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तशरीह के साथ हदीसें

जिसने अपने भाई को एक साल तक छोड़े रखा, मानो उसने उसका ख़ून बहाया

عن أبي خِراش حَدْرَدِ بن أبي حَدْرَدٍ الأسْلَمِي رضي الله عنه مرفوعاً: «من هَجَر أخَاه سَنَة فهو كَسَفْكِ دَمِهِ».
अबू ख़िराश हदरद बिन अबू हदरद असलमी (रज़ियल्लाहु अनहु) से मरफ़ूअन रिवायत है: जिसने अपने भाई को एक साल तक छोड़े रखा, मानो उसने उसका ख़ून बहाया।
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जिसने अपने भाई से बिना किसी शरई कारण के संबंध तोड़ लिया और इस सिलसिले को एक वर्ष तक जारी रखा, वह उसी प्रकार दंड का हक़दार बन जाता है, जिस प्रकार उसकी हत्या कर देने से दंड का हक़दार बनता है। यह दंड क्या हो, इसका निर्णय क़ाज़ी यानी शरई न्यायाधीश अपने अवलोकन के आधार पर करेगा। दंड का उद्देश्य उसे इस अपराध से रोकना और अन्य लोगों को सचेत करना है। लेकिन यदि किसी ने किसी शरई उद्देश्य के कारण संबंध तोड़ा, तो बिदअतियों एवं अवज्ञाकारियों से उस समय तक संबंध तोड़कर रखना चाहिए, जब तक तौबा न कर लें एवं सत्य की ओर लौट न आएँ, चाहे यह सिलसिला जितना भी लंबा हो।

हवाला

كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار ، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. رياض الصالحين، تأليف : محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي. شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ سلسلة الأحاديث الصحيحة ، تأليف: محمد ناصر الدين الألباني ، الناشر: مكتبة المعارف للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة: الأولى، "لمكتبة المعارف".

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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com