عن ابن مسعود رضي الله عنه قال: دخلتُ على النبيِّ صلى الله عليه وسلم وهو يُوعَكُ، فَمَسَسْتُهُ، فقلتُ: إنّكَ لَتُوعَكُ وَعَكًا شَدِيدًا، فقالَ: «أجَلْ، إنِّي أُوعَكُ كما يُوعَكُ رَجُلانِ منكُم».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया तो आपको बुख़ार था। मैंने आपके शरीर पर हाथ रखा और कहाः आपको तो बड़ा तीव्र बुख़ार है। तो फ़रमायाः मुझे तुम्हारे जैसे दो व्यक्तियों के बराबर बुख़ार आता है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि वह अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास उस समय पहुँचे जब आपकी बीमारी बढ़ चुकी थी और आप कष्ट में थे। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया और आपसे कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! आपकी बीमारी तो काफ़ी बढ़ चुकी है। तो आपने बताया कि आपको बीमारी की उतनी भीषणता का सामना होता है, जितने का सामना हममें से दो व्यक्तियों को होता है। ऐसा इसलिए, ताकि आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सब्र के सबसे ऊँचे दर्जे प्राप्त हों।
हवाला
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي.
تطريز رياض الصالحين، تأليف فيصل آل مبارك، تحقيق د. عبدالعزيز آل حمد، دار العاصمة، الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ.
رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ.
شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن - الرياض، 1426هـ.
صحيح البخاري، للإمام أبي عبدالله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.
صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبدالباقي، دار عالم الكتب - الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ.
كنوز رياض الصالحين، فريق علمي برئاسة أ.د. حمد العمار، دار كنوز إشبيليا -الرياض، الطبعة الأولى، 1430هـ.
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة - بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما : «أنه كان يسير على جمل فأعيا، فأراد أن يُسَيِّبَهُ. فلحقني النبي صلى الله عليه وسلم فدعا لي، وضربه، فسار سيرا لم يَسِرْ مثله. ثم قال: بِعْنِيهِ بأُوقية. قلتُ: لا. ثم قال: بِعْنِيه. فَبِعْتُهُ بأوقية، واستثنيت حُمْلَانَهُ إلى أهلي. فلما بلغت: أتيته بالجمل. فنقدني ثمنه. ثم رجعت. فأرسل في إثري. فقال: أتَرَانِي مَاكستُكَ لآخذ جملك؟ خذ جملك ودراهمك، فهو لك».
जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि वह एक ऊँट पर सवार होकर चल रहे थे कि ऊँट थक गया और उन्होंने उसे छोड़ देने का मन बना लिया। परन्तु, इसी बीच अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुझसे आ मिले और मेरे लिए दुआ की तथा उस ऊँट को मारा। सो, वह ऐसे चलने लगा कि उस तरह कभी नहीं चला था। फिर आपने फ़रमायाः इसे मुझसे एक ओक़िया (तौल में एक विशेष भार को इंगित करने वाला एक प्रकार का बटखरा) में बेच दो। मैंने कहाः नहीं। फिर आपने फ़रमायाः इसे मुझसे बेच दो। अतः, मैंने उसे एक ओक़िया में बेच दिया, लेकिन यह शर्त रखी कि मुझे घर जाने तक उस पर सवार होने का अधिकार प्राप्त होगा। जब मैं घर पहुँचने के बाद ऊँट लेकर उपस्थित हुआ तो आपने मुझे उसकी क़ीमत दे दी। फिर, जब मैं चल पड़ा तो मेरे पीछे एक व्यक्ति को भेजा और फ़रमायाः क्या तुम समझते हो कि मैंने तुम्हारा ऊँट लेने के लिए उसका मूल्य कम लगाया है? तुम अपना ऊँट और अपने दिर्हम ले लो। सब तुम्हारा है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) एक युद्ध में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ थे। वह एक ऊँट पर सवार थे, जो इतना थक चुका था कि सेना के साथ चल नहीं पा रहा था। नौबत यहाँ तक पहुँच चुकी थी कि उन्होंने उसे किसी काम का न समझकर आज़ाद छोड़ देने का इरादा कर लिया था। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को चूँकि अपने साथियों और अपनी उम्मत से बड़ा प्रेम था, इसलिए आप सेना के पीछे-पीछे चलते थे कि निर्बल, विवश और पिछड़ जाने वाले की सहायता कर सकें। इसी बीच आप जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) से मिले, जो अपने दुर्बल ऊँट पर सवार थे। अतः, आपने उनके लिए दुआ की और उनके ऊँट को मारा। आपकी यह मार उनके दुर्बल ऊँट के लिए शक्तिस्रोत बन गई और वह इतना तेज़ चलने लगा कि कभी उस तरह चलते नहीं देखा गया था। फिर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम), जो सदव्यवहार और उत्तम चरित्र के पुतले थे, जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) का दिल बहलाने और उनसे बात करने लगे कि आसानी से रास्ता कट जाए। आपने कहाः मुझेस यह ऊँट एक ऊक़िया में बेच दो। जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने अल्लाह के अनुग्रह की उम्मीद की। जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) जानते थे कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से बेचने से मना करने पर उनके धर्म में कोई कमी नहीं आएगी, क्योंकि आपका यह आदेश कोई ऐसा आदेश नहीं है, जिसका अनुपालन ज़रूरी हो। लेकिन इसके बावजूद जब आपने दोबारा बेचने को कहा, तो उसे एक ऊक़िया में बेच दिया। अलबत्ता, यह शर्त रखी कि वह उसपर सवार होकर मदीने में स्थित अपने घर तक जाएँगे। आपने उनकी शर्त मंज़ूर कर ली। जब सब लोग मदीना पहुँच गए, तो जाबर (रज़ियल्लाहु अंहु) ऊँट लेकर आपके पास आए और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें दाम भी दे दिया। जब वह जाने लगे, तो आपने उन्हें बुला भेजा। जब वह आए, तो आपने कहाः क्या तुम समझते हो कि मैंने तुमसे मामला तुम्हारे ऊँट के लालच में और उसे प्राप्त करने के लिए किया था? अपना ऊँट और अपने दिरहम दोनों ले जाओ। दोनों तुम्हारे हैं। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दरियादिली तथा दयालुता के सामने यह कोई अचंभे की बात भी नहीं है; क्योंकि आपके जीवन में इसके बहुत-से उदाहरण मिलते हैं।
हवाला
- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.
- صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ.
- الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه.
- تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلَّى الله عليه وسلم قال: «ما مِنْ أحَدٍ يُسلِّمُ علي إلا ردَّ اللهُ عليَّ رُوحي حتى أردَّ عليه السَّلامَ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का उत्तर दे दूँ।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाइसकी सनद ह़सन है
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि सलाम करने वाले को उसके सलाम का जवाब देने के लिए आपकी आत्मा को आपके शरीर में लौटा दिया जाता है। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि सलाम करने वाला दूर है कि निकट। याद रहे कि बर्ज़ख़ एवं क़ब्र के जीवन का संबंध ग़ैब की दुनिया से है, जिसकी हक़ीक़त उस अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता, जो हर चीज़ की क्षमता रखता है।
फ़ायदे
- अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर अधिक से अधिक दरूद व सलाम भेजने की प्रेरणा।
- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अपनी कब्र में ज़िंदगी, वह सबसे श्रेष्ठ और पूर्ण ज़िंदगी है जो किसी इंसान को बरज़ख (मृत्यु के बाद की स्थिति) में मिल सकती है; और इस ज़िंदगी की असल हकीकत को अल्लाह के अलावा कोई नहीं जानता।
- इस हदीस में उन लोगों के लिए कोई दलील नहीं है, जो क़ब्र के अंदर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हमारे इस सांसारिक जीवन की तरह संपूर्ण रूप से जीवित होने का दावा करते हैं। अतः शिर्क करने वालों का इसे आपसे मदद मांगने के लिए सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना दुरुस्त नहीं है। सच्ची बात यह है कि आप इस समय बर्ज़ख़ का जीवन जी रहे हैं।
हवाला
سنن أبي داود (3/ 384) (2041).
مسند أحمد (16/ 477) (10815).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 486).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 477).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 964).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أنس قال: قال أبو طَلحَة لأم سليم: قد سمعت صوت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضعيفًا أعرف فيه الجُوع، فهل عندك من شيء؟ فقالت: نعم، فَأَخْرَجَت أَقْرَاصًا من شَعير، ثم أَخَذْتْ خِمَارًا لها، فَلفَّت الخُبْزَ بِبَعْضِه، ثم دسَّتْهُ تحت ثوبي ورَدَّتني ببعضِه، ثم أرسَلَتني إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فَذَهَبَتُ به، فوجدت رسول الله صلى الله عليه وسلم جالسًا في المسجد، ومعه الناس، فَقُمتُ عليهم، فقال لي رسول الله صلى الله عليه وسلم : «أرسلك أبو طلحة؟» فقلت: نعم، فقال: « أَلِطَعَام؟» فقلت: نعم، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «قوموا» فانْطَلَقُوا وانطَلَقتُ بين أيديهم حتى جئت أبا طَلَحة فَأَخْبَرتُهُ، فقال أبو طلحة: يا أم سليم، قد جاء رسول الله صلى الله عليه وسلم بالناس وليس عندنا ما نُطعِمُهُم؟ فقالت: الله ورسوله أعلم. فانطلق أبو طلحة حتى لقي رسول الله صلى الله عليه وسلم فأقبل رسول الله صلى الله عليه وسلم معه حتى دخلا، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : « هَلُمِّي ما عندك يا أم سليم» فأتت بذلك الخبز، فأمر به رسول الله صلى الله عليه وسلم فَفُتَّ، وَعَصَرَتْ عليه أم سليم عُكَّةً فَآدَمَتْهُ ، ثم قال فيه رسول الله صلى الله عليه وسلم ما شاء الله أن يقول، ثم قال: «ائْذن لعشرة» فَأَذِنَ لَهُم فأكلوا حتى شَبِعُوا ثم خرجوا، ثم قال: «ائْذَن لعشرة» فأذن لهم حتى أكل القُوم كلُّهم وشَبِعُوا والقوم سبعون رجلا أو ثمانون. متفق عليه. وفي رواية: فما زال يَدخُل عشرة، ويخرج عشرة حتى لم يبق منهم أحد إلا دخل، فأكل حتى شَبِع، ثم هَيَّأهَا فإذا هي مِثْلُهَا حين أكلوا منها. وفي رواية: فأكلوا عشرة عشرة، حتى فعل ذلك بثمانين رجلا، ثم أكل النبي صلى الله عليه وسلم بعد ذلك وأهل البيت، وتركوا سُؤْرَا. وفي رواية: ثم أفْضَلُوا ما بَلَغُوا جِيرانهم. وفي رواية عن أنس، قال: جئت رسول الله صلى الله عليه وسلم يوما، فوجدته جالسا مع أصحابه، وقد عَصَبَ بَطنه، بِعُصَابة، فقلت لبعض أصحابه: لِم عَصَبَ رسول الله صلى الله عليه وسلم بطنه؟ فقالوا: من الجُوع، فذهبت إلى أبي طلحة، وهو زوج أم سليم بنت مِلْحَان، فقلت: يا أبَتَاه، قد رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم عَصَبَ بطنه بِعِصَابَة، فسألت بعض أصحابه، فقالوا: من الجُوع. فدخل أبو طلَحَة على أمي، فقال: هل من شيء؟ قالت: نعم، عندي كِسَرٌ من خُبزٍ وتمرات، فإن جاءنا رسول الله صلى الله عليه وسلم وحده أشْبَعنَاه، وإن جاء آخر معه قَلَّ عنهم... وذكر تمام الحديث.
अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि अबू तलहा –रज़ियल्लाहु अनहु- ने उम्मे सुलैम –रज़ियल्लाहु अनहा- से कहा : मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आवाज़ दुर्बल सुनी है, जिससे महसूस हो रहा है कि आप भूखे हैं। क्या तुम्हारे पास कुछ है? उन्होंने कहा : हाँ! फिर उन्होंने जौ की रोटियों के कुछ टुकड़े निकाले, उन्हें अपने दुपट्टे के एक भाग में लपेटा, फिर उसे मेरे कपड़े के अंदर छिपाया और शेष भाग को मेरे ऊपर डाल दिया, फिर मुझे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास भेज दिया। मैं पहुँचा, तो देखा कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मस्जिद में बैठे हुए हैं और आपके साथ कुछ लोग भी मौजूद हैं। अतः, मैं लोगों के पास खड़ा हो गया। यह देख अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुझसे कहा : “क्या अबू तलहा ने तुम्हें भेज़ा है?” मैंने कहा : हाँ। फ़रमाया : “खाने के लिए?” मैंने कहाः हाँ। तब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “चलो, सब लोग चलते हैं। चुनाँचे, लोग चलने लगे और मैं भी उनके आगे-आगे चल पड़ा। यहाँ तक कि मैंने अबू तलहा के पास आकर सब कुछ बताया, तो अबू तलहा ने कहा : उम्मे सुलैम, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- लोगों के साथ आ रहे हैं और हमारे पास उन्हें खिलाने के लिए पर्याप्त खाना नहीं है। यह सुन उम्मे सुलैम ने कहा : अल्लाह और उसके रसूल अधिक जानते हैं। अबू तलहा चलकर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से मिले, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उनके साथ पधारे और दोनों घर में दाख़िल हुए। अब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “ऐ उम्मे सुलैम, तुम्हारे पास जो कुछ है, वह ले आओ। उन्होंने वही रोटी के टुकड़े हाज़िर किए, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के आदेश से उन्हें टुकड़े-टुकड़े किया गया और उम्मे सुलैम ने उसके ऊपर घी की कुप्पी निचोड़कर सालन की व्यवस्था कर दी। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसमें, जो अल्लाह ने चाहा, पढ़ा और फ़रमाया : “दस लोगों को बुलाओ। उन्हें अनुमती दी गई, तो उन्होंने आसूदा होकर खाना खाया और फिर निकल गए। फ़िर फ़रमाया : “दस लोगों को बुलाओ। उन्हें अनुमती मिली, तो उन्होंने भी आसूदा होकर खाना खाया और निकल गए। यहाँ तक कि सब लोगों ने भर पेट खाना खा लिया। जबकि उनकी संख्या सत्तर अथवा अस्सी थी। सहीह बुख़ारी तथा मुस्लिम। जबकि एक रिवायत में है : लगातार दस-दस लोग दाखिल होते गए और दस-दस लोग निकलते रहे, यहाँ तक कि सब लोग अंदर आए और सबने भरपेट खाना खाया। फिर शेष खाने को एकत्र किया गया, तो पता चला कि उतना ही बचा हुआ है, जितना उस समय था, जब खाना शुरू किया गया था। एक और रिवायत में है : दस-दस लोग खाते रहे, यहाँ तक कि अस्सी लोगों ने खाना खाया। फिर उसके बाद नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- और घर वालों ने खाना खाया तथा कुछ बचा हुआ खाना छोड़ भी दिया। एक और रिवायत में है : फिर इतना खाना बचा दिया कि पड़ोसियों को भेजा गया। एक अन्य रिवायत में अनस –रज़ियल्लाहु अनहु- फरमाते हैं : मैं अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया, तो आप मस्जिद में कुछ लोगों के साथ बैठे हुए थे और आपके पेट पर एक पट्टी बँधी हुई थी। मैंने किसी सहाबी से पूछा कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने पेट पर पट्टी क्यों बाँधे हुए हैं? तो उत्तर मिला : भूख के कारण। सो, मैं अबू तलहा, जो उम्मे सुलैम बिंत मिलहान के पति थे, के पास गया और कहा : ऐ मेरे अब्बू जान! मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देखा है कि आप अपने पेट पर पट्टी बाँधे हुए हैं। कुछ लोगों से पूछा, तो उन्होंने बताया कि आपने ऐसा भूख के कारण किया है। अतः, अबू तलहा मेरी माता के पास गए और बाले : तुम्हारे पास कुछ है? उन्होंने उत्तर दिया : हाँ! मेरे पास रोटी के कुछ टुकड़े और कुछ खजूर हैं। यदि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अकेले आएँ, तो हम आपको आसूदा कर सकते हैं। परन्तु, यदि दूसरे लोग भी आ गए, तो कम पड़ जाएँगे। … फिर पूरी हदीस बयान की।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م.
كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ.
نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ.
صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422ه.ـ
صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل، الطبعة: الأولى، 1428 هـ.
دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الكترونية، لا يوجد بها بيانات نشر.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه مرفوعاً: انشقَّ القمر على عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم فِلْقَتين، فستر الجبل فِلْقَة، وكانت فِلْقَة فوق الجبل، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «اللهمَّ اشهَدْ».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरफ़ूअन रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में चाँद के दो टुकड़े हुए, तो पहाड़ ने एक टुकड़े को परदे में कर दिया और दूसरा टुकड़ा पहा़ड़ के ऊपर था। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “ऐ अल्लाह! तू गवाह रह!”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه.
صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
كشف المشكل من حديث الصحيحين، لجمال الدين أبي الفرج عبد الرحمن بن علي بن محمد الجوزي، المحقق: علي حسين البواب، الناشر: دار الوطن – الرياض.
مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: جاء زيدُ بنُ حارثة يشكو، فجعل النبيُّ صلى الله عليه وسلم يقول: «اتَّقِ اللهَ، وأمسِكْ عليك زوجَك»، قال أنس: لو كان رسولُ الله صلى الله عليه وسلم كاتمًا شيئًا لكتم هذه، قال: فكانت زينبُ تَفْخرُ على أزواج النبي صلى الله عليه وسلم تقول: زوَّجَكنَّ أهاليكنَّ، وزوَّجني اللهُ تعالى من فوق سبع سموات، وعن ثابت: {وتُخفي في نفسِك ما اللهُ مُبْدِيهِ وتخشى الناسَ} [الأحزاب: 37]، «نزلت في شأن زينبَ وزيد بن حارثة».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि ज़ैद बिन हारिसा (रज़ियल्लाहु अन्हु) शिकायत लेकर आए, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “अल्लाह से भय करो और अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो।” अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि यदि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कुछ छुपाते, तो इस बात को ज़रूर छुपाते। कहते हैं कि ज़ैनब (रज़ियल्लाहु अन्हा) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दूसरी पत्नियों पर यह बोलकर अभिमान करती थीं कि तुम्हारी शादी तुम्हारे घर वालों ने कराई है, जबकि मेरी शादी उच्च एवं महान अल्लाह ने सात आसमानों के ऊपर से कराई है। साबित से रिवायत है कि यह आयत : {आप अपने दिल में वह बात छुपाते हैं, जिसे अल्लाह प्रकट करके रहेगा और आप लोगों से भय करते हैं।} (सूरा अल-अहज़ाबः 37) ज़ैनब (रज़ियल्लाहु अन्हा) तथा ज़ैद बिन हारिसा (रज़ियल्लाहु अन्हु) के बारे में उतरी है।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه.
شرح كتاب التوحيد من صحيح البخاري، لعبد الله بن محمد الغنيمان، الناشر: مكتبة الدار، المدينة المنورة، الطبعة: الأولى، 1405 هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عمران بن حصين رضي الله عنهما قال: كنا في سفر مع النبي صلى الله عليه وسلم، وإنا أَسْرَيْنا حتى كنا في آخر الليل، وَقَعْنا وَقْعَة، ولا وَقْعَة أحلى عند المسافر منها، فما أيقظنا إلا حَرُّ الشمس، وكان أول من استيقظ فلان، ثم فلان، ثم فلان، ثم عمر بن الخطاب، وكان النبي صلى الله عليه وسلم إذا نام لم يوقظ حتى يكون هو يستيقظ، لأنا لا ندري ما يحدث له في نومه، فلما استيقظ عمر ورأى ما أصاب الناس وكان رجلا جليدا، فكبَّر ورفع صوته بالتكبير، فما زال يكبر ويرفع صوته بالتكبير حتى استيقظ بصوته النبي صلى الله عليه وسلم، فلما استيقظ شكوا إليه الذي أصابهم، قال: «لا ضير -أو لا يضير- ارتحلوا». فارتحل، فسار غير بعيد، ثم نزل فدعا بالوَضوء، فتوضأ، ونُودِيَ بالصلاة، فصلَّى بالناس، فلما انفتل من صلاته إذا هو برجل معتزل لم يُصَلِّ مع القوم، قال: «ما منعك يا فلان أن تصلي مع القوم؟». قال: أصابتني جنابة ولا ماء، قال: «عليك بالصعيد، فإنه يكفيك». ثم سار النبي صلى الله عليه وسلم، فاشتكى إليه الناس من العطش، فنزل فدعا فلانا، ودعا عَلِيًّا فقال: «اذهبا، فابتغيا الماء». فانطلقا، فتلقيا امرأة بين مزادتين -أو سطيحتين- من ماء على بعير لها، فقالا لها: أين الماء؟ قالت: عهدي بالماء أمسِ هذه الساعةَ، ونَفَرُنا خُلُوف. قالا لها: انطلقي. إذًا قالت: إلى أين؟ قالا: إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم. قالت: الذي يقال له: الصابئ؟ قالا: هو الذي تَعْنين، فانطلقي، فجاءا بها إلى النبي صلى الله عليه وسلم، وحدثاه الحديث، قال: فاستَنْزَلوها عن بعيرها، ودعا النبي صلى الله عليه وسلم بإناء، ففرَّغ فيه من أفواه المزادتين -أو سطيحتين- وأَوْكَأ أفواههما وأطلق العَزَالِيَ، ونودي في الناس: اسقوا واستقوا، فسقى مَن شاء واستقى مَن شاء، وكان آخر ذاك أن أعطى الذي أصابته الجنابة إناء من ماء، قال: «اذهب فأفرغه عليك». وهي قائمة تنظر إلى ما يُفْعَل بمائها، وايمُ الله لقد أقلع عنها، وإنه ليُخَيَّل إلينا أنها أشد مَلَأَة منها حين ابتدأ فيها، فقال النبي صلى الله عليه وسلم: «اجمعوا لها». فجمعوا لها من بين عَجْوة ودقيقة وسويقة حتى جمعوا لها طعاما، فجعلوها في ثوب وحملوها على بعيرها، ووضعوا الثوب بين يديها، قال لها: «تعلمين، ما رزئنا من مائك شيئا، ولكنَّ الله هو الذي أسقانا». فأتت أهلها وقد احتبست عنهم، قالوا: ما حبسك يا فلانة؟ قالت: العجب، لقيني رجلان، فذهبا بي إلى هذا الذي يقال له الصابئ، ففعل كذا وكذا، فوالله إنه لأسحر الناس من بين هذه وهذه، وقالت بإصبعيها الوسطى والسبابة، فرفعتهما إلى السماء –تعني: السماء والأرض- أو إنه لرسول الله حقا، فكان المسلمون بعد ذلك يَغِيرون على من حولها من المشركين، ولا يصيبون الصِّرْم الذي هي منه، فقالت يوما لقومها: ما أرى أن هؤلاء القوم يدعونكم عمدا، فهل لكم في الإسلام؟ فأطاعوها، فدخلوا في الإسلام.
इमरान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि हम लोग एक सफर में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। हम रात भर चलते रहे, यहाँ तक कि रात का अंतिम पहर हुआ, तो कुछ देर के लिए सो गए। वैसे भी, मुसाफिर के लिए सोने से उत्तम कोई वस्तु नहीं होती। हम सोए रहे, यहाँ तक कि सूरज की गरमी से ही जागे। सबसे पहले जागने वाले व्यक्ति अमुक, फिर अमुक, फिर अमुक, फिर उमर बन खत्ताब थे। हमारा मामूल यह था कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब सो जाते, तो आपको जगाया नहीं जाता, बल्कि आप खुद ही जागते थे। क्योंकि हम नहीं जानते थे कि आपके साथ नींद में क्या कुछ घटित हो रहा है? जब उमर -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने जागकर लोगों की हालत देखी, तो एक निडर व्यक्ति होने के नाते, ज़ोर-ज़ोर से तकबीर कहने लगे। वह लगातार ज़ोर-ज़ोर से ‘अल्लाहु अकबर’ कहते रहे, यहाँ तक कि उनकी आवाज़ से अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जाग गए। आपकी नींद टूटी, तो लोगों ने आपसे उस दुर्घटना की शिकायत की, जो उनके साथ घटी थी। उनकी बात सुन आपने फ़रमाया : “कुछ हर्ज नहीं -या कहा कि उससे कुछ नुकसान न होगा-, चलो अब कूच करो।” फिर लोग वहाँ से चल दिए। थोड़े-से सफ़र के बाद आप उतरे, वज़ू के लिए पानी मँगवाया, वज़ू किया, नमाज़ के लिए अज़ान दी गई और उसके बाद आपने लोगों को नमाज़ पढ़ाई। जब आपकी नमाज़ पूरी हो गई, तो एक आदमी को लोगों से अलग देखा, जिसने हम लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी थी। आपने उससे पूछा : “ऐ अमुक व्यक्ति! तुझे लोगों के साथ नमाज़ पढ़ने से किस चीज़ ने रोका?” उसने उत्तर दिया : मैं नापाक हो गया था और पानी भी मौजूद न था। आपने फ़रमाया : “तुझे मिट्टी से तयम्मुम करना चाहिए था। वह तेरे लिए काफी होता।” फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- चले, तो लोगों ने आपसे प्यास की शिकायत की। अतः, आप सवारी से उतरे और अली -रज़ियल्लाहु अन्हु- तथा एक अन्य व्यक्ति को बुलाया और फरमाया : “तुम दोनों जाओ और पानी तलाश करो।” दोनों रवाना हुए, तो रास्ते में उन्हें एक स्त्री मिली, जो अपने ऊँट पर पानी की दो मश्कों के बीच बैठी हुई थी। उन्होंने उससे कहा कि पानी कहाँ है? उसने जवाब दिया कि पानी मुझे कल इसी समय मिला था और हमारे मर्द पीछे हैं। उन दोनों ने उससे कहा कि तुम हमारे साथ चलो। उसने कहा : कहाँ जाना है? उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास। वह बोली : वही, जिसे अधर्मी कहा जाता है? उन्होंने कहा : हाँ वही, जिन्हें तू ऐसा कहती है। अच्छा अब चलो। आख़िर दोनों उसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास ले आए और आपको सारी घटना कह सुनाई। इमरान -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं : लोगों ने उसे ऊँट से उतारा। फिर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक बर्तन मँगवाया और दोनों मश्कों के मुँह उसमें खोल दिए। फिर ऊपर का मुँह बंद करके नीचे का मुँह खोल दिया। उसके बाद लोगों को ख़बर कर दी गई कि ख़ुद भी पानी पिएँ और जानवरों को भी पिलाएँ। तो जिस ने चाहा ख़ुद पिया और जिसने चाहा जानवरों को पिलाया। फिर अंत में उस जुंबी व्यक्ति को बुलाकर एक बर्तन पानी दे दिया और फ़रमाया कि जाओ, इससे स्नान कर लो। वह औरत खड़ी-खड़ी सब देखती रही कि उसके पानी का प्रयोग किन-किन कामों में हो रहा है? अल्लाह की क़सम! जब दोनों मशकों से पानी लेना बंद किया गया, तो हमें ऐसा लग रहा था कि वे उस समय से कहीं अधिक भरे हुए हैं, जब पानी लेना आरंभ किया गया था। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया कि इस औरत के लिए कुछ जमा करो। अतः, लोगों ने खजूर, आटा और सत्तू आदि जमा करना शुरू किया और अच्छी-खासी खाने की चीजें एकत्र कर लीं। फिर उन्हें एक कपड़े में बाँधकर, उस महिला को ऊँट पर सवार करने के बाद, उसके आगे रख दिया गया। उसके बाद आपने उससे कहा : “तुम जानती हो कि हमने तुम्हारा पानी घटने नहीं दिया है। बल्कि हमें तो अल्लाह ने पिलाया है।” फिर वह महिला अपने घर वालों के पास गई। चूँकि वह देर से पहुँची थी, इसलिए उन्होंने पूछा : ऐ अमुक स्त्री! तुझे किसने रोक लिया था? उसने कहा : मेरे साथ तो एक अजीब घटना घटी है। हुआ यह कि रास्ते में मुझे दो आदमी मिले, जो मुझे उस आदमी के पास ले गए, जिसको अधर्मी कहा जाता है। फिर उसने ऐसा और ऐसा किया। अल्लाह की क़सम! जितने लोग इस (आकाश) के और इस (धरती) के बीच में हैं, यह कहते ससम उसने अपनी बीच वाली और शहादत वाली उंगलियों को उठाकर आसमान और ज़मीन की और इशारा भी किया, उन सबमें वह या तो सबसे बड़ा जादूगर है या फिर अल्लाह का सच्चा रसूल है। फिर मुसलमानों ने यह रवैया अपनाया कि उसके आस-पास के बहुदेववादियों, लेकिन जिस परिवार से उसका संबंध था, उससे छेड़छाड़ नहीं करते थे। अंततः, उसने एक दिन अपनी क़ौम से कहा : मेरे ख़याल में मुसलमान तुम्हें जान-बूझकर छोड़ हैं। क्या तुम्हारे अंदर इस्लाम की कोई चाहत है? इसपर लोगों ने उसकी बात मान ली और सब लोग मुसलमान हो गए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح البخاري، أبو عبد الله محمد بن إسماعيل بن إبراهيم الجعفي البخاري, تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر - الناشر: دار طوق النجاة - الطبعة: الأولى 1422هـ.
توضيح الأحكام من بلوغ المرام، عبدالله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة، ط الخامسة، 1423هـ.
منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف : عبد الله بن صالح الفوزان، ط 1، 1427هـ، دار ابن الجوزي.
صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبدالباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ.
عمدة القاري شرح صحيح البخاري؛ تأليف بدر الدين العيني الحنفي، طبعة إحياء التراث العربي، بيروت، بدون تاريخ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه ، قال أبو جهل: هل يُعَفِّر محمدٌ وجهَه بين أَظْهُركم؟ قال فقيل: نعم، فقال: واللَّات والعُزَّى لَئِن رأيتُه يفعل ذلك لأَطَأَنَّ على رقبتَه، أو لأُعَفِّرنَّ وجهَه في التراب، قال: فأتى رسولَ الله صلى الله عليه وسلم وهو يصلِّي، زَعَم لَيَطَأ على رقبته، قال: فما فَجِئَهم منه إلا وهو يَنْكِصُ على عَقِبَيْه ويتَّقي بيديْه، قال: فقيل له: ما لك؟ فقال: إنَّ بيْني وبيْنه لخَنْدَقًا من نار وهَوْلًا وأجنِحة، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لو دنا منِّي لاخْتَطفَتْه الملائكةُ عُضْوًا عُضْوًا» قال: فأنزل اللهُ -عزَّ وجلَّ- -لا ندري في حديث أبي هريرة، أو شيء بلغه -: {كَلَّا إِنَّ الْإِنْسَانَ لَيَطْغَى، أَنْ رَآهُ اسْتَغْنَى، إِنَّ إِلَى رَبِّكَ الرُّجْعَى، أَرَأَيْتَ الَّذِي يَنْهَى، عَبْدًا إِذَا صَلَّى، أَرَأَيْتَ إِنْ كَانَ عَلَى الْهُدَى، أَوْ أَمَرَ بِالتَّقْوَى، أَرَأَيْتَ إِنْ كَذَّبَ وَتَوَلَّى} [العلق: 7]- يعني أبا جهل - {أَلَمْ يَعْلَمْ بِأَنَّ اللَّهَ يَرَى، كَلَّا لَئِنْ لَمْ يَنْتَهِ لَنَسْفَعًا بِالنَّاصِيَةِ، نَاصِيَةٍ كَاذِبَةٍ خَاطِئَةٍ، فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ، سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ، كَلَّا لَا تُطِعْهُ} [العلق: 14]، زاد عبيد الله -أحد الرواة- في حديثه قال: وأمره بما أمره به. وزاد ابن عبد الأعلى -راوٍ آخر-: {فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ} [العلق: 17]، يعني قومه.
