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तशरीह के साथ हदीसें

मस्जिदों के आदाब

34 हदीसें

लोग क़ुबा में अभी सुब्ह की नमाज़ पढ़ ही रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति उनके पास आकर बोलाः आज रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर क़ुरआन की आयत उतरी है और आपको क़िब्ला बदलने का आदेश दिया गया है, अतः तुम काबे की ओर मुँह कर लो

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: «بَينَمَا النَّاس بِقُبَاء في صَلاَة الصُّبحِ إِذْ جَاءَهُم آتٍ، فقال: إِنَّ النبِيَّ صلى الله عليه وسلم قد أُنزِل عليه اللَّيلةّ قرآن، وقد أُمِرَ أن يَستَقبِل القِبْلَة، فَاسْتَقْبِلُوهَا، وكانت وُجُوهُهُم إلى الشَّام، فَاسْتَدَارُوا إِلى الكَّعبَة».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़िल्लाहु अनहु) कहते हैंः लोग क़ुबा में अभी सुब्ह की नमाज़ पढ़ ही रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति उनके पास आकर बोलाः आज रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर क़ुरआन की आयत उतरी है और आपको क़िब्ला बदलने का आदेश दिया गया है, अतः तुम काबे की ओर मुँह कर लो। उस समय लोगों का मुँह शाम की ओर था, परन्तु एलान सुनते ही सभी ने काबे की ओर मुँह कर लिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

एक सहाबी मदीने से निकलकर मदीने के बाहरी क्षेत्र में स्थित क़ुबा मस्जिद पहुँचे, तो देखा कि वहाँ के लोगों को क़िबला बदल जाने की सूचना नहीं मिली है और वे अभी तक पहले क़िबले की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ रहे हैं। अतः, उन्हें क़िबला बदलकर काबा के क़िबला होने की बात कही और बताया कि इस संबंध में क़ुरआन की आयत भी उतरी है। उनका इशारा इस आयत की ओर थाः {हम देख रहे हैं कि तुम आकाश की ओर अपना चेहरा कर रहे हो। हम निश्चय ही तुम्हें एक ऐसे क़िबले की ओर फेर देंगे, जिससे तुम प्रसन्न हो जाओगे। तो अपना मुँह मस्जिद-ए-हराम की ओर कर लो और जहाँ भी रहो, उसी की ओर मुँह करो और निश्चय जो लोग पुस्तक वाले हैं, जानते हैं कि यही उनके रब की ओर से है और सत्य है, और अल्लाह तुम्हारे कर्मों से अचेत नहीं है।} [सूरा अल-बक़राः 144] उन्होंने यह भी बताया कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने काबा की ओर मुँह कर लिया है। चुनांचे सहाबा की सूझबूझ और समझदारी देखिए कि उन्होंने बिना समय गँवाए पहले क़िबला बैतुल मक़दिस की ओर से मुँह फेरकर दूसरे क़बला काबा की ओर मुँह कर लिया।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تنبيه الأفهام، للعثيمين -طبعة مكتبة الصحابة الامارات -مكتبة التابعين- القاهرة- الطبعة الأولى 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «سَوُّوا صُفُوفَكُمْ، فَإِنَّ تَسْوِيَةَ الصَّفِّ مِنْ تَمَامِ الصَّلَاةِ».
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ियों को इस बात का आदेश दे रहे हैं कि अपनी सफ़ें बराबर कर लिया करें। कोई किसी से आगे रहे, न पीछे। सफ़ों को बराबर करना नमाज़ को संपूर्ण बनाने वाली चीज़ों में से है, जबकि उनका टेढ़ा रह जाना नमाज़ में कमी पैदा करता है।

फ़ायदे
  1. इन्सान को उन सभी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए, जो नमाज़ को संपूर्ण बनाएँ और उसे कमियों से बचाएं।
  2. यहाँ शिक्षा के संबंध में अल्लह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हिकमत सामने आती है कि आपने आदेश के साथ उसका निहित कारण भी बता दिया, ताकि आदेश की हिकमत स्पष्ट हो जाए और इन्सान के अंदर आज्ञापालन का जज़्बा पैदा हो।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 145) (723). صحيح مسلم (1/ 324) (433). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص127). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 161). الإفهام في شرح عمدة الأحكام، لابن باز (ص173).

