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सहीह मुस्लिम

नंबर 1346

नंबर 1346किताब 5, नंबर 183अरबी नंबरिंग 594.05
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ الْمُرَادِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَالِمٍ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، أَنَّ أَبَا الزُّبَيْرِ الْمَكِّيَّ، حَدَّثَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ، وَهُوَ يَقُولُ فِي إِثْرِ الصَّلاَةِ إِذَا سَلَّمَ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِهِمَا وَقَالَ فِي آخِرِهِ وَكَانَ يَذْكُرُ ذَلِكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Abu Zubair al-Makki reported that he had heard 'Abdullah b. Zubair uttering (the words) like that of the hadith (narrated above) at the end of the prayer after pronouncing salutation. He at the conclusion also said that he was making a mention of that from the Messenger of Allah (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।