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मस्जिद का पोस्टर

नमाज़ के बाद के अज़कार

أذكار بعد الصلاة
Adhkār after Prayer
इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

फ़ज्र के बाद और अस्र के बाद पढ़े जाते हैं
सुबह और शाम
أَذْكَارُ الصَّبَاحِ وَالْمَسَاء
अज़्कारुस-सबाहि वल-मसाअ
आयतुल-कुर्सी
एक बार
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
अल्लाहु ला इलाह इल्ला हुवल-हय्युल-क़य्यूमु ला तअख़ुज़ुहु सिनतुन व ला नौमुन लहु मा फ़िस-समावाति व मा फ़िल-अर्ज़ि मन ज़ल-लज़ी यश्फ़उ इन्दहु इल्ला बि-इज़्निहि यअलमु मा बैन ऐदीहिम व मा ख़ल्फ़हुम व ला युहीतून बिशैइन मिन इल्मिहि इल्ला बिमा शाअ वसिअ कुर्सिय्युहुस-समावाति वल-अर्ज़ व ला यऊदुहु हिफ़्ज़ुहुमा व हुवल-अलिय्युल-अज़ीम
Allāhu lā ilāha illā Huwal-Ḥayyul-Qayyūm. Lā ta’khudhuhū sinatun wa lā nawm. Lahū mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ. Man dhal-ladhī yashfa‘u ‘indahū illā bi-idhnih. Ya‘lamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥīṭūna bi-shay’im-min ‘ilmihī illā bimā shā’. Wasi‘a kursiyyuhus-samāwāti wal-arḍ, wa lā ya’ūduhū ḥifẓuhumā, wa Huwal-‘Aliyyul-‘Aẓīm.
अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। (वह) जीवित है, हर चीज़ को सँभालने (क़ायम रखने) वाला है। न उसे कुछ ऊँघ पकड़ती है और न नींद। उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। कौन है, जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे? वह जानता है जो कुछ उनके सामने और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को (अपने ज्ञान से) नहीं घेर सकते, परंतु जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती को व्याप्त है और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, नमाज़ों के अज़कार से। छपे संस्करण में यह छोटा है।

क़ुरआन 2:255, आख़िर तक। जो इसे सुबह पढ़े, वह शाम तक हिफ़ाज़त में रहता है।
हाकिम · सहीह
तीनों सूरतें
तीन बार
सूरह अल-इख़्लास
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ
क़ुल हुवल्लाहु अहदुनिल्लाहुस-समदु लम यलिद व लम यूलद व लम यकुन लहु कुफ़ुवन अहद
Qul Huwallāhu Aḥad. Allāhuṣ-Ṣamad. Lam yalid wa lam yūlad. Wa lam yakun lahū kufuwan aḥad.
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है। न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है। और न कोई उसका समकक्ष है।
सूरह अल-फ़लक़
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِنْ شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल-फ़लक़ि मिन शर्रि मा ख़लक़ व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब व मिन शर्रिन-नफ़्फ़ासाति फ़िल-उक़दि व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद
Qul a‘ūdhu bi-Rabbil-falaq. Min sharri mā khalaq. Wa min sharri ghāsiqin idhā waqab. Wa min sharrin-naffāthāti fil-‘uqad. Wa min sharri ḥāsidin idhā ḥasad.
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ। उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की। तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए। तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से। तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।
सूरह अन-नास
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ إِلَٰهِ النَّاسِ مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन-नासि मलिकिन-नासि इलाहिन-नासि मिन शर्रिल-वस्वासिल-ख़न्नासिल-लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन-नासि मिनल-जिन्नति वन-नास
Qul a‘ūdhu bi-Rabbin-nās. Malikin-nās. Ilāhin-nās. Min sharril-waswāsil-khannās. Alladhī yuwaswisu fī ṣudūrin-nās. Minal-jinnati wan-nās.
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की। लोगों के बादशाह की। लोगों के सत्य पूज्य की। वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से। जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है। जिन्नों और इनसानों में से।

