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जेबी साथी · 9 में से हिस्सा 1

रोज़ाना का साथी

أَذْكَارُ الْيَوْمِ
इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

जेबी साथी · 09 में से 01
रोज़ाना का साथी
أَذْكَارُ الْيَوْمِ
अज़्कारुल-यौम
जागने से सोने तक — एक आम दिन के मुस्तनद अज़कार।
2 · जागना और वुज़ू
3 · सुबह और शाम, बुनियादी
4 · सुबह और शाम, जारी
5 · घर, खाना, लिबास
6 · मस्जिद, सफ़र, बारिश, परेशानी
7 · सोने का वक़्त और रात
8 · सात दिन का रिकॉर्ड
बुख़ारी · मुस्लिम · चारों सुनन · दर्जे अल्बानी के मुताबिक़, जब तक कुछ और न लिखा हो।
02जागना और वुज़ू
जागने पर
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
अल-हम्दु लिल्लाहिल-लज़ी अह्याना बअद मा अमातना व इलैहिन-नुशूर
Al-ḥamdu lillāhil-ladhī aḥyānā ba‘da mā amātanā wa ilayhin-nushūr
तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसने हमें मौत के बाद ज़िंदगी दी, और उसी की तरफ़ उठकर जाना है।
बुख़ारी · सहीह
वुज़ू के बाद
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अश्हदु अन ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुह
Ash-hadu an lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, wa ash-hadu anna Muḥammadan ‘abduhū wa rasūluh
मैं गवाही देता हूँ कि अकेले अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और यह कि मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं।
मुस्लिम · सहीह — जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं। वुज़ू बिस्मिल्लाह से शुरू करें।
बैतुल-ख़ला में दाख़िल होते · निकलते वक़्त
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ — غُفْرَانَكَ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-ख़ुबुसि वल-ख़बाइस — ग़ुफ़्रानक
Allāhumma innī a‘ūdhu bika minal-khubuthi wal-khabā’ith — on leaving: Ghufrānak
नर और मादा शैतानों से पनाह — तेरी मग़फ़िरत।
बुख़ारी; तिर्मिज़ी · सहीह
03सुबह और शाम
वही अज़कार दिन में दो बार — फ़ज्र के बाद, और अस्र के बाद से मग़रिब तक। जहाँ दो लफ़्ज़ दिए गए हैं, वहाँ दूसरा शाम के लिए है।
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ ﴿أَمْسَيْنَا وَأَمْسَىٰ﴾ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
अस्बह्ना व अस्बहल-मुल्कु लिल्लाहि अम्सैना व अम्सा वल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह
Aṣbaḥnā wa aṣbaḥal-mulku lillāh ⟨Amsaynā wa amsā⟩ wal-ḥamdu lillāh, lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah
हमने सुबह की, और इसी के साथ बादशाही अल्लाह की है; तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है।
मुस्लिम · सहीह · 1×
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्म अन्त रब्बी ला इलाह इल्ला अन्त, ख़लक़्तनी व अना अब्दुक, व अना अला अह्दिक व वअदिक म-स्ततअत, अऊज़ु बिक मिन शर्रि मा सनअत, अबूउ लक बिनिअमतिक अलय्य व अबूउ लक बिज़न्बी फ़-ग़्फ़िर ली फ़-इन्नहु ला यग़्फ़िरुज़-ज़ुनूब इल्ला अन्त
allāhumma anta rabbī lā ilāha illā ant, khalaqtanī wa anā ‘abduk, wa anā ‘alā ‘ahdika wa wa‘dika mastaṭa‘t, a‘ūdhu bika min sharri mā ṣana‘t, abū’u laka bi-ni‘matika ‘alayya wa abū’u laka bi-dhanbī faghfir lī fa-innahu lā yaghfirudh-dhunūba illā ant
ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है; तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ, और जितनी मुझमें ताक़त है, मैं तेरे अहद और वादे पर क़ायम हूँ। मैं अपने किए की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमत का इक़रार करता हूँ और अपने गुनाह का इक़रार करता हूँ — तो मुझे बख़्श दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को नहीं बख़्शता।

