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तशरीह के साथ हदीसें

तुम जायदाद मत बनाओ, अन्यथा दुनिया की चाहत में पड़ जाओगे।

عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ مَسْعُودٍ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لاَ تَتَّخِذُوا الضَّيْعَةَ فَتَرْغَبُوا فِي الدُّنْيَا».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुम जायदाद मत बनाओ, अन्यथा दुनिया की चाहत में पड़ जाओगे।"
इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर ह़सन)
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जायदाद, बाग़ और खेत रखने से मना किया है, क्योंकि यह चीज़ें इन्सान को आख़िरत से हटाकर दुनिया में लीन करने का कारण बनती हैं।

फ़ायदे
  1. दुनिया इतना एकत्र करने की मनाही कि आख़िरत से विमुखता का कारण बन जाए।
  2. इस हदीस में जीविका कमाने के साधन अपनाने से नहीं, बल्कि इस दुनिया में लीन होकर आख़िरत को भूल जाने से मना किया गया है।
  3. सिंधी कहते हैं : इस हदीस का मतलब है : तुम जायदाद बनाने में इतना मग्न मत हो जाओ कि आख़िरत को याद करना ही भूल जाओ।
हवाला

سنن الترمذي (4/ 155) (2328). مسند أحمد (6/ 54) (3579). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (331/7). شرح رياض الصالحين لابن عثيمين (375/3).

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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com