عن وَاثِلَةَ بن الأَسْقَعِ ـ رضي الله عنه ـ مرفوعاً: «إن من أعظم الفِرَى أن يَدَّعِيَ الرجلُ إلى غير أبيه، أو يُرِي عَيْنَهُ ما لم تَرَ، أو يقول على رسول الله صلى الله عليه وسلم ما لم يَقْلْ».
वासिला बिन असक़ा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
- صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة.
- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه.
- نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ.
- كنوز رياض الصالحين»، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه.
- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة .
- شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «بَلِّغُوا عَنِّي وَلَوْ آيَةً، وَحَدِّثُوا عَنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَلَا حَرَجَ، وَمَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ».
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मेरी ओर से मिली वाणी दूसरों तक पहुँचा दो, चाहे एक आयत ही हो, तथा इसराईली वंश के लोगों की घटनाओं का वर्णन करो, इसमें कोई हर्ज नहीं है, तथा जिसने मुझपर जान-बूझकर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आपकी ओर से ज्ञान पहुँचाने का आदेश दे रहे हैं, जो क़ुरआन के रूप में हो या हदीस के रूप में, चाहे वह ज्ञान थोड़ा-सा मसलन क़ुरआन की एक आयत या एक हदीस ही क्यों न हो। शर्त यह है कि पहुँचाने वाला उस चीज़ को जानता हो, जिसे वह पहुँचाना चाहता है। फिर आपने बताया कि बनी इसराईल की उन घटनाओं को बयान करने में कोई हर्ज नहीं है, जो हमारी शरीयत के साथ टकराती न हों। फिर आपने अपने ऊपर झूठ बाँधने से सावधान किया है और बताया है कि जो आप पर जान-बूझकर झूठ बाँधेगा, वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।
फ़ायदे
- अल्लाह की शरीयत को दूसरों तक पहुँचाने की प्रेरणा और इस बात का प्रोत्साहन कि इन्सान को दीन की उन बातों को दूसरों तक पहुँचा देना चाहिए, जिनको उसने याद किया और समझा है, चाहे वह थोड़ी ही क्यों न हों।
- शरई ज्ञान अर्जित करना वाजिब है, ताकि इन्सान अल्लाह की इबादत करने और उसकी शरीयत को दूसरों तक पहुँचाने का काम सही तरीक़े से कर सके।
- किसी हदीस को दूसरे तक पहुँचाने या उसे फैलाने से पहले उसके सही होने की पुष्टि कर लेनी चाहिए, ताकि इन्सान इस चेतावनी के दायरे में न आ जाए।
- आम बातचीत के दौरान सच बोलने और हदीस बयान करते समय सचेत रहने की प्रेरणा, ताकि इन्सान झूठ में पड़ने से बच सके। खास तौर से अल्लाह की शरीयत के बारे में सावधान रहने की अधिक आवश्यकता है।
हवाला
صحيح البخاري (4/ 170) (3461).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 464).
نزهة المتقين، لمصطفى الخن وغيره (2/ 951).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 429).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ وَالْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ رضي الله عنهما قَالَا: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ حَدَّثَ عَنِّي بِحَدِيثٍ يُرَى أَنَّهُ كَذِبٌ، فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبِينَ».
