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जेबी साथी · 9 में से हिस्सा 6

ज़िंदगी के मौक़ों की दुआएँ

أَدْعِيَةُ الْحَاجَاتِ
इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

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ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

जेबी साथी · 09 में से 06
ज़िंदगी के मौक़ों की दुआएँ
أَدْعِيَةُ الْحَاجَاتِ
अदइयतुल-हाजात
जब ज़रूरत पड़े तब क्या कहें — बीमारी, ग़म, क़र्ज़, ख़ौफ़, ख़ुशी।
2 · परेशानी और बेचैनी
3 · बीमारी और बीमार
4 · ग़म और मौत
5 · क़र्ज़ और रिज़्क़
6 · निकाह और औलाद
7 · सफ़र और हिफ़ाज़त
8 · ग़ुस्सा, ख़ौफ़, फ़ैसला
सब सहीह या हसन हैं। अपने अल्फ़ाज़ में भी माँगें — वह भी सुन्नत है।
02परेशानी और बेचैनी
किसी भी मुसीबत में
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَرَبُّ الْأَرْضِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
ला इलाह इल्लल्लाहुल-अज़ीमुल-हलीम, ला इलाह इल्लल्लाहु रब्बुल-अर्शिल-अज़ीम, ला इलाह इल्लल्लाहु रब्बुस-समावाति व रब्बुल-अर्ज़ि व रब्बुल-अर्शिल-करीम
Lā ilāha illallāhul-‘Aẓīmul-Ḥalīm, lā ilāha illallāhu Rabbul-‘Arshil-‘Aẓīm, lā ilāha illallāhu Rabbus-samāwāti wa Rabbul-arḍi wa Rabbul-‘Arshil-Karīm
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, जो अज़मत वाला, बुर्दबार है; अर्श-ए-अज़ीम का रब; आसमानों का, ज़मीन का, और अर्श-ए-करीम का रब।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह — परेशानी की दुआ।
ग़म या फ़िक्र में
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-हम्मि वल-हज़न, वल-अज्ज़ि वल-कसल, वल-बुख़्लि वल-जुब्न, व ज़लइद-दैनि व ग़लबतिर-रिजाल
Allāhumma innī a‘ūdhu bika minal-hammi wal-ḥazan, wal-‘ajzi wal-kasal, wal-bukhli wal-jubn, wa ḍala‘id-dayni wa ghalabatir-rijāl
फ़िक्र, ग़म, बेबसी, सुस्ती, कंजूसी, बुज़दिली, क़र्ज़ के बोझ और लोगों के ग़लबे से पनाह।
बुख़ारी · सहीह
यूनुस की दुआ
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
ला इलाह इल्ला अन्त सुब्हानक इन्नी कुन्तु मिनज़-ज़ालिमीन
Lā ilāha illā Anta subḥānaka innī kuntu minaẓ-ẓālimīn
तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।
तिर्मिज़ी · सहीह · क़ुरआन 21:87 — कोई मुसलमान परेशानी में इसे नहीं कहता मगर उसकी दुआ क़बूल होती है।
03बीमारी और बीमार
बीमार की इयादत · 7×
أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ
असअलुल्लाहल-अज़ीम रब्बल-अर्शिल-अज़ीमि अन यश्फ़ियक
As’alullāhal-‘Aẓīma Rabbal-‘Arshil-‘Aẓīmi an yashfiyak
मैं अज़मत वाले अल्लाह से, जो अर्श-ए-अज़ीम का रब है, सवाल करता हूँ कि वह तुम्हें शिफ़ा दे।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह — अगर उसका वक़्त नहीं आया है, तो उसे शिफ़ा मिल जाती है।
बीमार पर रुक़या
اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ، مُذْهِبَ الْبَاسِ، اشْفِ أَنْتَ الشَّافِي، لَا شَافِيَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्म रब्बन-नास, मुज़्हिबल-बास, इश्फ़ि अन्तश-शाफ़ी, ला शाफ़िय इल्ला अन्त
Allāhumma Rabban-nās, mudhhibal-bās, ishfi Antash-Shāfī, lā shāfiya illā Ant
ऐ अल्लाह, लोगों के रब, तकलीफ़ दूर करने वाले, शिफ़ा दे — तू ही शिफ़ा देने वाला है; तेरे सिवा कोई शिफ़ा देने वाला नहीं।
बुख़ारी · सहीह — अल-फ़ातिहा और तीनों सूरतों के साथ।
अपने दर्द के लिए
بِسْمِ اللَّهِ — أَعُوذُ بِاللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ
बिस्मिल्लाह — अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुद्रतिहि मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िर
Bismillāh (3×) — A‘ūdhu billāhi wa qudratihī min sharri mā ajidu wa uḥādhir (7×)
मैं अल्लाह की और उसकी क़ुदरत की पनाह लेता हूँ, उस चीज़ की बुराई से जो मैं महसूस करता हूँ और जिससे डरता हूँ।
मुस्लिम · सहीह — हाथ दर्द की जगह पर रखकर।
04ग़म और मौत
किसी की मौत की ख़बर सुनकर
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ. اللَّهُمَّ أْجُرْنِي فِي مُصِيبَتِي وَأَخْلِفْ لِي خَيْرًا مِنْهَا
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन. अल्लाहुम्म अजुर्नी फ़ी मुसीबती व अख़्लिफ़ ली ख़ैरन मिन्हा
Innā lillāhi wa innā ilayhi rāji‘ūn. Allāhumma’jurnī fī muṣībatī wa akhlif lī khayran minhā
निःसंदेह हम अल्लाह के हैं और निःसंदेह हम उसी की ओर लौटने वाले हैं। मेरी इस मुसीबत में मुझे अज्र दे और इसके बदले मुझे इससे बेहतर अता फ़रमा।
मुस्लिम · सहीह
मय्यत के लिए
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ وَأَبْدِلْهُ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ وَأَهْلاً خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ وَزَوْجًا خَيْرًا مِنْ زَوْجِهِ وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ أَوْ مِنْ عَذَابِ النَّارِ
अल्लाहुम्म-ग़्फ़िर लहु व-र्हम्हु व आफ़िहि व-अफ़ु अन्हु व अक्रिम नुज़ुलहु व वस्सिअ मुद्ख़लहु व-ग़्सिल्हु बिल-माइ वस-सल्जि वल-बरदि व नक़्क़िहि मिनल-ख़ताया कमा नक़्क़ैतस-सौबल-अब्यज़ मिनद-दनसि व अब्दिल्हु दारन ख़ैरन मिन दारिहि व अह्लन ख़ैरन मिन अह्लिहि व ज़ौजन ख़ैरन मिन ज़ौजिहि व अद्ख़िल्हुल-जन्नत व अइज़्हु मिन अज़ाबिल-क़ब्रि औ मिन अज़ाबिन-नार
पूरी रिवायत

