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तशरीह के साथ हदीसें

पीने की हराम वस्तुएँ

8 हदीसें

अल्लाह यहूदियों का विनाश करे, उनपर चरबी हराम की गई, तो उन्होंने उसे पिघला कर बेचा

عن عبد الله بن عباسٍ رضي الله عنهما قال: بلغَ عمرَ رضي الله عنه أن فلانًا باعَ خمرًا. فقال: قاتلَ الله فلانًا! ألم يعلم أن رسولَ الله صلى الله عليه وسلم قال: "قاتلَ الله اليهودَ، حُرِّمت عليهم الشُّحومُ، فجَمَلُوها، فباعُوها".
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि उमर (रज़ियल्लाहु अनहु) को मालूम हुआ कि एक व्यक्ति ने शराब बेची है, तो फ़रमायाः अल्लाह उसका विनाश करे, क्या वह नहीं जानता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया हैः अल्लाह यहूदियों का विनाश करे, उनपर चरबी हराम की गई, तो उन्होंने उसे पिघला कर बेचा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

उमर बिन खत्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- को मालूम हुआ कि एक व्यक्ति ने मदिरा से लाभ उठाने के लिए हीला-बहाना से काम लिया है और उसे पीने के बजाय बेच लिया है। यह एक स्पष्ट छल एवं हराम कार्य था। इसलिए उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उसपर बद दुआ की, जिस प्रकार नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने छल करने वाले यहूदियों पर बद दुआ की थी। उन्होंने कहा : अल्लाह उसका विनाश करे, क्या उसे नहीं मालूम कि इस प्रकार का बहाना हराम है? इसलिए कि यह एक प्रकार से अल्लाह एवं उसके रसूल को धोखा देना है और नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : अल्लाह यहूदियों को हलाक करे। जब अल्लाह ने उनपर चरबी को हराम कर दिया, तो हीले-बहाने से उससे लाभ उठाने लगे। चरबी को पिघलाकर बेचने लगे और उसके मूल्य को खाने लगे और आँख में धूल झोंकने के इरादे से कहने लगे : हमने वर्जित चरबी नहीं खाई है। सच्चाई यह है कि वे अल्लाह को धोखा दे रहे थे और अल्लाह उन्हें धोखा दे रहा था।

हवाला

صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط دار الفكر بدمشق الطبعة الأولى1381هـ. تأسيس الأحكام للنجمي، ط2، دار علماء السلف، 1414هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से शराब के बारे में पूछा गया, जिसे सिर्का बना लिया जाता है, तो आपने फ़रमाया : “ नहीं ”

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: سُئل رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الخمر تُتَّخَذُ خَلًّا؟ قال: «لا».
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से शराब के बारे में पूछा गया, जिसे सिर्का बना लिया जाता है, तो आपने फ़रमाया : “नहीं।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. - سبل السلام شرح بلوغ المرام، تأليف: محمد بن إسماعيل بن صلاح الصنعاني، الناشر: دار الحديث, بدون طبعة وبدون تاريخ. - توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م - نيل الأوطار, محمد بن علي بن محمد بن عبد الله الشوكاني اليمني, تحقيق: عصام الدين الصبابطي, دار الحديث، مصر, الطبعة: الأولى، 1413هـ - 1993م. - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن صالح الفوزان، الناشر : دار ابن الجوزي الطبعة : الأولى ، 1427 هـ - 1431 هـ - فتاوى اللجنة الدائمة - المجموعة الأولى, اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء, جمع وترتيب: أحمد بن عبد الرزاق الدويش, الناشر: رئاسة إدارة البحوث العلمية والإفتاء - الإدارة العامة للطبع – الرياض. - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 ه - 2006 م. - فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427ه. - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر. دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية. الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م.

