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तशरीह के साथ हदीसें

अज़ान तथा इक़ामत

23 हदीसें

जब तुम अज़ान सुनो, तो तुम उसके समान कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है।

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الخُدْرِيِّ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِذَا سَمِعْتُمُ النِّدَاءَ، فَقُولُوا مِثْلَ مَا يَقُولُ المُؤَذِّنُ».
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब तुम अज़ान सुनो, तो तुम उसके समान कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अज़ान सुनते समय मुअज़्ज़िन के शब्दों का जवाब देने की प्रेरणा दे रहे हैं। यानी यह कि हम एक-एक वाक्य करके वैसे ही कहते जाएँ, जैसे मुअज़्ज़िन कहता है। चुनांचे जब वह तकबीर कहेगा, तो हम तकबीर कहेंगे। जब वह दोनों गवाबियाँ देगा, तो हम दोनों गवाहियाँ देंगे। अलबत्ता, "حي على الصلاة" तथा "حي على الفلاح" का मामला इससे अलग है। इन दोनों वाक्यों के बाद "لا حول ولا قوة إلا بالله" कहा जाएगा।

फ़ायदे
  1. पहले मुअज़्ज़िन के बाद दूसरे मुअज़्ज़िन के शब्दों का भी जवाब दिया जाएगा। चाहे मुअज़्ज़िन एक से अधिक ही क्यों न हों। क्योंकि हदीस के शब्द आम हैं।
  2. मुअज़्ज़िन का जवाब इन्सान हर परिस्थिति में देगा, जब तक कि शौचालय में न हो या मल त्याग में व्यस्त हो।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 126) (611). صحيح مسلم (1/ 288) (383). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص120). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 98).

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बिलाल रात रहते ही अज़ान देते हैं, अतः तुम इब्ने उम्मे मकतूम की अज़ान सुनने तक खाते- पीते रहो

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنه مرفوعاً: «إنَّ بِلالاً يُؤَذِّن بِلَيلٍ، فَكُلُوا واشرَبُوا حتَّى تَسمَعُوا أَذَان ابنِ أُمِّ مَكتُوم».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः बिलाल रात रहते ही अज़ान देते हैं, अतः तुम इब्ने उम्मे मकतूम की अज़ान सुनने तक खाते- पीते रहो।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दो मुअज़्ज़िन थे; बिलाल बिन अबू रबाह और अब्दुल्लाह बिन उम्मे मकतूम, जो कि दृष्टिहीन थे (रज़ियल्लाहु अंहुमा)। बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) फ़ज्र की अज़ान, फ़ज्र के समय से पहले ही देते थे। इसका कारण यह था कि यह सोने का समय है(यानी लोग फज्र की नमाज़ से पहले नींद में होते हैं) और लोगों को नमाज़ का निर्धारित समय आने से पहले से तैयारी की आवश्यकता होती है। अतः, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने साथियों को सूचित करते थे कि बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) रात रहते ही अज़ान देते हैं। सो, फ़ज्र तुलू (फज्र का समय आने तक, जिस में फज्र की नमाज़ अदा की जाती है) होने तक खाते-पीते रहो, यहाँ तक कि दूसरे मुअज़्ज़िन यानी अब्दुल्लाह बिन उम्मे मकतूम (रज़ियल्लाहु अंहु) अज़ान दे दें, जो कि द्वितीय फ़ज्र तूलू होने पर अज़ान दिया करते हैं। यह आदेश उस व्यक्ति के लिए है, जो रोज़ा रखना चाहे। क्योंकि यही वह समय है, जब उसे खाना-पीना छोड़ना है और नमाज़ का समय दाख़िल हो जाता है। यह आदेश फ़ज्र की नामज़ के साथ खास है। उसके अतिरिक्त किसी अन्य नमाज़ की अज़ान समय प्रवेश करने से पहले देना जायज़ नहीं है। फिर फ़ज्र की नमाज़ की पहली अज़ान के बारे में मतभेद है कि क्या फ़ज्र की नमाज़ के लिए वही काफ़ी है या समय दाख़िल होने पर दूसरी अज़ान देना ज़रूरी होगी? अधिकतर उलमा के निकट वह अज़ान देना सही तो है, परंतु उसी पर बस नहीं किया जाएगा।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।

