सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

जो व्यक्ति मेरे हवाले से कोई बात बताए और उसे लगता हो कि वह झूठ है, तो वह झूठों में से एक है।

عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ وَالْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ رضي الله عنهما قَالَا: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ حَدَّثَ عَنِّي بِحَدِيثٍ يُرَى أَنَّهُ كَذِبٌ، فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبِينَ».
समुरा बिन जुंदुब और मुग़बीरा बिन शोबा रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, दोनों कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो व्यक्ति मेरे हवाले से कोई बात बताए और उसे लगता हो कि वह झूठ है, तो वह झूठों में से एक है।"
इस ह़दीस़ को मुस्लिम ने अपने मुक़द्दमे (प्रस्तावना) में रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो व्यक्ति आपके हवाले से कोई हदीस बयान करे और वह जानता हो या उसे लगता हो कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर इस हदीस की निस्बत झूठी है, तो बयान करने वाला भी इस झूठ में इसे पहली बार बोलने वाले का शरीक है।

फ़ायदे
  1. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से नक़ल की गई हदीसों की छानबीन करना और उन्हें रिवायत करने से पहले उनके सहीह होने के बारे में आश्वस्त हो जाना ज़रूरी है।
  2. झूठ बोलने वाले के साथ-साथ उसे नक़ल करने और फैलाने वाला भी झूठा है।
  3. किसी हदीस के मनगढ़त होने का ज्ञान या प्रबल गुमान होने के बावजूद उसे नक़ल करना हराम है। हाँ, उससे सावधान करने के लिए नक़ल किया जाए, तो बात अलग है।
हवाला

صحيح مسلم (1/ 8).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
सुन्नत का महत्व एवं गुरुता

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com