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तशरीह के साथ हदीसें

आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कृपा

17 हदीसें

क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَلاَ أُحَدِّثُكُمْ حَدِيثًا عَنِ الدَّجَّالِ، مَا حَدَّثَ بِهِ نَبِيٌّ قَوْمَهُ؟ إِنَّهُ أَعْوَرُ، وَإِنَّهُ يَجِيءُ مَعَهُ بِمِثَالِ الجَنَّةِ وَالنَّارِ، فَالَّتِي يَقُولُ إِنَّهَا الجَنَّةُ هِيَ النَّارُ، وَإِنِّي أُنْذِرُكُمْ كَمَا أَنْذَرَ بِهِ نُوحٌ قَوْمَهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा और जिसे जन्नत कहेगा, वास्तव में वह जहन्नम होगी। मैं तुम्हें उससे उसी तरह सावधान करता हूँ, जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति को सावधान किया था।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों को दज्जाल, उसकी विशेषताओं और अलामतों से संबंधित ऐसी-ऐसी बातें बता रहे हैं, जो पहले किसी नबी ने नहीं बताई थीं। उदाहरण : वह काना होगा। अल्लाह उसके साथ दो चीज़ें रख देगा, जो लोगों को जन्नत और जहन्नम की तरह नज़र आएँगी। लेकिन हक़ीक़त में उसकी जन्नत जहन्नम होगी और उसकी जहन्नम जन्नत। जो उसकी बात मानेगा, उसे वह जन्नत जैसी दिखने वाली जगह में दाख़िल करेगा, जो हक़ीक़त में जहन्नम होगी। जो उसकी बात नहीं मानेगा, उसे वह जहन्नम जैसी दिखने वाली जगह में दाख़िल करेगा, जो हक़ीक़त में जन्नत होगी। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें उसके फ़ितने से सावधान किया है, जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को सावधान किया था।

फ़ायदे
  1. दज्जाल का फ़ितना बहुत बड़ा फ़ितना होगा।
  2. दज्जाल के फ़ितने से मुक्ति का ज़रिया सच्चा ईमान, अंतिम तशह्हुद में उससे अल्लाह की शरण माँगना और सूरा अल-कह्फ़ के आरंभ की दस आयतों को याद करना है।
  3. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपनी उम्मत से बेपनाह मोहब्बत थी। यही कारण है कि मुसमानों को दज्जाल की ऐसी विशेषताएँ बता दीं, जो किसी नबी ने नहीं बताई थीं।
हवाला

صحيح البخاري (4/ 134) (3338). صحيح مسلم (4/ 2250) (2936).

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अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उमामा बिंत ज़ैनब (अपनी नातिन) को उठाए हुए नमाज़ पढ़ लेते थे।

عن أبي قَتَادَةَ الأَنْصَارِيِّ رضي الله عنه قال: «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان يُصَلِّي وهو حامل أُمَامَةَ بنت زينب بنت رسول الله صلى الله عليه وسلم ». ولأبي العاص بن الربيع بن عبد شَمْسٍ رضي الله عنه : «فإذا سجد وضعها، وإذا قام حملها».
अबू क़तादा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उमामा बिंत ज़ैनब (अपनी नातिन) को उठाए हुए नमाज़ पढ़ लेते थे। और अबुल-आस बिन रबी बिन अब्दे शम्स- रज़ियल्लाहु अन्हु- की रिवायत में है कि जब सजदे में जाते तो उन्हें रख देते और जब खड़े होते तो उठा लेते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी नवासी उमामा बिंत ज़ैनब को नमाज़ की हालत में उठा लेते थे। जब खड़े होते तो अपने कंधे पर उठा लेते और जब रुकू या सजदा करते तो ज़मीन में रख देते।

हवाला

تيسير العلام للبسام الناشر: مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة الطبعة- العاشرة، 1426 هـ - 2006 م . تنبيه الأفهام للعثيمين -طبعة مكتبة الصحابة الامارات - مكتبة التابعين- القاهرة- الطبعة الأولى 1426. صحيح البخاري -أبو عبد الله محمد بن إسماعيل بن إبراهيم بن المغيرة الجعفي البخاري، تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر - الناشر : دار طوق النجاة -الطبعة : الأولى 1422هـ. صحيح مسلم المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. تأسيس الأحكام -أحمد بن يحيى النجمي- دار المنهاج- القاهرة- مصر -الطبعة الأولى.