عن أبي سليمان مالك بن الحويرث رضي الله عنه قال: أَتَينَا رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- ونَحنُ شَبَبَةٌ مُتَقَارِبُون، فَأَقَمْنَا عِندَهُ عِشْرِينَ لَيلَةً، وَكَان رَسُولُ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- رَحِيمًا رَفِيقًا، فَظَنَّ أَنَّا قَدْ اشْتَقْنَا أَهْلَنَا، فَسَألَنا عمَّنْ تَرَكْنا مِنْ أَهلِنا، فأَخبَرنَاه، فقال: «ارْجِعُوا إلى أَهْلِيكُم، فَأَقِيمُوا فيهم، وَعَلِّمُوهُم وَمُرُوهُم، وَصَلُّوا صَلاَةَ كَذَا في حِينِ كذَا، وصَلُّوا كَذَا في حِينِ كَذَا، فَإِذا حَضَرَتِ الصلاةُ فَلْيُؤذِّن لكم أَحَدُكُم وَلْيَؤُمَّكُم أكبركم». زاد البخاري في رواية له: «وصَلُّوا كَمَا رَأَيتُمُونِي أُصَلِّي».
अबू सुलैमान मालिक बिन हुवैरिस (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए। हम लोग उस समय लगभग समान आयु वाले जवान थे। हम आपके पास बीस दिन ठहरे। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बहुत ही दयालु और नरम स्वभाव के मालिक थे। आपको लगा कि हम लोग अपने परिवार की ओर लौटने की इच्छा रखते हैं, इसलिए हमसे हमारे परिवार के बारे में पूछा, तो हमने आपको बताया। इसपर आपने फ़रमायाः "अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي- بيروت - بدون تاريخ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة - بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب - الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا - الطبعة الأولى 1430هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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जब नमाज़ खड़ी हो जाए और रात का खाना हाज़िर हो, तो पहले खाना खा लो।

عن عائشة وعبد الله بن عمر وأنس بن مالك رضي الله عنهم مرفوعاً: «إِذَا أُقِيمَت الصَّلاَة، وحَضَرَ العَشَاء، فَابْدَءُوا بِالعَشَاء».
आइशा, अब्दुल्लाह बिन उमर और अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहुम) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब नमाज़ खड़ी हो जाए और रात का खाना हाज़िर हो, तो पहले खाना खा लो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने तमाम रिवायतों के साथ नक़ल किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जब नमाज़ खड़ी हो जाए और खाने या पीने की चीज़ सामने उपस्थित हो, तो पहले खाने-पीने से फ़ारिग हो जाना चाहिए। ताकि भूख-प्यास की शिद्दत ख़त्म हो जाए और नमाज़ पढ़ते समय नमाज़ी का ध्यान खाने की ओर न जाए, बल्कि वह एकाग्र होकर नमाज़ पढ़ सके। लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि नमाज़ का वक्त तंग न हो तथा भूख लगी हुई हो। इस हदीस से पता चलता है कि हमारी शरीयत एक संपूर्ण शरीयत है और उसने आसानी तथा उदारता के साथ-साथ प्राण के अधिकार का भी ख़याल रखा है।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को आदेश दिया गया था कि वह अज़ान के शब्द दो-दो बार कहें और इक़ामत के शब्द एक-एक बार।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه مرفوعاً: «أُمِر بِلاَل أن يَشفَع الأَذَان، ويُوتِر الإِقَامَة».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है, वह कहते हैंः बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को आदेश दिया गया था कि वह अज़ान के शब्द दो-दो बार कहें और इक़ामत के शब्द एक-एक बार।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने मुअज़्ज़िन बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) को आदेश दिया कि अज़ान के वाक्यों को दो-दो बार कहें। क्योंकि अज़ान अनुपस्थित लोगों को सूचना देने के लिए है। लेकिन दो-दो बार कहने का यह आदेश शुरू की तकबीर और अंत के 'कलिमा-ए- तौहीद' को छोड़कर है। क्योंकि यह साबित है कि शुरू में तकबीर चार बार कही जाएगी और अंत में 'कलिमा-ए-तौहीद' एक बार। इसी तरह उन्हें आदेश दिया कि इक़ामत के वाक्यों को एक-एक बार कहें। क्योंकि इक़ामत उपस्थित लोगों को सूचित करने के लिए है। लेकिन यहाँ एक-एक बार कहने का आदेश भी तकबीर और 'क़द क़ामतिस्सलात' को छोड़कर है। क्योंकि उन दोनों को दो-दो बार कहना साबित है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم، لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उस समय आप चमड़े से बने हुए लाल खेमें में थे। उनका कहना है कि इसी बीच बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु- वज़ू का पानी लेकर निकले तो कोई आपके शरीर के अंगों से गिरने वाले पानी को अपने ऊपर छिड़क रहा था और कोई ले रहा था।

عن أبي جُحَيْفَةَ وَهْبِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ السُّوَائِيِّ رضي الله عنه قال: «أَتَيتُ النَبِيَّ صلى الله عليه وسلم وهو في قُبَّةٍ لَهُ حَمرَاءَ مِن أَدَمٍ، قال: فَخَرَج بِلاَل بِوَضُوءٍ، فمن نَاضِحٍ ونَائِلٍ، قال: فَخَرَجَ النبِيَّ صلى الله عليه وسلم عليه حُلَّةٌ حَمرَاءُ، كَأَنِّي أَنظُرُ إلى بَيَاضِ سَاقَيهِ، قال: فَتَوَضَّأ وأَذَّن بِلاَل، قال: فَجَعَلَتُ أتَتَبَّعُ فَاهُ هَهُنَا وهَهُنَا، يقول يمِينا وشِمالا: حَيَّ على الصَّلاة؛ حيَّ عَلَى الفَلاَح. ثُمَّ رَكَزَت لَهُ عَنَزَةٌ، فَتَقَدَّمَ وصلى الظُهرَ رَكعَتَين، ثُمَّ لَم يَزلَ يُصِلِّي رَكعَتَين حَتَّى رَجَعَ إِلى المَدِينَة».
अबू जुहैफ़ा वह्ब बिन अब्दुल्लाह सुवाई- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उस समय आप चमड़े से बने हुए लाल खेमें में थे। उनका कहना है कि इसी बीच बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु- वज़ू का बचा हुआ पानी लेकर निकले तो कोई आपके शरीर के अंगों से गिरने वाले पानी को अपने ऊपर छिड़क रहा था और कोई ले रहा था। वह कहते हैं कि फिर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) लाल जोड़े में निकले। ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं आपकी पिंडलियों की सफ़ेदी को देख रहा हूँ। कहते हैंः आप ने वज़ू किया और बिलाल ने अज़ान दी। वह कहते हैंः मैं बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु- के मुख को حَيَّ على الصَّلاة؛ حيَّ عَلَى الفَلاَح. कहते समय दाएँ तथा बाएँ ओर मुड़ते हुए देखने लगा। फिर आपके लिए एक नेज़ा गाड़ दिया गया और आपने आगे बढ़कर दो रकअत ज़ुहर की नमाज़ पढ़ी। फिर मदीना वापस आने तक दो-दो रकअत ही पढते रहे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मक्का के ऊपरी भाग के अबतह नामी स्थान में रुके हुए थे कि बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) आपके वज़ू के बचे हुए पानी लेकर निकले और लोग उससे बरकत लेने लगे। फिर बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) ने अज़ान दी। अबू जुहैफ़ा कहते हैं : जब बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) "حي على الصلاة حي على الفلاح" कहते समय दाएँ-बाएँ मुड़ रहे थे, तो मैं उनके मुँह को देखता रहा।। वह ऐसा इसलिए कर रहे थे, ताकि लोग अच्छी तरह सुन सकें। क्योंकि इन दोनों वाक्यों में नमाज़ की ओर आने की प्रेरणा दी गई है। फिर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए सुतरा के तौर पर एक छोटा-सा नेज़ा गाड़ा गया और आपने ज़ुहर की नमाज़ दो रकात पढ़ी। चूँकि आप मुसाफ़िर थे, इसलिए बाद में मदीना आने तक चार रकात वाली नमाज़ों को दो-दो रकात पढ़ते रहे।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423 هـ.

