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सहीह मुस्लिम

नंबर 1345

नंबर 1345किताब 5, नंबर 182अरबी नंबरिंग 594.03
وَحَدَّثَنِي يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، حَدَّثَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ أَبِي عُثْمَانَ، حَدَّثَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ، يَخْطُبُ عَلَى هَذَا الْمِنْبَرِ وَهُوَ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ إِذَا سَلَّمَ فِي دُبُرِ الصَّلاَةِ أَوِ الصَّلَوَاتِ ‏.‏ فَذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ ‏.‏
Abu Zubair reported:I heard Abdullah b. Zubair addressing (people) on the pulpit and saying: When the Messenger of Allah (ﷺ) pronounced salutation at the end of the prayer or prayers, and then he made a mention of the hadith as transmitted by Hisham b. 'Urwa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।