पूरा पाठ दिखाया गया है, दुआओं का मजमूआ से। छपे संस्करण में यह छोटा है।

सय्यिदुल-इस्तिग़फ़ार — इस्तिग़फ़ार का सरदार। ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है; मैं अपने ऊपर तेरी नेमत का और अपने गुनाह का इक़रार करता हूँ, तो मुझे बख़्श दे।
बुख़ारी · सहीह · 1× — जो इसे दिन में कहे और उसी दिन मर जाए, वह जन्नत में दाख़िल होगा।
04सुबह और शाम, जारी
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
बिस्मिल्लाहिल-लज़ी ला यज़ुर्रु मअ-स्मिहि शैउन फ़िल-अर्ज़ि व ला फ़िस-समाइ व हुवस-समीउल-अलीम
Bismillāhil-ladhī lā yaḍurru ma‘asmihī shay’un fil-arḍi wa lā fis-samā’i wa Huwas-Samī‘ul-‘Alīm
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती।
तिर्मिज़ी, अबू दाऊद · सहीह · 3× — उसे कोई नुक़सान नहीं पहुँचेगा।
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا، وَبِمُحَمَّدٍ ﷺ نَبِيًّا
रज़ीतु बिल्लाहि रब्बन, व बिल-इस्लामि दीनन, व बिमुहम्मदिन ﷺ नबिय्यन
Raḍītu billāhi Rabban, wa bil-Islāmi dīnan, wa bi-Muḥammadin ﷺ nabiyyan
मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर, और मुहम्मद ﷺ के नबी होने पर राज़ी हूँ।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह · 3×
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ، عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ، وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
हस्बियल्लाहु ला इलाह इल्ला हुव, अलैहि तवक्कल्त, व हुव रब्बुल-अर्शिल-अज़ीम
Ḥasbiyallāhu lā ilāha illā Hū, ‘alayhi tawakkalt, wa Huwa Rabbul-‘Arshil-‘Aẓīm
अल्लाह मेरे लिए काफ़ी है। उसी पर मैंने भरोसा किया, और वही अर्श-ए-अज़ीम का रब है।
अबू दाऊद · हसन · 7×
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिह
Subḥānallāhi wa biḥamdih
अल्लाह पाक है, और तारीफ़ उसी के लिए है।
मुस्लिम · सहीह · 100×। साथ ही तीनों सूरतें 3× और आयतुल-कुर्सी (कार्ड 05)।
05घर, खाना, लिबास
घर से निकलते वक़्त
بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
बिस्मिल्लाह, तवक्कल्तु अलल्लाह, ला हौल व ला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह
Bismillāh, tawakkaltu ‘alallāh, lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh
अल्लाह के नाम से; मैंने अल्लाह पर भरोसा किया; उसके बग़ैर न कोई ताक़त है, न क़ुव्वत।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह
घर में दाख़िल होते वक़्त
بِسْمِ اللَّهِ وَلَجْنَا، وَبِسْمِ اللَّهِ خَرَجْنَا، وَعَلَى اللَّهِ رَبِّنَا تَوَكَّلْنَا
बिस्मिल्लाहि वलज्ना, व बिस्मिल्लाहि ख़रज्ना, व अलल्लाहि रब्बिना तवक्कल्ना
Bismillāhi walajnā, wa bismillāhi kharajnā, wa ‘alallāhi Rabbinā tawakkalnā
अल्लाह के नाम से हम दाख़िल हुए, और अल्लाह के नाम से निकले, और अल्लाह, अपने रब पर हमने भरोसा किया।
अबू दाऊद · हसन
खाने से पहले · बाद
بِسْمِ اللَّهِ — وَإِنْ نَسِيتَ: بِسْمِ اللَّهِ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ — الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَٰذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ
बिस्मिल्लाह — व इन नसीत: बिस्मिल्लाहि अव्वलहु व आख़िरह — अल-हम्दु लिल्लाहिल-लज़ी अतअमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी व ला क़ुव्वह

पूरा पाठ दिखाया गया है, आदाब और अख़लाक़ से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Bismillāh — if forgotten: Bismillāhi awwalahū wa ākhirah — after: Al-ḥamdu lillāhil-ladhī aṭ‘amanī hādhā wa razaqanīh
तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसने मुझे यह खिलाया और मुझे यह रिज़्क़ दिया।
बुख़ारी, अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह
06मस्जिद, सफ़र, बारिश, परेशानी
मस्जिद · दाख़िल होते, निकलते वक़्त
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ — اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अल्लाहुम्म-फ़्तह ली अब्वाब रह्मतिक — अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक मिन फ़ज़्लिक
Allāhumma iftaḥ lī abwāba raḥmatik — Allāhumma innī as’aluka min faḍlik
मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे — मैं तुझसे तेरा फ़ज़्ल माँगता हूँ। दाख़िल होते वक़्त दायाँ पाँव पहले, निकलते वक़्त बायाँ।
मुस्लिम · सहीह
सफ़र · सवार होते वक़्त
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ، وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ
सुब्हानल-लज़ी सख़्ख़र लना हाज़ा व मा कुन्ना लहु मुक़्रिनीन, व इन्ना इला रब्बिना लमुन्क़लिबून
Subḥānal-ladhī sakhkhara lanā hādhā wa mā kunnā lahū muqrinīn, wa innā ilā Rabbinā lamunqalibūn
पवित्र है वह अल्लाह, जिसने इसे हमारे वश में कर दिया। हालाँकि हम इसे वश में करने वाले नहीं थे। तथा निःसंदेह हम अपने पालनहार की ओर अवश्य लौटकर जाने वाले हैं।
मुस्लिम · सहीह · 43:13–14
बारिश · आँधी
اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا — اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا فِيهَا وَخَيْرَ مَا أُرْسِلَتْ بِهِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا فِيهَا وَشَرِّ مَا أُرْسِلَتْ بِهِ
अल्लाहुम्म सय्यिबन नाफ़िअन — अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक ख़ैरहा व ख़ैर मा फ़ीहा व ख़ैर मा उर्सिलत बिहि व अऊज़ु बिक मिन शर्रिहा व शर्रि मा फ़ीहा व शर्रि मा उर्सिलत बिह
पूरी रिवायत