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एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: «جاء أعرابِيُّ، فبَالَ في طَائِفَة المَسجد، فَزَجَرَه النَّاسُ، فَنَهَاهُمُ النبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَلمَّا قَضَى بَولَه أَمر النبي صلى الله عليه وسلم بِذَنُوب من ماء، فَأُهرِيقَ عليه».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा। यह देख, लोग उसे डाँटने लगे, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने लोगों को इससे रोका। फिर जब वह पेशाब कर चुका, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बालटी पानी लाने का आदेश दिया और उसे पेशाब के ऊपर बहा दिया गया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

देहात के लोग चूँकि अल्लाह की ओर से मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतरने वाली शरीयत को सीख नहीं सके थे, इसलिए उनके अंदर अज्ञानता और उद्दंडता जैसी चीज़ें मौजूद थीं। एक दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने साथियों के साथ मस्जिदे नबवी में बैठे थे कि एक देहाती आया और उसे एक साधारण स्थान समझकर उसके एक किनारे में पेशाब करने लगा। सहाबा के दिल में चूँकि मस्जिद का बड़ा सम्मान था, इसलिए उसका यह काम उनपर भारी पड़ा। अतः, उन्होंने उसे पेशाब करते देख डाँटना शुरू कर दिया। लेकिन, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने, जो आदर्श व्यवहार के स्वरूप थे और खुशखबरी देने वाले तथा आसानी पैदा करने वाले के रूप में आए थे, उन्हें डाँटने से मना किया। क्योंकि आप अरबों का स्वभाव जानते थे। साथ ही डाँटने से उसका शरीर अथवा कपड़ा गंदा हो सकता था और अचानक पेशाब रुकने के कारण उसे नुकसान भी पहुँच सकता था। यह भी उद्देश्य सामने था कि डाँटने के बजाय बाद में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब उसे समझाएं तो वह आप की बात क़बूल करे। आपने आदेश दिया कि उसके पेशाब के स्थान को एक बालटी पानी बहाकर साफ कर लिया जाए।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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तुम अपनी सफ़ों को ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे बीच मतभेद डाल देगा (दूसरा अर्थः तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा)।

عن النعمان بن بشير رضي الله عنه مرفوعاً: «لَتُسَوُّنَّ صُفُوفَكُم أو لَيُخَالِفَنَّ الله بين وُجُوهِكُم». وفي رواية: «كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يُسَوِّي صُفُوفَنَا، حتى كَأَنَّمَا يُسَوِّي بها القِدَاح، حتَّى إِذَا رأى أَنْ قد عَقَلْنَا عَنهُ، ثم خَرَج يومًا فَقَام، حتَّى إِذَا كاد أن يُكَبِّرُ، فَرَأَى رَجُلاً بَادِيًا صَدرُهُ، فقال: عِبَادَ الله، لَتُسَوُّنَّ صُفُوفَكُم أو لَيُخَالِفَنَّ الله بين وُجُوهِكُم».
नोमान बिन बशीर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः ''तुम अपनी सफ़ों को ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा (दूसरा अर्थः तुम्हारे दिलों में मतभेद डाल देगा)।'' और एक रिवायत मे हैः ''रसूलुल्लाह (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारी सफ़ें सीधी करवाया करते थे, यहाँ तक कि यह मालूम होता कि गोया आप उनसे तीर सीधा कर रहे हैं। यहाँ तक कि आप को अनुभव हुआ कि हमने आपसे यह मसला समझ लिया है। फिर एक दिन आप नमाज़ के लिए आए और खड़े हुए। फिर तकबीर कहने ही वाले थे कि एक आदमी को देखा, कि उसका सीना सफ़ से बाहर निकला हुआ है। तो आपने फ़रमायाः "अल्लाह के बंदो, तुम अपनी सफ़ों ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात की ताकीद की है कि अगर सफ़ों को बराबर नहीं किया गया, तो अल्लाह उन लोगों के मतो में विभेद डाल देगा, जिनकी सफ़ें टेढ़ी रह गईं और उनको सीधी करने पर ध्यान नहीं दिया। अतः, सफ़ में कोई आगे रहा तो कोई पीछे और नमाज़ियों के बीच में खाली स्थान भी छोड़ दिए। प्यारे रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जहाँ अपने साथियों को बताकर सिखाते थे, वहीं अमली तौर पर भी उन्हें प्रशिक्षण देते थे। चुनांचे आप हर नमाज़ के समय उनकी सफ़ें खुद अपने हाथों से सीधी करते रहे, यहाँ तक कि जब आपको लगा कि वे अच्छी तरह से समझ गए हैं, तो इस सिलसिले को बंद कर दिया। फिर एक दिन नमाज़ के समय अपने एक साथी को देखा कि उनका सीना सफ़ से बाहर निकला हुआ है, तो नाराज़ हुए और कहाः "तुम अपनी सफ़ें ज़रूर सीधी रखो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे मतों में विभेद पैदा कर देगा।"

