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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मुअज़्ज़िन देर करता और इक़ामत नहीं कहता, यहाँ तक कि जब देख लेता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) निकल आए हैं, तो इक़ामत कहता

عن جابر بن سمرة رضي الله عنه قال: «كان مُؤَذِّنُ رسول الله -صلى الله عليه وسلَّم- يُمْهِلُ فلا يُقِيم، حتَّى إذا رأى رسول الله صلى الله عليه وسلم قد خرج أقام الصَّلاة حِين يَرَاه».
जाबिर बिन समुरह (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मुअज़्ज़िन देर करता और इक़ामत नहीं कहता था, यहाँ तक कि जब देख लेता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) निकल आए हैं, तो इक़ामत कहता।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن الترمذي، محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق: بشار عواد معروف، دار الغرب الإسلامي، بيروت. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، محمد عبد الرحمن بن عبد الرحيم المباركفورى، دار الكتب العلمية، بيروت. مسند الإمام أحمد بن حنبل، أحمد بن حنبل أبو عبدالله الشيباني، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى1421هـ، 2001م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
अज़ान तथा इक़ामत

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com