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बेशक अल्लाह ही के लिए है, जो उसने ले लिया और उसी का है, जो उसने दिया। उसके समीप प्रत्येक वस्तु का समय निश्चित है। अतः अब तू सब्र कर तथा अल्लाह से प्रतिफल की उम्मीद रख।

عن أسامة بن زيد بن حارثة رضي الله عنهما قال: أرسلت بنت النبي صلى الله عليه وسلم إنَّ ابني قد احتُضِر فاشْهَدنَا، فأرسَل يُقرِىءُ السَّلام، ويقول: «إنَّ لِلَّه ما أَخَذ ولَهُ ما أَعطَى، وكلُّ شَيءٍ عِنده بِأجَل مُسمَّى فَلتَصبِر ولتَحتَسِب». فأرسلت إليه تُقسِم عَليه لَيَأتِيَنَّها، فقام ومعه سعد بن عبادة، ومعاذ بن جبل، وأبي بن كعب، وزيد بن ثابت، ورجال رضي الله عنهم فَرفع إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم الصَّبِي، فأَقعَدَه في حِجرِه ونَفسه تَقَعقَع، فَفَاضَت عينَاه فقال سعد: يا رسول الله، ما هذا؟ فقال: «هذه رَحمَة جَعلَها الله تعالى في قُلُوب عِباده» وفي رواية: «في قلوب من شاء من عباده، وإنَّما يَرحَم الله من عِبَاده الرُّحَماء».
उसामा बिन ज़ैद बिन हारिस (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक बेटी ने आपके पास संदेश भेजा कि मेरा बेटा मृत्यु के समीप है। अतः आप पधारें। चुनांचे आपने उनको सलाम भेजा तथा फरमायाः "बेशक अल्लाह ही के लिए है, जो उसने ले लिया और उसी का है, जो उसने दिया। उसके समीप प्रत्येक वस्तु का समय निश्चित है। अतः अब तू सब्र कर तथा अल्लाह से प्रतिफल की उम्मीद रख।" परन्तु आपकी बेटी ने फिर क़सम देते हुए संदेश भेजा की आप अवश्य आएँ। सो आप उठे। आपके साथ साद बिन उबादा, मुआज़ बिन जबल, उबय बिन काब, ज़ैद बिन साबित तथा कुछ और लोग (रज़ियल्लाहु अंहुम) भी थे। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर बच्चे को बढ़ाया गया और आपने उसको अपनी गोद में बिठाया, तो उसकी साँसें उखड़ रही थीं। यह देख, आपकी आँखों में आँसू आ गए। इसपर साद (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, यह क्या है? आपने फरमायाः "यह रहमत है, जिसे अल्लाह ने अपने बंदों के दिलों में डाल दिया है।" तथा एक रिवायत में हैः "अपने जिस बंदे के दिल में चाहा, डाल दिया। तथा अल्लाह अपने उन्हीं बंदों पर रहम करता है, जो दूसरों पर रहम करते हैं।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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अल्लाह ने मेरे लिए धरती को समेट दिया, तो मैंने उसके सूर्योदय के स्थानों और सूर्यास्त के स्थानों को देखा। निश्चय ही मुसलमानों का राज्य वहाँ तक पहुँचेगा, जहाँ तक मेरे आगे समेट कर लाया गया है। मुझे लाल तथा सफ़ेद दो ख़ज़ाने दिए गए हैं।