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426ه. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم: «اللهُمَّ لَا تَجْعَلْ قَبْرِي وَثَنًا، لَعَنَ اللهُ قَوْمًا اتَّخَذُوا قُبُورَ أَنْبِيَائِهِمْ مَسَاجِدَ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना। उस क़ौम पर अल्लाह का बड़ा भारी प्रकोप हुआ, जिसने अपने नबियों की क़ब्रों को मस्जिदों में परिवर्तित कर दिया।"
इसे अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने रब से दुआ की है कि आपकी क़ब्र को बुत न बनने दे कि लोग उसका सम्मान करके और उसकी ओर मुँह करके सजदा करके उसकी इबादत करने लगें। फिर आपने बताया कि अल्लाह ने उन लोगों को अपनी रहमत से दूर कर दिया है, जिन्होंने अपने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना डाला। क्योंकि उनको मस्जिद बनाना उनकी इबादत करने तथा उनके साथ आस्था स्थापित करने का कारण है।

फ़ायदे
  1. नबियों तथा नेक लोगों की क़ब्रों के बारे में शरई सीमा से आगे बढ़ना दरअसल अल्लाह को छोड़ उनकी इबादत करना है। इसलिए शिर्क के साधनों से बचना ज़रूरी है।
  2. क़ब्र के पास उनको सम्मान देने और उनके पास इबादत करने के लिए जाना जायज़ नहीं है, चाहे उनके अंदर दफ़न इन्सान अल्लाह का कितना ही क़रीबी क्यों न हो।
  3. क़ब्रों के ऊपर मस्जिद बनाना हराम है।
  4. क़ब्रों के पास नमाज़ पढ़ना हराम है, चाहे वहाँ मस्जिद न भी बनाई जाए। हाँ, जिसपर जनाज़े की नमाज़ न पढ़ी गई हो तो उसकी क़ब्र पर जनाज़े की नमाज़ पढ़न इस मनाही के दायरे से बाहर है,।
हवाला

مسند أحمد (12/ 314) (7358). فتح المجيد شرح كتاب التوحيد، لعبد الرحمن التميمي (1/ 434). القول المفيد على كتاب التوحيد، لمحمد بن عثيمين (1/ 434). الملخص في شرح كتاب التوحيد، لصالح الفوزان (ص178). الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد القرعاوي (ص194). التمهيد لشرح كتاب التوحيد، لصالح آل الشيخ (ص51). مشكاة المصابيح، للتبريزي (1/ 234).

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मेरी क़ब्र को मेला स्थान न बनाना और न अपने घरों को क़ब्रिस्तान बनाना। हाँ, मुझपर दरूद भेजते रहना। क्योंकि तुम जहाँ भी रहो, तुम्हारा सलाम मुझे पहुँच जाएगा।