Jubair b. Nufair says:I heard it from 'Auf b. Malik that the Prophet (ﷺ) said prayer on the dead body, and I remembered his prayer:" O Allah! forgive him, have mercy upon him, give him peace and absolve him. Receive him with honour and make his grave spacious; wash him with water, snow and hail. Cleanse him from faults as Thou wouldst cleanse a white garment from impurity. Requite him with an abode more excellent than his abode, with a family better than his family, and with a mate better than his mate. Admit him to the Garden, and protect him from the torment of the grave and the torment of the Fire." ('Auf bin Malik) said: I earnestly desired that I were this dead body

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2232 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Allāhummaghfir lahu warḥamh, wa ‘āfihi wa‘fu ‘anh, wa akrim nuzulah, wa wassi‘ mudkhalah
उसे बख़्श दे, उस पर रहम फ़रमा, उसे माफ़ कर दे, और उसके ठिकाने को इज़्ज़त बख़्श।
मुस्लिम · सहीह — नमाज़-ए-जनाज़ा की तीसरी तकबीर के बाद।
ग़मज़दा घरवालों से ताज़ियत
“अल्लाह ही का है जो उसने ले लिया, और उसी का है जो उसने दिया; हर चीज़ का एक वक़्त मुक़र्रर है।”
बुख़ारी · सहीह
क़ब्र पर
السَّلاَمُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ لَلَاحِقُونَ أَسْأَلُ اللَّهَ لَنَا وَلَكُمْ الْعَافِيَةَ
अस-सलामु अलैकुम अह्लद-दियारि मिनल-मुअमिनीन वल-मुस्लिमीन व इन्ना इन शाअल्लाहु ललाहिक़ून असअलुल्लाह लना व लकुम अल-आफ़ियह
पूरी रिवायत

Sulaiman b. Buraida narrated on the authority of his father that the Messenger of Allah (ﷺ) used to teach them when they went out to the graveyard. One of the narrators used to say this in the narration transmitted on the authority of Abu Bakr:" Peace be upon the inhabitants of the city (i. e. graveyard)." In the hadith transmitted by Zuhair (the words are):" Peace be upon you, the inhabitants of the city, among the believers, and Muslims, and God willing we shall join you. I beg of Allah peace for us and for you

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2257 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