عن ثوبان رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "إن الله زَوَى لي الأرض، فرأيت مشارقها ومغاربها، وإن أمتي سيبلغ ملكُها ما زُوِيَ لي منها. وأعطيت الكنْزين الأحمر والأبيض. وإني سألت ربي لأمتي أن لا يهلكها بسَنَةٍ بعامةٍ، وأن لا يُسَلِّطَ عليهم عدوا من سوى أنفسهم فيَسْتَبِيحَ بَيْضَتَهُمْ؛ وإن ربي قال: يا محمد، إذا قضيتُ قضاءً فإنه لا يُرَدُّ، وإني أعطيتك لأمتك أن لا أهلكهم بسنة عامة، وأن لا أُسَلِّطَ عليهم عدوا من سوى أنفسهم فيَسْتَبِيحَ بَيْضَتَهُمْ ولو اجتمع عليهم مَنْ بأقطارها، حتى يكون بعضُهم يُهْلِكُ بعضًا ويَسْبِي بعضُهم بعضًا". ورواه البرقاني في صحيحه، وزاد: "وإنما أخاف على أمتي الأئمةَ المضلين، وإذا وقع عليهم السيف لم يرفع إلى يوم القيامة. ولا تقوم الساعة حتى يلحق حي من أمتي بالمشركين، وحتى تعبد فِئامٌ من أمتي الأوثان. وإنه سيكون في أمتي كذابون ثلاثون؛ كلهم يزعم أنه نبي، وأنا خاتم النبيين لا نبي بعدي. ولا تزال طائفة من أمتي على الحق منصورة لا يضرهم من خذلهم حتى يأتي أمر الله تبارك وتعالى".
सौबान (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "अल्लाह ने मेरे लिए धरती को समेट दिया, तो मैंने उसके सूर्योदय के स्थानों और सूर्यास्त के स्थानों को देखा। निश्चय ही मेरी उम्मत का राज्य वहाँ तक पहुँचेगा, जहाँ तक मेरे आगे समेटकर लाया गया है। मुझे लाल तथा सफ़ेद दो ख़ज़ाने दिए गए हैं। मैंने अपने रब से दुआ की है कि मेरी उम्मत को सर्वव्यापी अकाल के जरिए हलाक न करे और उनपर किसी बाहरी शत्रु को हावी न करे, जो उनके अधिकांश लोगों का सफाया कर दे। मेरे रब ने कहा: ऐ मुहम्मद, जब मैं कोई निर्णय कर लिता हूँ, तो वह होकर रहता है। मैंने तुम्हारी उम्मत के बारे में तुम्हारी दुआ काबूल करली है। उनको सर्वव्यापी अकाल के ज़रिए हलाक नहीं करूँगा और उनपर किसी बाहरी शत्रु को हावी न करूँगा, जो उनके अधिकांश लोगों का सफाया कर दे, यद्यपि उनके विरुद्ध धरती के सभी भागों के लोग एकत्र हो जाएँ, यहाँ तक कि खुद वही एक-दूसरे का विनाश करने लगें तथा एक-दूसरे को बंदी बनाने लगें।" इसे बुरक़ानी ने अपनी सहीह में भी रिवायत किया है। उसमें आगे हैः "मुझे अपनी उम्मत के बारे में भय केवल पथभ्रष्ट अगुवाओं का है। जब उनके बीच तलवार चल पड़ेगी, तो क़यामत के दिन तक थमने का नाम नहीं लेगी। तथा क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक मेरी उम्मत का एक क़बीला शिर्क करने वालों से न मिल जाए तथा मेरी उम्मत के कुछ गिरोह बुतों की पूजा न करने लगें। मेरी उम्मत में तीस झूठे पैदा होंगे। उनमें से हर व्यक्ति नबी होने का दावा करेगा। जबकि मैं अंतिम नबी हूँ। मेरे बाद कोई नबी नहीं होगा। तथा मेरी उम्मत का एक गिरोह सदा सत्य पर डटा रहेगा। उस गिरोह में शामिल लोग सहयोग के पात्र होंगे। उनका साथ छोड़ने वाले उनका कुछ नुक़सान न कर सकेंगे, यहाँ तक कि बरकत वाले और उच्च अल्लाह का आदेश आ जाएगा।