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जहाँ तक इस व्यक्ति की बात है, तो इसने अबुल क़ासिम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा की।

عن أبي الشعثاء، قال: كنا قُعُودًا مع أبي هريرة رضي الله عنه في المسجد، فأذن المؤذن، فقام رجل من المسجد يمشي، فأَتْبَعَهُ أبو هريرة بَصَرَهُ حتى خرج من المسجد، فقال أبو هريرة: أما هذا فقد عصى أبا القاسم صلى الله عليه وسلم .
अबू शासा कहते हैं कि हम लोग अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) के साग मस्जिद में बैठे हुए थे कि इसी बीच मोअज़्ज़िन ने अज़ान दी। इतने में एक व्यक्ति खड़ा होकर मस्जिद से जाने लगा, तो अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) उसे लगातार देखते रहे, यहाँ तक कि जब वह मस्जिद से निकल गया, तो फ़रमायाः जहाँ तक इस व्यक्ति की बात है, तो इसने अबुल क़ासिम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा की।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

كنوز رياض الصالحين, بإشراف حمد العمار, دار كنوز إشبيليا, الطبعة الأولى, 1430هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. تطريز رياض الصالحين، لفيصل الحريملي، نشر: دار العاصمة، الرياض، الطبعة: الأولى، 1423هـ. - 2002م. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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मैं देख रहा हूँ कि तुझे बकरी तथा देहात पसंद है। अतः, जब तुम बकरियों के साथ रहो

عن عبد الله بن عبد الرحمان بن أبي صعصعة: أن أبا سعيد الخدري رضي الله عنه قال له: «إنِّي أرَاكَ تُحبُّ الغنم والبادية فإذا كُنْتَ في غنمك -أو بَادِيتِك- فَأذَّنْتَ للصلاةِ، فَارْفَعْ صوتك بِالنِّدَاءِ، فَإنَّهُ لا يَسمَعُ مدى صَوْتِ المُؤذِّنِ جِنٌّ، وَلاَ إنْسٌ، وَلاَ شَيْءٌ، إِلاَّ شَهِدَ لَهُ يَومَ القِيَامَةِ» قال أبو سعيد: سمعتُه من رسولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم .
अब्दुल्लाह बिन अब्दुर रहमान बिन अबू सासआ से वर्णित है कि अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनसे फ़रमायाः मैं देख रहा हूँ कि तुझे बकरी तथा देहात पसंद है। अतः, जब तुम बकरियों के साथ रहो (अथवा देहात में रहो) और नमाज़ के लिए अज़ान दो, तो आवाज़ ऊँची करना। क्योंकि मुअज़्ज़िन की आवाज़, जो भी जिन्न अथवा इनसान और जो भी वस्तु सुनेगी, वह क़यामात के दिन उसके लिेए में गवाही देगी। अबू सईद (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने फ़रमायाः यह बात मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से सुनी है।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

1- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي. 2- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي-بيروت. 3- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. 4- شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. 5- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبدالله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. 6- فتح الباري بشرح صحيح البخاري؛ للحافظ أحمد بن علي بن حجر العسقلاني، دار المعرفة-بيروت. 7-كنوز رياض الصالحين؛ فريق علمي برئاسة أ.د. حمد العمار، دار كنوز إشبيليا-الرياض، الطبعة الأولى، 1430هـ.

