अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने बताया है कि मानव से उसका विवेक छीन लेने वाली हर चीज़ अरबी भाषा के शब्द "ख़म्र" के दायरे में आएगी, और नशा लाने वाली चीज़ शुमार होगी। चाहे उसे पिया जाए, खाया जाए, सूँघा जाए या किसी और तरह से उपयोग में लाया जाए। साथ ही यह कि नशा लाने वाली और मानव विवेक का हरण करने वाली हर चीज़ को अल्लाह ने हराम क़रार दिया है, और उसके इस्तेमाल से मना किया है। कम हो या ज़्यादा। जिसने किसी नशा लाने वाली चीज़ का पाबंदी से उपयोग किया और उससे तौबा किए बिना दुनिया से चला गया, वह अल्लाह की ओर से तयशुदा इस दंड का हक़दार बन गया कि उसे जन्नत की शराब से वंचित रखा जाएगा।
- शराब को हराम क़रार देने का कारण उसमें नशा होना है। अतः हर नशा वाली चीज़ हराम है।
- अल्लाह ने शराब को हराम इसलिए क़रार दिया कि उसमें बड़े-बड़े नुक़सान और बुराइयाँ हैं।
- स्वर्ग में शराब पीना परम सुख और पूर्ण आनंद का एक भाग है।
- जो दुनिया में खुद को शराब से दूर नहीं रखेगा, उसे जन्नत की शराब से वंचित रखा जाएगा। क्योंकि इन्सान को प्रतिफल उसी कोटि का दिया जाता है, जिस कोटि का उसका कर्म होता है।
- मृत्य से पहले गुनाहों से तौबा कर लेने में जल्दी करने की प्रेरणा।
صحيح البخاري (7/ 104) (5575). صحيح مسلم (3/ 1587) (2003). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (8/ 519). فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (5/ 418). توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام (6/ 307). معالم السنن، وهو شرح سنن أبي داود، للخطابي (4/ 264). الفتح الرباني لترتيب مسند الإمام أحمد بن حنبل الشيباني، للساعاتي (16/ 116). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (5/ 30). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (6/ 2382).