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस के अंदर कई महत्वपूर्ण बातें हैं और सच्ची सूचनाएँ दी गई हैं। इसमें आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बताया है कि अल्लाह ने आपके लिए धरती को समेट दिया और आपने धरती के उन अन्तिम पूर्वी एवं पश्चिमी क्षेत्रों को देख लिया, जो आपकी उम्मत के अधीन आने वाले थे। आपकी यह सूचना बिल्कुल सत्य साबित हुई, क्योंकि आपकी उम्मत के राज्य का विस्तार धरती के अंतिम पूर्वी छोर से अंतिम पश्चिमी छोर तक हो गया। आगे बताया कि आपको दो ख़ज़ाने दिए गए, जो हुआ भी। खुसरू और क़ैसर (सीज़र) के राज्य, उनके सोने चाँदी और हीरे मोती के खज़ानों के साथ आपकी उम्मत के हाथ लग गए। यह भी बताया कि आपने अल्लाह से दुआ की है कि आपकी उम्मत को सर्वव्यापी अकाल के द्वारा हलाक न करे और उनपर किसी काफिर शत्रु को हावी न कर दे, जो उनके राज्य में घुसकर उनकी जमात का विनाश कर दे। अल्लाह ने आपकी पहली दुआ ग्रहण कर ली। लेकिन दूसरी दुआ उसी समय तक ग्रहणयोग्य होगी, जब तक उम्मत आपसी मतभेद और मार-काट से दूर रहे। अगर इसमें पड़ गई, तो अल्लाह उसपर किसी काफिर शत्रु को हावी कर देगा। इसका दृश्य देखने का भी मिला। जब-जब उम्मत में बिखराव आया, अन्य लोग उसपर हावी हो गए। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी उम्मत पर पथभ्रष्ट शासकों और उलेमाओं का भय प्रकट किया है, क्योंकि लोग उन्हें देखकर गुमराही की ओर चल पड़ेंगे। आगे बताया कि जब इस उम्मत के अंदर फ़ितने और आपसी लड़ाई-झगड़े का सिलसिला शुरू हो जाएगा तो क़यामत तक रुकने का नाम नहीं लेगा। ऐसा हुआ भी। उसमान (रज़ियल्लाहु अनहु) के क़त्ल से जो फ़ितने का द्वार खुला, वह आज तक बंद नहीं हुआ। फिर बताया कि आपकी उम्मत के कुछ लोग रहन-सहन और धर्म के मामले में शिर्क करने वालों से मिल जाएँगे और कुछ लोग शिर्क को भी अपना लेंगे। यह सूचना भी सच साबित हुई और इस्लाम के दावेदार क़ब्रों, पेड़ों और पत्थरों की पूजा में लिप्त हो गए। अंत में बताया कि बहुत-से नुबूवत के दावेदार सामने आएँगे और यह कि नुबूवत का दावा करने वाला हर व्यक्ति झूठा होगा, क्योंकि आपके नबी होने के साथ ही नुबूवत का सिलसिला बंद हो गया है। फिर यह खुशखबरी दी कि इन सारी घटनाओं और विनाशकारियों के बावजूद आपकी उम्मत का एक गिरोह इस्लाम पर कायम रहेगा तथा संख्याबल के दृष्टिकोण से दुर्बल होने के बावजूद इस गिरोह को उसके दुश्मन और विरोधी कुछ नुकसान नहीं पहुँचा सेंकेंगे।