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जब अल्लाह ने वह आयत उतारी, जिसमें शराब को हराम क़रार दिया है, तो उस समय मदीने में प्रयोग होने वाली सारी शराबें खजूर की होती थीं।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: «لقد أَنْزَلَ الله الآية التي حَرَّمَ الله فيها الخمر، وما بالمدينة شَرَابٌ يُشْرَبُ إلا من تَمْرٍ».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि उन्होंने कहाः जब अल्लाह ने वह आयत उतारी, जिसमें शराब को हराम क़रार दिया है, तो उस समय मदीने में प्रयोग होने वाली सारी शराबें खजूर की होती थीं।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि जब शराब को हराम किए जाने की आयत उतरी, तो मदीने में शराब केवल खजूर ही की बनती थी, जो इस बात का प्रमाण है कि शराब को हराम घोषित करने का कारण उसकी मादकता (नशा आवर होना) है, चाहे उसे किसी भी चीज़ से बनाया जाए।

हवाला

- تسهيل الالمام، للشيخ صالح الفوزان، طبعة الرسالة، الطبعة الأولى 1427 – 2006 م - فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427 - 2006 م - توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية، الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م - صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي. ط1 1428هـ.

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हर नशे वाली वस्तु शराब है और हर नशे वाली वस्तु हराम है। जिसने दुनिया में शराब पी और इसी लत के साथ तौबा किए बिना मर गया, वह आख़िरत में उससे वंचित रहेगा।

عن ابن عمر رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «كل مُسْكِرٍ خَمْرٌ، وكل مُسْكِرٍ حرام، ومن شرِب الخمر في الدنيا فمات وهو يُدْمِنُهَا لَمْ يَتُبْ، لَمْ يَشْرَبْهَا في الآخرة».
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "हर नशे वाली वस्तु शराब है और हर नशे वाली वस्तु हराम है। जिसने दुनिया में शराब पी और इसी लत के साथ तौबा किए बिना मर गया, वह आख़िरत में उससे वंचित रहेगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है, जबकि बुख़ारी ने इसका अंतिम वाक्य रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने बताया है कि मानव से उसका विवेक छीन लेने वाली हर चीज़ अरबी भाषा के शब्द "ख़म्र" के दायरे में आएगी, और नशा लाने वाली चीज़ शुमार होगी। चाहे उसे पिया जाए, खाया जाए, सूँघा जाए या किसी और तरह से उपयोग में लाया जाए। साथ ही यह कि नशा लाने वाली और मानव विवेक का हरण करने वाली हर चीज़ को अल्लाह ने हराम क़रार दिया है, और उसके इस्तेमाल से मना किया है। कम हो या ज़्यादा। जिसने किसी नशा लाने वाली चीज़ का पाबंदी से उपयोग किया और उससे तौबा किए बिना दुनिया से चला गया, वह अल्लाह की ओर से तयशुदा इस दंड का हक़दार बन गया कि उसे जन्नत की शराब से वंचित रखा जाएगा।

फ़ायदे
  1. शराब को हराम क़रार देने का कारण उसमें नशा होना है। अतः हर नशा वाली चीज़ हराम है।
  2. अल्लाह ने शराब को हराम इसलिए क़रार दिया कि उसमें बड़े-बड़े नुक़सान और बुराइयाँ हैं।
  3. स्वर्ग में शराब पीना परम सुख और पूर्ण आनंद का एक भाग है।
  4. जो दुनिया में खुद को शराब से दूर नहीं रखेगा, उसे जन्नत की शराब से वंचित रखा जाएगा। क्योंकि इन्सान को प्रतिफल उसी कोटि का दिया जाता है, जिस कोटि का उसका कर्म होता है।
  5. मृत्य से पहले गुनाहों से तौबा कर लेने में जल्दी करने की प्रेरणा।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 104) (5575). صحيح مسلم (3/ 1587) (2003). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (8/ 519). فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (5/ 418). توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام (6/ 307). معالم السنن، وهو شرح سنن أبي داود، للخطابي (4/ 264). الفتح الرباني لترتيب مسند الإمام أحمد بن حنبل الشيباني، للساعاتي (16/ 116). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (5/ 30). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (6/ 2382).