समुरा बिन जुंदुब और मुग़बीरा बिन शोबा रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, दोनों कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो व्यक्ति मेरे हवाले से कोई बात बताए और उसे लगता हो कि वह झूठ है, तो वह झूठों में से एक है।"
इस ह़दीस़ को मुस्लिम ने अपने मुक़द्दमे (प्रस्तावना) में रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो व्यक्ति आपके हवाले से कोई हदीस बयान करे और वह जानता हो या उसे लगता हो कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर इस हदीस की निस्बत झूठी है, तो बयान करने वाला भी इस झूठ में इसे पहली बार बोलने वाले का शरीक है।
फ़ायदे
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से नक़ल की गई हदीसों की छानबीन करना और उन्हें रिवायत करने से पहले उनके सहीह होने के बारे में आश्वस्त हो जाना ज़रूरी है।
- झूठ बोलने वाले के साथ-साथ उसे नक़ल करने और फैलाने वाला भी झूठा है।
- किसी हदीस के मनगढ़त होने का ज्ञान या प्रबल गुमान होने के बावजूद उसे नक़ल करना हराम है। हाँ, उससे सावधान करने के लिए नक़ल किया जाए, तो बात अलग है।
यह हदीस HadeethEnc.com परعن المقدام بن معدِيْكَرِب رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «أَلَا هَلْ عَسَى رَجُلٌ يَبْلُغُهُ الْحَدِيثُ عَنِّي وَهُوَ مُتَّكِئٌ عَلَى أَرِيكَتِهِ فَيَقُولُ: بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ كِتَابُ اللهِ، فَمَا وَجَدْنَا فِيهِ حَلَالًا اسْتَحْلَلْنَاهُ، وَمَا وَجَدْنَا فِيهِ حَرَامًا حَرَّمْنَاهُ، وَإِنَّ مَا حَرَّمَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا حَرَّمَ اللهُ».
मिक़दाम बिन मादीकरिब रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "सुन लो, वह समय आने ही वाला है कि एक व्यक्ति के पास मेरी हदीस पहुँचेगी और वह अपने बिस्तर पर टेक लगाकर बैठा होगा। हदीस सुनने के बाद वह कहेगा : हमारे और तुम्हारे बीच अल्लाह की किताब है। इसमें हम जो हलाल पाएँगे उसे हलाल जानेंगे और इसमें जो हराम पाएँगे उसे हराम जानेंगे। हालाँकि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की हराम की हुई चीज़ भी अल्लाह की हराम की हुई चीज़ की तरह है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि वह समय निकट है, जब एक प्रकार के लोग समाने आएँगे, जिनमें से एक व्यक्ति अपने बिस्तर पर टेक लगाकर बैठा होगा और इस अवस्था में जब उसके पास अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कोई हदीस पहुँचेगी, तो कहेगा : हमारे और तुम्हारे बीच निर्णय के लिए अल्लाह की किताब है, यही हमारे लिए काफ़ी है। इसमें जो चीज़ें हम हलाल पाएँगे, हम उनपर अमल करेंगे और इसमें जो चीज़ें हम हराम पाएँगे, उनसे दूर रहेंगे। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि आपने अपनी सुन्नत में जिन चीज़ों को हराम कहा है या जिन चीज़ों से मना किया है, वह सारी चीज़ें दरअसल अल्लाह की किताब में हराम की हुई चीज़ों की ही तरह हैं। क्योंकि आपका काम आपके रब के संदेश को पहुँचाना ही था।
फ़ायदे
- क़ुरआन की तरह हदीस का भी सम्मान किया जाना चाहिए और उसपर भी अमल किया जाना चाहिए।
- रसूल का आज्ञापालन दरअसल अल्लाह का आज्ञापालन है और रसूल की अवज्ञा अल्लाह की अवज्ञा है।
- इस हदीस से सुन्नत के प्रमाण होने का सूबत मिलता है और उन लोगों का खंडन हो जाता है, जो सुन्नत को ठुकराते या उसका इनकार करते हैं।
- जिसने सुन्नत से मुँह फेरा और केवल क़ुरआन पर अमल करने का दावा किया, उसने दरअसल दोनों से मुँह फेरा और क़ुरआन के अनुपालन का उसका दावा झूठा है।
- आपके नबी होने का एक प्रमाण यह भी है कि आपने किसी बात की भविष्यवाणी की और वह बात सामने आ भी गई।