हवाला

الملخص في شرح كتاب التوحيد، دار العاصمة الرياض، الطبعة: الأولى 1422هـ- 2001م. الجديد في شرح كتاب التوحيد، مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية، الطبعة: الخامسة، 1424هـ/2003م. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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मुझे तुम्हारे बारे में जिस वस्तु का भय सबसे अधिक है, वह है, छोटा शिर्का।" सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! छोटा शिर्क क्या है? आपने उत्तर दिया : "दिखावा

عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَخَافُ عَلَيْكُمُ الشِّرْكُ الْأَصْغَرُ» قَالُوا: وَمَا الشِّرْكُ الْأَصْغَرُ يَا رَسُولَ اللهِ؟ قَالَ: «الرِّيَاءُ، يَقُولُ اللهُ عز وجل لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِذَا جُزِيَ النَّاسُ بِأَعْمَالِهِمْ: اذْهَبُوا إِلَى الَّذِينَ كُنْتُمْ تُرَاؤُونَ فِي الدُّنْيَا، فَانْظُرُوا هَلْ تَجِدُونَ عِنْدَهُمْ جَزَاءً؟».
महमूद बिन लबीद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुझे तुम्हारे बारे में जिस वस्तु का भय सबसे अधिक है, वह है, छोटा शिर्का।" सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! छोटा शिर्क क्या है? आपने उत्तर दिया : "दिखावा। सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ऐसे लोगों से क़यामत के दिन, जब लोगों को उनके कर्मों का प्रतिफल दे दिया जाएगा, कहेगा : उन लोगों के पास जाओ, जिनको दिखाने के लिए तुम दुनिया में काम करते थे। देखो, क्या तुम उनके पास कोई प्रतिफल पाते हो?" bn
इसे अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि आपको अपनी उम्मत के बारे में जिस चीज़ का भय सबसे ज़्यादा है, वह छोटा शिर्क है। छोटा शिर्क अर्थात दिखावा, यानी इन्सान लोगों को दिखाने के लिए काम करे। फिर आपने लोगों को दिखाने के लिए काम करने वालों को क़यामत के दिन मिलने वाले दंड के बारे में बात करते हुए बताया है कि उनसे कहा जाएगा कि तुम उन लोगों के पास जाओ, जिनको दिखाने के लिए तुम काम करते थे और देखो कि क्या वह तुमको उन कामों का प्रतिफल दे सकते हैं, जो तुम उनको दिखाने के लिए किया करते थे।

फ़ायदे
  1. अमल विशुद्ध रूप से अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए करना ज़रूरी है। इन्सान को दिखावे से सावधान रहना चाहिए।
  2. उम्मत पर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दया तथा उनको अल्लाह के मार्ग पर चलाने की आपकी लालसा।
  3. जब अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का इतना भय उस समय दिख रहा है, जब आप सहाबा को संबोधित कर रहे थे, जो इस उम्मत के सबसे सदाचारी लोग थे, तो बाद के लोगों के बारे में आपके भय की अवस्था क्या हो सकती है?
हवाला

مسند أحمد (39/ 39) (23630). الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد القرعاوي (ص57). الملخص في شرح كتاب التوحيد، لصالح الفوزان (ص45).

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अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सिर से पानी टपक रहा था और फ़रमायाः यदि मेरी उम्मत पर कठिन नही होत तो मैं इसी समय इस नमाज़ का आदेश देता।

عن عَبْد اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قال: «أّعْتَمَ النَبِيُّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- بِالعِشَاء، فَخَرَج عُمَر فقال: الصَّلاةَ يا رسول الله، رَقَد النِسَاءُ والصِّبيَان. فَخَرَجَ ورَأسُهُ يَقطُر يقول: لَولاَ أن أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي -أو على النَّاس- لَأَمَرتُهُم بهذه الصَّلاة هذه السَّاعَة».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अनहुमा- से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सर से पानी टपक रहा था और फ़रमायाः यदि मेरी उम्मत पर कठिन नही होता तो मैं इसी समय इस नमाज़ का आदेश देता।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

एक बार नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इशा की नमाज़ में विलंब किया, यहाँ तक कि रात का अधिकतर भाग बीत गया तथा महिलाएँ एवं बच्चे, जो अधिक प्रतीक्षा नहीं कर सकते थे, सो गए। यह देख उमर बिन खत्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- आपके पास आए और कहने लगे : नमाज़ पढ़ लेनी चाहिए, क्योंकि महिलाएँ एवं बच्चे सो गए हैं। तब आप घर से मस्जिद की ओर आए। उस समय आपके सर से स्नान का पानी टपक रहा था। फिर आपने यह स्पष्ट करते हुए कि यदि नमाज़ की प्रतीक्षा करने वालों को कठिनाई न हो, तो इशा की नमाज़ को देर से पढ़ना ही उत्तम है, फ़रमाया : यदि मेरी उम्मत पर कठिन नही होता, तो मैं इस नमाज़ को इसी समय पढ़ने का आदेश देता।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423 هـ.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई काम पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।

عن أم المؤمنين عائشة رضي الله عنها قالت: إِنْ كَانَ رسولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم لَيَدَعُ العَمَلَ، وهو يُحِبُّ أَنْ يَعْمَلَ بِهِ؛ خَشْيَةَ أَنْ يَعْمَلَ بِهِ النَّاسُ فَيُفْرَضَ عَلَيْهِمْ.
मोमिनों की माता आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई काम पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
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نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي -الطبعة الأولى 1418هـ. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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मैं लंबी नमाज़ पढ़ने के इरादे से खड़ा होता हूँ, लेकिन किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर इस डर से अपनी नमाज़ हल्की कर देता हूँ कि कहीं उसकी माँ को तकलीफ़ में न डाल दूँ।

