تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، اعتنى بإخراجه عبدالسلام بن عبد الله السليمان، الرسالة، بيروت، الطبعة: الأولى 1427هـ، 2006م. توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة 1423هـ، 2003م. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، عبد الله صالح الفوزان، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى 1428هـ، 1432هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.
तशरीह के साथ हदीसें
मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल्लाह! पवित्र आत्मा (जिबरील) के द्वारा तू इसकी सहायता कर।?" तो उन्होंने उत्तर दिया : मैं अल्लाह को गवाह बनाकर कहता हूँ कि हाँ, आपने ऐसा कहा था।
عن أبي هريرة أنَّ عمر مرَّ بِحَسَّان رضي الله عنهم وهو يَنْشُدُ الشِّعر في المسجد، فَلَحَظَ إليه، فقال: قد كُنْتُ أَنْشُد، وفيه من هو خير مِنْك، ثمَّ الْتَفَتَ إلى أبي هريرة، فقال: أَنْشُدُكَ الله، أَسَمِعْتَ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «أَجِبْ عَنِّي، اللَّهُمَّ أَيِّدْهُ بروح الْقُدُسِ»؟ قال: اللهمَّ نعم.
अबू हुरैरा से वर्णित है कि उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) हस्सान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के निकट से गुज़रे, जो मस्जिद में शेर पढ़ रहे थे, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उन्हें घूरकर देखा। इसपर उन्होंने कहा : मैं मस्जिद के अंदर उनकी उपस्थिति में भी शेर पढ़ता था, जो आपसे उत्तम थे। फिर अबू हुरैरा की ओर पलटे और कहाः मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल्लाह! पवित्र आत्मा (जिबरील) के द्वारा तू इसकी सहायता कर।?" तो उन्होंने उत्तर दिया : मैं अल्लाह को गवाह बनाकर कहता हूँ कि हाँ, आपने ऐसा कहा था।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com