अबू क़तादा सलमी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई मस्जिद के अंदर प्रवेश करे, तो बैठने से पहले दो रकातें पढ़ ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस बात की प्रेरणा दी है कि जो व्यक्ति किसी भी समय और किसी भी उद्देश्य से मस्जिद के अंदर प्रवेश करे, वह बैठने से पहले दो रकातें पढ़ ले। इन दोनों रकातों को तहिय्यतुल मस्जिद कहा जाता है।
फ़ायदे
मस्जिद में बैठने से पहले तहिय्यतुल मस्जिद के तौर पर दो रकात पढ़ना मुसतहब है।
यह आदेश उस व्यक्ति के लिए है, जो बैठना चाहे। जो व्यक्ति मस्जिद में प्रवेश करे और बैठने से पहले ही निकल जाए, वह इस आदेश के दायरे में नहीं आएगा।
जब कोई व्यक्ति मस्जिद में प्रवेश करे और उस समय लोग नमाज़ पढ़ रहे हों और वह उनके साथ जमात में शरीक हो गया, तो इन दो रकातों की ज़रूरत नहीं रह जाती।
हवाला
صحيح البخاري (1/ 96) (444)، صحيح مسلم (1/ 495) (714)، المفهم لما أشكل من تلخيص كتاب مسلم (2/ 352)، فتح الباري لابن رجب (3/ 274)، التوضيح (5/524)، البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (15/ 287).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com