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नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से शराब के बारे में पूछा गया, तो आपने उन्हें शराब बनाने से मना किया (या शराब बनाने को नापसंद किया।) उन्होंने कहाः मैं तो शराब केवल दवा के लिए बनाता हूँ। आपने कहाः "यह दवा नहीं, बल्कि ख़ुद बीमारी है।"

عن وائل الحضرمي أن طارق بن سويد الجعفي سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن الخمر، فَنَهَاهُ -أو كره- أن يَصْنَعَهَا، فقال: إنما أَصْنَعُهَا لِلدَّوَاءِ، فقال: «إنه ليس بِدَوَاءٍ، ولكنه دَاءٌ».
वाइल हज़रमी का वर्णन है कि तारिक़ बिन सुवैद जोअ़फ़ी (रज़ियल्लाहु अंहु) ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से शराब के बारे में पूछा, तो आपने उन्हें शराब बनाने से मना किया (या शराब बनाने को नापसंद किया।) उन्होंने कहाः मैं तो शराब केवल दवा के लिए बनाता हूँ। आपने कहाः "यह दवा नहीं, बल्कि ख़ुद बीमारी है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में है कि तारिक़ बिन सुवैद -रज़ियल्लाहु अनहु- ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से शराब के बारे में पूछा, जिसे पीने के लिए नहीं, बल्कि दवा के लिए बनाया जाए, तो आपने बताया कि वह स्वयं बीमारी है और उसके अंदर शिफ़ा जैसी कोई वस्तु नहीं है। इस हदीस से मालूम होता है कि शराब हराम है, बीमारियाँ पैदा करती है और इसमें कोई लाभ नहीं है। अतः इसे नष्ट कर देना और बहा देना ज़रूरी है।

हवाला

- تسهيل الالمام، للشيخ صالح الفوزان، طبعة الرسالة، الطبعة الأولى، 1427 – 2006 م. - فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى، 1427 - 2006 م. - توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية، الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م. - صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت.

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सुन लो! शराब हराम कर दी गई है।

عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: كُنْتُ سَاقِيَ القَوْمِ فِي مَنْزِلِ أَبِي طَلْحَةَ، وَكَانَ خَمْرُهُمْ يَوْمَئِذٍ الفَضِيخَ، فَأَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُنَادِيًا يُنَادِي: أَلاَ إِنَّ الخَمْرَ قَدْ حُرِّمَتْ، قَالَ: فَقَالَ لِي أَبُو طَلْحَةَ: اخْرُجْ، فَأَهْرِقْهَا، فَخَرَجْتُ فَهَرَقْتُهَا، فَجَرَتْ فِي سِكَكِ المَدِينَةِ، فَقَالَ بَعْضُ القَوْمِ: قَدْ قُتِلَ قَوْمٌ وَهِيَ فِي بُطُونِهِمْ، فَأَنْزَلَ اللَّهُ: {لَيْسَ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ فِيمَا طَعِمُوا} [المائدة: 93] الآيَةَ.
अनस रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं अबू तलहा के घर में लोगों को शराब पिला रहा था और उन दिनों उनकी शराब फ़ज़ीख़ नामी शराब हुआ करती थी, कि इसी बीच अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक व्यक्ति को यह आवाज़ लगाने का आदेश दिया : सुन लो! शराब हराम कर दी गई है। उनका कहना है कि (यह आवाज़ सुनते ही) अबू तलहा ने मुझसे कहा : बाहर जाओ और इसे बहा दो। चुनांचे मैं बाहर गया और उसे बहा दिया। देखते ही देखते मदीने की गलियों से शराब बहने लगी। ऐसे में किसी ने कहा : कुछ लोग क़त्ल कर दिए गए और उनके पेट में शराब मौजूद थी। चुनांचे अल्लाह ने यह आयत उतारी : (ईमान लाने और अच्छे अमल करने वालों पर उन चीज़ों का कोई गुनाह नहीं है, जो वे खा चुके।) [अल-माइदा : 93]
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु बता रहे हैं कि वह अपनी माता के पति अबू तलहा के घर में उपस्थित लोगों को शराब पिला रहे थे और उस दिन लोग पकी हुई एवं अधपकी खजूरों से बनी शराब पी रहे थे कि इसी बीच अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर से भेजे हुए एक व्यक्ति ने ऐलान कर दिया : सुन लो! शराब हराम कर दी गई है, उनका कहना है कि ऐलान सुनने के बाद अबू तलहा ने मुझसे कहा : बाहर जाओ और शराब को बहा दो। चुनांचे मैं बाहर गया और उसे बहा दिया। फिर देखते ही देखते मदीने की गलियों में शराब बहने लगी। ऐसे में किसी ने कहा : कुछ सहाबा शराब हराम होने से पहले इस अवस्था में मार दिए गए कि उनके पेट में शराब मौजूद थी। चुनांचे अल्लाह ने यह आयत उतारी : {ईमान लाने और अच्छे अमल करने वालों पर उन चीज़ों का कोई गुनाह नहीं है, जो वे खा चुके।} [अल-माइदा : 93] यानी ईमान वालों ने शराब का निषेध उतरने से पहले जो कुछ खाया और पिया, उन्हें उसका गुनाह नहीं होगा।