عن أبي قتادة وأنس بن مالك رضي الله عنهما مرفوعاً: «إني لأقوم إلى الصلاة، وأريد أن أُطَوِّلَ فيها، فأسمع بكاء الصبي فأَتَجَوَّزُ في صلاتي كراهيةَ أن أَشُقَّ على أمه».
अबू कतादा और अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मैं लंबी नमाज़ पढ़ने के इरादे से खड़ा होता हूँ, लेकिन किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर इस डर से अपनी नमाज़ हल्की कर देता हूँ कि कहीं उसकी माँ को तकलीफ़ में न डाल दूँ।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الرابعة عشر، 1407ه - 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي.

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  1. क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा
  2. अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उमामा बिंत ज़ैनब (अपनी नातिन) को उठाए हुए नमाज़ पढ़ लेते थे।
  3. बेशक अल्लाह ही के लिए है, जो उसने ले लिया और उसी का है, जो उसने दिया। उसके समीप प्रत्येक वस्तु का समय निश्चित है। अतः अब तू सब्र कर तथा अल्लाह से प्रतिफल की उम्मीद रख।
  4. अल्लाह ने मेरे लिए धरती को समेट दिया, तो मैंने उसके सूर्योदय के स्थानों और सूर्यास्त के स्थानों को देखा। निश्चय ही मुसलमानों का राज्य वहाँ तक पहुँचेगा, जहाँ तक मेरे आगे समेट कर लाया गया है। मुझे लाल तथा सफ़ेद दो ख़ज़ाने दिए गए हैं।
  5. मुझे तुम्हारे बारे में जिस वस्तु का भय सबसे अधिक है, वह है, छोटा शिर्का।" सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! छोटा शिर्क क्या है? आपने उत्तर दिया : "दिखावा
  6. अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सिर से पानी टपक रहा था और फ़रमायाः यदि मेरी उम्मत पर कठिन नही होत तो मैं इसी समय इस नमाज़ का आदेश देता।
  7. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई काम पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।
  8. मैं लंबी नमाज़ पढ़ने के इरादे से खड़ा होता हूँ, लेकिन किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर इस डर से अपनी नमाज़ हल्की कर देता हूँ कि कहीं उसकी माँ को तकलीफ़ में न डाल दूँ।
  9. बच्चों को बोसा देना और उनसे स्नेह और दया करना।
  10. मेरा और तुम्हार उदाहरण उस व्यक्ति की तरह है, जिसने आग जलाई, तो टिड्डे तथा पतिंगे उसमें गिरने लगे और वह उन्हें उससे रोकने लगे। (बिलकुल उसी तरह) मैं तुम्हारी कमर पकड़कर तुम्हें जहन्नम की आग से रोक रहा हूँ और तुम मेरे हाथों से फिसले जा रहे हो।
  11. जो दया नहीं करता, उसपर दया नहीं की जाती।
  12. ऐ जिबरील, मुहम्मद के पास जाओ और बता दो कि हम आपको आपकी उम्मत के बारे में प्रसन्न कर देंगे और आपको नाराज़ नहीं होने देंगे।
  13. एक यहूदी लड़का अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सेवा किया करता था।
  14. क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आपके लिए क्षमायाचना की है? उन्होंने कहा : हाँ, और तुम्हारे लिए भी! फिर यह आयत पढ़ी : {अपने गुनाहों की क्षमायाचना कीजिए तथा मोमिन मर्दों और मोमिन स्त्रियों के लिए भी।}
  15. उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जब भी शैतान तुम्हें (ऐ उमर!) किसी रास्ते पर चलता हुआ देखता है, तो तुम्हारा रास्ता छोड़ कर कोई और रास्ता अपना लेता है
  16. अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपना हाथ मेरे मुख पर फेरा तथा मेरे लिए दुआ की, तो वह एक सौ बीस साल तक जीवित रहे और उन के सिर में केवल कुछ ही बाल सफेद थे।
  17. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई अमल पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि कहीं लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com