हवाला
سنن أبي داود (7/ 13) (4604)، سنن الترمذي (4/ 399) (2664)، سنن ابن ماجه (1/ 9) (12)، نخب الأفكار في تنقيح مباني الأخبار في شرح معاني الآثار (13/ 154).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने जान-बूझकर मुझपर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम बना ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जिसने आपपर झूठ बोला, यानी किसी कथन या कार्य का झूठा संबंध आपकी ओर किया, उसे इस झूठ के बदले में आख़िरत में जहन्नम में स्थान प्रदान किया जाएगा।
फ़ायदे
- जान-बूझकर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर झूठ बोलना जहन्नम में प्रवेश का सबब है।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर झूठ बोलना अन्य लोगों पर झूठ बोलने की तरह नहीं है। क्योंकि आपपर बोले जाने वाले झूठ के नतीजे में दीन एवं दुनिया की बहुत-सी बुराइयाँ सामने आती हैं।
- पूरी छान-बीन और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर संबंध के सही होने की पुष्टि किए बिना हदीसों को फैलाने की मनाही।
हवाला
صحيح البخاري (1/ 33) (110)، صحيح مسلم (1/ 10) (3)، إكمال المعلم (1/111)، شرح النووي على مسلم (1/65)، المفهم (1/32)، عمدة القاري شرح صحيح البخاري (2/ 151)، شرح مقدمة سنن ابن ماجه (5/ 8).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن العِرْباضِ بن ساريةَ رضي الله عنه قال: قام فينا رسول الله صلى الله عليه وسلم ذات يوم، فوَعَظَنا مَوعظةً بليغةً وَجِلتْ منها القلوبُ، وذَرَفتْ منها العيونُ، فقيل: يا رسول الله، وعظتَنَا موعظةَ مُودِّعٍ فاعهد إلينا بعهد. فقال: «عليكم بتقوى الله، والسمع والطاعة، وإن عبدًا حبشيًّا، وسترون من بعدي اختلافًا شديدًا، فعليكم بسنتي وسنة الخلفاء الراشدين المهديين، عَضُّوا عليها بالنواجِذ، وإياكم والأمور المحدثات، فإن كل بدعة ضلالة».
इरबाज़ बिन सारिया से रिवायत है, वह कहते हैं : एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे बीच खड़े हुए और ऐसा प्रभावशाली वक्तव्य रखा कि हमारे दिल दहल गए और आँखें बह पड़ीं। अतः किसी ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने हमें एक विदाई के समय संबोधन करने वाले की तरह संबोधित किया है। अतः आप हमें कुछ वसीयत करें। तब आपने कहा : "तुम अल्लाह से डरते रहना और अपने शासकों के आदेश सुनना तथा मानना। चाहे शासक एक हबशी ग़ुलाम ही क्यों न हो। तुम मेरे बाद बहुत ज़्यादा मतभेद देखोगे। अतः तुम मेरी सुन्नत तथा नेक और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत पर चलते रहना। इसे दाढ़ों से पकड़े रहना। साथ ही तुम दीन के नाम पर सामने आने वाली नई-नई चीज़ों से भी बचे रहना। क्योंकि हर बिदअत (दीन के नाम पर सामने आने वाली नई चीज़) गुमराही है।
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
एक दिन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों को संबोधित किया। संबोधन इतना प्रभावशाली था कि उससे लोगों के दिल दहल गए और आँखें बह पड़ीं। यह देख आपके साथियों ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा प्रतीत होता है कि यह विदाई के समय का संबोधन है। क्योंकि उन्होंने देखा कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने संबोधन के समय अपना दिल निकाल कर रख दिया। अतः उन्होंने आपसे कुछ वसीयत करने को कहा, ताकि आपके बाद उसे मज़बूती से पकड़े रहें। चुनांचे आपने कहा : मैं तुमको सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह से डरने की वसीयत करता हूँ। यहाँ यह याद रहे कि अल्लाह से डरने का मतलब है, उसकी अनिवार्य की हुई चीज़ों का पालन करना और उसकी हराम की हुई चीज़ों से दूर रहना। इसी तरह मैं तुमको शासकों के आदेश सुनने एवं मानने की वसीयत करता हूँ। चाहे तुम्हारा शासक कोई हबशी गुलाम ही क्यों न हो। यानी एक मामूली से मामूली इन्सान भी अगर तुम्हारा शासक बन जाए, तो तुम उससे दूर मत भागो बल्कि तुम उसकी बात मानो, ताकि फ़ितने सर न उठा सकें। क्योंकि तुममें से जो लोग जीवित रहेंगे, वह बहुत सारा मतभेद देखेंगे। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों को इस मतभेद से निकलने का रास्ता बताया। वह यह है कि आपकी सुन्नत तथा आपके बाद शासन संभालने वाले और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण, अबू बक्र सिद्दीक़, उमर बिन ख़त्ताब, उसमान बिन अफ़्फ़ान और अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहुम की सुन्नत को मज़बूती से पकड़कर रखा जाए। आपने इसे दाढ़ों से पकड़ने की बात कही है। यानी हर हाल में सुन्नत का पालन किया जाए और उसे पूरी ताक़त से पकड़कर रखा जाए। उसके बाद आपने उनको दीन के नाम पर सामने आने वाली नई चीज़ों से सावधान किया। क्योंकि दीन के नाम पर सामने आने वाली हर नई चीज़ गुमराही है।
फ़ायदे
- सुन्नत को मज़बूती से पकड़ने और उसका अनुसरण करने का महत्व।
- उपदेश देने और दिलों को नर्म करने पर ध्यान।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बाद शासन संभालने वाले और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण यानी अबू बक्र सिद्दीक़, उमर फ़ारूक़, उसमान बिन अफ़्फ़ान और अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहुम के अनुसरण का आदेश।
- दीन के नाम पर नई चीज़ें अविष्कार करने की मनाही और यह कि दीन के नाम पर सामने आने वाली हर नई चीज़ बिदअत है।
- मुसलमानों का शासन संभालने वाले शासकों की बात सुनना तथा मानना ज़रूरी है, जब तक वे किसी गुनाह के काम का आदेश न दें।
- हर समय और हर हाल में अल्लाह का भय रखने का महत्व।
- इस उम्मत में मतभेद सामने आना है और जब मतभेद सामने आए, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत की ओर लौटना ज़रूरी है।
हवाला
الأربعون النووية (ص: 89) (ح28)، سنن أبي داود (7/ 16) (4607)، سنن الترمذي (4/ 408) (2676)، سنن ابن ماجه (1/ 28) (42)، مسند أحمد (28/ 367) (17142)، تحفة الأحوذي (7/ 366)، عون المعبود وحاشية ابن القيم (12/ 235)، شرح الأربعين النووية للعثيمين (ص: 278).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ: «سَيَكُونُ فِي آخِرِ أُمَّتِي أُنَاسٌ يُحَدِّثُونَكُمْ مَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ وَلَا آبَاؤُكُمْ، فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मेरी उम्मत के आख़िर में ऐसे लोग पैदा हो जाएँगे, जो ऐसी बातें बताएँगे, जो न तुमने सुनी होगी और न तुम्हारे बाप-दादाओं ने सुनी होगी। अतः तुम उनसे बचकर एवं सावधान रहना।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि आपकी उम्मत के आख़िर में ऐसे लोग पैदा हो जाएँगे, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के हवाले से गढ़कर झूठी बातें बताएँगे और ऐसी बीतें कहेंगे, जो उनसे पहले किसी ने कही नहीं होगी। वह सर-ए-आम झूठी हदीसें बयान करते फिरेंगे। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आदेश दिया है कि हम इस प्रकार के लोगों से दूर रहें, उनके साथ उठने-बैठने से बचें और उनकी बात न सुनें कि कहीं ऐसा न हो कि उनकी बातई हुई झूठी बातें दिलों में बैठ जाएँ और उनसे दामन छुड़ाया न जा सके।
फ़ायदे
- इसमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी होने की एक बहुत बड़ी निशानी बयान की गई है। आपने अपनी उम्मत के अंदर सामने आने वाली एक बात की सूचना दी, जो उसी तरह सामने आ गई, जैसे आपने बताई थी।
- अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के हवाले से तथा दीन-ए-इस्लाम के बारे में कोई झूठी बात गढ़कर कहने वाले से दूर रहना और उनकी बात न सुनना ज़रूरी है।
- इसमें सही तथा साबित होने की पुष्टि किए बिना हदीसों को ग्रहण करने तथा फैलाने से सावधान किया गया है।
हवाला
صحيح مسلم (1/ 12) (6)، قرة عين المحتاج في شرح مقدمة صحيح مسلم بن الحجاج (2/ 8).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبدِ الله بن عمرو رضي الله عنهما قال: كنتُ أكتبُ كلَّ شيءٍ أسمعُه من رسولِ الله صلَّى الله عليه وسلم أُريدُ حفْظَه، فنهتْني قريشٌ، وقالوا: أتكْتبُ كلَّ شيءٍ تَسمَعُه من رسول الله صلَّى الله عليه وسلم، ورسولُ الله صلَّى الله عليه وسلم بَشَرٌ يتكلَّمُ في الغضَبِ والرِّضا؟ فأمسَكتُ عن الكتاب، فذكرتُ ذلك لرسول الله صلَّى الله عليه وسلم، فأومأ بإصبَعِه إلى فيه، فقال: «اكتُبْ، فوالذي نفسي بيدِه، ما يَخرُجُ منه إلا حقٌّ».
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुनी हुई हर बात को इस इरादे से लिख लिया करता था कि वह सुरक्षित रह जाए। लेकिन मुझे इससे क़ुरैश ने मना कर दिया और कहा कि क्या तुम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुनी हुई हर बात को लिख लिया करते हो, जबकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक इन्सान हैं, जो क्रोध तथा प्रसन्नता की अवस्था में बात करते हैं? अतः मैंने लिखना बंद कर दिया और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने इसका ज़िक्र किया तो आपने अपनी उंगली से अपने मुँह की ओर इशारा किया और फ़रमाया : "तुम लिखा करो। उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, इस (मुंह) से केवल सत्य ही निकलता है।"
इसे अबू दावूद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुनी हुई हर बात को लिख लिया करता था, ताकि उसे लिखित रूप में सुरक्षित रखा जा सके। लेकिन क़ुरैश के कुछ लोगों ने मुझे इससे मना किया और कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक इन्सान हैं और प्रसन्नता तथा क्रोध दोनों हालतों में बात करते हैं। हो सकता है कि कभी आप ग़लती भी कर बैठते हों। (इसलिए आपकी हर बात को लिखा मत करो।) चुनांचे मैंने लिखना बंद कर दिया।
फिर मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने उनकी इस बात का ज़िक्र किया, तो आपने अपने मुँह की ओर इशारा करते हुए कहा कि; उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है! इस मुंह से हर हाल में सत्य ही निकलता है। रज़ामंदी की अवस्था में भी और क्रोध की अवस्था में भी।
खुद अल्लाह तआला ने अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में फ़रमाया है : "और न वह अपनी इच्छा से बोलता है। वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।" [सूरा नज्म 3-4]
फ़ायदे
- इस बात की दूर-दूर तक भी गुंजाइश नहीं है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अल्लाह का संदेश पहुँचाने में कोई ग़लती हो। न तो प्रसन्नता की अवस्था में और न क्रोध की अवस्था में।
- सहाबा का पूरा प्रयास रहता था कि सुन्नत की सुरक्षा की जाए और उसे दूसरों तक पहुँचाया जाए।
- किसी मसलहत (अच्छे परिणाम) के लिए, जैसे किसी बात में ताकीद पैदा करने के लिए, क़सम की मांग के बिना भी क़सम खाई जा सकती है।
- ज्ञान को लिख लेना उसकी सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन है।
हवाला
سنن أبي داود (5/ 489) (3646)، شرح سنن أبي داود للعباد (412/ 21).
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com