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तशरीह के साथ हदीसें

क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक कि लोग मस्जिदों के बारे में गर्व न करने लगें।

عَنْ أَنَسٍ رَضيَ اللهُ عنه أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يَتَبَاهَى النَّاسُ فِي الْمَسَاجِدِ».
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक कि लोग मस्जिदों के बारे में गर्व न करने लगें।"
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن أبي داود (1/ 337) (449). سنن النسائي (2/ 32) (689). سنن ابن ماجه (1/ 475) (739)،. توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، لعبد الله البسام (2/ 137). فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (1/ 621).

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मस्जिदों के आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com