Ata' b. Rabah reported on the authority of 'A'isha, the wife of the Messenger of Allah (way peace be upon him), who said:Whenever the wind was stormy, the Messenger of Allah (ﷺ) used to say: O Allah! I ask Thee for what is good in it, and the good which it contains, and the good of that which it was sent for. I seek refuge with Thee from what is evil in it, what evil it contains, and the evil of that what it was sent for; and when there was a thunder and lightning in the sky, his colour underwent a change, and he went out and in, backwards and forwards; and when the rain came, he felt relieved, and I noticed that (the sign of relief) on his face. 'A'isha asked him (about it) and he said: It may be as the people of 'Ad said: When they saw a cloud formation coming to their valley they said:" It is a cloud which would give us rain" (Qur'an, xlvi)

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2085 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Allāhumma ṣayyiban nāfi‘an — in wind: Allāhumma innī as’aluka khayrahā
नफ़ा देने वाली बारिश — मैं तुझसे इसकी भलाई माँगता हूँ। बारिश में दुआ क़बूल होती है।
बुख़ारी; मुस्लिम · सहीह
परेशानी
परेशानी की पूरी दुआ कार्ड 06 पर है — ला इलाहा इल्लल्लाहुल-अज़ीमुल-हलीम…
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह
07सोने का वक़्त और रात
सोने से पहले · तरतीब से
वुज़ू · आयतुल-कुर्सी 1× · इख़्लास, फ़लक़, नास मिली हुई हथेलियों में पढ़कर बदन पर फेरें 3× · अल-बक़रह की आख़िरी दो आयतें · सूरह अल-मुल्क · तस्बीह 33/33/34 · दाईं करवट लेटें।
बुख़ारी, मुस्लिम, तिर्मिज़ी · सहीह
بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
बिस्मिक अल्लाहुम्म अमूतु व अह्या
Bismika Allāhumma amūtu wa aḥyā
ऐ अल्लाह, तेरे ही नाम से मैं मरता हूँ और जीता हूँ।
बुख़ारी · सहीह
اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ، وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ، وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ، رَغْبَةً وَرَهْبَةً إِلَيْكَ، لاَ مَلْجَأَ وَلاَ مَنْجَا مِنْكَ إِلاَّ إِلَيْكَ، آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ، وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ
अल्लाहुम्म अस्लम्तु नफ़्सी इलैक, व वज्जह्तु वज्ही इलैक व फ़व्वज़्तु अम्री इलैक, व अल्जअतु ज़ह्री इलैक, रग़्बतन व रह्बतन इलैक, ला मल्जअ व ला मन्जा मिन्क इल्ला इलैक, आमन्तु बिकिताबिकल-लज़ी अन्ज़ल्त, व बिनबिय्यिकल-लज़ी अर्सल्त
पूरी रिवायत

Narrated Al-Bara' bin `Azib:Allah's Messenger (ﷺ) said, "O so-and-so, whenever you go to your bed (for sleeping) say, 'O Allah! I have surrendered myself over to you and have turned my face towards You, and leave all my affairs to You and depend on You and put my trust in You expecting Your reward and fearing Your punishment. There is neither fleeing from You nor refuge but with You. I believe in the Book (Qur'an) which You have revealed and in Your Prophet (Muhammad) whom You have sent.' If you then die on that night, then you will die as a Muslim, and if you wake alive in the morning then you will receive the reward." (See Hadith No. 323, Vol)

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह बुख़ारी · नंबर 7488 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Allāhumma aslamtu nafsī ilayk, wa wajjahtu wajhī ilayk, wa fawwaḍtu amrī ilayk, wa alja’tu ẓahrī ilayk
ऐ अल्लाह, मैंने अपनी जान तेरे हवाले कर दी, अपना चेहरा तेरी तरफ़ कर लिया, अपना मामला तेरे सुपुर्द कर दिया, और अपनी पीठ तेरे सहारे टिका दी।
बुख़ारी · सहीह — सोने से पहले के आख़िरी अल्फ़ाज़; जो उस रात मर जाए, वह फ़ितरत पर मरता है।
बुरा ख़्वाब
बाईं तरफ़ तीन बार हल्का-सा थुतकारें, शैतान से और जो आपने देखा उससे पनाह माँगें, करवट बदल लें, और किसी को न बताएँ।
मुस्लिम · सहीह
08सात दिन का रिकॉर्ड
हर कार्ड पर एक हफ़्ता। जैसे-जैसे करते जाएँ, निशान लगाते जाएँ।
सोम · मंगल · बुध · जुमेरात · जुमा · सनीचर · इतवार
फ़ज्र वक़्त पर
ज़ुहर वक़्त पर
अस्र वक़्त पर
मग़रिब वक़्त पर
इशा वक़्त पर
सुबह के अज़कार
शाम के अज़कार
नमाज़ के बाद के अज़कार
क़ुरआन का हिस्सा
सोते वक़्त के अज़कार
हफ़्ता ____________________

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।

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