عن علي بن الحسين: "أنه رأى رجلا يجيء إلى فُرْجَةٍ كانت عند قبر النبي صلى الله عليه وسلم فيدخل فيها فيدعو، فنهاه، وقال: ألا أحدثكم حديثا سمعته من أبي عن جدي عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:« لا تتخذوا قبري عيدا، ولا بيوتكم قبورا، وصلوا علي، فإن تسليمكم يبلغني أين كنتم».
अली बिन हुसैन से रिवायत है कि उन्होंने एक व्यक्ति को नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की क़ब्र के निकट दीवार के एक छिद्र से अंदर जाकर दुआ करते देखा, तो उसे मना किया और फ़रमायाः क्या मैं तुम्हें वह हदीस न बताऊँ, जो मैंने अपने पिता के वास्ते से अपने दादा से सुनी है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "मेरी क़ब्र को मेला स्थान न बनाना और न अपने घरों को क़ब्रिस्तान बनाना। हाँ, मुझपर दरूद भेजते रहना। क्योंकि तुम जहाँ भी रहो, तुम्हारा सलाम मुझे पहुँच जाएगा।"
इसे इब्ने अबी शैबा ने रिवायत किया है।दर्जाविभिन्न सनदों और शवाहिद के आधार पर सह़ीह़
तशरीह

अली बिन हुसैन हमें बता रहे हैं कि उन्होंने एक व्यक्ति को अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की क़ब्र के पास दुआ करते देखा, तो उसे इससे रोका तथा प्रमाण के तौर पर वह हदीस प्रस्तुत की, जिसमें आपकी कब्र के बार-बार दर्शन करने तथा घरों को अल्लाह की इबादत एवं ज़िक्र से वंचित रखने से मना किया गया है और ऐसे घरों को क़ब्रिस्तान के समान कहा गया है तथा यह बताया गया है कि मुसलमान चाहे जहाँ भी हो, उसका सलाम आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को पहुँच जाता है।

हवाला

كتاب التوحيد، للإمام محمد بن عبد الوهاب، ت: د. دغش العجمي، مكتبة أهل الأثر, الطبعة الخامسة, 1435ه. الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي, ت: محمد بن أحمد سيد, مكتبة السوادي، الطبعة: الخامسة، 1424ه. الملخص في شرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح الفوزان, دار العاصمة, الطبعة الأولى، 1422ه. مصنف ابن أبي شيبة، تحقيق: كمال يوسف الحوت، نشر: مكتبة الرشد - الرياض، الطبعة: الأولى، 1409ه. تحذير الساجد من اتخاذ القبور مساجد, الألباني, المكتب الإسلامي - الطبعة: الرابعة.

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बनू सलमा! तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे। तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे।

عن جابر رضي الله عنه قال: أراد بنو سلمة أن ينتقلوا للسكن قرب المسجد فبلغ ذلك رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال لهم: «إنه قد بلغني أنكم تُريدون أن تنتقلوا قُرب المسجد؟» فقالوا: نعم، يا رسول الله قد أردنا ذلك، فقال: «بَنِي سَلِمَة، دِيارَكُم، تُكتب آثارُكُم، ديارَكُم تُكتب آثاركُم». وفي رواية: «إن بكلِّ خَطْوَة درجة».
जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि बनू सलमा ने अपने रहने का स्थान बदलकर मस्जिदे नबवी के निकट आ जाने का इरादा कर लिया। इसकी सूचना अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मिली, तो फ़रमायाः "मुझे यह सूचना मिली है कि तुम मस्जिद के निकट आ जाना चाहते हो।" उन्होंने कहाः हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! हमने यह इरादा कर लिया है। आपने फ़रमायाः "बनू सलमा! तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे। तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे।" तथा एक रिवायत में हैः "हर क़दम के बदले में तुम्हारा एक दर्जा ऊँचा होगा।"
इसे बुखारी ने इन्हीं जैसे शब्दों के साथ रिवायत किया है । - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

