साइब बिन यज़ीद -रज़ियल्लाहु अनहुमा- एक घटना के बारे में बता रहे हैं, जो उनकी उपस्थिति में घटी थी। हुआ यूँ कि उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- के ज़माने में दो व्यक्ति अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मस्जिद में आवाज़ ऊँची किए हुए थे। जब उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उनकी आवाज़ सुनी, तो उन्होंने साइब बिन यज़ीद को एक कंकर मारकर सचेत किया, और ऐसा इस लिए किया कि वह उन दोनों को उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- के पास लेकर आएं। साइब कहते हैं कि मैं दोनों को उनके पास लाया, तो उनसे पूछा कि तुम कहाँ से आए हो? दोनों ने उत्तर दिया : ताइफ़ से। इसपर फ़रमाया : यदि तुम मदीने के रहने वाले होते, तो मैं तुम्हें दंडित करता। तुम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मस्जिद में आवाज़ ऊँची करते हो! चूँकि दोनों मदीने के निवासी नहीं थे, इसलिए उनकी अनभिज्ञता को आधार बनाकर उनको क्षमा कर दिया। क्योंकि आम तौर पर इस प्रकार के लोगों को शरीयत की बहुत-सी बातें मालूम नहीं होतीं।
نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار ، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ رياض الصالحين، تأليف : محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ.