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तशरीह के साथ हदीसें

जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का उत्तर दे दूँ।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلَّى الله عليه وسلم قال: «ما مِنْ أحَدٍ يُسلِّمُ علي إلا ردَّ اللهُ عليَّ رُوحي حتى أردَّ عليه السَّلامَ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का उत्तर दे दूँ।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाइसकी सनद ह़सन है
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि सलाम करने वाले को उसके सलाम का जवाब देने के लिए आपकी आत्मा को आपके शरीर में लौटा दिया जाता है। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि सलाम करने वाला दूर है कि निकट। याद रहे कि बर्ज़ख़ एवं क़ब्र के जीवन का संबंध ग़ैब की दुनिया से है, जिसकी हक़ीक़त उस अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता, जो हर चीज़ की क्षमता रखता है।

फ़ायदे
  1. अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर अधिक से अधिक दरूद व सलाम भेजने की प्रेरणा।
  2. नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अपनी कब्र में ज़िंदगी, वह सबसे श्रेष्ठ और पूर्ण ज़िंदगी है जो किसी इंसान को बरज़ख (मृत्यु के बाद की स्थिति) में मिल सकती है; और इस ज़िंदगी की असल हकीकत को अल्लाह के अलावा कोई नहीं जानता।
  3. इस हदीस में उन लोगों के लिए कोई दलील नहीं है, जो क़ब्र के अंदर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हमारे इस सांसारिक जीवन की तरह संपूर्ण रूप से जीवित होने का दावा करते हैं। अतः शिर्क करने वालों का इसे आपसे मदद मांगने के लिए सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना दुरुस्त नहीं है। सच्ची बात यह है कि आप इस समय बर्ज़ख़ का जीवन जी रहे हैं।
हवाला

سنن أبي داود (3/ 384) (2041). مسند أحمد (16/ 477) (10815). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 486). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 477). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 964).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की विशेषताएँ

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com