كنوز رياض الصالحين، أ. د. حمد بن ناصر بن عبد الرحمن العمار، دار كنوز اشبيليا، الطبعة الأولى، 1430هـ. بهجة الناظرين، الشيخ: سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الكتاب غير نازل في الشاملة وحملته من المكتبة الوقفية، ولم أجد بيانات غير ما ذكرنا. نزهة المتقين، د. مصطفى سعيد الخن، د. مصطفى البغا، محي الدين مستو، علي الشرجبي، محمد أمين لطفي، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الأولى. 1397هـ - 1977م. شرح رياض الصالحين، الشيخ: محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن للنشر، طبع عام 1426هـ. رياض الصالحين، د. ماهر بن ياسين الفحل، الناشر: دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق - بيروت، الطبعة: الأولى، 1428هـ - 2007م. صحيح البخاري، محمد بن اسماعيل البخاري، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، المؤلف: مسلم بن الحجاج أبو الحسن القشيري، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت. شرح الزرقاني على موطأ الإمام مالك، المؤلف: محمد بن عبد الباقي بن يوسف الزرقاني، تحقيق: طه عبد الرءوف سعد، الناشر: مكتبة الثقافة الدينية - القاهرة، الطبعة: الأولى، 1424هـ - 2003م. موطأ الإمام مالك، المؤلف: مالك بن أنس بن مالك الأصبحي، صححه ورقمه وخرج أحاديثه وعلق عليه: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت - لبنان، عام النشر: 1406هـ - 1985م. سنن أبي داود، المؤلف: أبو داود سليمان بن الأشعث الأزدي، المحقق: محمد محيي الدين عبد الحميد، الناشر: المكتبة العصرية، صيدا - بيروت. صحيح أبي داود - الأم، المؤلف: محمد ناصر الدين الألباني، الناشر: مؤسسة غراس للنشر والتوزيع، الكويت، الطبعة الأولى، 1423هـ - 2002م. مسند الإمام أحمد بن حنبل، المؤلف: أبو عبد الله أحمد بن محمد بن حنبل الشيباني، المحقق: شعيب الأرناؤوط - عادل مرشد، وآخرون، إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى، 1421هـ - 2001م.

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मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों से रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों में वह थूक भी पाया, जो मस्जिद में फेंका गया हो और उसे साफ़ न किया गया हो।