As-salāmu ‘alaykum ahlad-diyāri minal-mu’minīna wal-muslimīn, wa innā in shā’allāhu lalāḥiqūn
तुम पर सलाम हो, ऐ इन घरों के रहने वालो, मोमिनो और मुसलमानो — और हम भी, अगर अल्लाह ने चाहा, आ मिलने वाले हैं।
मुस्लिम · सहीह
05क़र्ज़ और रिज़्क़
भारी क़र्ज़
اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ، وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ
अल्लाहुम्म-क्फ़िनी बिहलालिक अन हरामिक, व अग़्निनी बिफ़ज़्लिक अम्मन सिवाक
Allāhummakfinī bi-ḥalālika ‘an ḥarāmik, wa aghninī bi-faḍlika ‘amman siwāk
ऐ अल्लाह, जो तूने हलाल किया है उसे मेरे लिए काफ़ी कर दे ताकि मैं तेरे हराम किए हुए से बचा रहूँ, और अपने फ़ज़्ल से मुझे ऐसा ग़नी कर दे कि तेरे सिवा किसी का मोहताज न रहूँ।
तिर्मिज़ी · हसन — “चाहे तुम्हारा क़र्ज़ पहाड़ जितना हो।”
रिज़्क़ के लिए
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक इल्मन नाफ़िअन, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलन मुतक़ब्बलन
Allāhumma innī as’aluka ‘ilman nāfi‘an, wa rizqan ṭayyiban, wa ‘amalan mutaqabbalan
नफ़ा देने वाला इल्म, पाकीज़ा हलाल रिज़्क़, और क़बूल होने वाला अमल।
इब्न माजा · सहीह — फ़ज्र के बाद।
क़र्ज़ देने वाले को क़र्ज़ लौटाते वक़्त
بَارَكَ اللَّهُ لَكَ فِي أَهْلِكَ وَمَالِكَ
बारकल्लाहु लक फ़ी अह्लिक व मालिक
Bārakallāhu laka fī ahlika wa mālik
अल्लाह तुम्हारे घरवालों और तुम्हारे माल में बरकत दे।
इब्न माजा · सहीह
किफ़ायत की तलब
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ
हस्बुनल्लाहु व निअमल-वकील
Ḥasbunallāhu wa ni‘mal-wakīl
हमारे लिए अल्लाह काफ़ी है और वह बहुत अच्छा कार्यसाधक (काम बनाने वाला) है।
बुख़ारी · सहीह · क़ुरआन 3:173
06निकाह और औलाद
नए शादीशुदा को
بَارَكَ اللَّهُ لَكَ، وَبَارَكَ عَلَيْكَ، وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ
बारकल्लाहु लक, व बारक अलैक, व जमअ बैनकुमा फ़ी ख़ैर
Bārakallāhu lak, wa bāraka ‘alayk, wa jama‘a baynakumā fī khayr
अल्लाह तुम्हें बरकत दे, तुम पर बरकत नाज़िल करे, और तुम दोनों को भलाई में जमा रखे।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह
बच्चों की हिफ़ाज़त
أُعِيذُكُمَا بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ، وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
उईज़ुकुमा बिकलिमातिल्लाहित-ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिन व हाम्मह, व मिन कुल्लि ऐनिन लाम्मह
U‘īdhukumā bi-kalimātillāhit-tāmmati min kulli shayṭānin wa hāmmah, wa min kulli ‘aynin lāmmah
मैं तुम दोनों को अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह में देता हूँ, हर शैतान और ज़हरीले जानवर से, और हर नुक़सान पहुँचाने वाली नज़र से।
बुख़ारी · सहीह — आप ﷺ ने इसे हसन और हुसैन पर पढ़ा।
औलाद के लिए
رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ — رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنْتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ
रब्बि हब ली मिनस-सालिहीन — रब्बि ला तज़र्नी फ़र्दन व अन्त ख़ैरुल-वारिसीन
Rabbi hab lī minaṣ-ṣāliḥīn — Rabbi lā tadharnī fardan wa Anta khayrul-wārithīn
ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर — ऐ मेरे पालनहार! मुझे अकेला मत छोड़ और तू सब वारिसों से बेहतर है।
क़ुरआन 37:100; 21:89
07सफ़र और हिफ़ाज़त
रवाना होते वक़्त
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الأَهْلِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالأَهْلِ
सुब्हानल-लज़ी सख़्ख़र लना हाज़ा व मा कुन्ना लहु मुक़्रिनीन व इन्ना इला रब्बिना लमुन्क़लिबून अल्लाहुम्म इन्ना नसअलुक फ़ी सफ़रिना हाज़ल-बिर्र वत-तक़्वा व मिनल-अमलि मा तर्ज़ा अल्लाहुम्म हव्विन अलैना सफ़रना हाज़ा व-त्वि अन्ना बुअदहु अल्लाहुम्म अन्तस-साहिबु फ़िस-सफ़रि वल-ख़लीफ़तु फ़िल-अह्लि अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिन वअसाइस-सफ़रि व कआबतिल-मन्ज़रि व सूइल-मुन्क़लबि फ़िल-मालि वल-अह्ल
पूरी रिवायत