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23 हदीसें
  1. जब तुम अज़ान सुनो, तो तुम उसके समान कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है।
  2. बिलाल रात रहते ही अज़ान देते हैं, अतः तुम इब्ने उम्मे मकतूम की अज़ान सुनने तक खाते- पीते रहो
  3. अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।
  4. जब नमाज़ खड़ी हो जाए और रात का खाना हाज़िर हो, तो पहले खाना खा लो।
  5. बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को आदेश दिया गया था कि वह अज़ान के शब्द दो-दो बार कहें और इक़ामत के शब्द एक-एक बार।
  6. मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उस समय आप चमड़े से बने हुए लाल खेमें में थे। उनका कहना है कि इसी बीच बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु- वज़ू का पानी लेकर निकले तो कोई आपके शरीर के अंगों से गिरने वाले पानी को अपने ऊपर छिड़क रहा था और कोई ले रहा था।
  7. जहाँ तक इस व्यक्ति की बात है, तो इसने अबुल क़ासिम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा की।
  8. मैं देख रहा हूँ कि तुझे बकरी तथा देहात पसंद है। अतः, जब तुम बकरियों के साथ रहो
  9. जो मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनकर कहता है : أشهد أن لا إله إلا الله وحده لا شريك له وأنَّ محمداً عبده ورسولُه، رضيتُ بالله رباً وبمحمدٍ رسولاً وبالإسلام دِينا, (अर्थात मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और इस बात की भी गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं। मैं अल्लाह को अपना रब मानकर, मुहम्मद को रसूल मानकर और इस्लाम को अपने धर्म के तौर पर स्वीकार कर खुश और संतुष्ट हूँ), उसके सारे गुनाह क्षमा कर दिए जाते हैं।
  10. जब नमाज़ के लिए अज़ान कही जाती है, तो शैतान हवा निकालता हुआ पीठ फेरकर भाग खड़ा होता है; ताकि अज़ान की आवाज़ न सुन सके
  11. क़यामत के दिन अज़ान देने वालों की गर्दनें सबसे ऊँची होंगी।
  12. यह, अल्लाह ने चाहा तो, एक सच्चा स्वप्न है, अतः तुम बिलाल के साथ खड़े हो जाओ और जो कुछ देखा है, उसे बताओ, वह उन शब्दों द्वारा अज़ान दे, क्योंकि उसकी आवाज़ तुमसे ऊँची है
  13. सुन्नत यह है कि अज़ान देने वाला फ़ज्र की अज़ान में 'हय्या अलल-फ़लाह' के बाद 'अस-सलातु ख़ैरुम-मिनन-नौम' (नमाज़ नींद से बेहतर है) कहे
  14. मैंने बिलाल (रज़ियल्लाहु अनहु) को देखा कि अबतह की ओर निकले और अज़ान दी। जब 'हय्या अलस-सलाह', 'हय्या अलल-फ़लाह' तक पहुँचे, तो अपनी गर्दन को दाएँ और बाएँ मोड़ा तथा अपने शरीर को नहीं घुमाया
  15. तुम उनके इमाम हो, उनके सबसे कमज़ोर को ध्यान में रखते हुए नमाज़ पढ़ाओ और ऐसा मुअज़्ज़िन नियुक्त करो, जो अज़ान देने का मेहनताना न लेता हो
  16. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मुअज़्ज़िन देर करता और इक़ामत नहीं कहता, यहाँ तक कि जब देख लेता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) निकल आए हैं, तो इक़ामत कहता
  17. मुअज़्जिन, अज़ान का अधिक हक़दार है और इमाम, इक़ामत का अधिक हक़दार है
  18. ''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा स्थान) और श्रेष्ठतम दर्जा प्रदान कर और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें वचन दिया है।" उसके लिए क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश अनिवार्य हो जाएगी।''
  19. बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) ने फ़ज्र होने से पहले ही अज़ान दे दी, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें आदेश दिया कि जाकर यह ऐलान करें : "लोग सुनो, बंदा सो गया था। लोगो सुनो, बंदा सो गया था।"
  20. जब मुअज़्ज़िन "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है और (उसके उत्तर में) तुममें से कोई "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है
  21. जब तुम मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनो, तो उसी तरह के शब्द कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। फिर मुझपर दरूद भेजो
  22. ऐ बिलाल! नमाज़ क़ायम (खड़ी) करो, हमें उसके द्वारा सुकून पहुँचाओ।
  23. हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है।" फिर तीसरी बार फ़रमाया : "उसके लिए, जो पढ़ना चाहे।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com