैं किसी की कमी को उजागर करने के लिए उसका कोई ऐब बयान करूँ, उसकी नक़ल उतारूँ या उसकी तरह बात करके दिखाऊँ, चाहे उसके बदले में मुझे दुनिया की बहुत सारी चीज़ें दे दी जाएं।

फ़ायदे
  1. इस हदीस में गीबत करने, अर्थात; किसी की अनुपस्थिति में उसकी बुराई बयान करने, से सावधान किया एवं डराया गया है।
  2. किसी को अपमानित करने और नीचा दिखाने के रूप में उसकी स्थितियों की और अन्य किसी प्रकार से उसकी नक़ल करना भी निषिद्ध चुगली में दाखिल है।
  3. शारीरिक दोषों को बयान करना ग़ीबत में दाख़िल है।
  4. क़ाज़ी कहते हैं : इस हदीस में आए हुए शब्द "المزج" का अर्थ है : किसी वस्तु को उसके साथ दूसरी वस्तु मिलाकर बदल देना। इस प्रकार इस हदीस का अर्थ यह है कि अगर यह ग़ीबत कोई ऐसी वस्तु होती कि उसे समुद्र के पानी में मिला दिया जाए, तो वह समुद्र के विशाल जल भंडार को भी उसकी असल अवस्था से हटा देती। अतः उन थोड़े-मोड़े कर्मों का क्या, जिनके साथ ग़ीबत को मिला दिया जाए।
  5. पत्नियों के बीच प्रकट होने वाले स्वाभिमान के कुछ दृश्य।
  6. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम कोई ग़लत काम होता हुआ देखकर ख़ामोश नहीं रहते थे।
  7. अल्लाह की प्रसन्नता एवं अप्रसन्नता की तुलना में इस दुनिया और उसमें मौजूद वस्तुओं का कोई महत्व नहीं है।
  8. इस्लाम उच्च नैतिक मूल्यों का धर्म है। यह शब्दों या कार्यों द्वारा किसी के सम्मान को ठेस पहुँचाने से मना करता है, क्योंकि इससे मुसलमानों के बीच शत्रुता और नफ़रत पैदा होती है।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 237) (4875). سنن الترمذي (4/ 275) (2502). مسند أحمد (41/ 433) (24964). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (3/ 25). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، للقاري (7/ 3046). التيسير بشرح الجامع الصغير، للمناوي (2/ 339). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (5/ 411).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
47 में से 8
47 हदीसें
  1. जब क़यामत के दिन अल्लाह पहले के और बाद के तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो हर विश्वासघात करने वाले के लिए एक-एक झंडा ऊँचा किया जाएगा। कहा जाएगा : यह अमुक के पुत्र अमुक का विश्वासघात है।
  2. क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?
  3. इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।
  4. मेरी उम्मत का निर्धन वह व्यक्ति है, जो क़यामत के दिन नमाज़, रोज़ा और ज़कात के साथ आए, लेकिन इस अवस्था में उपस्थित हो कि किसी को गाली दे रखी हो, किसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा रखा हो, किसी का रक्त बहा रखा हो और किसी को मार रखा हो, अतः इसे उसकी कुछ नेकियाँ दे दी जाएंगी और इसे कुछ नेकियाँ दे दी जाएंगी।
  5. तुम लोग सात विनाशकारी वस्तुओं से बचो
  6. मुझे एक ऐसा वाक्य मालूम है कि अगर यह व्यक्ति उसे पढ़ ले, तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाए। अगर इसने कहा : मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ। तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाएगा।
  7. सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो
  8. तुमने एक ऐसी बात कह दी है कि यदि उसे समुद्र के पानी से मिला दिया जाए, तो उसे नष्ट कर डाले।
  9. यदि आदम की संतान को सोने की एक घाटी मिल जाए, तो वह चाहेगा कि उसे दो घाटियाँ मिल जाएँ। केवल मिट्टी ही उसके मुँह को भर सकती है तथा जो तौबा करेगा, अल्लाह उसकी तौबा क़बूल करेगा।
  10. अत्याचार क़यामत के दिन अंधेरा ही अंधेरा होगा।
  11. बुरे गुमान से बचो, क्योंकि बुरा गुमान सबसे झूठी बात है।
  12. मुसलमान को गाली देना फ़िस्क़ (घोर पाप) है, और उससे लड़ाई करना कुफ़्र है।
  13. जन्नत में लगाई-बुझाई करने वाला व्यक्ति प्रवेश नहीं करेगा।
  14. "बड़े पापों में से एक यह है कि आदमी अपने माता-पिता को गाली दे।" कहा गया कि क्या आदमी अपने माता-पिता को गाली दे सकता है? तो फ़रमायाः "हाँ, आदमी किसी के बाप को गाली दे, तो वह उसके बाप को गाली दे और आदमी किसी की माँ को गाली दे, तो वह उसकी माँ को गाली दे।"
