एक सहाबी ने कहा कि काश मैं नमाज़ पढ़ता और आराम पाता, तो एक तरह से उनके आस-पास मौजूद लोगों ने उनकी इस बात को बुरा समझा, इसपर उन्होंने कहा कि मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है कि ऐ बिलाल! नमाज़ के लिए अज़ान दो और नमाज़ क़ायम करो, ताकि हम उससे सुकून हासिल करें। क्योंकि नमाज़ में अल्लाह से वार्तालाप होता है और आत्मा तथा हृदय को सुकून मिलता है।
- दिल का सुकून नमाज़ से प्राप्त होता है, क्योंकि नमाज़ में अल्लाह से वार्तालाप होता है।
- इबादत में सुस्ती करने वाले का खंडन।
- जिसने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए उस कार्य को कर लिया, जो उसपर वाजबि (अनिवार्य) था, तो आराम एवं संतोष का बोध होता है।
سنن أبي داود (7/ 338) (4985)، الكاشف عن حقائق السُّنن (4/1217)، عون المعبود وحاشية ابن القيم (13/ 225)، مرقاة المفاتيح (3/939) ، شرح سنن أبي داود للعباد (567/ 6).