जब अल्लाह ने वह आयत उतारी, जिसमें शराब को हराम क़रार दिया है, तो उस समय मदीने में प्रयोग होने वाली सारी शराबें खजूर की होती थीं।
عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: «لقد أَنْزَلَ الله الآية التي حَرَّمَ الله فيها الخمر، وما بالمدينة شَرَابٌ يُشْرَبُ إلا من تَمْرٍ».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि उन्होंने कहाः जब अल्लाह ने वह आयत उतारी, जिसमें शराब को हराम क़रार दिया है, तो उस समय मदीने में प्रयोग होने वाली सारी शराबें खजूर की होती थीं।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
इस हदीस में अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि जब शराब को हराम किए जाने की आयत उतरी, तो मदीने में शराब केवल खजूर ही की बनती थी, जो इस बात का प्रमाण है कि शराब को हराम घोषित करने का कारण उसकी मादकता (नशा आवर होना) है, चाहे उसे किसी भी चीज़ से बनाया जाए।
हवाला
- تسهيل الالمام، للشيخ صالح الفوزان، طبعة الرسالة، الطبعة الأولى 1427 – 2006 م
- فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427 - 2006 م
- توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م
- بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية، الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م
- صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت
- منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي. ط1 1428هـ.
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com