صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. صحيح البخاري، لأبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري, تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة الأولى 1422هـ. توضيح الأحكام من بلوغ المرام، لعبدالله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة، ط الخامسة 1423هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، (ط10)، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ.
तशरीह के साथ हदीसें
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़ुहर अथवा अस्र की नमाज़ -मुहम्मद बिन सीरीन कहते हैं कि मुझे यही लगता है कि वह अस्र की नमाज़ थी- दो रकात पढ़ी और सलाम फेर दिया। उसके बाद मस्जिद के अगले भाग में गड़ी हुई एक लकड़ी के पास गए और उस पर अपना हाथ रखा।
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: صَلَّى النبي صلى الله عليه وسلم إِحْدَى صَلاَتَيِ العَشِيّ -قال محمد: وَأَكْثَرُ ظَنِّي العصر- رَكْعَتَيْنِ، ثُمَّ سَلَّمَ، ثم قام إلى خَشَبَةٍ فِي مُقَدَّمِ المَسْجِدِ، فَوَضَعَ يَدَهُ عَلَيْهَا، وفيهم أبو بكر، وعمر رضي الله عنهما ، فَهَابَا أَنْ يُكَلِّمَاهُ، وخرج سَرَعَانُ النَّاسِ فَقَالُوا: أَقَصُرَتِ الصلاة؟ وَرَجُلٌ يَدْعُوهُ النبي صلى الله عليه وسلم ذُو اليَدَيْنِ، فَقَالَ: أَنَسِيتَ أَمْ قَصُرَتْ؟ فَقَالَ: لَمْ أَنْسَ وَلَمْ تُقْصَرْ، قَالَ: «بَلَى قَدْ نَسِيتَ، فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ، ثُمَّ سَلَّمَ، ثُمَّ كَبَّرَ، فَسَجَدَ مِثْلَ سُجُودِهِ أَوْ أَطْوَلَ، ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ، فَكَبَّرَ، ثُمَّ وَضَعَ رَأْسَهُ، فكبر، فَسَجَدَ مِثْلَ سُجُودِهِ أَوْ أَطْوَلَ، ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ وَكَبَّرَ».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने जुहर अथवा अस्र की नमाज़ -मुहम्मद बिन सीरीन कहते हैं कि मुझे यही लगता है कि वह अस्र की नमाज़ थी- दो रकात पढ़ी और सलाम फेर दिया। उसके बाद मस्जिद के अगले भाग में गड़ी हुई एक लकड़ी के पास गए और उस पर अपना हाथ रखा। लोगों के बीच अबू बक्र और उमर -रज़ियल्लाहु अंहुमा- भी उपस्थित थे। लेकिन, दोनों ने आपसे बात करने में भय महसूस किया। उधर, जल्दबाज़ लोग निकल गए और कहने लगे कि क्या नमाज़ कम कर दी गई है? उस समय एक व्यक्ति, जिसे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- 'ज़ुल-यदैन' (दो हाथ वाले) कहकर पुकारते थे, भी मौजूद थे । उन्होंने कहाः (ऐ अल्लाह के रसूल) क्या आप भूल गए हैं या नमाज़ कम हो गई है? आपने उत्तर दियाः "न मैं भूला हूँ और न नमाज़ कम की गई है।" उन्होंने कहाः नहीं, आप ज़रूर भूले हैं। तब आपने दो रकात पढ़ी, फिर सलाम फेरा, फिर तकबीर कही और अपने आम सजदों के समान या उनसे लंबा सजदा किया, फिर अपना सर उठाया, तकबीर कही, फिर अपना सर रखा, तकबीर कही और अपने आम सजदों के समान या उनसे लंबा सजदा किया, फिर अपना सर उठाया और तकबीर कही।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com