जब कोई व्यक्ति सजदे की आयतों में से कोई आयत पढ़ता है, जिसमें सजदे का आदेश होता है और वह अल्लाह के आदेश के पालन और उसके अनुसरण की चाहत में सजदा करता है, तो शैतान क़ुरआन पढ़ने वाले उस व्यक्ति के पास से भाग जाता है और आदम की संतान को प्राप्त होने वाले सम्मान पर ईर्ष्या के कारण वह जिस प्रकार सम्मान से वंचित हुआ है और धिक्कार तथा नाकामी का हक़दार बना है, उसपर अफ़सोस करते हुए कहता है : "हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया और उसने सजदा किया, तो उसके लिए जन्नत है, जबकि मुझे सजदे का आदेश दिया गया, तो मैंने इनकार कर दिया।" यानी हाय मेरा विनाश! अल्लाह ने आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया और उसने अपने प्रभु के आदेश का पालन करते हुए सजदा किया, तो उसके लिए जन्नत है, जबकि मुझे सजदे का आदेश दिया और मैंने अभिमान के कारण सजदे से इनकार कर दिया तो मेरे लिए जहन्नम है।
- صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. - الإفصاح عن معاني الصحاح، ليحيى بن هبيرة بن محمد بن هبيرة الذهلي الشيباني، المحقق: فؤاد عبد المنعم أحمد، الناشر: دار الوطن، سنة النشر: 1417هـ. - مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة الأولى، 1422هـ - 2002م. - إكمال المعلم بفوائد مسلم لعياض بن موسى بن عياض بن عمرون اليحصبي السبتي، المحقق: الدكتور يحيى إسماعيل، الناشر: دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر، الطبعة الأولى، 1419هـ - 1998م.