फ़ायदे
  1. अबू तलहा और सहाबा रज़ियल्लाहु अनहुम की यह खूबी है कि उन्होंने बिना किसी संकोच के अल्लाह के आदेश को तुरंत मान लिया। यही एक सच्चे मुसलमान का कर्तव्य है।
  2. ख़म्र : एक सारगर्भित शब्द जिसके दायरे में सारे नशीले पदार्थ आ जाते हैं।
  3. फ़ज़ीख़ : पकी एवं अधपकी खजूरों से आग में पकाए बिना बनने वाली शराब। बुस्र : अधपकी खजूर।
  4. इब्न-ए-हजर कहते हैं : मुहल्लब ने कहा है : शराब को रास्ते में इसलिए बहा दिया गया, ताकि उसे ठुकरा देने और छोड़ देने की बात हर तरफ़ फैल जाए। वैसे, सड़क पर शराब डालने से लोगों को कष्ट हो सकता है, लेकिन ऊपर बताई गई मसलहत इस कष्ट से कहीं अधिक महत्वूर्ण है।
  5. बंदों पर अल्लाह के अनुग्रह का बयान और यह कि आदेश उतरने से पहले किए गए किसी कार्य की पकड़ नहीं होगी।
  6. अल्लाह ने शराब को इसलिए हराम कर दिया है कि इससे विवेक एवं धन को होने वाली क्षति के कारण कई बुराइयाँ सामने आती हैं और विवेक छिन जाने के कारण इन्सान शराब पीकर बहुत-से गुनाह के काम करने लगता है।
हवाला

صحيح البخاري (3/ 132) (2464). صحيح مسلم (3/ 1570) (1980). النهاية في غريب الحديث والأثر (709) (1006). فتح الباري لابن حجر (1/ 133). إرشاد الساري لشرح صحيح البخاري (4/ 267).

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जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए, उसकी कम मात्रा भी हराम है।

عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضيَ اللهُ عنهُما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَا أَسْكَرَ كَثِيرُهُ فَقَلِيلُهُ حَرَامٌ».
जाबिर -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए, उसकी कम मात्रा भी हराम है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि खाने-पीने की हर वह चीज़, जो अधिक मात्रा में लिए जाने से इन्सान की अक़्ल को ले उड़ती है, उसकी कम मात्रा लेना भी हराम है। चाहे अक़्ल न भी ले जाए।