عن أبي ذر رضي الله عنه قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم :«عُرِضَتْ عَلَيَّ أعمالُ أُمتي، حَسَنُهَا وسَيِّئُهَا فَوَجَدتُ في مَحَاسِنِ أَعْمَالِهَا الأَذَى يُمَاطُ عَنِ الطَّرِيقِ، ووَجَدتُ في مَسَاوِئِ أَعْمَالِهَا النُّخَاعَةُ تَكُونُ في المَسْجِدِ لا تُدْفَنُ».
अबू ज़र्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों में रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों में वह थूक भी पाया, जो मस्जिद में फेंका गया हो और उसे साफ़ न किया गया हो।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. - شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. الطبعة الأولى1418هـ. - صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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34 में से 8
34 हदीसें
  1. लोग क़ुबा में अभी सुब्ह की नमाज़ पढ़ ही रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति उनके पास आकर बोलाः आज रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर क़ुरआन की आयत उतरी है और आपको क़िब्ला बदलने का आदेश दिया गया है, अतः तुम काबे की ओर मुँह कर लो
  2. अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।
  3. एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा
  4. तुम अपनी सफ़ों को ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे बीच मतभेद डाल देगा (दूसरा अर्थः तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा)।
  5. ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
  6. मेरी क़ब्र को मेला स्थान न बनाना और न अपने घरों को क़ब्रिस्तान बनाना। हाँ, मुझपर दरूद भेजते रहना। क्योंकि तुम जहाँ भी रहो, तुम्हारा सलाम मुझे पहुँच जाएगा।
  7. बनू सलमा! तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे। तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे।
  8. मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों से रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों में वह थूक भी पाया, जो मस्जिद में फेंका गया हो और उसे साफ़ न किया गया हो।
  9. अल्लाह के निकट सबसे प्रिय स्थान मस्जिदें और सबसे अप्रिय स्थान, बाज़ार हैं।
  10. जो व्यक्ति हमारी मस्जिदों या बाज़ारों से गुज़रे तथा उसके हाथ में तीर हो तो उसके फल को अच्छी तरह पकड़ ले या उसके फल को अपनी मुठ्ठी में दबा ले, ताकि ऐसा न हो कि किसी मुसलमान को उसकी नोक लग जाए।
  11. मस्जिदें पाख़ाना- पेशाब के लिए नहीं होती हैं, बल्कि अल्लाह के स्मरण तथा क़ुरआन के पठन- पाठन के लिए होती हैं
  12. एक व्यक्ति ने मस्जिद में कुछ ढूँढते हुए कहा: कौन लाल ऊँट को पहचानता है। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: तुम्हें न मिले, क्योंकि मस्जिदें केवल उन कामों के लिए होती हैं जिनके लिए वह बनाई गई हैं।
  13. यदि तुम दोंनों इसी शहर के होते तो मैं तुम्हें कष्ट देता, तुम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मस्जिद में आवाज़ ऊँची करते हो
  14. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने महल्लों में मस्जिदें बनाने तथा उन्हें पवित्र एवं स्वच्छ और सुगंधित रखने का आदेश दिया है।
  15. वे ऐसे लोग हैं कि उन लोगों के अंदर जब कोई सदाचारी बंदा अथवा सदाचारी व्यक्ति मर जाता, तो उसकी कब्र के ऊपर मस्जिद बना लेते
  16. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर कुछ सवार भेजे, जो बनू हनीफ़ा के एक आदमी को पकड़ लाए। उस आदमी का नाम सुमामा बिन उसाल था। लोगों ने उसे मस्जिद के एक खंबे से बाँध दिया।
  17. मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल्लाह! पवित्र आत्मा (जिबरील) के द्वारा तू इसकी सहायता कर।?" तो उन्होंने उत्तर दिया : मैं अल्लाह को गवाह बनाकर कहता हूँ कि हाँ, आपने ऐसा कहा था।
  18. जो किसी व्यक्ति को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते हुए सुने, तो कहे : अल्लाह उसको तुम्हें वापस न लौटाए। क्योंकि मस्जिदें इसके लिए नहीं बनी हैं।
  19. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : जब किसी व्यक्ति को मस्जिद में क्रय-विक्रय करते हुए देखो, तो कहो : अल्लाह तुम्हारे व्यापार में लाभ न दे। और जब किसी को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते देखो, तो कहो : अल्लाह उसे तुम्हें वापस न करे।
  20. मस्जिदों में न तो हद लागू की जाएगी और उनके अंदर क़िसास लिया जाएगा।
  21. ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके लिए मस्जिद में एक ख़ेम लगा दिया था, ताकि निकट से उनकी देखभाल कर सकें।
  22. "जाने भी दो अबू बक्र! ये ईद के दिन हैं।" मालूम रहे कि वे मिना के दिन थे।
  23. आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं : वह मेरे पास आकर बातें किया करती थी और जब भी मेरे पास आती, यह शेर ज़रूर पढ़ती। कमरबंद का दिन अल्लाह की अजीब क़ुदरतों में से है। उसने मुझे कुफ़्र के देश से मुक्ति प्रदान की।
  24. मस्जिद में थूकना पाप है और उसका कफ़्फ़ारा यह है कि उसे दफ़न कर दिया जाए।
  25. क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक कि लोग मस्जिदों के बारे में गर्व न करने लगें।
  26. मुझे ऊँची-ऊँची मस्जिदें निर्माण करने का आदेश नहीं दिया गया है।
  27. जिसने अल्लाह के लिए कोई घर बनाया, अल्लाह जन्नत में उसके लिए उसी जैसा घर बनाएगा।
  28. मेरी इस मस्जिद में पढ़ी गई एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम को छोड़ अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई एक हज़ार नमाज़ों से बेहतर है।
  29. जब तुममें से कोई मस्जिद के अंदर प्रवेश करे, तो बैठने से पहले दो रकातें पढ़ ले।
  30. जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो यह दुआ पढ़े : "اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ" (ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के द्वार खोल दे) और जब मस्जिद से निकले, तो यह दुआ पढ़े : "اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ" (ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरा अनुग्रह माँगता हूँ।)
  31. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता
  32. अल्लाह की बंदियों को अल्लाह की मस्जिदों से न रोको, लेकिन वे बिना सुगंध लगाए निकलें।
  33. जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो नबी पर सलाम भेजे और यह दुआ पढ़े : اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
  34. सात प्रकार के लोग ऐसे हैं, जिनको अल्लाह उस दिन अपने अर्श के नीचे छाया देगा, जिस दिन उसकी छाया के अतिरिक्त कोई छाया नहीं होगी

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com