नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में अब्दुल्लाह नाम का एक आदमी था, जिसे हिमार का लक़ब दिया गया था। वह अपनी कुछ बातों से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को हंसाया करता था और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे शराब पीने पर कोड़े भी मारे थे। फिर एक दिन उसे शराब पीने की हालत में लाया गया तो आपके हुक्म पर उसे कोड़े मारे गए। इसी दरमियान उपस्थित लोगों में से एक ने उसे बुरा-भला कहा और बोला : इसपर अल्लाह की लानत हो! इसे कितनी बार शराब पीने की स्थिति में लाया जा चुका है?! तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : इसे अल्लाह की रहमत से दूर होने की बद-दुआ न दो, क्योंकि अल्लाह की क़सम, मैं तो बस यही जानता हूँ कि यह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है।
- किसी निषिद्ध कार्य को कर बैठने और उसे करने वाले के दिल में अल्लाह और उसके रसूल के प्रेम के मौजूद होने के बीच कोई टकराव नहीं है। क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि उल्लिखित व्यक्ति, उससे वह गुनाह हो जाने के बावजूद, अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है।
- बड़ा गुनाह (कबीरा गुनाह) करने वाला यदि अपने किसी गुनाह पर अड़े रहकर मर जाए, तो वह अल्लाह की इच्छा के अधीन है; अल्लाह चाहे तो उसे क्षमा कर दे और चाहे तो उसे यातना दे, और अह्ले-इस्लाम में से कोई भी जहन्नम में सदैव नहीं रहेगा।
- शराब पीने वाले किसी निश्चित व्यक्ति पर लानत करना मकरूह है; क्योंकि इस बात की संभावना है कि कोई रुकावट उस तक लानत के पहुँचने में बाधा बन जाए; और इसलिए भी कि किसी विशेष व्यक्ति पर लानत करना और उसके विरुद्ध बद-दुआ करना उसे अपनी सरकशी पर अड़े रहने पर उकसा सकता है, या उसे तौबा की स्वीकृति से निराश कर सकता है।
- इस अवगुण वाले अनिर्दिष्ट व्यक्ति पर लानत भेजना जायज़ है।
صحيح البخاري (8/ 158) (6780). إرشاد الساري لشرح صحيح البخاري (9/ 452). البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (29/ 394).