फ़ायदे
  1. शरीयत इन्सान की अक़्ल की रक्षा करती है।
  2. बुराई के रास्ते को रोकने के सिद्धांत के एतिबार का सहीह होना, ऐसा उन सभी चीज़ों को बंद करके किया जाता है जो उन बुराइयों की ओर ले जाती हैं।।
  3. नशा लाने वाली चीज़ों की कम मात्रा भी हराम है। क्योंकि इसी रास्ते पर चलकर इन्सान नशा का आदी बन जाता है।
  4. जिस चीज़ की कम एवं अधिक मात्रा दोनों नशा न लाए, वह हराम नहीं है।
हवाला

سنن أبي داود (5/ 523) (3681). سنن الترمذي (3/ 442) (1865). سنن ابن ماجه (4/ 475) (3393). مسند أحمد (23/ 51) (14703). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام (5/ 418). شرح سنن أبي داود للعباد (417/ 9). النهاية في غريب الحديث والأثر (437).

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हर नशा वाली वस्तु हराम है।

عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ أَبِي مُوسَى الأَشْعَريِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ: أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَهُ إِلَى اليَمَنِ، فَسَأَلَهُ عَنْ أَشْرِبَةٍ تُصْنَعُ بِهَا، فَقَالَ: وَمَا هِيَ؟، قَالَ: «البِتْعُ وَالمِزْرُ»، فَقِيلَ لِأَبِي بُرْدَةَ: مَا البِتْعُ؟ قَالَ: نَبِيذُ العَسَلِ، وَالمِزْرُ: نَبِيذُ الشَّعِيرِ، فَقَالَ: «كُلُّ مُسْكِرٍ حَرَامٌ» خرجه البخاري. وَخَرَّجَهُ مُسْلِمٌ وَلَفْظُهُ: قَالَ: بَعَثَنِي رَسُولُ اَلله أَنَا وَمُعَاذٌ إِلَى اَليَمَنِ، فَقُلْتُ: يَا رَسُولُ اَللَّهِ! إِنَّ شَرَابًا يُصْنَعُ بِأَرْضِنَا يُقَال لَهُ: المِزَرُ مِنَ الشَّعِيرِ، وَشَرَابٌ يُقَالُ لَهُ: البِتْعُ مِنَ العَسَلِ، فَقَالَ: «كُلُّ مُسْكِرٍ حَرَامٌ». وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: «فَقَالَ: كُلُّ مَا أَسْكَرَ عَنِ الصَّلَاةِ فَهُوَ حَرَامٌ». وَفِي رِوَايَةٍ لَهُ: «وَكَانَ رَسُولُ الله قَدْ أُعْطِيَ جَوَامِعَ الكَلِمِ بِخَوَاتِمِهِ، فَقَالَ: أَنْهَى عَنْ كُلِّ مُسْكِرٍ أَسْكَرَ عَنْ الصَّلَاةِ».
अबू बुरदा अपने पिता अबू मूसा अशरी -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत करते हैं कि : नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको यमन की ओर भेजा और उन्होंने आपसे कुछ पीने की चीज़ों के बारे में पूछा जो वहाँ बनाई जाती थीं, तो आपने फ़रमाया : “वह क्या हैं?” उन्होंने कहा : बित्अ तथा मिज़्र। (बाद में) अबू बुरदा से इन दोनों शब्दों का अर्थ पूछा गया, तो उन्होंने फ़रमाया : बित्अ से मुराद शहद से बनने वाली नबीज़ और मिज़्र से मुराद जौ से बनने वाली नबीज़ है। चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “हर नशे वाली वस्तु हराम है।” इस हदीस को इमाम बुख़ारी ने रिवायत किया है। इसे इमाम मुस्लिम ने भी रिवायत किया है। सहीह मुस्लिम के शब्द हैं : (अबू मूसा अशरी -रज़ियल्लाहु अनहु) ने कहा: अल्लाह के रसूल ने मुझे और मुआज़ को यमन भेजा, तो मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे इलाक़े में जौ से एक शराब बनती है, जिसे मिज़्र कहा जाता है और शहद से एक शराब बनती है, जिसे बित्अ कहा जाता है। आपने जवाब दिया : "नशा लाने वाली हर वस्तु हराम है।" मुस्लिम ही की एक अन्य रिवायत में है : "आपने कहा : जो चीज़ नशे में डालकर नमाज़ से निश्चेत कर दे, वह हराम है।" मुस्लिम ही की एक और रिवायत में है : "अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को बात को शुरू से अंत तक सारगर्भित शब्दों में करने की क्षमता दी गई थी। अतः आपने कहा : मैं हर ऐसी नशा लाने वाली वस्तु के सेवन से मना करता हूँ, जो नमाज़ से रोके।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अबू मूसा अशअरी बता रहे हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको यमन भेजा। चुनांचे उन्होंने वहाँ बनने वाले कुछ पेय पदार्थों के बारे में पूछा कि वह हलाल हैं या हराम, तो आपने उनका विवरण जानना चाहा। अतः अबू मूसा -रज़ियल्लाहु अनहु- ने बताया कि उन पेय पदार्थों से मुराद बित्अ : जो शहद से बनी हुई नबीज़ है और मिज़्र : जो जौ से बनी हुई नबीज़ है। ऐसे में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने, जिन्हें सारगर्भित शब्दों में बात करने की क्षमता दी गई थी, फ़रमाया : "हर नशा लाने वाली वस्तु हराम है।"