  15. जो लोगों की बात कान लगाकर सुने, जबकि उन्हें यह पसंद न हो, तो क़यामत के दिन उसके कानों में सीसा पिघलाकर डाला जाएगा।
  16. ”अल्लाह के पास सबसे घृणित व्यक्ति वह है, जो अत्यधिक झगड़ालू तथा हमेशा विवाद में रहने वाला हो।”
  17. बहुत ज़्यादा लानत करने वाले क़यामत के दिन गवाही देने वाले और सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे।
  18. जो व्यक्ति अपने आपको बड़ा समझे और अकड़कर चले, वह क़यामत के दिन अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि अल्लाह उससे क्रोधित होगा।
  19. बरबादी है उस व्यक्ति के लिए, जो लोगों से बात करता है और उन्हें हँसाने के लिए झूठ बोलता है। बरबादी है उसके लिए। फिर बरबादी है उसके लिए।
  20. जब तुम (किसी के सामने उसकी) प्रशंसा करने वालों को देखो, तो उनके मुँह पर मिट्टी डाल दो।
  21. अत्याचार से बचो, क्योंकि अत्याचार क़यामत के दिन अंधेरों के रूप में सामने आएगा। अति कंजूसी से बचो, क्योंकि अति कंजूसी ने तुमसे पूर्व के लोगों का विनाश किया है।
  22. निश्चय ही अल्लाह अत्याचारी को छूट देता रहता है और जब पकड़ता है, तो छोड़ता नहीं है
  23. अभिमान तथा अहंकार का हराम होना और इसका बुरा अंत
  24. तीन प्रकार के लोगों से अल्लाह क़यामत के दिन न बात करेगा, न उन्हें पवित्र करेगा और न उनकी ओर देखेगा।
  25. वह व्यक्ति जन्नत में प्रवेश नहीं करेगा, जिस के दिल में रत्ती बराबर भी अहंकार होगा
  26. जिसने ऐसा ज्ञान प्राप्त किया, जिससे अल्लाह की खुशी प्राप्त की जाती है
  27. क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है?
  28. जो व्यक्ति मेरे हवाले से कोई बात बताए और उसे लगता हो कि वह झूठ है, तो वह झूठों में से एक है।
  29. न दी हुई चीज़ को ज़ाहिर करने वाला ऐसा है, जैसे किसी ने झूठ का जोड़ा पहन रखा हो।
  30. दो गाली देने वालों की गाली की लानत, आरंभ करने वाले पर होगी, जब तक कि पीड़ित आत्याचार न करे
  31. यदि तुम मुसलमानों की छुपी हुई कमियों की जासूसी करते रहोगे तो उन्हें और अधिक बिगाड़ दोगे या बिगड़ने की कगार पर ले आओगे
  32. एक व्यक्ति को उनके पास लाया गया और उन से कहा गया: यह अमुक आदमी है, इसकी दाढ़ी से शराब टपक रही है। यह सुन कर आपने फ़रमाया: हमें जासूसी करने से मना किया गया है, लेकिन यदि कोई चीज़ ज़ाहिर हो तो हम उसकी उसके कारण पकड़ करेंगे
  33. किसी मुस्लिम के लिए जायज़ नहीं है कि अपने भाई को तीन दिन से अधिक छोड़े रखे, जिसने तीन दिन से अधिक छोड़े रखा और इसी दशा में मर गया तो वह जहन्नम में दाख़िल होगा
  34. जो किसी दूसरे की पत्नी अथवा दासी को धोका दे अथवा बिगाड़े, वह हममें से नहीं है
  35. जिसने अपने भाई को एक साल तक छोड़े रखा, मानो उसने उसका ख़ून बहाया
  36. निस्संदेह शैतान इस बात से निराश हो चुका है कि मुसलमान अरब प्रायद्वीप में उसकी इबादत करेंगे। लेकिन उसकी आशाएँ मुसलमानों के बीच फूट डालने के संबंध में जीवित हैं।
  37. बेशक अल्लाह तआला उन लोगों को -क़यामत के दिन- यातना देगा जो दुनिया में लोगों को यातना देते हैं
  38. जो अपने दास को बिना किसी कारण के मारता है, उसका प्रायश्चित यह है कि उसे मुक्त कर दे
  39. मुजाहेदीन की पत्नियाँ, जिहाद में न जाने वालों के लिए उनकी अपनी माताओं के समान हराम हैं
  40. एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्तांग और एक महिला दूसरी महिला के गुप्तांग को न देखे
  41. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सर के कुछ भाग के बालों को मूँड़ने और कुछ भाग को छोड़ देने से मना किया है।
  42. हम उमर रज़ियल्लाहु अनहु के पास मौजूद थे कि इसी दौरान उन्होंने कहा : "हमें तकल्लुफ़ करने यानी बिना ज़रूरत कष्ट उठाने से मना किया गया है।
  43. मेरी उम्मत के अधिकतर मुनाफ़िक़ क़ारी (क़ुरआन पढ़ने वाले लोग) होंगे।
  44. जिसने जान-बूझकर मुझपर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम बना ले।
  45. “आदमी के अच्छे मुसलमान होने की एक निशानी यह है कि वह बेमतलब की चीज़ों को छोड़ दे।”
  46. इसे छोड़ दो, क्योंकि यह एक बदबूदार चीज़ है।
  47. उसपर लानत न भेजो, अल्लाह की क़सम! मुझे मालूम है कि वह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com