Ibn Umar (Allah be pleased with them) reported that whenever Allah's Messenger (ﷺ) mounted his camel while setting out on a journey, he glorified Allah (uttered Allah-o-Akbar) thrice, and then said:Hallowed is He Who subdued for us this (ride) and we were not ourselves powerful enough to use It as a ride, and we are going to return to our Lord. O Allah, we seek virtue and piety from Thee in this journey of ours and the act which pleaseth Thee. O Allah, lighten this journey of ours, and make its distance easy for us. O Allah, Thou art (our) companion during the journey, and guardian of (our) family. O Allah, I seek refuge with Thee from hardships of the journey, gloominess of the sights, and finding of evil changes in property and family on return. And he (the Holy Prophet) uttered (these words), and made this addition to them: We are returning, repentant, worshipping our Lord. and praising Him

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 3275 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Subḥānal-ladhī sakhkhara lanā hādhā… Allāhumma innā nas’aluka fī safarinā hādhal-birra wat-taqwā, wa minal-‘amali mā tarḍā
…ऐ अल्लाह, हम अपने इस सफ़र में तुझसे नेकी और तक़वा माँगते हैं, और वह अमल जिससे तू राज़ी हो।
मुस्लिम · सहीह
कहीं भी ठहरते वक़्त
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन शर्रि मा ख़लक़
A‘ūdhu bi-kalimātillāhit-tāmmāti min sharri mā khalaq
मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह लेता हूँ, उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से।
मुस्लिम · सहीह — वहाँ से रवाना होने तक उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।
वापसी पर
آيِبُونَ تَائِبُونَ عَابِدُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ
आयिबून ताइबून आबिदून लिरब्बिना हामिदून
Ā’ibūna tā’ibūna ‘ābidūna li-Rabbinā ḥāmidūn
हम लौटने वाले, तौबा करने वाले, इबादत करने वाले, और अपने रब की तारीफ़ करने वाले हैं।
मुस्लिम · सहीह
किसी बस्ती में दाख़िल होते वक़्त
اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِيهَا
अल्लाहुम्म बारिक लना फ़ीहा
Allāhumma bārik lanā fīhā
ऐ अल्लाह, हमारे लिए इसमें बरकत दे।
इब्न हिब्बान · सहीह
08ग़ुस्सा, ख़ौफ़, फ़ैसला
ग़ुस्से में
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम
A‘ūdhu billāhi minash-Shayṭānir-rajīm
मैं मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह लेता हूँ।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह — और खड़े हों तो बैठ जाएँ, बैठे हों तो लेट जाएँ, और वुज़ू कर लें।
ख़ौफ़ में
اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَعَزُّ مِنْ خَلْقِهِ جَمِيعًا، اللَّهُ أَعَزُّ مِمَّا أَخَافُ وَأَحْذَرُ
अल्लाहु अक्बर, अल्लाहु अअज़्ज़ु मिन ख़ल्क़िहि जमीअन, अल्लाहु अअज़्ज़ु मिम्मा अख़ाफ़ु व अह्ज़र
Allāhu akbar, Allāhu a‘azzu min khalqihī jamī‘an, Allāhu a‘azzu mimmā akhāfu wa aḥdhar
अल्लाह सबसे बड़ा है — अपनी सारी मख़लूक़ से ज़्यादा ग़ालिब, और उस चीज़ से ज़्यादा ग़ालिब जिससे मैं डरता और बचता हूँ।
नसाई · सहीह
किसी फ़ैसले से पहले
दो रकअतें, फिर इस्तिख़ारा की दुआ — पूरा मत्न लंबी शीट के कार्ड 04 पर है। फिर अमल करें, और राज़ी रहें।
बुख़ारी · सहीह
अच्छे अंजाम की तलब
اللَّهُمَّ أَحْسِنْ عَاقِبَتَنَا فِي الْأُمُورِ كُلِّهَا، وَأَجِرْنَا مِنْ خِزْيِ الدُّنْيَا وَعَذَابِ الْآخِرَةِ
अल्लाहुम्म अह्सिन आक़िबतना फ़िल-उमूरि कुल्लिहा, व अजिर्ना मिन ख़िज़्यिद-दुन्या व अज़ाबिल-आख़िरह
Allāhumma aḥsin ‘āqibatanā fil-umūri kullihā, wa ajirnā min khizyid-dunyā wa ‘adhābil-ākhirah
ऐ अल्लाह, तमाम कामों में हमारा अंजाम अच्छा कर, और हमें दुनिया की रुसवाई और आख़िरत के अज़ाब से बचा।
इब्न हिब्बान · सहीह

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।

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