फ़ायदे
  1. नबीज़ : वह पानी जिसमें खजूर, शहद या जौ आदि डाल दिया जाए और इसके नतीजे में उसके अंदर इन चीज़ों का स्वाद तथा मिठास आ जाए। कभी-कभी इसमें नशा भी आ जाता है और यह नशीला हो जाता है।।
  2. यह हदीस सभी प्रकार के नशा जैसे शराब, हशीश (चरस, भाँग, गांजा) आदि के हराम होने के संबंध में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
  3. ज़रूरी मसायल के बारे में पूछने का महत्व।
  4. शराब सबसे पहले नमाज़ का समय आ जाने पर हराम की गई थी, जब कुछ मुहाजिरों ने नमाज़ पढ़ी और क़ुरआन पढ़ने में ग़लतियाँ कर डालीं। उस समय यह आयत उतरी थी : "ऐ ईमान वालो! तुम जब नशे में रहो तो नमाज़ के समीप न जाओ, जब तक जो कुछ बोलो उसे न समझो।" [सूरा निसा : 43], उस समय अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- का मुनादी एलान करता था : कोई नशे की हालत में नमाज़ के निकट न आए। बाद में अल्लाह ने शराब को संपूर्ण रूप से हराम घोषित करते हुए फ़रमाया : "ऐ ईमान वालो! निस्संदेह मदिरा, जुआ, देवस्थान और पाँसे शैतानी मलिन कर्म हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम सफल हो जाओ। शैतान तो यही चाहता है कि शराब तथा जूए द्वारा तुम्हारे बीच बैर तथा द्वेष डाल दे और तुम्हें अल्लाह की याद तथा नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम रुकने वाले हो?" [सूरा माइदा : 90-91]
  5. अल्लाह तआला ने शराब (मदिरा) को इसलिए हराम किया है, क्योंकि इसमें बड़ी-बड़ी हानियाँ और बुराइयाँ पाई जाती हैं।
  6. शराब के हराम होने का कारण उसके अंदर नशा लाने की विशेषता का होना है। नबीज़ के अंदर अगर नशा लाने का गुण आ जाए, तो वह हराम है और यह विशेषता न पाई जाए, तो हलाल है।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 104) (5575). صحيح مسلم (3/ 1587) (2003). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (8/ 519). فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (5/ 418). توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام (6/ 307). معالم السنن، وهو شرح سنن أبي داود، للخطابي (4/ 264). الفتح الرباني لترتيب مسند الإمام أحمد بن حنبل الشيباني، للساعاتي (16/ 116). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (5/ 30). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (6/ 2382).

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