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अबू जह्ल ने कहा: क्या मुहम्मद तुम्हारे सामने ज़मीन पर अपना चेहरा रखता है? वर्णनकर्ता का कहना है कि उससे कहा गया: हाँ। इसपर उसने कहा: लात तथा उज़्ज़ा की क़सम! यदि मैंने उसे ऐसा करते देखा, तो उसकी गर्दन पर पाँव रख दूँगा या उसके चेहरे को मिट्टी में सान दूँगा। वर्णनकर्ता का कहना है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ पढ़ रहे थे कि वह आपके पास आया। वह इस भ्रम में था कि आपकी गर्दन को रौंदेगा। वर्णनर्ता का कहना है: लेकिन लोगों ने देखा कि वह अचानक पीछे हटने लगा और अपने दोनों हाथों से अपना बचाव करने लगा। वर्णनकर्ता कहता है: उससे पूछा गया कि तुम्हारे साथ क्या हुआ? तो उसने कहा: मेरे और उसके बीच आग की खाई, भय तथा बहुत-से पर थे। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: अगर वह मेरे निकट आता, तो फ़रिश्ते उसकी बोटी- बोटी उचक लेते। वर्णनकर्ता का कहना है कि इसके बाद (सर्वशक्तिमान एवं महान) अल्लाह ने यह आयतें उतारीं (हम नहीं जानते कि यह अबू हुरैरा की रिवायत में है या किसी अन्य स्रोत से उनके पास पहुँची है): {كَلَّا إِنَّ الْإِنْسَانَ لَيَطْغَى، أَنْ رَآهُ اسْتَغْنَى، إِنَّ إِلَى رَبِّكَ الرُّجْعَى، أَرَأَيْتَ الَّذِي يَنْهَى، عَبْدًا إِذَا صَلَّى، أَرَأَيْتَ إِنْ كَانَ عَلَى الْهُدَى، أَوْ أَمَرَ بِالتَّقْوَى، أَرَأَيْتَ إِنْ كَذَّبَ وَتَوَلَّى، أَلَمْ يَعْلَمْ بِأَنَّ اللَّهَ يَرَى، كَلَّا لَئِنْ لَمْ يَنْتَهِ لَنَسْفَعًا بِالنَّاصِيَةِ، نَاصِيَةٍ كَاذِبَةٍ خَاطِئَةٍ، فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ، سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ، كَلَّا لَا تُطِعْهُ} अर्थात, वास्तव में, इंसान सरकशी करता है, क्योंकि वह ख़ुद को धनवान् समझता है। निस्संदेह, फिर तेरे पालनहार की ओर लौटकर जाना है। क्या तुमने उसको देखा, जो एक बंदे को रोकता है, जब वह नमाज़ पढ़ता है? भला देखो तो, यदि वह सीधे मार्ग पर हो या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो? और देखो तो यदि उसने झुठलाया और मुँह फेरा हो? क्या वह नहीं जानता कि अल्लाह उसे देख रहा है? निश्चित तौर पर यदि वह नहीं रुका, तो हम उसे माथे के बल घसीटेंगे। झूठे और पापी माथे के बल। तो वह अपनी सभा को बुला ले। हम भी नरक के फ़रिश्तों को बुलाएँगे। (ऐ मेरे बंदे!) हरगिज़ उसकी बात न सुनो। [सूरा अल-अलक़ः 6-19] यहाँ झुठलाने और मुँह फेरने वाले से आशय अबू जह्ल है। इस हदीस के एक वर्णनकर्ता उबैदुल्लाह ने अपनी रिवायत में यह इज़ाफ़ा किया है : फिर उसे आदेश दिया, जो आदेश दिया। तथा एक और वर्णनकर्ता इब्ने अब्दुल आला ने {فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ} का अर्थ बताया है कि वह अपनी जाति को बुलाए।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
- صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
- المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت، الطبعة: الثانية، 1392ه.
- النهاية في غريب الحديث والأثر، لابن الأثير، نشر: المكتبة العلمية - بيروت، 1399هـ - 1979م، تحقيق: طاهر أحمد الزاوى - محمود محمد الطناحي.
- مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م.
- الإفصاح عن معاني الصحاح، ليحيى بن هبيرة بن محمد بن هبيرة الذهلي الشيباني، المحقق: فؤاد عبد المنعم أحمد، الناشر: دار الوطن، سنة النشر: 1417هـ.
- كشف المشكل من حديث الصحيحين، لجمال الدين أبي الفرج عبد الرحمن بن علي بن محمد الجوزي، المحقق: علي حسين البواب، الناشر: دار الوطن – الرياض.
- تاج العروس من جواهر القاموس، للزبيدي، نشر: دار الهداية.
- تفسير الطبري = جامع البيان عن تأويل آي القرآن, محمد بن جرير بن يزيد بن كثير بن غالب الآملي، أبو جعفر الطبري, تحقيق: الدكتور عبد الله بن عبد المحسن التركي, دار هجر, الطبعة: الأولى، 1422 هـ - 2001 م.
- إكمال المعلم بفوائد مسلم لعياض بن موسى بن عياض بن عمرون اليحصبي السبتي، المحقق: الدكتور يحيى إسماعيل، الناشر: دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر، الطبعة: الأولى، 1419 هـ - 1998 م.
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com