पूरा पाठ दिखाया गया है, नमाज़ों के अज़कार से। छपे संस्करण में यह छोटा है।

अल-इख़्लास, अल-फ़लक़, अन-नास — हर एक तीन बार। ये तुम्हें हर चीज़ से काफ़ी हो जाएँगी।
सोने से पहले दोबारा पढ़ी जाती हैं, हथेलियों में फूँककर और बदन पर जहाँ तक हाथ पहुँचे वहाँ फेरकर।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · हसन सहीह
सय्यिदुल-इस्तिग़फ़ार
एक बार
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्म अन्त रब्बी ला इलाह इल्ला अन्त, ख़लक़्तनी व अना अब्दुक, व अना अला अह्दिक व वअदिक म-स्ततअत, अऊज़ु बिक मिन शर्रि मा सनअत, अबूउ लक बिनिअमतिक अलय्य व अबूउ लक बिज़न्बी फ़-ग़्फ़िर ली फ़-इन्नहु ला यग़्फ़िरुज़-ज़ुनूब इल्ला अन्त
जो इसे दिन में यक़ीन के साथ कहे और शाम से पहले मर जाए, वह जन्नत वालों में से है।
इस्तिग़फ़ार का सरदार — एक बार सुबह, एक बार शाम।
बुख़ारी · सहीह
दिन शुरू होने पर
एक बार
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا، وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ، وَإِلَيْكَ النُّشُورُ
अल्लाहुम्म बिक अस्बह्ना व बिक अम्सैना, व बिक नह्या व बिक नमूत, व इलैकन-नुशूर
शाम को: व इलैकन-नुशूर की जगह व इलैकल-मसीर।
तिर्मिज़ी · हसन
फ़ितरत पर
एक बार
أَصْبَحْنَا عَلَىٰ فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ، وَعَلَىٰ كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ، وَعَلَىٰ دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ ﷺ، وَعَلَىٰ مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا مُسْلِمًا
अस्बह्ना अला फ़ित्रतिल-इस्लाम, व अला कलिमतिल-इख़्लास, व अला दीनि नबिय्यिना मुहम्मदिन ﷺ, व अला मिल्लति अबीना इब्राहीम हनीफ़न मुस्लिमन
शाम को: अस्बहना की जगह अमसैना।
अहमद · सहीह
बादशाही अल्लाह की है
एक बार
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
अस्बह्ना व अस्बहल-मुल्कु लिल्लाह, वल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह
आगे पढ़ें: रब्बि असअलुका ख़ैरा मा फ़ी हाज़ल-यौम — मैं तुझसे इस दिन की भलाई माँगता हूँ।
मुस्लिम · सहीह
रज़ामंदी
तीन बार
رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبًّا، وَبِالْإِسْلَامِ دِينًا، وَبِمُحَمَّدٍ ﷺ نَبِيًّا
रज़ीतु बिल्लाहि रब्बन, व बिल-इस्लामि दीनन, व बिमुहम्मदिन ﷺ नबिय्यन
जो इसे कहे, अल्लाह पर हक़ है कि वह उसे राज़ी कर दे।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · हसन
सुबह
इसका वक़्त फ़ज्र से सूरज निकलने तक है — और दोपहर तक पढ़ लेने से भी यह फ़ौत नहीं होता।
हर नुक़सान से हिफ़ाज़त
तीन बार
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ، وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
बिस्मिल्लाहिल-लज़ी ला यज़ुर्रु मअ-स्मिहि शैउन फ़िल-अर्ज़ि व ला फ़िस-समाअ, व हुवस-समीउल-अलीम
जो इसे सुबह और शाम तीन बार कहे, उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।
उस्मान इब्न अफ़्फ़ान को सिखाई गई, जिन्होंने इसे कभी नहीं छोड़ा।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह
किफ़ायत
सात बार
حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ، عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ، وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
हस्बियल्लाहु ला इलाह इल्ला हुव, अलैहि तवक्कल्त, व हुव रब्बुल-अर्शिल-अज़ीम
अल्लाह उसके लिए दुनिया और आख़िरत की हर उस चीज़ में काफ़ी हो जाता है जो उसे फ़िक्र में डाले।
सात बार सुबह और सात बार शाम।
अबू दाऊद · हसन
आफ़ियत
तीन बार
اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي سَمْعِي، اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَصَرِي، لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्म आफ़िनी फ़ी बदनी, अल्लाहुम्म आफ़िनी फ़ी समई, अल्लाहुम्म आफ़िनी फ़ी बसरी, ला इलाह इल्ला अन्त
ऐ अल्लाह, मुझे मेरे बदन में, मेरी समाअत में, और मेरी बसारत में आफ़ियत दे।
अबू दाऊद · हसन
कलिमा-ए-तौहीद
दस बार
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द, व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर
दस बार, या सौ बार — सौ बार दस ग़ुलाम आज़ाद करने के बराबर है।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह
इस्तिग़फ़ार
सौ बार
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
अस्तग़्फ़िरुल्लाह व अतूबु इलैह
आप ﷺ दिन में सौ बार इस्तिग़फ़ार करते थे, हालाँकि आप पर कोई गुनाह न था।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह
मामला सुपुर्द करना
एक बार
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، وَلَا تَكِلْنِي إِلَىٰ نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ
या हय्यु या क़य्यूमु बिरह्मतिक अस्तग़ीस, अस्लिह ली शअनी कुल्लह, व ला तकिल्नी इला नफ़्सी तर्फ़त ऐन
मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर।
एक बार कही जाती है, दिन के शुरू में और उसके ख़त्म होने पर।
नसाई, हाकिम · हसन
कलिमात की पनाह
तीन · शाम
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन शर्रि मा ख़लक़
उस रात उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।
मुस्लिम · सहीह
तस्बीह
सौ बार
سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ
सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिह
उसके गुनाह मिटा दिए जाते हैं, चाहे वे समुंदर के झाग के बराबर हों।
हर हाल में कही जाती है — चलते हुए, बैठे हुए, या काम करते हुए।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह
शाम
इसका वक़्त अस्र से सूरज डूबने तक है — और रात के शुरुआती हिस्से तक पढ़ लेने से भी यह फ़ौत नहीं होता।
अगर आप और कुछ न पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ तीन बार कहें, और तीनों सूरतें तीन बार। थोड़ा-सा अमल जो रोज़ पाबंदी से किया जाए, उस बहुत-से अमल से भारी है जो छोड़ दिया जाए।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह।

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।

इस भाषा में लाइब्रेरी इंटरनेशनल एडिशन के एक ड्राफ़्ट तर्जुमे में पढ़ी जाती है। इसे मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसकी जाँच नहीं की है। स्रोत अरबी है; अंग्रेज़ी उसके साथ दिखाई जा सकती है। जहाँ कोई टाइटल क़ुरआन की आयत नक़ल करता है, वहाँ दिखाया गया मतलब एक पब्लिश हो चुके एडिशन, Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com), के अल्फ़ाज़ हैं, ड्राफ़्ट नहीं।

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