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तशरीह के साथ हदीसें

सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो

عن وَاثِلَةَ بن الأَسْقَعِ ـ رضي الله عنه ـ مرفوعاً: «إن من أعظم الفِرَى أن يَدَّعِيَ الرجلُ إلى غير أبيه، أو يُرِي عَيْنَهُ ما لم تَرَ، أو يقول على رسول الله صلى الله عليه وسلم ما لم يَقْلْ».
वासिला बिन असक़ा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - كنوز رياض الصالحين»، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة . - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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सुन्नत का महत्व एवं गुरुता

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com